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विशेष कार्यशाला

*आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या* *साध्वी श्री डॉ गवेषणा श्री जी, साध्वी श्री मेरु प्रभाजी, साध्वी श्री मयंक प्रभाजी एवं साध्वी श्री दक्ष प्रभाजी*               के सान्निध्य में         *विशेष कार्यशाला*       *अगस्त 02 शुक्रवार*  🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼   *पहला तीर्थ,पहला मंदिर*  🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑 *साध्वी श्री जी द्वारा प्रभावी प्रवचन* आप अपने परिवार व बंधु मित्रों सहित पधारकर इस प्रभावी प्रवचन का श्रवण करें। दिनांक: *2 अगस्त 2024* प्रातः *9:30 से 10.45 बजे* स्थल :*तीर्थंकर समवसरण*             *जैन तेरापंथ नगर*                   *माधावरम।* नोट : *समय का विशेष ध्यान रखें , अपना मोबाइल बंद रखें।*          = ◆ निवेदक ◆ = *श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ माधावरम् ट्रस्ट, चेन्नई*

रानी बाग़ चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश

!! श्री महावीराय नम: !! 🙏🏻जय शिव -जय सुभद्र- जय कैलाश- जय कुसुम- जय ओम- जय शक्ति🙏🏻   *🦶🏻रानी बाग़ चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश🦶🏻*   *अहोभाग्य हमारा, शुभ कर्मों का संचय, क्षेत्र की असीम पुण्यवाणी से*   🙏शासन प्रभाविका उपप्रवर्तनी महासाध्वी श्री कैलाशवती जी म० की पौत्र शिष्याएं एवं श्रमणी गौरव महासाध्वी श्री शक्ति प्रभा जी म० की सुशिष्याएं .. *😷शासन जयोति महासाध्वी श्री शुभा जी म०* *😷प्रज्ञा श्रमणी महासाध्वी डा. श्री शिवा जी म०* *😷सेवा भावी महासाध्वी श्री आराधिका जी म०* ठाणे-3 का वर्ष 2024 मंगलमय *चातुर्मास हेतु मांगलिक प्रवेश* *बुधवार 17 जुलाई प्रातः 6.30 बजे के लगभग* प्रधान श्री विरेन्द्र जैन जी के निवास wz 427 गली न०1, श्री नगर से महेन्द्रा पार्क जैन स्थानक के लिए होगा। *सभी सदस्यों से सविनय निवेदन सपरिवार चातुर्मासिक मांगलिक प्रवेश में अवश्यमेव उपस्थित हो श्री संघ व महासाध्व...

जिस घर के सदस्यों में आपसी प्रेम मजबूत वह घर स्वर्ग के समान : आलोक मुनि.. अमन मुनि

शांत मूर्ति, सेवा शिरोमणि जैन संत आलोक मुनि…अमन मुनि ने कहा कि जिस घर के लोगों में आपसी प्रेम मजबूत होता है, वह घर स्वर्ग के समान होता है। उन्होंने कहा कि लकीरों का खेल भी बड़ा अजीब खेल है। यह लकीरें यदि हथेलियों पर खिंच जाएं तो किस्मत बन जाती। जमीन पर खिंच जाएं तो सरहद बन जाती हैं। शरीर पर खिंच जाएं तो खून निकाल देती हैं और रिश्तों में खिंच जाएं तो दीवार बन जाती है। ये प्रवचन – जैन संत ने लुधियाना के जनता नगर में स्थित एस.एस. जैन सभागार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे। इस अवसर पर प्रवचन प्रभाकर, परहितप्रेरक, युवा कर्मठ संत अमन मुनि ने कहा कि ईंट पत्थर से मकान बनवा लेना बहुत आसान है, पर प्रेम और व्यवहार से घर बसाना बहुत मुश्किल। मौके पर एसएस जैन सभा जनता नगर के चेयरमैन कुलभूषण जैन प्रधान सुनील जैन, कोषाध्यक्ष प्रमोद जैन, हरदीप जैन, राज कुमार, बिमल जैन, रमा जैन, रचना ...

