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स्वभाव में आवश्यक सुधार किए बिना प्रगति नहीं हो सकती है : देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि अपने दोषों की ओर से अनभिज्ञ रहने से बड़ा प्रमाद इस संसार में और कोई नहीं हो सकता, इसका मूल्य जीवन की असफलता का पश्चाताप करते हुए ही चुकाना पड़ता है। आरंभ छोटे-छोटे दोष- दुर्गुणों से करना चाहिए। उन्हें ढूंढ़ना और हटाना चाहिए। इस क्रम से आगे बढ़ने वाले को जो छोटी-छोटी सफलताएं मिलती हैं, उनसे उसका साहस बढ़ता चलता है। उस सुधार से जो प्रत्यक्ष लाभ मिलते हैं, उन्हें देखते हुए बड़े कदम उठाने का साहस भी होता है और उन्हें पूरा करने का मनोबल भी संचित हो चुका होता है। गुण, कर्म, स्वभाव में आवश्यक सुधार किए बिना प्रगति नहीं हो सकती है। गुण, कर्म, स्वभाव का मानवोचित परिष्कार करते हुए व्यक्तित्व को सुविकसित करने में संलग्न होना चाहिए। वे आगे बोले कि दुर्व्यवहार का कुफल दुःख और बेचैनी ...

जैन संस्कार विधि : प्रगतिशील विविध प्रयोग

★ अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा का जैन संस्कार विधि से मनाया जन्मदिन Sagevaani.com /चेन्नई : अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा का जन्मदिन साध्वीश्री लावण्यश्रीजी ठाणा 3 के सानिध्य में तेरापंथ सभा, साहुकारपेट, चेन्नई में जैन संस्कार विधि से मनाया गया।  तेयुप सहमंत्री श्री नवीन बोहरा के नमस्कार महामंत्र गीत संगान के साथ कार्यक्रम शुभारम्भ हुआ।  जैन संस्कार श्री स्वरूप चन्द दाँती ने सम्पूर्ण मंगल मंत्रोच्चार के साथ जन्मदिवस संस्कार विधि सम्पादित करवाई। जैन संस्कार श्री अपुर्व मोदी, अहमदाबाद ने भी इस अवसर पर उपस्थित हो साथ निभाया।  अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ तेयुप पदाधिकारियों ने मंगल भावना पत्रक की स्थापना की। तेयुप उपाध्यक्ष एव अभातेयुप समिति सदस्य श्री संदीप मुथा, तेयुप मंत्री एवं अभातेयुप नेत्रदान सहप्रभारी श्री कोमल डागा ने सभी के तिलक ...

चार्तुमास की सफलता के बाद आई साध्वी रमणीक कुंवर जी की भावुक विदाई वेला

तीन दिन तक चलेगा सम्मान समारोह, 27 को होगी उपकार सभा Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। पांच माह तक चार्तुमास अवधि में शिवपुरी में जन-जन को जिन धर्म का संदेश देने वाली प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी म.सा. ठाणा 5 की विदाई बेला नजदीक आ गई है। साध्वी जी 28 नवम्बर को दोपहर 1 बजे पोषद भवन से बिहार कर अगले पड़ाव के लिए रवाना होगी। विदाई बेला से पूर्व तीन दिन तक कमला भवन में सम्मान समारोह और उपकार सभा का आयोजन होगा। 25 नवम्बर शनिवार को चार्तुमास के दौरान 3 अथवा उससे अधिक उपवास की तपस्या करने वाले साधकों का सम्मान किया जाएगा। 26 नवम्बर रविवार को साध्वी रमणीक कुंवर जी, साध्वी नूतन प्रभाश्री जी, साध्वी पूनम श्री जी, साध्वी जयश्री जी और साध्वी वंदना श्री जी के प्रवचन को जन-जन तक पहुंचाने वाले मीडियाकर्मियों का सम्मान किया जाएगा तथा 27 नवम्बर को कमला भवन में सुबह 9 बजे से उपकार सभा का आयोजन होगा। तीनो...

