Author: saadhak

सबके साथ प्रेम की दृष्टि रखो

आज हमको उत्तम धर्म मानव भाव उत्तम गुरु और सर्वज्ञ प्रभु का शासन मिल गया है इस भाव में जाकर हमने क्या किया है, जीवन को कैसे दिया है..? जीवन कैसे बनाना है सुगंधित सुभाषित बनाना है बहुत भाव से गंदगी जमा की है भीतर के घर में कचरे का कोई पार नहीं हैl अगर कचरे को साफ नहीं किया तो भविष्य अंधकार में यहां से जाने का समय होगा तब कर्म सत्ता हमें पूछेगीl तुझे इस अच्छे भव में भेजा सतगुरु के पास बैठाया तू वहां ...

एक ही लक्ष्य देहनाश के पूर्व कर्मनाश

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣2️⃣ 🪔 306) एक ही लक्ष्य देहनाश के पूर्व कर्मनाश.! 307) कोई व्यक्ति या देवता न मेरा दुख ले सकता हैं न मुझे दुख दे सकता हैं.! मेरे अंतर के मलिन परिणाम ही मेरे दुख का कारण हैं.! 308) प्रभु कहते है की थोड़ा दुख सहन करलें अनंत सुख भेट में मिलेगा.! 309) बूंद मात्र विषय भोग की लालसा में अनंत दुखो की कैद मिलेगी.! 310) देह के ममत्व का त्याग होगा वही से साधना का मंगल प्रारंभ होगा.! 🌧...

भारतीय दर्शन में सत् का स्वरूष

क्रमांक – 4 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹भारतीय दर्शन में सत् का स्वरूष* *👉 ‘सत्’ शब्द अस्तित्व का वाचक है। विश्व में जितने भी अस्तित्ववान पदार्थ हैं, वे सब सत् हैं। जड़ और चेतन-दोनों प्रकार के पदार्थों का समावेश सत् में हो जाता है। इस दृष्टि से सत्, वस्तु, तत्त्व, द्रव्य, पदार्थ एक ही अर्थ के बोधक शब्द हैं।* *सत् के स्वरूप के सन्दर्भ में भारतीय दर्शन में पांच मान्यताएँ हैं-* *1. ...

शल्य रहित अंतर में प्रभु पधारते हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣1️⃣ 🪔 301) शल्य रहित अंतर में प्रभु पधारते हैं.! 302) वीतराग धर्म की आराधना से भाव परिवर्तन नही हो रहा तो हमे अपनी रीत का निरीक्षण करना चाहिए.! 303) जिसका व्यवहार कमजोर होता है.. लोक विरुद्ध,शास्त्र विरुद्ध आज्ञाविरुद्ध हो ऐसे लोगो का निश्चय भी खोखला ही होता है..! 304) जिस सुख के आने से धर्म छूट जाए आत्मार्थी को ऐसे सुख का.? 305) इच्छाओं के अंत से मोक्ष का प्रारंभ होता हैं....

क्रोधी व्यक्ति जीवन में रहता अशांत : मुनि हिमांशुकुमारजी

 करीब 250 व्यक्तियों का संघ गया गुरु दर्शन को सूरत   Sagevaani.com /साहूकारपेट, चेन्नई: जो व्यक्ति क्रोध, गुस्से की गिरफ्त में आ जाता है, वह सदैव स्वयं तो अशांत रहता है ही, साथ में परिवारीक वातावरण को भी अशांत बना देता है। उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा भवन में ‘कषाय मुक्ति’ प्रवचन माला के अन्तर्गत गुरुवार को मुनि हिमांशुकुमारजी ने कहें।  मुनि श्री ने आगे कहा कि क्रोध विष, आग, चण्डाल, ...

आत्म विस्मरण आत्म घातक प्रवृत्ति है

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣0️⃣ 🪔 296) आत्म विस्मरण आत्म घातक प्रवृत्ति है.! 297) प्रायश्चित की सिर्फ क्रिया करेंगे, लेकिन विराधना के भावो का प्रायश्चित नही करेंगे तो शल्यमुक्ति असंभव है.! 298) तत्त्व स्वरूप में स्थिर चित्त होना ही जन्म की सफलता हैं.! 299) जो पाप हो रहा है वो मन से आनंद से राग से हो रहा है और धर्म सिर्फ काया से करना ये कैसे चलेगा बताओ…? 300) क्रिया कितनी भी श्रेष्ठ शुद्ध विधिसंप...

