पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस उपाध्या प्रवर ने समझाई परिष्ठापना समिति Sagevaani.com @रायपुर । लालगंगा पटवा भवन में पर्युषण महापर्व के दौरान अंतगड़ सूत्र का पाठ करते हुए उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि परमात्मा के मूल 11 अंगों में से आठवां अंग है अंतगड़ सूत्र। उन्होंने कहा कि आपके मन में सवाल आता होगा कि हमें मूल पाठ क्यों सुनना चाहिए? हम तो सरल भाषा में सुनते हैं तो समझ में आ जाता है। लेकिन मूल पाठ परमात्मा के शब्द हैं। और भक्ति का रिश्ता हो तो बिना व्याकरण के भी शब्द का अर्थ समझ में आ जाता है। परमात्मा एक भाषा में बोलते हैं, लेकिन सुनने वाले को लगता है कि वे हमारी भाषा में बोल रहे हैं। ये परमात्मा की वाणी का अतिशय है। परमात्मा के शब्द हमारे कानों से गुजरने चाहिए, इसलिए मूलपाठ की आराधना करते हैं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी है। पर्युषण महापर्व के पंचम दि...
यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बंधुओं, दो शब्द है पर्युषण’ और ‘प्रदूषण। संसार प्रदुषण यानि गदंगी से युक्त है। संसार कषाय से युक्त है जिससे हानि है। पर्युषण ही शुद्ध बनाता है। आत्मा का उद्धार करता है। अनादिकाल से आत्मा में कर्मो का प्रदूषण लगा हुआ है। मन, वचन, काया से यदि हम शुद्ध नहीं होंगे तो पर्युषण पर्व मनाना भी सार्थक नहीं होगा। आत्मा को पवित्र शुद्ध बनाने का हमारा लक्ष्य होना चाहिए। सरकार भी गदंगी प्रदूषण हटाने के लिए अनेक प्रयास करती है जिससे व्यक्ति निरोगी व दीर्घायु हो उसी प्रकार भगवान कहते है कि शाश्वत सुख व अमरता पाना चाहते हो तो आत्मा में लगे कर्मों के प्रदूषण को दूर करना आवश्यक है। सरकार को तो प्रदूषण बार-बार हटाना पड़ता है परन्तु ज्ञानीजन कहते है कि आत्मा एक बार शुद्ध हो गई हो बार-2 ये कार्य नही ...
जैन साध्वियों ने बताया कि जब तक माता-पिता जीवित रहे उन्होंने नहीं ली दीक्षा, पर्यूषण पर्व में भगवान के जन्म का हुआ वाचन Sagevaani.com @शिवपुरी। मेरे जरा से कष्ट में मेरे माता-पिता विचलित हो जाते हैं तो जब मैं दीक्षा लूंगा तो उन पर क्या बीतेगी यह विचार कर भगवान महावीर ने संकल्प लिया कि जब तक उनके माता-पिता जीवित रहेंगे वे दीक्षा नहीं लेंगे और संसार में ही रहेंगे। इस तरह से भगवान महावीर ने मातृ-पितृ भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। उक्त बात प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने पर्यूषण पर्व के दौरान भगवान महावीर के जन्म का वाचन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर के जीवन दर्शन को देखने से पता चलता है कि कर्मों का फल तीर्थंकर और भगवान को भी भोगना पड़ता है। कर्म फल से कोई नहीं बच पाता। भगवान महावीर के जन्म का जैसे ही वाचन हुआ वैसे ही आराधना भवन का हॉल भगवान महावीर के जय-जय...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ जावरा के दिवाकर भवन पर चल रहे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के पंचम दिवस पर अतंगड सूत्र का वाचन हुआ, धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड गौरव प्रखर वक्ता रविन्द्र मुनि जी म.सा.ने पर्युषण पर्व के अंतर्गत महावीर जन्म का वाचन करते हुए फरमाया की भगवान महावीर का जन्म वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में अयोध्या इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार हुआ था। तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। 12 वर्षो की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ जिसके पश्चात् उन्होंने समवशरण में ज्ञान प्रसारित किया। 72 वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कोणिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समाज द्वारा महावीर ...
