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सम्यकदर्शन का अवतरण आत्मोन्नति की प्रथम सीढ़ी है- आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीजी

किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने नवपद आराधना के छठे दिन सम्यक दर्शन के पवित्र दिन पर कहा कि सम्यक दर्शन का अर्थ है सच्ची और परिपूर्ण श्रद्धा, सत्य तत्वों में गहरी आस्था, सही दृष्टि इत्यादि। जिनवाणी पर अटूट श्रद्धा होने पर ही जीव सम्यकदर्शन का अनुभव कर सकता है और मिथ्यात्व से सावधान हो सकता है। ज्ञानी कहते हैं कि सम्यकदर्शन के बिना सम्यकज्ञान, सम्यकचारित्र संभव नहीं हो सकता। सम्यकदर्शन का अवतरण आत्मोन्नति की प्रथम सीढ़ी है। सम्यकदर्शन पद में चार श्रद्धा, दस विनय, पांच लक्षण सहित 67 गुण होते हैं, जो मोक्षमार्ग के आलंबन है। मोक्ष पद की प्राप्ति हेतु सम्यक्त्व होना ही चाहिए। सम्यक्त्व के चार लक्षण अनुकंपा, आस्तिकता, समता और संवेग बताए गए हैं। उन्होंने कहा शासन की स्थापना अरिहंत करते हैं‌। सिद्ध भगवंत हमारे लक्ष्य...

व्रत धारण कर सहज ही पाप बंध से बचा जा सकता है: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि संसार के जीवों को भव सागर से तारने के लिए भगवान महावीर ने ऐसे धर्म का निरूपण किया और ऐसा पाठ्यक्रम बनाया जिसे अपनी इच्छानुसार अनुसरण करने का निश्चय जीवों पर छोड़ दियाl जिसने भी इस धर्म का व्रतों का चाहे पूर्ण रूप से, चाहे आंशिक रूप से पालन किया या पालन करेगा वह अवश्य ही भव सागर से पार हो सकेगा। दिशाओं की मर्यादा कर उपभोग – परिभोग के साधनों की मर्यादा करने में कोई कठिनाई नहीं होती। आसानी से ये व्रत धारण कर सहज ही पाप बंध से बचा जा सकता है।   विपरीत द्रव्यों के मेल से बने पदार्थों के खाने से शरीर में विकार उत्पन्न होते है। आनन्द श्रावक के 26 बोलो की जीवन पर्यन्त के लिए ऐसी मर्यादा रखी कि उन्हें 14 नियम प्रतिदिन चितारने की आवश्यकता नही पड़ी हमें भी ऐसी मर्यादा रखने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

संसार का सुख अस्थाई और मोक्ष सुख स्थाई है: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com/चैन्नई। संसार का सुख अस्थाई है, और मोक्ष सुख स्थाई है। बुधवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने ओलीजी तप पर श्रीपाल चारित्र का वांचन करतें हुए साधना-आराधना करनें वाले साधकों से कहा कि आत्मा संसार में पूर्व भव मे किए गये पुण्य कर्म से ही जीवन मे सुख प्राप्त करती है मनुष्य के पुण्य जब तक प्रबल तब तक उसका कौई बाल भी बांका नहीं कर सकता है। पुण्य से ही मनुष्य संसार मे सुख प्राप्त करता है परन्तु संसार का सुख स्थाई नहीं है असली सुख तो मोक्ष का है जो कभी नष्ट नही होने वाला हैl इंसान पुदगलो और विषयों के सुख को स्थाई जानकर अज्ञान, मोह, माया कसाय और लोभ मे जीवन भर सुख की तलाश में दुःख भोगता है। लौकिक और भौतिक सुख स्थिर नही है सच्चा सुख आसक्ति को त्याग में है, कर्म के त्यागने में नहीं। कर्म से प्राप्त होने वाले फल के प्रति आसक्ति को त्यागने पर ही मनुष्य अपनी आत्मा को मोक्ष का सु...

