नवरत्न अर्पुव मंगल जैन श्वेतांबर आराधना भवन बेरछा मंडी मे चल रहे चातुर्मास के अन्तर्गत परम पुज्य साध्वी भगवन्त प्रियदर्शना श्री जी कल्पदर्शना श्री जी एवं बाल साध्वी लब्धी दर्शना श्री जी महाराज साहेब की नि श्रा मे उपवास एकासना व आयंबिल की तपस्या निरंतर चल रही है। इसी क्रम मे नो उपवास की तपस्या स्वर्गीय मनोहर लाल जी की पुत्र वधु व संतोष कुमार जैन की पत्नी सविता जैन की पूर्ण होने पर दिनांक 8-8-23 मंगलवार को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी तथा स्वामीवात्सलय भी रखा गया है । इसी क्रम मे मेघा पति रवि मेहता (जैन )पुत्र वधू श्री राजेन्द्र कुमार जैन के द्वारा 31 उपवास की कठिन तपस्या की इस हेतु दिनांक 9-8-23 को रात्रि 8 बजे भक्ति संध्या श्री मनीष जी मेहता मंडल द्वारा रखी गई हैl दिनांक 10-8-23 को सुबह 8 बजे से श्नीनव अपूर्व अमर आराधना भवन मे साध्वी जी महाराज साहेब के प्रवचन तपस्वी का बहुमान के पश्चात शो...
गौतम निधि विकास फाउंडेशन में नाहर राष्ट्रीय अध्यक्ष, रायपुर के उद्योगपति ललित पटवा बने ट्रस्टी Sagevaani.com @रायपुर. गौतम निधि फाउंडेशन का राष्ट्रीय अधिवेशन बीते दिनों टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में संपन्न हुआ। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि जी महाराज साहब की पावन निश्रा में हुए इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलावा राजस्थान और महाराष्ट्र से भी तकरीबन 200 से ज्यादा प्रतिनिधि जुटे थे। इस दौरान गौतम लब्धि फाउंडेशन और गौतम विकास फाउंडेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। इनमें ज्यादातर राजस्थान और महाराष्ट्र के सदस्य हैं। रायपुर के लिए गर्व का विषय यह है कि गौतम लब्धि फाउंडेशन में छत्तीसगढ़ श्रमण संघ के अध्यक्ष कमल पटवा को राष्ट्रीय मार्गदर्शक चुना गया है। उन्हें छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वहीं गौतम विकास फाउंडेशन में ललित पटवा ट्रस्टी चुने गए हैं। बता दें कि गौतम लब्...
★ मनुष्य जीवन छोटा है, लेकिन साधना से उसे पूर्ण बनाया जा सकता है Sagevaani.com @चेन्नई ; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने उत्तराध्यन सूत्र के चौथे अध्याय की गाथा का विवेचन करते हुए कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए कम समय मिला है और पूर्ण समय भी मिला है। समय की गणना द्रव्य के आधार पर है और पूर्णाता उपयोगिता के आधार पर है। कम मिला है लेकिन पूर्ण मिला है। देवताओं की उम्र बहुत होती है, परन्तु अध्यात्म के हिसाब से वह पूर्ण नहीं है। नरक और तिर्यंच के पास भी बहुत है, पर पूर्ण नहीं है। हमारा मनुष्य जन्म छोटा है, परन्तु एक कदम आगे उठाने की जरुरत है और हम साधना के द्वारा उसे पूर्ण कर सकते हैं। ◆ इगो से भाई-भाई, परिवार, समाज म...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद *प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनि जी मा.सा*-संसार में दुःख के दो कारण बताये है, *आशा और स्वच्छन्दता* दुःखी क्यो हे? आशा के कारण सारे दुनिया के काम “करने की आशा.. कितना भी प्राप्त हो.संतुष्टि नहीं। भोग की कितनी भी सामग्री इकट्ठी कर लो संतुष्टि नहीं होती। *द्रष्टान्त*- सगत चक्रवर्ती नई विशेषता के लिये 7वे खण्ड को जीत को गये। 6 विभाग में भरत खंड- बटा। वासुदेव 3 खण्ड के अधिपति होते है, ऊपर की ओर चुलहिम्मत पर्वत कोई पार नहीं कर सकता- नीचे लवण समुद्र 500 योजन तक का होता है। 25000 देव सेवा करते है T मुलतह नाम की आशा है इसके पीछे मनुष्य नरक में चला जाता है। चक्रवर्ती 3 खण्ड के बाद चौथे खण्ड में पर्वत हस्ताक्षर करते हे, ऋषभकुट पर्वत पर भरतचक्रवती राजा बहुंचते है, कामीणी पत्थर लिखने के लिये उठाया लिखने की जगह नहीं। यह विधान *अभिमान तोड़ने के लिये*,...
