क्रमांक – 4 . *तत्त्व – दर्शन* *🔹भारतीय दर्शन में सत् का स्वरूष* *👉 ‘सत्’ शब्द अस्तित्व का वाचक है। विश्व में जितने भी अस्तित्ववान पदार्थ हैं, वे सब सत् हैं। जड़ और चेतन-दोनों प्रकार के पदार्थों का समावेश सत् में हो जाता है। इस दृष्टि से सत्, वस्तु, तत्त्व, द्रव्य, पदार्थ एक ही अर्थ के बोधक शब्द हैं।* *सत् के स्वरूप के सन्दर्भ में भारतीय दर्शन में पांच मान्यताएँ हैं-* *1. ...
*तत्त्व का अर्थ है पदार्थ, पारमार्थिक वस्तु या सत्।* *तत्त्व शब्द ‘तत्’ शब्द से बना है। संस्कृत भाषा में तत् सर्वनाम शब्द है। सर्वनाम शब्द सामान्य अर्थ के वाचक होते हैं। तत् शब्द में भाव अर्थ में ‘त्व’ प्रत्यय लगाने से तत्त्व शब्द बना है। जैनदर्शन में तत्त्व, सत्त्व, सार, द्रव्य, अर्थ और यथार्थ आदि एकार्थक एवं पर्यायवाची शब्द के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहां मूल चार शब्द ...