स्वाध्याय दिवस मनाया गया 

आज 24 अक्टूबर 2023 को आचार्य भूधरजी म.सा की पुण्य तिथि श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ-तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में तप-त्याग पूर्वक स्वाध्याय दिवस के रुप मे सामायिक साधना के रुप में मनाई गई | स्वाध्यायी बन्धुवर आर वीरेन्द्र कांकरिया ने सामायिक के पाठो के अर्थ का विश्लेषण किया | श्रावक संघ, तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने आचार्यश्री भूधरजी म.सा के जीवन चरित्र पर प्रकाश करते हुए कहा कि राजस्थान के नागौर में माणकचंद जी-रुपादेवी मुणोत परिवार में जन्मे भूधर बाल्यकाल से ही साहसी,वीर थे और सोजत में फौजियों के अफसर के रुप में आप नियुक्त हुए | कंटालिया ग्राम में 84 डाकुओं से लड़ते हुए विजयी बने,इस युद्ध के धटनाक्रम में आपके प्रिय ऊंट की गर्दन को एक डाकू ने शस्त्र से काट दिया, इस युद्ध में तड़प कर हुई मृत्यु को देखकर उन्हें संसार से विरक्ति हो गई व श...

त्याग का पर्याय ही साधु जीवन है : देवेन्द्रसागरसूरि

Sagevaani.com/चेन्नई. बिन्नी नोर्थटाउन जैन संघ के संघ भवन में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने नवपद ओली की आराधना के पंचम दिन साधु पद की महिमा से अवगत कराया। उन्होंने कहा धर्मरूपी कल्पवृक्ष पंचमेष्ठि से व्याप्त आत्मा को परमात्मा बनाते हैं। अरिहंत परमात्मा जड़ है, सिद्ध भगवंत फल , आचार्य भगवंत फूल हैं और उपाध्याय पत्ते व साधु भगवंत धड़ के स्थान पर हैं। साधु भगवंत जिनका पंच परमेष्ठी में अंतिम स्थान है किंतु सभी पदों में उनकी महिमा, गरिमा महान है। अरिहंत बनने से पूर्व साधु बनना होता है। सिद्ध, आचार्य और उपाध्याय भी साधु बने बिना प्राप्त नहीं हो सकते। कैवल्य ज्ञान सहित अन्य ज्ञान भी साधू बने बिना प्राप्त नहीं किए जा सकते, सिद्ध पद को प्राप्त नहीं किया जा सकता। मरुदेवी माता ने भी तभी सिद्ध अवस्था को प्राप्त किया जब उनके भावों में साधुता आई। पंच परमेष्ठी के चार पदों में से कोई भी पद बिना साधु ब...

जीवन के सारे सौभाग्य का मूलभूत द्वार है विनय : प्रवीण ऋषि

‘उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना’ के प्रथम दिवस विनयश्रुत की आराधना Sagevaani.com/रायपुर। रायपुर की पावन धरा पर 21 दिवसीय ‘उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना’ का 24 अक्टूबर को भव्य शुभारंभ हुआ। उत्तराध्ययन सूत्र भगवान महावीर के अंतिम वचन हैं, जिसे सुनने के लिए देवता भी स्वर्ग से उतरकर धर्मसभा में बैठे थे। लगातार 16 पहर तक चले महावीर के प्रवचनों का लाभ संसार के समस्त जीवों ने लिया था। सुधर्मा स्वामी द्वारा रचित यह पवित्र ग्रन्थ है जिनके 36 अध्याय में महावीर स्वामी के निर्वाण के कुछ समय पहले दिए गये उपदेश संग्रहित हैं। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने धर्मसभा में उपस्थित श्रावकों को उस धर्मसभा का वर्णन किया जहां महावीर ने अपने प्रवचन दिए। तीर्थंकर परमात्मा के पावन, पवित्र अस्तित्व की समृद्धि में अनुभूति कराने के लिए देवों द्वार निर्मित एक भव्य दिव्या समोशरण, एक विशाल चांदी का परकोटा...