सबसे बड़े तीर्थ हैं माता-पिता, उनके आशीर्वाद को ईश्वर भी नहीं काट सकते : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी Sagevaani.com @शिवपुरी। पोषद भवन में जैन साध्वियों ने उन कथित समाजसेवियों पर कड़े प्रहार किए जो समाजसेवक के रूप में अपनी पहचान रखते हैं, अखबारों में अपने फोटो छपवाते हैं, सार्वजनिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनकर गौरवान्वित होते हैं, लेकिन घर में अपने माता-पिता की कोई देखभाल नहीं करते। यहां तक कि महीनों तक उनसे बातचीत भी नहीं करते। साध्वी रमणीक कुंवर जी ने कहा कि जिस घर में माता-पिता हंसते हैं वहां भगवान बसते हैं। वहीं साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि वैष्णो देवी, शिखरजी और गिरिनार जी तीर्थ जाने से पहले सबसे बड़े तीर्थ अपने माता-पिता का आशीर्वाद तो ले लो। बकौल साध्वी नूतन प्रभाश्री जी, माता-पिता के आशीर्वाद को भगवान भी नहीं काट पाते। जो माता-पिता का आशीर्वाद होता है उनके ...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि जीवन की वास्तविक सफलता और लोकप्रियता पाने के लिए धन- दौलत अथवा शक्ति-संबल की आवश्यकता नहीं, उसके लिए आवश्यकता है – गुण, कर्म और स्वभाव की श्रेष्ठता की। जब तक गुण-कर्म-स्वभाव में श्रेष्ठता का समावेश नहीं होगा, बहुत कुछ धन- दौलत एवं शक्ति-संपन्नता होने पर भी मनुष्य वास्तविक लोकप्रियता नहीं पा सकता। जो गुणी है, उसका आदर क्या धनवान और क्या निर्धन दोनों ही करते हैं।उसकी पूजा-प्रतिष्ठा बाह्य आधार पर नहीं होती, आंतरिक गुणों के कारण ही होती है। सहानुभूति, संवेदना, सहयोग, सेवा का गुण मनुष्य को वह लोकप्रियता प्राप्त करा सकता है, जो एक धनवान लाखों-हजारों रुपया खर्च करके भी नहीं पा सकता। सहानुभूति का एक शब्द, संवेदना का एक आंसू और सेवा का एक कार्य टनों स्वर्ण से भी अधिक मूल्यवान है...
रोटरी क्लब ऑफ़ मद्रास ट्रडिशनल का सातवां शपथ ग्रहण समारोह रविवार 6 अगस्त 2023 को होटल डेक्कन प्लाजा, रोयपेत्ताह, के प्रांगण में संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में रोटरी के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर, AKS रवि रमन उपस्थित थे! सर्वप्रथम श्री महावीर गुलेचा ने 2022 23 वर्ष की सफलता हेतु सभी का धन्यवाद दिया एवं सभी का स्वागत किया, और श्री चंद्रेश जी जगावत ने अपने सचिव कार्यकाल की रिपोर्ट प्रस्तुत की। तत्पश्चात मेडल पहनाते हुए श्री विवेक बॉम्ब को कर्तव्य धनी के साथ सभी ने अध्यक्ष 2023 24 के लिए घोषित कर निर्वाचित किया! उन्होंने अपने शपथ समारोह में संस्था को अगले आयामों तक कैसे छुआ जाए एवं जो सहभागी रोटरी संस्थाएं हैं उनके साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण की बात रखी! रोटरी क्लब ऑफ मद्रास ट्रडिशनल द्वारा नेल्लूर की एक स्कूल को अडॉप्ट करने की घोषणा कि गई! श्री विपिनचंदजी जिन्हे सब अंकलजी के नाम से बुलाते हैं, उनक...
किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में योगनिष्ठ आचार्यश्री केशरसूरीजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने प्रवचन में कहा चित्त को अपने वश में करने से अपने जीवन में के तीन शत्रु खड़े हो जाते हैं वचन, शरीर और व्यवहार। ये तीनों शत्रु जैसे बर्ताव करने लग जाते हैं। क्रोधी व्यक्ति के शब्द हमेशा अशांत निकलते हैं। वचन, शरीर और व्यवहार को शांत बनाना है तो मन को शांत बनाओ। जिसकी काया शांत होती है, उसकी इंद्रियां शांत रहती है। ऐसा कहा जाता है चंचलता मन का स्वभाव है, व्याधि शरीर का स्वभाव है, क्यों न हम उसे बदल डालें यानी शुभ विचारों में डाल दें? हमारा मन विचार करे बिना रहता नहीं है। ज्ञानी कहते हैं मन जब भी अशुभ विचारों में चला जाता है तब उसे शुभ आलंबन देना शुरू कर दो। साहित्य, स्थान, संगति तीनों बदल दो तो मन शुभ विचार के अंदर चला जाएगा। क्रिया को स्थिर करने के लिए काय...
