Author: saadhak

जिनका आत्म निश्चय कमजोर है वही पदार्थ के रंग में रंगते है

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣7️⃣ 331) जिनका आत्म निश्चय कमजोर है वही पदार्थ के रंग में रंगते है.! 332) 90 वर्ष की उम्र में हिमालय के शिखर पर चढ़ने से भी अधिक मुश्किल व्यर्थ में गंवाए हुए इस जन्म को दोबारा प्राप्त करना हैं.! 333) जो निज स्वभाव में स्थिर रहता है,वही सच्चा लोकप्रिय बन सकता हैं.. क्योंकि ऐसा व्यक्ति किसी के जीवनमें डिस्टर्ब नही करता, पीड़ा का कारण नही बनता..! 334) दृष्टिराग छोड़ो गुणानुराग...

हर एक व्यक्ति की प्रवृत्ति रुचि स्वभाव सामान नहीं होता

श्री हीराबाग जैन स्थानक में विराजित साध्वी आगम श्री जी म सा ने बताया कि परमात्मा ने जगत जिओ को आगम के माध्यम से आत्म साधना का उपदेश दियाl हर एक व्यक्ति की प्रवृत्ति रुचि स्वभाव सामान नहीं होताl तीन प्रकार के व्यक्ति होते हैं, जिसमें सातवा, गनी और रजोगुणी यह तीन प्रकार के होते हैं। शांत सुशील धर्म वान होता है रजोगुणी वाला गुस्सा आवेश वाला होता है अंदर में स्वयं की पकड़ रखने वाला होता है और प्रसंग क...

नवतत्त्वों का क्रम

क्रमांक – 8 . *तत्त्व – दर्शन* *🔹 नवतत्त्वों का क्रम* *👉 यहां प्रश्न होता है कि नवतत्त्वों में जीव ही सबसे पहले क्यों? इसके उत्तर में यह कहा जा सकता है कि सारी घटनाएं जीव के साथ ही घटती हैं। वही ज्ञाता है, शुभ और अशुभ कर्मों का कर्ता, भोक्ता एवं स्वामी है। वही पुद्गलों का उपभोक्ता है। संसार में मोक्ष के लिए भी वही प्रवृत्ति करता है। अतः नवतत्त्वों में प्रधान जीव ही है। इसलिए क्रम में स...

म्हणून सर्वांनीच जाप केला पाहिजे-साध्वी प.पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: मन हे कितीही चंचल असू द्यात त्याला काबूत आणण्याचे साधन म्हणजे जाप हे आहे. म्हणूनच जाप हा प्रत्येकानेच केला पाहिजे. त्यामुळे आपल्याला एका वेगळ्या शक्तीची अनुभूती आल्याशिवाय राहत नाही, असा हितोपदेश संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळ...

मन के बिना सिर्फ वचन काया से तीव्र कर्मबंध नही होता

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣6️⃣ 🧘🏼‍♂️ ⚡ मन के बिना सिर्फ वचन काया से तीव्र कर्मबंध नही होता.! ♦️ *वचन,* *काया के बिना,* *सिर्फ अकेला मन* *अतितीव्र कर्मबंध हेतु समर्थ हैं.!* 💥 विवेकहीन जीव के लिए तो मनोनिग्रह दुष्कर ही है लेकिन निकट भव मोक्षगामी एवं विवेक संपन्न के लिए भी मन का नियंत्रण मुश्किल हैं.! 🤔 दुर्गति एवं संसार के मूलरूप ऐसा कोई दुख नहीं है जिसका कारण मन न हो.! 🏴 मन, पव...

स्वाध्याय मन शांती एवं पुण्य की चाबी

स्वाध्याय मन शांती एवं पुण्य की चाबी ! अतित में नही वर्तमान मे जिना सिखों- साध्वी डॉ. राज श्री जी म. सा. आज आकुर्डी स्थानक भवन मे कोथरुड जैन श्रावक संघ का महिला मंडल दर्शनार्थ एवं प्रार्थना हेतु सुबह 6.45 बजे आया ! इस अवसर पर उद् भोदन में डॉ. राज श्री जी म. सा. नीयमीत रुपसे स्वाध्याय करने का एहलान करते हुये घड़ी मे लगे तीन कमेंटों का उदाहरण देते हुये सेकंद कॉंटे की गती जैसा बचपन शीघ्र गती से गुजर ...