सुगम हो ट्राफिक व्यवस्था: आर सुधाकर

Sagevaani.com@चेन्नई: चेन्नई कॉरपोरेशन के ‘कॉल फॉर एक्शन’ अभियान के तहत महानगर के सबसे व्यस्ततम, व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र साहुकारपेट, पार्क टाउन में यातायात की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए नगर निगम वार्ड नं 57 पार्षद राजेश जैन रंगीला ने एडिशनल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस ट्रैफिक आर सुधाकर आइपीएस आइजीपी से आज मुलाकात की। उन्हें क्षेत्र में अवस्थित ट्रैफिक, लारियों के असमय प्रवेश पर हो रही समस्याओं पर जानकारी दी। एडिशनल कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि वह स्वयं इस पर ध्यान देंगे और आवश्यक कार्यवाही करेंगे। इस अवसर पर बिजनेस वींग जिलाध्यक्ष शांतिलाल राजपुरोहित, अरिहंत जैन चोरड़िया भी उपस्थित थे।

आचार्य भुधरजी म सा की जन्म जयंती नार्थ टाउन में मौन व सामायिक के साथ मनाई गई

श्री यस यस जैन संघ नार्थ टाउन के तत्वावधान में दिनांक 24 अक्टूबर मंगलवार को क्षमा श्रमण आचार्य भुधरजी म सा की जन्म जयंती गुरुदेव जयतिलक मुनिजी के पावन सानिध्य में मौन व सामायिक के साथ मनाई गई। सर्वप्रथम महिला मण्डल ने भुधरजी पर गीत प्रस्तुत किया। संघ के वरिष्ठ श्रावक बंशीलाल डोसी ने भुधरजी के जीवन पर प्रकाश डाला। महिला मण्डल की मंत्री ममता कोठारी ने स्तवन गया। स्वीटी चोरड़िया व बबीता बैद ने नाटक पेश किया। पेरंबुर से पधारी प्रेमलता मेहता ने बहुत ही सुन्दर गीत गया। ज्ञानचंद कोठारी ने संचालन करते हुए बताया कि ऐसे महान आचार्य के थोड़े से गुण भी अगर हम धारण कर लेते हैं तो जीवन को सफल बना सकते हैं। तत्पश्चात गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि जिनशासन में एक-से-बढ़कर एक महापुरुषों ने जन्म लिया, ऐसे ही सोजत में ओसवाल कुल में भुधर का जन्म हुआ, वे हाकिम के पद पर सुशोभित थे। डाकू भी उनके ना...

मानवता के मसीहा थे- गुरुदेव पदम चन्द्र जी- डाॅ. वरुण मुनि

राष्ट्र संत उत्तर भारतीय प्रवर्तक दादा गुरुदेव भण्डारी श्री पदम चन्द्र जी म. सा. की पावन जन्म जयंती गुरु गणेश मिश्री पावन स्मृति धाम सुल्लूरपेठ के प्रांगण में बड़ी भव्यता के साथ सानंद संपन्न हुई। स्पष्टवक्ता श्री कांति मुनि जी म. सा. के श्रीमुख से मंगलाचरण के द्वारा धर्म सभा का शुभारम्भ हुआ। विद्याभिलाषी लोकेश मुनि जी म, मुनि रत्न श्री रूपेश मुनि जी म. ने गुरु भक्ति गीत प्रस्तुत किए। दक्षिण सूर्य डॉ. श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने मंगलमय उदबोधन् में नवरात्रि दशहरा एवं गुरु पदम जन्म जयंती पर ओजस्वी शब्दों में प्रकाश डाला। उन्होंने फरमाया नवरात्रि के ये नौ दिन केवल शक्ति की उपासना के ही नहीं अपितु अपने भीतर की शक्ति को जगाने के दिन हैं। हमारे भीतर जो भी दुर्गुण रूपी रावण छिपे हुए हैं, उन्हें हराना है, तभी दशहरा सही अर्थों में सार्थक होगा ।  पूज्य दादा गुरुदेव भण्डारी श्री पदम चन्द्र जी म. सा., ...

