Blog

अपने दुखों का शमन कर सकते हैं: साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. अपने दुखों का शमन कर सकते हैं। अनुष्ठान का हिस्सा बनकर न केवल अपने कर्मों की निर्जरा अपितु पुण्य उपार्जन भी कर सकते हैं। अयनावरम दादावाड़ी चातुर्मास कर रही साध्वी कुमुदलता के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में चक्रवर्ती की रिद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिए दिवाकर दरबार में अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस मौके पर साध्वी महाप्रज्ञ ने कहा अनुष्ठान के माध्यम से हम अपने जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जप, तप और अनुष्ठान में भाग लेने का अवसर बड़े ही सौभाग्य से प्राप्त होता है। साध्वी ने कहा मंगलकारी अनुष्ठान में सवा सात करोड़ जाप अनुष्ठान की अनुमोदना कर धर्म कार्य में आगे बढऩे से न केवल धार्मिक गतिविधियों को बल मिलता है बल्कि समाज में, व्यक्ति में, जीव मात्र में धर्म की चेतना जागृत होती है। अनुष्ठान से व्यक्ति जीवन में सुख-शांति का आभास कर अपने आपको धन्य मानता है...

धन मंगल एवं अमंगल दोनों होता है: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. धन मंगल एवं अमंगल दोनों होता है पर धर्म मंगल ही है। धन एवं धर्म का चुनाव होने पर प्राय: लोग धन को चुन लेते हैं। धर्म को गौण कर लेते हैं। परन्तु ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा धन अशाश्वत है। धर्म शाश्वत है। धन कहता है मुझे धारण करो मैं तुम्हें नरक में ले जाऊंगा। धर्म कहता है मुझे धारण करने पर मैं तुम्हें मोक्ष में ले जाऊंगा। जब धर्म घर में होता है तो वह घर नहीं एक पवित्र मंदिर होता है। शरीर जल से, मन सत्य से तथा बुद्धि ज्ञान से शुद्ध होती है पर आत्मा धर्म से ही शुद्ध होती है। साध्वी ने कहा कि लक्ष्मी की लाली आत्मा को काली बनाने वाली है। मनी में जो बिजी होता है उसकी दुर्गति भी ईजी होती है। धर्म में जो बिजी होता है उसकी सद्गति ईजी होती है। आपको जो संपत्ति मिली है वह मद करने के लिए मदद के लिए मिली है। धन बुरा नहीं उसकी आशक्ति बुरी है।

इन्द्रियों का करे संयम : आचार्य श्री महाश्रमण

माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में ठाणं सूत्र के छठे स्थान के ग्यारहवें श्लोक के दूसरे भाग का विवेचन करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि इन्द्रियों एवं अनिन्द्रिय की अपेक्षा से सर्व जीवों के छ: प्रकार हैं| पच्चीस बोल में चौथा बोल हैं – इन्द्रिया पांच| कान, चक्षु आदि जीव के ज्ञान के माध्यम बनते हैं, अत: इन्द्रियों को ज्ञानेन्द्रिय भी कहां जाता हैं| हमारे जीवन में इन्द्रियों का महत्वपूर्ण स्थान हैं| इन्द्रिया जब तक सक्षम है, तो शरीर सक्षम है और इन्द्रियों में क्षीणता आ जाती हैं, कमजोरी पड़ जाती हैं, इसका मतलब शारीरिक सक्षमता में कमी आ गई| आचार्य श्री ने आगे फरमाया कि विकास की दृष्टि से सबसे पहले हैं स्पर्शनेन्द्रिय, त्वचा, जिसका व्यापार हैं चुना, जिसका विषय है स्पर्श| ऐसे अनन्त अनन्त प्राणी है, जिसके एक ही स्पर्शनेन्द्रिय हैं| ये स्थावर जीव कहलाते हैं| पृथ्वीकाय,...

सुखी बनना है तो अपनी इंन्द्रियों के विकारों का त्याग करना होगा: गौतममुनि

चेन्नई. सुखी बनना है तो अपनी इंन्द्रियों के विकारों का त्याग करना होगा। विकार का त्याग करने वालों को ही मंजिल मिल पाती है। साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा यह जीवन कुछ बनने के लिए मिला है। खुद को बनाना या बिगाडऩा मनुष्य के हाथ में है। उसके पास परमात्मा ने सारी व्यवस्था दी है। वह उन व्यवस्थाओं का कैसे उपयोग करता है यह उस पर निर्भर करता है। मनुष्य जैसा सोचता है वैसा बन भी जाता है। अध्यापक बनने की इच्छा रखने वाला अध्यापक और डॉक्टर की इच्छा रखने वाला डाक्टर बन जाता है। ऐसे में परमात्मा बनने की इच्छा रखने वाले परमात्मा भी बन सकते हैं लेकिन करणीय कार्य करने पर यह मुकाम हासिल हो पाएगा। नवरात्रि के दिनों में मनुष्य को कषायों से दूर होने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि क्रोध, मोह, माया और लोभ आत्मा पर कालिक पोतकर उसे बदतर बनाने का कार्य करते हैं। इन कषायों का त्याग करना ही सच्च...

