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यह पुण्य का प्रभाव है कि तरुण सागर जी कडवा बोलते थे फिर भी लोग उन्हें सुनने को बेताव रहते थे

साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी ने बताया नौ पुण्यों मे से कोई भी एक करोगे तो पाप करना मुश्किल हो जाएगा Sagevaani.com @शिवपुरी। त्रियंच, नरक और देव गति में चाहते हुए भी पुण्य नहीं किया जा सकता लेकिन मानव गति है जिसमें प्रत्येक आत्मा को पुण्य करने की स्वतंत्रता मिलती है। जीवन मेें जो भी सुख मिलता है वह पुण्यों के कारण है। यह पुण्य की प्रबलता का प्रभाव है कि आचार्य तरुण सागर जी कडवा बोलते थे लेकिन इसके बाद भी उन्हें सुनने को बेताव रहते थे। पुण्य की महिमा पर उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्बी नूतन प्रभा श्रीजी ने स्थानीय कमला भवन में आयोजित एक विशाल धर्म सभा में व्यक्त किये। धर्म सभा में साध्बी पूनम श्रीजी ने जीवन के लक्ष्य मानवता अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस इंसान में मानवता नहीं है उसका जीवन पशु के समान है। उन्होंने बताया कि भगवान राम की तरह जीवन मर्यादित, भगवान कृष्ण की तरह शांतिप्रिय, भगवान ...

समस्या हमारी दृष्टि पर आधारित होती है: देवेंद्रसागरसूरिजी

  श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि जिस स्थिति या परिस्थिति को हमारा मन जटिल मानता है, जिसमें अनुकूलित नहीं हो पाता उसे समस्या माना जाता है। कहने का आशय यह है कि समस्या हमारी दृष्टि पर आधारित होती है। किसी ने ठीक ही कहा है कि हमारी दृष्टि ही सृष्टि की निर्मात्री है। बहरहाल, कभी-कभी जीवन में बाहरी कारणों की वजह से हमारे सामने ऐसी विषम परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसका सामना न चाहते हुए भी करना पड़ता है। ऐसी दशा में हम क्या करें और कैसे उससे निपटें अर्थात् वस्तुगत रूप से कौन सी प्रक्रिया अपनाएं, इसे समस्या समाधान कहते हैं। जीवन में समस्याएं तो आती ही रहती हैं। दरअसल समस्या विहीन जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। समस्या आने पर उसे कैसे हल करें यानी उसका समाधान कैसे निकालें, इस संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण बातो...

आत्मा के बिना संसार में शरीर का कौई अस्तित्व नहीं है: महासती धर्मप्रभा

हजारों श्रध्दांलूओ की उपस्थिति मे तपस्यार्थीयो का हुआ सम्मान साहूकारपेट जैन भवन में Sagevaani.com @चैन्नई आत्मा के बिना संसार में शरीर का कौई अस्तित्व नहीं है।शुक्रवार साहूकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने तपस्यार्थीयो ओर सैकड़ों श्रध्दांलूओ को धर्म उपदेश प्रदान करतें हुए कहा कि आत्मा को जो जान लेता है और पहचान लेता उस मनुष्य को संसार किसी ओर को जानने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि वह जानता है आत्मा अनादि है और शरीर नश्वर है। शरीर के माध्यम से ही आत्मा को संसार से मुक्ति मिल सकती है। इस संसार मे अनादि काल से हमारी यह जीवात्मा कहीं जीवयोनीयो मे जन्म ले चुकी है और हम इस आत्मा को मुक्ति नहीं दिला सके क्योंकि हम अपनी आत्मा के स्वरूप नहीं जाना शरीर के सुख को जानकर वस्तुओं मे आत्मा का सुख खोज रहे है वस्तुओं और भोग मे जब तक हम इस आत्मा को बाहर नही निकालेगे तब तक हमारी आत्मा संसार जन्म लेते रहेग...