आस्था का अहोभाव जगाने का अनुष्ठान है श्रुतदेव आराधना : प्रवीण ऋषि

मंगलवार 24 अक्टूबर से लालगंगा पटवा भवन में गूंजेंगे महावीर के अंतिम वचन आज के लाभार्थी परिवार : श्रीमती कांतादेवी धरमचंदजी पटवा परिवार व श्रीमती प्रेमलता राजीवजी तातेड़ परिवार दिल्ली Sagevaani.com/रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि मनुष्य को मंजिल तब मिलती है जब दिल, दिमाग और पाँव एक ही रास्ते पर चलते हैं। इसलिए दिल में परमात्मा का अस्तित्व, दिमाग में परमात्मा के वचन रहना चाहिए। अगर दिल-दिमाग में प्रभु बस गए तो पाँव भी प्रभु के पास चल पड़ेंगे। लालगंगा पटवा भवन में सोमवार को उपाध्याय प्रवर श्रुतदेव आराधना कैसे करें और परमात्मा का निर्वाण कल्याणक कैसे मनाएं इस पर चर्चा कर रहे थे। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि आराधना तभी संपन्न होती है जब श्रद्धा होती है। स्वाध्याय बिना श्रद्धा के हो जाता है, इसके लिए श्रद्धा के आवश्यकता नहीं है। ज्ञान बिना श्रद्धा के मिल सकता है, लेकिन यह ज्ञान नर्क ले जात...

साधना जीवन में सफलता का मूल मंत्र है: महासती धर्मप्रभा 

Sagevaani.com/चैन्नई। साधना के बल पर असंभव काम को भी संभव किया जा सकता है।रविवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने नवपद ओली तप करने वाले अराधको और साधकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि साधना जीवन में सफलता का मूल मंत्र है। मनुष्य विधी विधान और श्रध्दां-आस्था के साथ मन को स्थिर रखकर साधना करता है तो वह मनवांछित फल प्राप्त कर सकता है। जीवन में साधना छोटी और बड़ी नहीं होती है,साधना साधना होती है विधी- विधान और ध्यान पूर्वक व्यक्ति आराधना-साधना करता है तो वह मानव भव सार्थक बनाकर आत्मा को उच्चगति दिलवा सकता है। साध्वी स्नेहप्रभा ने श्रीमद उत्ताराध्यय सूत्र के पंचमं अध्याय अज्झयणं अकाममरणिज्यं पाठ का वर्णन करतें हुए श्रध्दांलु ओ से कहा कि संसार मे मनुष्य ने सम्पूर्ण कलाएँ प्राप्त करने बाद अगर उसमे मृत्यु की कला को नहीं जान पाया तो उसकी सम्पूर्ण कलाएं अधूरी रह जाएगी। जन्म का महोत्सव तो संसार...

पानी पीजे छान के और गुरु कीजे जान के: देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में नवपद ओली के तीसरे दिन पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि राजा अपने राज्य की रक्षा के लिए अभेद्य किले बनवाता है, ताकि शत्रु के जब आक्रमण करने आए तो किले को देखकर ही लौट जाए। इंसान खाली पड़ी अपनी जमीन के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनवाता है, ताकि वह आम लोगों से सुरक्षित रह सके। किसान खेत के चारों ओर मेड़ बनवाता है। जिससे जानवरों से फसल की रक्षा हो सके। इसी प्रकार अध्यात्म पथ का साधक अपने मन, हृदय और जीवन को अनेक प्रकार की शुभ भावनाओं से शुभ विचारों से और शुभ प्रवृत्तियों से अपने जीवन को सुरक्षित रखते है. उन्होंने कहा कि विज्ञान जगत में आश्चर्य भाव की प्रधानता है। धर्म जगत में विस्मय भाव की प्रधानता है। अपने अंत:करण से पूछे कि हमें प्यास पदार्थ की है या परमात्मा की, हमें तड़पन संपत्ति की है या सदगुणों की, हमें तलब ...

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