तेरापंथ जैन विद्यालय, पट्टालम ने मनाया शिक्षक दिवस

Sagevaani.com /पट्टालम, चेन्नई: तेरापंथ जैन विद्यालय पट्टालम में मंगलवार को शिक्षक दिवस मनाया गया।  कार्यक्रम का शुभारंभ ईश- वंदना से किया गया। प्रधानाचार्या श्रीमती आशा क्रिस्टी ने विद्यालय कार्यकारिणी के सदस्यों का स्वागत किया एवं शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में अपने विचार व्यक्त किये। इसके पश्चात वरिष्ठ शिक्षकों ने अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। ट्रस्ट के चेयरमैन श्री गौतमचंद बोहरा में अपने विचार व्यक्त ...

द्रव्य के प्रकार

क्रमांक – 7 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹सत् (द्रव्य) के प्रकार* *👉 द्रव्य या तत्त्व कितने हैं? इस प्रश्न का उत्तर विभिन्न ग्रंथों में विविध रूपों में दिया गया है। जहाँ तक द्रव्य सामान्य का प्रश्न है, सब एक हैं। वहाँ किसी प्रकार की भेद-कल्पना उत्पन्न ही नहीं होती। जो सत् है, वही द्रव्य है और वही तत्त्व है।* *यदि हम द्वैत दृष्टि से देखें तो द्रव्य को दो रूपों में देख सकते हैं। ये दो रूप हैं &#...

सुर्योदयालाही अनन्य साधारण महत्व-साध्वी प.पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना : सुर्योदयाला अनन्य साधारण असे महत्व आहे. पूर्वी लोक सुर्योदयापूर्वी जेवायचे आणि सुर्यास्तानंतर जेवण सोडून देत असत, असा हितोपदेश संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा....

अनित्य का अर्थ है क्षणभंगुर या हमेशा बदलने वाला

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक में साध्वी विनित प्रज्ञा ने अनित्य भावना को समझाते हुए कहा अनित्य का अर्थ है क्षणभंगुर या हमेशा बदलने वाला। अनित्य भावना हमें यह एहसास कराती है कि इस दुनिया में हमारा भौतिक शरीर, यौवन, सौंदर्य, स्वास्थ्य, धन, कामुक सुख, प्रसिद्धि, पारिवारिक संबंध आदि सब कुछ अस्थायी है और एक दिन नष्ट हो जाएगा। इन क्षणभंगुर चीजों से लगाव इनके खोने पर दुख देता है। हम अक्सर अपन...

समकित रहित जीव भी चलता फिरता मुर्दा है

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣5️⃣ ⚡ प्राण रहित देह को मुर्दा कहते है, वैसे ही समकित रहित जीव भी चलता फिरता मुर्दा है.! ❌ मुर्दा लोक में आदरपात्र नही है, *वैसे ही* *ये चल मुर्दा भी* *आध्यात्मिक क्षेत्र में* *अनादरणीय है…* *सम्मान पात्र नहीं है..!* समकित ही जीव का वैभव हैं, सम्मान है,भूषण है.! *_📔श्री भाव प्राभृत📔_*   🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन च...

सब कुछ भूलना पर मां-बाप को कभी मत भूलना

मां बाप जिंदगी के पेड़ की जे पेड़ कितना ही बड़ा क्यों हो जाए कितना ही हरा भरा क्यों ना हो जाए जड़ काटने से हरा भरा नहीं हो सकताl जिन बच्चों की खुशियों के लिए एक बार अपनी मेहनत की पाई पाई हंसते-हंसते उन पर खर्च कर देता है वही बच्चे जब बाप की आंखें धुंधली हो जाती हैl तो उन्हें कटरा भर रोशनी देने से क्यों कतराते हैं? आज आप कोई यहां बैठे हैं जिनके साथ मां-बाप है पर कोई ऐसे हैं की जिनकी मां बाप नहीं चा...

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