स्वच्छता हम सबके लिए बहुत जरूरी: मुनि संयमरत्न विजय

चेन्नई. स्वच्छता हम सबके तन व मन की खुशी के लिए लिए बहुत जरूरी है। स्वच्छता से जीने वाला सभी जगह आदर पाता है। स्वच्छता अनैच्छिक नहीं अपितु स्वेच्छिक कार्य है जिसे हम सबको मिलकर करना चाहिए। धीर-वीर-गंभीर, साहसी, निर्भीक बनकर स्वच्छता की शुरुआत यदि हम खुद से करें, तो घर,समाज, नगर, उद्यान, शहर, राज्य, राष्ट्र स्वत: ही स्वच्छ व सुंदर बन सकता है। साहुकारपेट स्थित राजेंद्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय व भुवनरत्न विजय के सान्निध्य में एस.जे.टी. सुराणा जैन विद्यालय में स्वच्छ भारत अभियान के तहत रैली निकाली गई। इससे पूर्व मुनि संयमरत्न ने बच्चों को ‘स्वच्छता’ का गीत सुनाकर कहा स्वस्थता हर घर में जगाएं और स्वच्छता अपनाएं, स्वच्छ रहे जहां देश हमारा, स्वस्थता बढ़ती जाए। सूरज को स्नान कराना है, धरती को भी नहलाना है, जो मन से निकले उमड़-घुमड़, उस नदी को आज बहाना है, स्वच्छता की ज्योत जगाना है। जहा...

ज्ञान के साथ जुड़े चेतना का तार : आचार्य श्री महाश्रमण

माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में ठाणं सूत्र के छठे स्थान के ग्यारहवें श्लोक के पहले भाग का विवेचन करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि जीव का लक्षण है – उपयोग| जिसमें चेतना का व्यापार हैं, प्रवृत्ति है, वह उपयोग हैं| ज्ञान, दर्शन और एक अपेक्षा से अज्ञान चेतना का व्यापार होता हैं| जो भी आत्मा हैं, उसमे उपयोग होगा और उपयोग शून्य अजीव होता है|   आचार्य श्री ने आगे फरमाया कि पच्चीस बोल में नौवा बोल हैं, उपयोग बारह| उनमें पांच ज्ञान में से मतिज्ञान को आभी निबोदिक ज्ञान भी कहा जाता है| पिछले जन्म या जन्मों का ज्ञान (जाति स्मृति ज्ञान) भी मति ज्ञान का अवयव है| संसार के जीतने भी जीव है, उनमें पांच ज्ञान या तीन अज्ञान में से कोई भी अवश्य होगा|    आचार्य श्री ने आगे फरमाया कि अज्ञान दो प्रकार का होता हैं – विपरीत ज्ञान, अज्ञान और दूसरा हैं ज्ञान का अभाव, अज्ञान| त...

संसार की नश्वरता जानने वाले पूर्ण संसार की कामना नहीं करते: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. बुधवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज का प्रवचन कार्यक्रम हुआ। उपाध्याय प्रवर ने जैनोलोजी प्रेक्टिल लाइफ सत्र में युवाओं को अपने अन्तर की शक्ति को जागृत करने के प्रयोग बताए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति चाहता है कि उसका जीवन परिपूर्ण रहे। पति-पत्नी दोनों ही चाहते हैं कि उन्हें पूर्ण आज्ञाकारी और सर्वगुण संपन्न जीवनसाथी ही मिले। उसमें कोई कमी न हो, हर सांसारिक जीव की यही भावना है कि वह शत प्रतिशत सही होना चािहए। आचारांग सूत्र कहता है कि परिपूर्ण और संपूर्ण जीवन जीने की कामना और उसके वशीभूत होकर व्यक्ति विपरीतता को प्राप्त करता है। यदि ऐसा हो जाए तो व्यक्ति मोक्ष की कामना ही नहीं करता। हर जीव पूर्ण सुख चाहता है लेकिन यह मिलता किसी को नहीं है। जब ऐसा सुख चक्रवर्ती, वासुदेव और बलदेव को भी नहीं मिला तो इस स्थिति में वह ...

बड़ी संख्या श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान में लिया भाग

चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य एवं गुरु दिवाकर कमला वर्षावास चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आयोजित अनिष्टहारी भगवान अरिष्ठनेमी पाश्र्वनाथ अनुष्ठान का समापन बुधवार को हुआ। बड़ी संख्या श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान में भाग लिया। इस अनुष्ठान के दौरान साध्वी कुमुदलता को डॉक्टर की उपाधि के अलावा कई पदाधिकारियों  को भी पदवी से नवाजा गया। कार्यक्रम में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सुनील सिंघी एवं चित्तौड़ के सांसद सीपी जोशी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अनुष्ठान को सफल बनाने में  गुरु दिवाकर कमला युवा संघ, भोजन समिति, महिला मंडल, बहू मंडल के सदस्यों ने अपना सहयोग दिया।