दोष दिखाने वाले को अपना शुभचिंतक मानकर उसका आभार मानें : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com /Chennai: दोष, दुर्गुण, दुष्प्रवृत्तियों, दुर्भावनाओं को त्यागिए संसार में कोई किसी को उतना परेशान नहीं करता, जितना कि मनुष्य के अपने दुर्गुण और दुर्भावनाएं। दुर्गुण रूपी शत्रु हर समय मनुष्य के पीछे लगे रहते हैं, वे किसी समय उसे चैन नहीं लेने देते। कहावत है कि अपनी बुद्धि और दूसरों की संपत्ति, चतुर को चौगुनी और मूरख को सौगुनी दिखाई पड़ती रहती है। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही, वे आगे बोले कि संसार में व्याप्त इस भ्रम को महामाया का मोहक जाल ही कहना चाहिए कि हर व्यक्ति अपने को पूर्ण निर्दोष और पूर्ण बुद्धिमान मानता है। न तो उसे अपनी त्रुटियां सूझ पड़ती हैं और न अपनी समझ में दोष दिखलाई पड़ता है। इस एक ही दुर्बलता ने मानव जाति की प्रगति में इतनी बाधा पहुंचाई है, जितनी संसार की समस्त अड़चनों ने मिलकर भी न ...

जैन दिवाकर गुरूदेव चौथमलजी म.सा. की जन्म जयन्ती रविवार को

श्रावक व्रत,14 नियम, 27 संकल्प, आगम कंठस्थ करने वाले 327 श्रावक श्राविकाएँ का होगा बहुमान Sagevaani.com /चेन्नई : श्री एस एस जैन संघ माम्बलम -टी.नगर के तत्वावधान एवं स्वर्ण संयम आराधक श्री वीरेन्द्रमुनीजी म.सा. के सान्निध्य में वर्ष 2023 का आडम्बर रहित यशश्वी एवं आदर्श चातुर्मास सम्पूर्णता की ओर अग्रसर है। रविवार दिनाँक 26 नवम्बर को सुबह 9.30 बजे से चातुर्मासार्थ विराजित मुनिश्री वीरेन्द्रमुनीजी म.सा. के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन समारोह के साथ जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. की जन्म जयन्ती एवं ज्योतिषाचार्य उपाध्याय कस्तूरचन्दजी का दीक्षा जयन्ती तप त्याग एवं सामायिक दिवस के रूप में मनाई जाएगी।          संघ अध्यक्ष डॉ.एम. उत्तमचन्द गोठी ने बताया कि इस प्रसंग पर चातुर्मास काल के 5 महीने के दरम्यान विशेष धर्म आराधना जैसे श्रावक व्रत,14 नियम, 27 संकल्प, आगम, प्रतिक्रमण, पुच्चीसुणं, बड़ी साधू वन्दना, भक्त्...

रायपुर की पावन धरा पर पहली बार निकलेगी अर्हम विज्जा की विजय यात्रा

9 फैकल्टी के 500 ट्रेनर्स के साथ सकल जैन समाज होगा शामिल Sagevaani.com /रायपुर (वीएनएस)। 5 माह का चातुर्मास अपने अंतिम दौर में है, और लालगंगा पटवा भवन में शिखर दिवस की तैयारी चल रही है। वहीं अर्हम विज्जा की 9 फैकल्टी के 500 ट्रेनर्स भी सर्टिफिकेशन कोर्स के लिए पहुंचे हैं। यह पहली बार नहीं है कि लालगंगा पटवा भवन में कोई कार्यक्रम बिना किसी उल्लास और उमंग के मनाया जा रहा है। इस चातुर्मास में रायपुर श्रमण संघ के सदस्यों ने हर पल को यादगार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है, तो फिर चातुर्मास का समापन कैसे अछूता रहेगा। शिखर दिवस की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। 25 नवंबर की सुबह 7 बजे विवेकानंद नगर से अर्हम विज्जा की विजय यात्रा प्रारंभ होगी, जिसमे अर्हम विज्जा के 500 ट्रेनर्स और सकल जैन समाज शामिल होगा। वहीं 24 नवंबर की शाम 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक गुरुभक्ति का कार्यक्रम लालगंगा पटवा भवन में आ...

