Author: saadhak

एसएस जैन सभा सिरसा ने करवाया भव्य जन्म व दीक्षा जयंती समारोह

बहुमंडल ने नाटक के माध्यम से कुसुम प्रभा म. सा. के जीवन पर डाला प्रकाश Sagevaani.com /सिरसा। एसएस जैन सभा की ओर से आत्म शुक्ल-शिव जन्म जयंती एवं कुसुम प्रभा म. सा. की दीक्षा जयंती पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महासाध्वी ज्ञान प्रभा म. सा. व मधुबाला म. सा. ठाणे-8 का पावन सान्निध्य रहा। कार्यक्रम में मक्खन लाल गोयल ने अध्यक्ष हरियाणा प्रांतीय तेरापंथ सभा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत क...

भय मृत्यु से अधिक घातक है

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣4️⃣ 🌺 316) भय मृत्यु से अधिक घातक है.. क्योंकि इसके कारण शक्ति का विकास अवरुद्ध होता हैं.! 317) किसी के कषाय करने पर हम भी कषाय करें तो अनर्थदंड का दोष लगता है.! 218) संसार की सभी स्थितियों का Expiry date के साथ आगमन होता है, ये त्रैकालिक सत्य को समकिति साधक जानता है, इसलिए आर्तध्यान नही करता.! 319) दर्शनाचार अर्थात धर्म की विकास यात्रा..! 320) जहां वात्सल्य होता है वहां गि...

जीवन हे नेहमीच चांगल्या पध्दतीने जगले पाहिजे-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

जालना: जीवन हे नेहमीच चांगल्या पध्दतीने जगले पाहिजे. खूप कठीण परिश्रमानंतर आपल्याला हा मानव जन्म मिळाला असून त्याचा सदुपयोग करुन घेतला पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा व अन्य काही साध्वींची...

मोह माया में फंसकर मनुष्य परमात्मा को भूल जाता है

वीरपता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक में साध्वी आनंद प्रभा ने कहा जिस तरह हमारे परिवार के सदस्यों के प्रति हमारा फर्ज होता है उसी तरह ही परमात्मा के प्रति भी हमारा फर्ज बनता है जिसने इस दुनिया में हमारे को भेजा। मोह माया में फंसकर मनुष्य परमात्मा को भूल जाता है जिस कारण उसे दुखों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दुख आने पर फिर परमात्मा की याद आती है अगर हम नित्य प्रति भगवान का सिमरन करें ...

किसी जीव पर प्रहार करना अर्थात स्वयं पर प्रहार करने जैसा है जीवदया अपनी ही दया हैं.

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣3️⃣ 🪔 किसी जीव पर प्रहार करना अर्थात स्वयं पर प्रहार करने जैसा है जीवदया अपनी ही दया हैं.! 🛑 नेत्र रोग,अंधापन विकृत देह,भीभत्स रूप संपत्ति की निर्धनता आदि प्रतिकूलता से भरी जिंदगी जीवहिंसा का ही परिणाम है.! 🌻 अतः हिंसा का परित्याग करो.! *📗श्रीसार समुच्चय कुलक*   🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी ...

मुलमुनीजी म.सा. कठीण जीवन जगले-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: नऊ वर्षाचे असतांना आई आणि बारा वर्षाचे असतांना वडीलांचे छत्र हरवल्यानंतर मुलमुनी म. सा. अत्यंत कठीण परिस्थितीतून गेलेl परंतू ते डगमले नाहीत तर खंबीरपणे उभे राहिले, असा हितोपदेश संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिलाl तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रे...

तेरापंथ जैन विद्यालय पट्टालम का 26 वां वार्षिक खेल दिवस आयोजित

Sagevaani.com /चेन्नई: तेरापंथ जैन विद्यालय, पट्टालम, चेन्नई का 26वॉ खेल दिवस नेहरू स्टेडियम में प्रातःकालीन बेला में दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ईष्ट वंदना से किया गया। विद्यालय प्रबंधन समिति सदस्यों व मुख्य अतिथि के द्वारा ध्वजारोहण किया गया। छात्रों द्वारा भव्य मार्चपास्ट किया गया। खेल सचिव शशिप्रभा ने मशाल प्रज्जवलित की। मुख्य अतिथि श्री धर्मेन्द्र प्रताप यादव आईएएस, प्रिंसीपल सेकेट्र...