पर्यूषण पर्व के चौथे दिन जैन साध्वियों ने अंतगढ़ सूत्र और कल्पसूत्र का किया वाचन Sagevaani.com @शिवपुरी। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण के लगभग 1000 वर्ष बाद आचार्य भद्रबाहु द्वारा रचित कल्पसूत्र जैन आगम ग्रंथों में सर्वाधिक उपकारी ग्रंथ है तथा इस पवित्र ग्रंथ को सुनने वाले भव सागर से पार हो जाते हैं। पर्यूषण पर्व के दौरान स्थानकवासी समाज में जहां अंतगढ़ सूत्र वहीं मंदिर मार्गी समाज में कल्पसूत्र के वाचन की परम्परा है। कल्पसूत्र से जैन संतों के आचार विचार की जानकारी मिलती है। संतों और साध्वियों को क्या कल्पता है और क्या नहीं? इसका पता चलता है। उक्त उद्गार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने आराधना भवन में पर्यूषण पर्व के चौथे दिन कल्पसूत्र का वाचन करते हुए व्यक्त किए। धर्मसभा में साध्वी पूनमश्री जी ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया। गुरुणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी ने बताया कि शास्त्रों क...
स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई विश्व हितेषी प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न, राष्ट्रसंत, विश्व हितकांक्षी, यूग प्रभवक श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय : प्रभु वीर का वीरता पूर्ण वैभव*🪔 ~ श्री कल्पसूत्र ग्रंथ सर्व ग्रंथो में सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है क्योंकि ये ग्रंथ परमात्मा के जीवन चरित्र से परिपूर्ण है। ~ श्री कल्पसूत्र ग्रंथ के सुनने मात्र से स्वयं की ज्ञान दशा प्रकृष्ठ रूप से जागृत होती ही है और ज्ञान दशा के प्रबलता से 8 भवमें मुक्ति हो ही सकती है। ~ जब तक साधक स्वयं के जीवन में चेतना का ज्ञान यानी सम्यक् दर्शन की प्राप्ति नहीं करता है तब तक मोक्ष का प्रारंभ प्रकट नहीं होता है। ~ प्रभु महावीर स्वामी ने भी नयसार के भव में सम्यक्तव प्राप्त करने ...
दिवाकर भवन पर चल रहे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के चतुर्थ दिवस पर अतंगड सूत्र का वाचन हुआ, धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड गौरव प्रखर वक्ता रविन्द्र मुनि जी म.सा.ने कहा की निंदा अर्थात दूसरों की आलोचना करना, उनकी बुराई करना और सरल भाषा में कहा जाए तो किसी की अनुपस्थिति में उसकी किसी दूसरे से चुगली करना। निंदा करते वक्त हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि जिस व्यक्ति की निंदा या बुराई हम कर रहे हैं हो सकता है हमारी अनुपस्थिति में वह शख्स भी हमारी किसी अन्य के सामने निंदा करता हो। परंतु इन सब बातों को यदि हम जान भी लें तभी भी कभी कभी अपनी आदतवश हम निंदा करने की आदत को सहजता से छोड़ नहीं पाते। निंदा करने में कई लोगों को आनंद की अनुभूति होती है ।निंदा रस से बढ़कर उनके लिए कोई दूसरा नहीं है ।कभी-कभी तो बिना वजह भी दूसरों की बुराई करने में उन्हें मजा आता है। किंतु निंदा करने वाले को यह बात सदैव अप...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में कहा कि पर्युषण पर्व चल रहे है। धार्मिक दिन अच्छे दिन जल्दी व्यतीत होते है। दुःख के दिन देर से बीतते है संवत्सरी का दिन आये उसके पहले धर्म ध्यान करने में पुरुषार्थ करे । ये दिन प्रमाद के नहीं। कर्म निर्जरा करने के है। कर्म झड़ेंगे तभी आत्मा पाप कर्मों से मुक्त होगी जब आत्मा आठ कर्मों को क्षीण करेगी तभी संसार परिभ्रमण से छुटकारा मिलेगा । जैसे घर की सफाई करके बड़ी खुशी मिलती है तब स्वच्छ घर में सांस लेने में आनन्द आता है वैसे ही आत्मा जब कर्मों की धूल से मुक्त होगी तब शाश्वत सुख की अनुभूति होगी। उस समय देवता भी आनन्दित होते है। उस समय देवलोक के देवताओं के भी शुभ कर्मों का आदान होता है। वे अनुमोदना कर कर के अपने सम्यक्त्व को मजबूत करते है। ये सब जानते है कि कर्मों का फल किस प्रकार भोगना पड़ता है फिर भी व्यक्ति सावधानी नही बरतता। यदि व्यक्ति कामन...