दानों मे श्रेष्ठ दान अभयदान है: जयतिलक मुनिजी

  नार्थ टाउन में विराजमान गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बंधुओ, दानों मे श्रेष्ठ दान अभयदान है। संसार में सबसे बड़ा दुख भय का होता है। व्यक्ति विचारों से घबरा के चिन्ता करने लगता है भविष्य में कुछ बुरा हो गया। तो क्या होगा ये डर सभी को सताता है भगवान कहते है जो सभी प्रकार के भय से मुक्त रहता है उसे किसी प्रकार की चिन्ता नहीं सताती। मोह कर्म के उदय से भय उत्पन्न होता है। जिसे किसी प्रकार का मोह नही होता उसे भय भी नहीं सताता । सभी गति के जीव भयभीत रहते है। तीर्थंकर ने इस बात को जाना और अभय दान को निरूपण किया। साधु-साध्वी को किसी प्रकार का मोह नही इसलिए वे सदैव प्रसन्न रहते है। साधु-साध्वी स्वयं भी निर्भय रहते है औरो को भी भय मुक्त रहने का उपदेश देते है। भय मुक्त व्यक्ति का चेहरा हर पल कमल के पुष्प की भाँति खिला रहता है। भगवान ने जो धर्म का निरूपण किया उसको सम्यग प्रक...

क्षमापना मुक्ति का शिखर है, नम्रता का परिणाम है 

श्री जैन महासंघ के तत्वावधान में आयोजित हुआ सामुहिक क्षमावाणी पर्व Sagevaani.com @चेन्नई; जैन एकता के प्रतीक श्री जैन महासंघ के तत्वावधान में आज शुक्रवार को सामूहिक क्षमावाणी, श्रमण भगवंतों की निश्रा में, चारों सम्प्रदायों के श्रावकों का श्री जैन आराधना भवन में सामूहिक रूप से मनाया। प पू आचार्य श्री वर्धमानसागर सूरीश्वरजी के मंगलाचरण के माध्यम से धर्मसभा की शुरुआत हुई। अध्यक्ष श्री राजकुमार ने धर्मसभा में पधारे समस्त धर्मप्रेमियों का अभिनन्दन स्वागत किया। महामंत्री सुरेशकुमार कागरेचा ने संघ द्वारा संचालित सम्पूर्ण गतिविधियों को सक्षिप्त में अवगत करवाया एवं संघ के मार्गदर्शक श्री पुखराजजी जैन को याद किया। श्री चंद्रप्रभु जैन नया मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष श्री रमेशजी मुथा ने कहा कि क्षमा के भाव जैनों का मूल मंत्र है। श्री तेरापंथ समाज अध्यक्ष श्री उगमराजजी सांड ने सभी सम्प्रदायों से पधारे भव्यजनो...

आशा से उपजे निराशा: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि अधिक आशा से उपजे निराशा बुढ़ापे में अपने भाग्य का रोना ना रहे जो प्रकृति से मिल रहा है उसे प्रेम से स्वीकार करेंl बच्चों से अधिक आशा है ना रखें लोग कहते हैं बेटा तो बुढ़ापे का सहारा है पर मैं ज्यादा आशा न पाल जीवन भर अगर आशाएं करता हूं ज्यादा आसान तो बुढ़ापा में निराश होना पड़ सकता हैl अगर आशा ही ना रखोगे तो निराश भी नहीं होना पड़ेगाl देखे तो हो कि पड़ोसी का बेटा अपने पिता की सेवा नहीं कर रहा तुम भी अपने पिताजी सेवा नहीं कर रही तो अपने बेटे से यह आशा क्यों रख रहे होl यह आशा है जब टूटते हैं तो बुढ़ापे में शिवाय दुख के सिवा कुछ हासिल नहीं होताl तुम निस्वार्थ भाव से बेटों के लिए जितना कर स...