नार्थ टाउन में जयगच्छीय गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मा बन्धुओ, जैन दर्शन में अभयकुमार का एक महत्वपूर्ण स्थान है विलक्षण बुद्धि वाले, राज कुल में होते हुए भी वे हर प्रवृति में धर्म का समावेश होता थाl जिससे उनके निकाचित कर्म का गृहस्थ होते हुए भी धर्म का समावेश अपने जीवन में करो जिससे भवयत्व और सम्यक्त्व दोनो सुरक्षित रहे। ज्ञानी जन कहते हैं कि जीवन में सदैव धर्म का समावेश रखो। धर्म शब्द का अर्थ ध यानि धारण करना ‘र यानि रक्षा ‘म’ यानि मरण-मोह धर्म छोड़ने योग्य, दिखावट, सजावट व मिलावट करने योग्य नही है। धर्म का सही अर्थ जानने से ही धर्म के प्रति श्रद्धा उत्पन्न होगी। धर्म धारण करने वाला दुर्गति से बचता है। जन्म-मरण की श्रृंखला को नष्ट करता है शास्वत सुख प्रदान करता है। जैसे चौकीदार सुरक्षा करता है। वैसे ही धर्म सदा काल रक्षा करते हुए जन्म मरण से मुक्ति कर...
🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰 *ता :06/8/2023 रविवार* 🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई* 🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दाणेश्वरी प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय: भवयात्रा कि भव्यता*🪔 ~अनंतकाल तक हमारे जीव ने जहाँ अनंत दुःख सहन किया हो वह स्थान है निगोद का. आँख की एक पलक मे 17 1/2 बार जनम मरण का भयंकर दुःख अनंतकाल तक सहन किया था। ~ चिंतामणि रत्न की प्राप्ति होना शायद सरल है किंतु मानव भव और जैन दर्शन की प्राप्ति होना कठिन है। ~ यदि हमारा मन शैतान की तरह है तो मृत्यु के बाद दुर्गति निश्चित है और यदि हमारा मन प्रभु की तरह है तो मृत्यु के बाद सद्गति निश्चित है। स्वभाव, विचार, व्...
Sagevaani.com @चेन्नई: किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीश्वरजी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी के रविवारीय प्रवचन का विषय था स्टाॅप, लुक एंड गो यानी रूको, देखो और आगे बढ़ो। जब भी कोई सज्जन व्यक्ति कुछ काम करता है, तो वह विचार करके आगे बढ़ता है। विचार किए बिना प्रगति नहीं होती है। वहीं, एक अहंकारी व्यक्ति गति करेगा लेकिन प्रगति नहीं करेगा। अंधकार व अहंकार एक ऐसा वातावरण है जिसमें आंखें होने पर भी नहीं दिखता। व्यक्ति में शक्ति है, फिर भी तप नहीं करता, उसका कारण है प्रमाद। भगवान है, फिर भी भक्ति नहीं करता, उसका कारण है मिथ्यात्व। शक्ति है, फिर भी प्रवचन श्रवण नहीं करता, उसका कारण है विकृत सोच और प्रमाद करने की आद भाग्य की लकीरें स्वयं के कर्मों ने बनाई है। इसके बीज पहले से पड़े हुए हैं, जो आज उसका वृक्ष बना है। उन्होंने कहा हरेक बीज के अंदर वृक्ष...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद भगवान निर्वाण मुक्ति का उपदेश करते है, अनासक्त भाव से यह बात बताते हुए पुज्य प्रर्वतक की प्रकाश मुनि जी मा.सा. ने फरमाया की→ बोधिदाता – ——–नमः हम सब मुर्ख है कि मूढ़ ? मुर्ख बनाया जाता हे मूढ़ होता है। जिसके पास विवेक नहीं होता वह *मुढ़* होता है *चालाकी से मुर्ख बनाया जाता हे।* मुढ़ता अन्दर का विषय है। *कार्य व अकार्य विवेक शून्य होना मूढ़ कहलाता है।* यह राग के कारण और प्रबल द्वेष मूढ़ बना देता है। *राग* विवेक शून्य बनाता है। मुढ़ता-विवेक शुन्यता । यह मुढ़ जीव है वह आसक्ति में उलझा है। राग-आसक्ति का कारण है। हम कितनी जगह आसक्त हे, राग के कारण से जिसके बिना रहा नहीं जाय उसका नाम *आसक्ति* । राग आसक्ति का फल दो रूप में आता हे *संताप – असंतुष्टि* रूप में आता है। आसक्ति, अंसतुष्टि व संताप पैदा करती है जीव नये-नये कर्म बांधता...