जो आत्मा को परतंत्र करता हैं, दु:ख देता है,

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे साध्वी चन्दन बाला ने कहा जो आत्मा को परतंत्र करता हैं, दु:ख देता है, संसार में परिभ्रमण कराता है उसे कर्म कहते हैं। अनादि काल से जीव का कर्म के साथ सम्बन्ध चला आ रहा है, इन दोनो का अस्तित्व स्वत: सिद्ध है। ‘मैं हूँ।” इस अनुभव से जीव जाना जाता है और जगत में कोई दरिद्र है कोई धनवान है, कोई रोगी है कोई स्वस्थ्य है इस विचित्रता से कर्म का अस्तित्...

साधना की अभिव्यक्ति है ध्यानयोगी आध्यात्म योगी, मौन साधक है आचार्य डॉ. शिवमुनीजी म.सा.- साध्वी डॉ. राज श्री जी

साधना पथ के योगी! साधना की अभिव्यक्ति है ध्यानयोगी आध्यात्म योगी, मौन साधक है आचार्य डॉ. शिवमुनीजी म.सा.- साध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. आज आकुर्डी स्थानक भवनमें तीन महापुरुषों का जन्मोत्सव आध्यात्मिक रुपसे महासाघ्वी डॉ. राज श्रीजी डॉ. मेघा़श्रीजी, साध्वी समिक्षा श्री जी, साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के सानिध्य में अनेक गणमान्य श्रावक श्राविका के उपस्थिती में मनाया गया! “ पुच्छिसुणं” जाप के 13 वे गाथा का...

श्रावक के 14 नियम जो हमें रोज़ लेने चाहिये

  *१. सचित्त :- सचित्त अर्थात जिस पदार्थ में जीव राशि है ।* इसमें सचित पदार्थो के सेवन की दैनिक मर्यादा रखी जाती है।जैसे कच्ची हरी सब्जी , कच्चे फल , नमक , कच्चा पानी, कच्चा पूरा धान आदि का सम्पूर्ण त्याग अथवा इतनी संख्या से अधिक उपयोग नही करूँगा ऐसा नियम करना । ( 3, 5 ,7 आदि )   *२ . द्रव्य :- खाने – पीने की वस्तु / द्रव्य की प्रतिदिन मर्यादा रखनी है , इसमें पदार्थो की संख्या का निश्चय ...

82 दिवसीय “धर्म- चक्र तप” श्रीमती कल्पना जी बसवंतलालजी कोचर द्वारा संप्पन्न

आचार्य भगवंत विश्वकल्याण सुरिश्वरजी के सानिध्य मे 82 दिवसीय “धर्म- चक्र तप” श्रीमती कल्पना जी बसवंतलालजी कोचर द्वारा संप्पन्न! लोणी (धामणी) – प्रतिष्ऱ्ठाचार्य, पुना जिला तिर्थउद्धारक आचार्य पु. विश्वकल्याण जी म.सा. आदि ठाणा लोणी धामणी मे चातुरमासार्थ विराजमान है! गुरुदेवने धर्म संदेश मे तप अनुमोदना कर सत्संग, तप, दान, धर्म, आराधना और संघटित रह कर कार्य करनेका एहलान किया! गुरुदेव के निश्रा मे...

आत्मदर्शन क्यां है-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: समोरा- समोर घेतले जाते ते दर्शन! दर्शन या शब्दाचा अर्थ असा आहे की, देखना! आपण एखादी मुव्ही बघायला जातो, ती तीन तासाची मुव्ही पाहयला आपल्या आत्मदर्शन होते? तर नाही ना, अशाच प्रकारे आपण दर्शन तर घेतो पण आत्मदर्शन कुठे आहे, हा प्रश्न शेवटी उरतोच, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजि...

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