सामूहिक चैत्यपरिपाटी एवं रथयात्रा का विशाल आयोजन रविवार को

पर्युषण एवं वार्षिक कर्तव्य के तहत पंद्रह जैन संघ करेंगे शिरकत चेन्नई महानगर में पहली बार 15 जैन संघों की सामूहिक चैत्यपरिपाटी सह रथयात्रा का विशाल आयोजन रविवार को गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सुरीश्वरजी एवं आचार्यश्री युगोदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में होगा। यह रथयात्रा किलपाॅक स्थित नेमिनाथ ब्रीज जैन संघ से रवाना होकर पंचतीर्थी दर्शन, चैत्यवंदन करते हुए रंगनाथन एवेन्यू स्थित मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय पहुंचेगी, जहां धर्मसभा का आयोजन होगा। इस आयोजन में साहुकारपेट स्थित चंद्रप्रभु जैन नया मंदिर ट्रस्ट, किलपाॅक श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ, गुजराती श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ, केएलपी अभिनंदन संकल्प श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ, रेनबो अपार्टमेंट सिद्धाचल श्वेतांबर जैन संघ, मैलापुर जैन संघ ट्रस्ट, केसरवाड़ी आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर न्यास, सैदापेट आदिनाथ जैन मंदिर संघ, नेमिनाथ ब्रीज ज...

बुजुर्गों का साथ आशीष का हाथ: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि बुजुर्गों का साथ आशीष का हाथ हम यह जानने की कोशिश अवश्य करें कि हमारे घर में न होने पर हमारे माता-पिता की सारी व्यवस्थाएं पत्नी ने सुचारू रूप से पूर्ण का या नहींl मोहम्मद साहब कहा करते हैं मातृ भक्त पुत्र का जनत मां के आंचल में जो लोग अपनी मां के गोद में सर रखने और आशीर्वाद पाने का सौभाग्य पा लेते हैं यह जानते हैं की मां के आशीर्वाद का क्या परिणाम होता हैl भावना वात्सल्य और ममता की मूरत केवल मन ही होती है जो पूर्ण नेट से यह सब कुछ हम पर लुटती हैंl इसलिए मां-बाप के कर्ज को चुकाने का फर्ज होता है जिसने मां बाप के आशीर्वाद ना लिए उसे दुनिया भर के मिले हुए आशीर्वाद भी कम होंगे जो रोज सुबह उ...

दिवसीय पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व शिविर सुचारू रूप से हुए

श्री एस एस जैन संघ आवड़ी में अष्ट दिवसीय पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के प्रसंग पर श्री दक्षिण भारत जैन स्वाध्याय संघ चेन्नई द्वारा श्राविकाएं समताजी मुथा, पूना रंजनाजी बोहरा राऊरी शिरडी एवं हेमंतकुमार बंब द्वारा प्रतिदिन प्रार्थना, अंतगढ़ सूत्र मूल व अर्थ वाचन, कल्पसूत्र वाचन, बच्चों के लिए प्रतियोगिता,रात्रि प्रतिक्रमण, ज्ञान चर्चा, ध्यान शिविर सुचारू रूप से हुए।   संघ के अध्यक्ष पदमचंद आंचलिया मंत्री डॉ जबरचंद खिंवसरा, संजय देशरला पवन कुमार नाहर, चंपालाल बंब, हीराचंद रांका, संजय डूंगरवाल, प्रवीण बंब, ललित बाफना, नेमीचंद देशरला, महावीर बंब, पदम बंब, मांगीलाल बोहरा, सिद्धार्थ चौरड़िया, कांतिलाल सुन्देशा, राकेश गुलेछा, महेन्द्र रांका, हर्ष कांकरिया, अजय छाजेड़, महावीर कोठारी, अरिहंत सेवा मंडल, राजमती बहु मंडल, चंदनबाला महिला मंडल एवं संघ के सभी सदस्यों ने पर्युषण महापर्व तप त्याग से मना...