अत्र ही जीवन का अवलंबन है: साध्वी चन्दन बाला

आमेट के जैन स्थानक मे चातुर्मास गुरु माता तपाचार्य जयमाला जी मा. सा. आदि ठाणा 6 के सानिध्य मे विराजित साध्वी चन्दन बाला ने कहा की सबसेपहला पुण्य है, अन्न पुण्य। अन्न के आधार पर ही प्राण टिके रहते है। अत्र ही जीवन का अवलंबन है। अन्न से ही जीवन का निर्माण भी होता है। आहार से ही शरीर बनता है, इन्द्रियों का निर्माण होता है। अच्छे आहार से संस्कार भी अच्छे ही बनते हैं। जबकि, कुत्सित आहार से संस्कार बुरे ही बनते हैं तथा आचरण भी बुरा ही होता है। भूख को नियंत्रण कर पाना सामान्य गृहस्थ के लिए बहुत ही कठिन काम है। पुण्य उपार्जन के लिए जिनके पास साधनों का आभाव है या आवश्यकता से भी कम साधन है, की भी बिना कहे ही सहायता करनी चाहिए। केवल अपने ही सम्प्रदाय के अनुयायियों का नहीं, मानव-मात्र तथा प्राणी-मात्र की सेवा का ध्यान रखना चाहिए। दया, करुणा अनुकंपा से प्रेरित होकर भोजन देना अन्न पुण्य है। अन्न की गरिम...

कर्मानुसार ही फल प्राप्त होता है: साध्वी आनंद प्रभा

आमेट के जैन स्थानक में जैन साध्वी आनंद प्रभा ने कहा। की सुख-दुख का निर्धारण् स्वंय के कर्म होते हैं। कर्मानुसार ही फल प्राप्त होता है। पाप का प्रतिफल स्वंय को भुगतना पड़ता है। इसमेें कोई सहभागिता नहीं कर सकता है। सुख मे आपके साथ रहने वालों की भीड़ होती है, लेकिन दुख के दौरान आप अकेले हो जाते हैं। कहने का अर्थ यह है कि सुख में सभी साथ देते हैं, लेकिन दुख में कोई मदद नहीं करता है। समझदार व्यक्ति एक बार ठोकर लगने पर ही संभल जाता है। अपनी गलती का पुनरावर्तन ना करने के लिए संकल्पित बन जाता है। मूर्खां में ऐसा नहीं होता है। वह अपनी गलती से सबक ना लेने के कारण कई बार ठोकर खाते हुए खेद प्राप्त करता है। इंसान से भूल होना स्वाभाविक है। भूल को स्वीकार करना ही सच्ची साधना है। पाप कभी नहीं छिपता है। इसे छिपाने के अनगिनत प्रयास भी असफल हो जाते हैं। पाप छिपा हुआ नहीं रह सकता। व्यक्ति को पाप से घृणा करनी ...

प्रभु का प्रिय करना ही भक्ति है

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 1️⃣1️⃣ 🪔 51) *जो स्वयं की* *चिंता करता है,* उसको ही परचिंता का परोपकार का अधिकार हैं.! 52) कर्मक्षय का पुरुषार्थ ही प्रभु की सर्वोत्तम भक्ति है क्योंकि *जीव कर्मबंधन में रहे,* *वो प्रभु को प्रिय नही है, तो* प्रभु का प्रिय करना ही भक्ति है.! 53) संसार से *अपनेपन की* आसक्ति तोड़ना ही साधना की सफलता हैं.! 54) कर्म जीव के साथ संयोग संबंध से जुड़कर ही दुखी करता है.. कर्म अलग रहकर न दुखी कर सकता है, न जीव दुखी होता सकता है, *संयोग ही दुख का कारण है.!* 55) यथा संभव अनुकरण का भाव हो वही सच्ची अनुमोदना है.. *अच्छा दिखाने सिर्फ* *वाह वाह करना तो* *खुशामत है.!* 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र* श्रुत संस्करणप्रेमी,शिष्यरत्न मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