धर्म के बिना जीवन का कोई महत्व नहीं: जयतिलक मुनिजी

ए यम के यम स्थानक नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि अतिथि संविभाग व्रत का निरुपण भगवान ने किया। कहते हैं श्रावक के 12 व्रतों को सुनकर समझकर अपनाना चाहिए। व्रत पालन से जीवन धर्म के निकट रहता है। धर्म से ही जीवन सुन्दर व सार्थक लगता है। धर्म के बिना जीवन का कोई महत्व नहीं। संसार में रहते हुए भी जीवन में धर्म व्रत अवश्य धारण करना चाहिए। धर्म के बिना जीवन प्रिय नहीं लगता। धर्म व्रत धारण करने से संसार में सम्मान बढ़ता है। श्रावक भी धर्म पालन से मोक्ष मार्ग की ओर आगे बढ़ता है। धर्म पालन से व्रत अंगीकार करने से जीवन मर्यादित होता है। जिससे संसार के बहुत सारे पाप खत्म हो जाते हैं। जिससे सभी जीव सुखी होते हैं धर्म ध्यान करने से अभयदान की वृद्धि होती है। धर्म सभी के लिए कल्याणकारी व हितकारी है। अतिथि यानि जिसके आने की तिथि निश्चित न हो। परंतु आज परिवर्तन आ गया है। पहले बिना सुचना के अति...

पाप में मन मत लगाओ लेकिन धर्म बिना मन के मत करो: साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

उन्होंने बताया जीवन में कर्मों का खेल और इससे मुक्त होने के उपाय Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। संसार में जीवन चलाने के लिए कुछ न कुछ गलत काम और पाप करने होते हैं, लेकिन पाप करते समय उसमें अपने मन को मत लगाओ वहीं धर्म मन लगाकर करो। बिना मन के धर्म किए जाने का कोई अर्थ नहीं है। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने स्थानीय कमला भवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने भगवान महावीर की अंतिम वाणी उत्तराध्यन सूत्र का वाचन करते हुए जीवन में कर्मों का क्या महत्व और प्रभाव है इसे विस्तार से समझाया और कर्मों से मुक्त होने के उपाय भी बताए। धर्मसभा में साध्वी वंदनाश्री जी ने कभी खुशियों का मेला है, कभी आंखों में पानी है। जिंदगी और कुछ नहीं सुख दुख की कहानी है, भजन का गायन कर माहौल को भक्ति रस की गंगा से सराबोर कर दिया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने आ...

अपनी अंतरात्मा की आवाज का अनुसरण करें : देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म उपदेश देते हुए कहा कि आत्मसम्मान एक सफल सुखी जीवन का आधारभूत तत्व है। व्यक्ति आत्मसम्मान के अभाव में सफल तो हो सकता है, बाह्य उपलब्धियों भरा जीवन भी सकता है, किंतु वह अंदर से भी सुखी, संतुष्ट और संतृप्त होगा, यह संभव नहीं है। आत्मसम्मान के अभाव में जीवन एक गंभीर अपूर्णता व रिक्तता से भरा रहता है। यह रिक्तता एक गहरी कमी का अहसास देती है और जीवन एक अनजानी- रिक्तता, एक अज्ञात पीड़ा, असुरक्षा और अशांति से बेचैन रहता है। आत्मसम्मान का बाहरी उपलब्धियों और सफलताओं से बहुत अधिक लेना-देना नहीं है। आत्मविश्वास स्वयं की सहज स्वीकृति, स्व-प्रेम और स्व-सम्मान की व्यक्तिगत अनुभूति है, जो दूसरों की प्रशंसा, निंदा और मूल्यांकन आदि से स्वतंत्र है। वस्तुत: आत्मविश्वास व्यक्ति का अपनी नजरों में अपना मूल्यांकन है और अपनी मौलिक अद्वित...