तप से होती है कर्म निर्जरा

तिरुवल्लूर. यहां जैन स्थानक में विराजित आचार्य विजयमुनि ने तपस्या की महिमा बताते हुए कहा कि  जैसे नाव में छेद होने पर वह डूबने लगती है और छेद बंद करने पर पानी तो नहीं आता पर नाव में पुराना पानी तो रहता ही है, ऐसे ही संवर करने सेे कर्म बंध तो हो जाता है पर पुराने कर्मों की निर्जरा नहीं होती इसलि उनकी निर्जरा के लिए तप आवश्यक है । तप दो प्रकार का होता है-बाह्य तप और अभयन्तर तप। तप के और भी भेद बताए गए है। अनशन तप से प्रायश्चित होता है। उन्नोदरी तप से विनय भाव आता है। रस परित्याग करने से स्वाध्याय होता है। इच्छाएं कम करने से बड़ों की सेवा का भाव आता है। ध्यान करने के लिए काया क्लेश तप जरूरी है। संघ के मंत्री विमलचंद सांखला ने बताया कि 12 अक्टूबर को आचार्य विजयराज की 60वीं जन्म जयंती मनाई जाएगी।

संसार पाप और पुण्य का नाटक होता है: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. संसार पाप और पुण्य का नाटक होता है। असफलता, विचित्रता और पराधीनता का भंडार है। पुण्य की बिक्री कर के पाप की फैक्टरी खोलने का नाम है संसार। ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा मेरी भावना का मूल संदेश है  किसी को नहीं देखना, अपने आप को देखना है। स्वयं को बदलना है। आप बदल गए तो आपके लिए सारा जग बदल जाएगा। आज तक एक भी ऐसी मिसाल नहीं है कि किसी व्यक्ति ने खुद को सबके अनुरूप बना लिया हो। कोई अच्छा कहे या बुरा, उसके कहने से हम अच्छे या बुरे नहीं बन जाते। आपकी अच्छाई आप पर निर्भर है उसका जन्म आपके हृदय के गर्भ से हुआ है। कच्ची रोटी खाने से पेट खराब होता है और कच्चे कान के बनोगे तो जीवन खराब होगा। इस अवसर पर साध्वी सुप्रतिभा ने कहा सत्य बोलने वाला व्यक्ति निर्भय होता है और झूठ बोलने वाला डरपोक। सत्य हमारा स्वभाव है झूठ बोलना विभाव। जीवन लक्ष्य की दो इमारत है संकल्प और पुरुष...

दर्शन यात्रा में रात्रि में खाते पीते जाना सही नहीं: गौतममुनि

चेन्नई. जो रावण के वंशज होते हैं वे रात्रि में जबकि राम और महावीर के वंशज दिन में ही भोजन करते हैं। एक तरफ लोग नवरात्रि की बात करते हैं और दूसरी ओर अपने खाने पीने पर नियंत्रण नहीं करते। दर्शन यात्रा में जाने वाले लोग भी रात्रि में खाते पीते जाते हैं जबकि ऐसा कभी नहीं करना चाहिए। साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक  गौतममुनि ने कहा कि नवरात्रि का पवन पावन दिवस सुुंदर भावनाओं को लेकर सामने आया है। नवरात्रि में मनुष्य को सात्विक खाना, सात्विक पीना और सात्विक ही सभी कार्य करना चाहिए। नवरात्रि मनुष्य को सुखी बनाने का मार्ग दिखाने के लिए आते हं। इस मौके का लाभ उठा कर प्रत्येक मनुष्य अपनी आत्मा और जीवन को परम पावन बना सकता है।  नवरात्री के समय में मनुष्य का जीवन पूरी तरह से सात्विक ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जीवन में सात्विकता आएगी तो जीवन का सार पता चलेगा। उन्होंने कहा कि अपने परिव...

अनिष्टहारी भगवान अरिष्ठनेमी पाश्र्वनाथ अनुष्ठान का आयोजन

चेन्नई में पहली बार सम्पूर्ण जैन विधि से निशुल्क अनिष्टहारी भगवान अरिष्ठनेमी पाश्र्वनाथ अनुष्ठान (महामंगलकारी अनुष्ठान) का आयोजन मंगलवार को सुबह 6.35 बजे से अयनावरम के कुन्नूर हाई रोड स्थित जैन दादावाड़ी में किया गया। श्रमण संघीय जैन दिवाकर दरबार में बड़ी संख्या श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। यह अनुष्ठान बुधवार सुबह 7.15 बजे तक चलेगा। गुरु दिवाकर कमला वर्षावास समिति, चेन्नई के तत्वावधान एवं साध्वीवृंद कुमुदलता, महाप्रज्ञा, पद्मकीर्ति व राजकीर्ति के सान्निध्य में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। समारोह के अध्यक्ष भाजपा दिल्ली के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, समारोह गौरव राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सुनिल सिंघी तथा चित्तौडग़ढ़ के सांसद चन्द्रप्रकाश जोशी थे। अरिष्ठनेमी भगवान पाश्र्वनाथ के महामंगलकारी अनुष्ठान के दौरान प्रथम कलश की स्थापना भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, आशा...

Skip to toolbar