रसना को जीतना बड़ा ही कठिन है: साध्वीजी आगम श्री म:स

साध्वीजी आगम श्री म:स ने बताया धन दौलत पुत्र परिवार छोड़ना बहुत सरल है पर रसना को जीतना बड़ा ही कठिन है! इसके कारण अच्छे अच्छे तपस्वियों का पतन हो गया ! जो तत्काल प्रवेश बनाता है वो टैप है! आत्मा के शत्रुओं को तपता है! इस के प्रभाव से अनेक लब्धियों को प्राप्त कर सकते है! वानर वृत्ति से की गई साधनाओं चंचल होती है! पक्षी की वृत्ति से की गई साधना स्थूल होती है!पिपीलिका की वृत्ति से की गई साधना ढेर गंभीर होती है! निरंतर चलने वाली चिटिया अपने सरलत से सस्तातय कर लेती है! जाने लक्स्य को पाना है!   साध्वी धैर्याश्री दुनिया के लिए आप बेहद अच्छे हो जब तक आप की अपेक्षा पूर्ण करते रहो तब तक हम सूर्योदय है जब तक रात्रि है! द्रव्य की आँख खुलती है! अब हमे अंतर के चढ़ी खोलना ! अजयजी बोथरा,आराधना जी गाड़िया,प्रीति जी सकलेचा, कविता जी रांका इनके 11-11 की तपस्या चल रही है ! सी अशोकजी बांटिया ने संचालन क...

परार्थ व्यसनी बनो पुदगल व्यसनी मत बनो

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 9️⃣ 🪔 41) परार्थ व्यसनी बनो पुदगल व्यसनी मत बनो.! 42) *प्रभु प्रिय* *तभी लगेंगे जब,* *पर पदार्थ अप्रिय लगेंगे.!* आत्मप्रियता ही प्रभु प्रियता हैं.! 43) *गुणों का पक्ष होगा तो ही* पुण्यानुबंधी पुण्य एवं सर्व रिद्धि सिद्धि समृद्धि मिल सकती है.! 44) जो स्वयं की चिंता करता है उसको ही परचिंता का *परोपकार का अधिकार हैं.!* 45) करूणता ये है की शत प्रतिशत समय *”जो छूटनेवाला है* *उसके पीछे ही लगा रहे है”,*  उसका 1% भी यदि जो साथ आएगा उसके लिए दिया तो पछताना नही पड़ेगा..! *_(श्री राजप्रश्नीय सूत्र प्रवचन )_* 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *समत्व शिरोमणि* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र* श्रुत संस्करणप्रेमी मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैन संघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर 🌷

ढाई अक्षर से बनती रिश्तों की दुनिया खुशहाल : साध्वी डॉ गवेषणाश्री

Sagevaani.com चेन्नई: ढाई अक्षर का शब्द है- प्रेम, प्यार, स्नेह, शक्ति, भक्ति, दुर्गा, लक्ष्मी आदि। ढाई अक्षर का अपना महत्व है। दो अक्षर का लक होता है और ढाई अक्षर का भाग्य। उपरोक्त विचार आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी डॉ गवेषणाश्रीजी ने जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् चेन्नई स्थित तीर्थकर समवसरण में ‘ढ़ाई अक्षर के शब्द’ विषय पर प्रस्तुति देते हुए कहें।  साध्वीश्रीजी ने आगे कहां कि पारिवारिक संबंध हो, सामाजिक क्षेत्र हो, व्यापारिक क्षेत्र हो, प्रत्येक संबंधों में ढाई अक्षर की महत्त्वपूर्ण योग्यता है। धर्म शब्द भी ढाई अक्षर का है। धर्म- व्याख्या नहीं व्याप्ति है, परिभाषा नहीं प्रयोग है, अभिव्यक्ति नहीं अनुभूति है, धर्म नारा नहीं जीवन है। जीवन में यदि ढाई अक्षर को समझ ले तो रिश्तों की दुनिया खुशहाल बन सकती है।    साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा कि पत्नी को पति का प्यार चा...