जैन समाज के आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के तहत चल रही है आराधना में जैन समाजजनों द्वारा आठ दिवसीय पर्युषण पर्व की आराधना की जा रही है। इसके तहत पांचवें दिन भगवान महावीर स्वामी का जन्मवाचन समारोह मनाया जाएगा। मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर आरंभ होगा। आकर्षक सजावट के साथ ही मंदिरों में भगवानजी की प्रतिमा की मनमोहक अंगरचना की जाएगी। शुक्रवार सुबह नोर्थटाउन के श्री सुमतिवल्लभ जैन मूर्तिपूजक संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागर जी की निश्रा में कल्पसूत्र ग्रंथ का वाचन आरंभ किया गया। इसके पूर्व समाजजनों ने ग्रंथ की भावपूर्वक पूजा-अर्चना की।बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिलाएं मंदिर आए तथा उपवास व्रत कर कल्पसूत्र का श्रवण किया। आचार्य श्री ने कल्पसूत्र शास्त्र का वर्णन करते हुए बताया कि इसका एक-एक अक्षर पवित्र है। कल्पसूत्र आगमग्रंथों में सर्वाधिक उपकारी ग्रंथ है जिसे सुनने वाले भवसागर से पार हो ज...
किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी की निश्रा में शुक्रवार को कल्पसूत्र वांचना की शुरुआत हुई। इससे पूर्व कल्पसूत्र वोहराने के लाभार्थी कीर्ति भाई ने आचार्यश्री को वोहराया। उसके बाद गुरुपूजन और ज्ञानपूजन के कार्यक्रम हुए। आचार्यश्री ने कल्पसूत्र की व्याख्या करते हुए बताया कि कल्प यानी आचार और सूत्र यानी जिसके अंदर आचार लिखे हुए हैं। उन्होंने कहा मोक्षमार्ग तो एक ही है लेकिन आचरण की गुणवत्ता अलग-अलग है। कल्पसूत्र चौदहपूर्व में से नवमें पूर्व के आठवें अध्याय से आया है। कल्पसूत्र का श्रवण भगवान महावीर के निर्वाण के 980 साल बाद शुरू हुआ। कल्पसूत्र में तीन वांचनएं होती है, तीर्थंकरों का जीवन चारित्र, गणधरों की पाटपरंपरा और साधुओं की समाचारी का वर्णन। उन्होंने कहा जीवन में अमंगल हो तो कल्पसूत्र, गौत...
पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन उपाध्याय प्रवर ने बताया कि आहार को कैसे अमृत बनाएं रायपुर। पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन गुरुवार को उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि दुनिया में कई धर्म हैं, कई संत हैं, कई साधू है। संत किसी भी परंपरा का हो, उसका जीवन भिक्षा से ही चलता है। किसी भी धर्म परंपरा में भिक्षा कैसी लेनी है, इसकी साधना नहीं दी गई है। लेकिन प्रभु महावीर ने एषणा समिति का विधान किया है। एषणा समिति के 3 आयाम हैं, गवेषणा, ग्रहणेशणा और परीभोगेशणा। खोजना, लेना और भोग करना। तीनो में क्या गलतियां हो सकती हैं, इसका भी वर्णन है। जब इन तीनो आयामों से आहार लिया जाता है तो जीवन बन जाता है। आहार जीवन का आधार है, यह मजबूत होगा तो जीवन मजबूत हो जाएगा। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। पर्युषण महापर्व की प्रवचन माला में उपाध्याय प्रवर ने अब तक बताया कि कैसे चलना है, कैसे ब...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष: विजयराज चुत्तर, मंत्री: हस्तीमल बाफनाl -:कम्मनहल्ली में प्रवचन:- श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया मां की ममता आज छोटी पड़ गई, सबसे बड़ा रुपैया हो गया। आज माता की क्या हालत है गंभीरता से विचार करना है। जब तक स्वस्थ है तब तक ठीक, नहीं तो फिर वृद्धाश्रम भेजा जाता है। क्या यही माँ के उपकारों का बदला है। सोचो जरा। आज बड़ा ही मार्मिक प्रवचन मां के बारे में था। सारी सभा के आंखों से अश्रु बहने लगे। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने आज कृष्ण महाराजा का वर्णन किया, कैसे माता को वंदन करते, और मां की आज्ञा का पालन करते। साथ में दान के बारे में बताया। कैसे साधु संतों को सुपात्र दान देना चाहिए। देवकी महारानी ने कैसे मुनिराजो को प्रात्सुक आहार बहराया। आज हमें ऐसा शुद्ध आहार प्राप्त होता...