स्वाध्याय नंदनवन है, दिव्य चक्षु है, ध्यान का प्रवेशद्वार है – साध्वी डॉ. राज श्री जी

स्वाध्याय नंदनवन है, दिव्य चक्षु है, ध्यान का प्रवेशद्वार है – साध्वी डॉ. राज श्री जी सम्यक द्रुष्टी से धर्म आराधना हो- डॉ. मेघाश्रीजी। वचनशक्ति सबसे बड़ी शक्ति है! शब्द बाण का और बिणा का भी काम करता है! एक चुप्पी हजारो समस्या का समाधान है। साध्वी जिनाज्ञाश्री जी। आज आकुर्डी स्थानक भवनमे “ पुच्छिसुणं” जाप अनुष्ठान के दसवी गाथा का संपुट हुआ! डॉ. मेधाश्री जी ने सामुहिक रुपसे जाप करवाया! साध्वी...

तत्त्व क्या है ?

*तत्त्व का अर्थ है पदार्थ, पारमार्थिक वस्तु या सत्।*  *तत्त्व शब्द ‘तत्’ शब्द से बना है। संस्कृत भाषा में तत् सर्वनाम शब्द है। सर्वनाम शब्द सामान्य अर्थ के वाचक होते हैं। तत् शब्द में भाव अर्थ में ‘त्व’ प्रत्यय लगाने से तत्त्व शब्द बना है। जैनदर्शन में तत्त्व, सत्त्व, सार, द्रव्य, अर्थ और यथार्थ आदि एकार्थक एवं पर्यायवाची शब्द के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहां मूल चार शब्द ...

शिव मुनि जी महाराज की 83 वीं जन्म जयंती मनाई गई

आज उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में श्रमण संघीय युग प्रदान वर्तमान आचार्य भगवन डॉ श्री शिव मुनि जी महाराज की 83 वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में श्रावक श्राविकाओं ने गुरू चरणों में अपने भाव रखे। गुरूदेव एवं गुरूणी जी महाराज ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। चतुर्विध संघ को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

गुरु जयमल महाराज का 317 वा जन्म महोत्सव

आमेट के वीरपत्ता की पावन भूमि पर एकाभवअवतारी चर्चा चक्रवर्ती युग प्रधान दादा गुरुदेव जयमल जी महाराज साहब का 317 जन्म महोत्सव एवं आचार्य डॉक्टर शिव मुनि जी महाराज एवं साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा जी महाराज का जन्म दिवस बुधवार को बड़े हर्षो उलास एवं तेला तप की आराधना द्वारा तपाचार्य जयमाला जी महाराज आदि ठाना 6 वे तेरा पन्थ से साध्वी विशद प्रज्ञा आदि ठाना 4 के शुभ सानिध्य में मनाया गयाl जिसमें सुबह महावीर ...

जब तक स्मृति के पाप खत्म नहीं होंगे तब तक धर्म का प्रारंभ होना असंभव हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣9️⃣ ⚡⚡ 291) जब तक स्मृति के पाप खत्म नहीं होंगे तब तक धर्म का प्रारंभ होना असंभव हैं.! 292) संत सज्जन की आशातना का पाप आत्मा के साथ वज्रलेप की तरह जुड़ता हैं.! 293) जिनकी सहनशक्ति कमजोर होती है उनका समय भी कमजोर.! 294) अनादि अज्ञान का अंत अनंत सुख का प्रारंभ हैं.! 295) शिव से है देह की महिमा, बाकी एक रात भी कोई घर में नही रखता.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मु...

आध्यात्मिक रत्नो को हमें बटोरना है! डॉ. राज श्री जी।

रत्नदिप जैसा शासन हमें मिला है, मानव जीवन आध्यात्मिक कमाई का केंन्द्र मिला है, आध्यात्मिक रत्नो को हमें बटोरना है! डॉ. राज श्री जी। आज आकुर्डी स्थानक भवनमें “ पुच्छिसुणं” जाप के ऑंठवी गाथा का संपुट संप्पन्न हुआ! आज अनंत चतुर्दशी का पर्व उपवास के तप आराधना से मनाया गया ! 25 बहनोने एक निरंकर उपवास कर 14 वे तिर्थंकर अनंतनाथ भगवानकी आराधना महासतीयोके सानिध्यमें की! अनंतचतुर्दशी का पर्व चौरासी नाथकी सं...

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