वैज्ञानिक प्रो. श्री नरेन्द्रजी भंडारी के सम्मान में परिचर्चा 

Sagevaani.com चेन्नई | इसरो और चंद्रयान मिशन से जुड़े अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रो. नरेन्द्रजी भंडारी ने कहा कि साधु और गृहस्थ के बीच विद्वानों का वर्ग होना बहुत आवश्यक है |  किलपॉक में समाजसेवी सुगालचंदजी जैन के निवास पर उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने जैन धर्म को सर्वाधिक वैज्ञानिक धर्म निरूपित किया। भगवान महावीर फाउंडेशन के संस्थापक श्री सुगालचंदजी जैन ने कहा कि भगवान ऋषभदेव के शासन में उनके पुत्र चक्रवर्ती भरत ने ब्राह्मण वर्ग के रूप में जैन विद्वानों का समुदाय बनाया था |  रिसर्च फाउंडेशन फॉर जैनोलोजी [ जैनविद्या शोध प्रतिष्ठान ] के अध्यक्ष श्री कैलाशमलजी दुगड़ ने कहा कि जैन शिक्षण संस्थानों में जैन दर्शन और जीवन मूल्यों का अध्यापन होना आवश्यक है। प्रतिष्ठान के महामंत्री पदमकुमारजी टाटिया ने जैन दर्शन में शोध योजनाओं को आगे बढ़ाने पर बल दिया |  इस अवसर पर श्री जैन रत्न हितैषी श्र...

वैज्ञानिक प्रोफेसर नरेन्द्रजी भंडारी का सम्मान

Sagevaani.com चेन्नई | इसरो और चंद्रयान मिशन से जुड़े अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रो. नरेन्द्रजी भंडारी का श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु की ओर से सम्मान किया गया | सम्मान करते हुए श्रावक संघ, तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने कहा कि प्रोफेसर भंडारी जैन अकादमी ऑफ स्कॉलर के संस्थापक हैं व अपोलो लूणार चन्द्र मिशन एवं भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम चन्द्रयान प्रथम मे मुख्य वैज्ञानिक रहे | आप मूण टास्क फोर्स, साइंस एडवाइजरी बोर्ड ऑफ इसरो व मार्श ऑर्बिटर मिशन के माननीय सदस्य रहे | वर्ष 2005 से 2007 इंटरनेशनल लुणार एक्सप्लोरेशन वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष रहे | आपको प्लेनेटरी व स्पेस साइन्स के लिए विक्रम साराभाई अवार्ड व भारतीय सरकार द्वारा नेशनल मिनरल अवार्ड व मारवाड़ अवार्ड प्रदान किया गया | स्पेस विशनरी सोसाइटी ऑफ कैलिफोर्निया ने आपको स्पेस विशनरी अवार्ड से सम्मानित किया | नासा,यूएसए ...

अध्यात्म त्याग वीतराग

श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड में विराजित महासतीजी श्री आगमश्रीजी म.सा ने प्रवचन में बताया कि आत्माेपासना एक सुंदर उपक्रम है जिसमें साधक अपनी आत्मकथा खुली पुस्तक की तरह पढ़ लेता हैं। कहां कहां और कैसे कैसे दोषों का सेवन हुआ है उसकी जांच परख प्रतिक्रमण में हो जाता है। व्रत प्रत्याख्यान स्वीकार करने पर ही प्रतिक्रमण होता है।   साध्वी धैर्याश्रीजी ने बताया कि धर्म का भूषण वैराग्य हे वैभव नही, संसार, शरीर, परिवार संबंधी सुख सुविधा का मिलना पुण्योदय हे। साथ ही दस उपवास के प्रत्याख्यान श्रीमती आराधना गादिया, प्रीति सखलेचा, ऋषभ बोथरा के हुवे।

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