सदैव सकारात्मक विचार रखेंगे तो हमेशा सृजनात्मक कार्य करेंगे : देवेंद्रसागरसूरि

मनुष्य जीवन में व्यक्तित्व का विशेष महत्व होता है। सूरत कैसी भी हो, लेकिन सीरत अच्छी होनी चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि यही सीरत ही आपके व्यक्तित्व को दर्शाती है। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही। वे आगे बोले कि कुछ लोग बहुत सुंदर दिखते हैं, लेकिन उनके बजाय कोई साधारण-सा व्यक्ति हमारे मन में अपनी गहरी छाप छोड़ देता है। बाहरी तौर पर सुंदर दिखने वाले शख्स की तुलना में साधारण व्यक्ति के चेहरे पर छाई मधुर मुस्कान, उसके व्यवहार में शिष्टाचार और बातचीत करने का सलीका हमारे दिलो-दिमाग में एक खास पहचान बना लेता है। हर मनुष्य का अपना-अपना व्यक्तित्व, अपनी पहचान है। इसकी विशेषता यही है कि लाखों-करोड़ों लोगों की भीड़ में वह अपन निराले व्यक्तित्व के कारण पहचान लिया जाता है। दरअसल, व्यक्ति की उस संपूर्ण छवि का नाम ही व्यक्तित्व है, जो ...

प्रभु के चरणों में खुद को समर्पित कर उनसे क्षमा का वरदान ग्रहण करो : प्रवीण ऋषि

क्षमापना के साथ की गई पर्युषण पर्व की आराधना Sagevaani.con @रायपुर। लालगंगा पटवा भवन में पर्युषण महापर्व के आखरी दिन उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि सम्वत्सरी की आलोचना, प्रतिक्रमण, श्रुतदेव आराधना करने के बाद क्षमापना के क्षीरसागर में स्नान करने के लिए आप तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले हम क्षमाप्रार्थी हैं अपने तीर्थंकर परमात्मा के। इसे महसूस करते हुए स्वयं को परमात्मा के चरणों में प्रस्तुत करते हुए उनसे क्षमा के वरदानों को ग्रहण करें जो उन्होंने बरसाए हैं। उन्होंने बताया कि पर्युषण पर्व आराधना के लिए चेन्नई, पुणे, इंदौर, अहमदनगर से पहुंचे हैं। कई लोग 9 दिनों से रायपुर में हैं, कई लोग 2 दिन पहले पहुंचे हैं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी है। 8 दिवसीय पर्युषण महापर्व के अंतिम दिवस सामूहिक प्रतिक्रमण के बाद 20 सितंबर को क्षमापना की गई। उपाध्याय प्रव...

क्षमा दिवस पर अपने घर को स्वर्ग बनाने का संकल्प लें: साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

कमला भवन में सााध्वी रमणीक कुंवर जी के सानिध्य में मनाया गया क्षमावाणी पर्व   Sagevaani.com @शिवपुरी। क्षमा दिवस चार्तुमास और पर्यूषण पर्व का सिरमोर दिवस है। क्षमा को अपने जीवन में उतारे बिना पर्यूषण पर्व की सार्थकता व्यर्थ है। क्षमावाणी दिवस या मैत्री दिवस पर सबसे पहले अपने घर को स्वर्ग बनाने का संकल्प लें। घर स्वर्ग तब बनेगा जब परिवार के एक-एक सदस्य का हृदय पवित्र और निर्मल होगा। पवित्र हृदय में ही क्षमा का वास होता है उक्त प्रेरक व्याख्यान प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने स्थानीय कमला भवन में क्षमावाणी दिवस पर आयोजित विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। इस अवसर पर गुरूणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी, तपस्वी रत्न साध्वी पूनम श्री जी, मधुर गायिका साध्वी जयश्रीजी और आशु कवि और मधुर गायिका वंदना श्री जी ने भी मैत्री दिवस पर अपनी ज्ञात और अज्ञात गलतियों के लिए 84 लाख जीव योनि सहित शिवपुर...

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