अर्हम विज्जा के इतिहास में पहली बार एक साथ 500 ट्रेनर्स को मिलेगा सर्टिफिकेट

सर्टिफिकेशन के लिए देशभर से 9 फैकल्टी के ट्रेनर्स पहुंचे लालगंगा पटवा भवन Sagevaani.com /रायपुर। 5 माह का चातुर्मास अपने अंतिम दौर में है, लालगंगा पटवा भवन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि के मुखारविंद से श्रावक पुच्छिंसुणं (वीर स्तुति) आराधना का लाभ ले रहे हैं। इस दौरान देशभर से अर्हम विज्जा के लगभग 400 से 500 ट्रेनर्स लालगंगा पटवा भवन पहुँच चुके है। अर्हम विज्जा के इतिहास में पहली बार एक साथ 9 फैकल्टी के ट्रेनर्स का सर्टिफिकेशन कोर्स एक ही छत के नीचे होने जा रहा है। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी है। पुच्छिंसुणं (वीर स्तुति) आराधना के 9वें व अंतिम दिवस गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर ने कहा कि चार प्रकार की फिलॉसॉफी (तत्त्वज्ञान) है। जीवन में प्रायः जो समस्या आती है वह चार प्रकार से आती हैं। और इन समस्याओं का समाधान जानना है तो आपको यह स...

साधक को तारने वाला है: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में कहा कि श्रावक धर्म एक प्रकार से साधक को तारने वाला, पाप को अल्प कराने वाला और ज्यादा से ज्यादा समय आत्म साधना, त्याग तप आदि में लगाने वाला है। श्रावक धर्म यही प्रेरणा देता है कि अपने आपको आत्मा से जोडो और संसार से निवृत हो। संसारी जीव जो पाप करने में लगा है उसे सीमित करने का निर्देश श्रावक धर्म देता है। सागर जितनी मर्यादा को तालाब जितनी तालाब जितनी मर्यादा को कुएँ जितनी करने का निर्देश सिमीत करने का निर्देश बारह व्रतों में मिलता है। देसवागासिक व्रत में श्रावक का विचार और ज्यादा सामायिक करने का व रात्रि संवर करने का हो जाता है। इस प्रकार अपनी आवश्यकताओं को और कम करते हुए बिना प्रयोजन के कार्यों को छोड़ अपना समय सामायिक प्रतिक्रमण करते हुए धर्म ध्यान को बढ़ाता है। पोरसी, डेढपोरसी, दो पोरसी एकासन आदि करते हुए तप करने लगत...

जीवन में असफलता भी सफलता का ही एक हिस्सा है : देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने सपने साकार करने के लिए कड़ी मेहनत और अपने समय का सही उपयोग करने की जरूरत है। सफलता केवल उन्हें ही मिलती है जो इसके काबिल होते हैं। लोग अपने सपनों को साकार करने के लिए अपने समय का सही इस्तेमाल और कड़ी मेहनत और उसी के अनुसार काम करते हैं। असफलता भी सफलता का ही एक हिस्सा है। हमें अपनी असफलता से निराश होने की जरुरत नहीं है, बल्कि हमें अपनी असफलता से सीखने की जरुरत है। हमने कहां गलतियां की है उसे पहचान कर उसे ठीक करने की जरुरत है। इससे हमने जो गलतियां की है उस गलती को हम सही कर सकते है। सफलता के मायने सबके लिए अलग-अलग होते हैं। किसी के लिए यह एक अच्छी स्थिति तो किसी के लिए अधिक सम्पत्ति या धन प्राप्ति करना है। मेरे अनुसार वास्तविक सफलता वो...

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