Author: saadhak

श्रावक के 14 नियम जो हमें रोज़ लेने चाहिये

  *1. सचित्त :- सचित्त अर्थात जिस पदार्थ में जीव राशि है ।* इसमें सचित पदार्थो के सेवन की दैनिक मर्यादा रखी जाती है।जैसे कच्ची हरी सब्जी , कच्चे फल , नमक , कच्चा पानी, कच्चा पूरा धान आदि का सम्पूर्ण त्याग अथवा इतनी संख्या से अधिक उपयोग नही करूँगा ऐसा नियम करना । ( 3, 5 ,7 आदि )   *2 . द्रव्य :- खाने – पीने की वस्तु / द्रव्य की प्रतिदिन मर्यादा रखनी है , इसमें पदार्थो की संख्या का निश्चय ...

त्याग, तप के साथ मनाई गई मेवाड के महामंत्री श्री शोभाग्य मुनि जी महाराज की चतुर्थ पुण्य स्मृति दिवस

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे त्याग, तप के साथ मनाई गई मेवाड के महामंत्री श्री शोभाग्य मुनि जी महाराज की चतुर्थ पुण्य स्मृति दिवसl साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा सौभाग्यमुनि एक यशस्वी रत्न थे, जिन्होने मेवाड़ की धरा पर जन्म लेकर अपना वह उत्कर्ष साधा कि आज उनसे उनका जन्म स्थल, कुलवंश ही नहीं अपितु जैन व अजैन समाज गौरवान्वित अनुभव करता है। बेड़च नदी के किनारे बसे चित्तौड़ जिले के आकोला ...

धर्म को संभालने के लिए पुण्य जरूरी

भगवान का धर्म यानी शुद्ध धर्म है भगवान का धर्म है निश्चित धर्म है। धर्म को संभालने के लिए पुण्य जरूरी हैl पुण्य का प्रबल उदय हो तो हम घर से थानक जा सकते हैl पाव चल सकते हैं आंखें देख सकती है कान सुन सकते हैं अगर इसके साथ हमारे भाव जुड़े हो तो धर्म का सही मायने से पालन कर सकते हैं। धर्म को समझने के लिए पुरुषार्थ जरूरी है और धर्म को पाने के लिए देवगुरु धर्म की कृपा अवश्य चाहिए। आज हम देखते हैं धर्म ...

जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं

क्रमांक – 10 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 जीव तत्त्व* *👉 जिसमें चेतना हो, सुख-दुःख का संवेदन हो उसे जीव कहा गया है। उत्तराध्ययन सूत्र में ‘जीवो उवओग लक्खणो’ कहकर इस तथ्य को अभिव्यक्त किया गया है। चेतना जीव का स्वरूप लक्षण है, आगन्तुक लक्...

कन्या राशीचे लोक खूप हुशार असतात पण-साध्वी प.पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: काल आपण सर्वांनी मेष आणि वृश्चिक राशीबद्दल माहिती घेतली आज मिथुन आणि कन्या राशीबद्दल बघणार आहोत. कन्या राशीचे लोक खूप हुशार असतात. परंतू आपल्या हुशारीचा उपयोग कुठे आणि कसा करावा हे त्यांना कळेलच असे नाही, असा हितोपदेश संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त...

डॉ. सुमनप्रभाजी सुवर्ण श्री जी आदि ठाणा 7 का चातुर्मास आध्यात्मिक कार्यकम से जारी है

तप आराधिका साध्वी चंद्रयशाजी म. सा. मासखमण तप आराधना अनुमोदना करने बेतु पहॅंचा आकुर्डी संघ का विश्वस्त मंडल! उपप्रवर्तिनी प्रवचन प्रभाविका, खान्देश रत्ना की सुशिष्या तपआराधिका पु. चंद्रयशाजी के आज 30 उपवास के प्रत्याखान हुये ! आगे बढने की संभावना है ! इसके पुर्व महासतीजीने 81 उपवास तक की हर वर्ष अनेक तप आराधना की है ! भोसरी श्री संघ मे डॉ. सुमनप्रभाजी सुवर्ण श्री जी आदि ठाणा 7 का चातुर्मास सुचारु ...

स्वाध्याय आत्म कल्याण की कुंजी

स्वाध्याय आत्म कल्याण की कुंजी! संघ समाज के सहारे ही वर्षावास की सफलता- डॉ. राज श्री जी आज आकुर्डी स्थानक भवनमें “ पुच्छिसुणं” जाप के 18वाँ गाथा का संपुट डॉ. मेघाश्रीजी ने करवाया! इस गाथा की माला फेरने से घर-परिवार, संघ- समाज के झगड़े समाप्त हो सकते है! साध्वी समिक्षा श्री जी ने “ पानी की नदियॉं सरसर बहती जाये, जीवन का संदेश सुनाये” यह सुंदर भजन सुनाया! साध्वी जिनवाणी श्री जी ने अपने उद् भोदन मे “...

जिनका आत्म निश्चय कमजोर है वही पदार्थ के रंग में रंगते है

*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*   *🪷प्रवचन प्रवाहक:🪷* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣8️⃣ 336) जिनका आत्म निश्चय कमजोर है वही पदार्थ के रंग में रंगते है.! 337) आत्मबोध से बलवान कुछ नही.! 338) जो उचित व्यवहार का पालन करता है वह कभी मार्ग से भ्रमित नही होता.! 339) मानव भव प्राप्त करके भी विभाव त्याग का पुरुषार्थ नही किया तो भविष्य में ये अवतार मिलन...

एकाग्रता से जिनवाणी सुनो वह स्वाध्याय है

आत्म कल्याण के लिए आगम के माध्यम से मोक्ष मार्ग की प्ररूप की उसके दो मार्ग बताएं, एक संसार का मार्ग दूसरा मुक्ति का मार्ग दोनों की दिशाएं अलग-अलग हैl संसार में राग है मुख्य मार्ग में विराग है संसार में भोग है मोक्ष मार्ग में त्याग हैl संसार में खाना पीना है मौज मजा आदि सब कुछ है पर मोक्ष मार्ग में तप त्याग व्रत नियम है दोनों का रास्ता अलग-अलग हैl संसार मार्ग से मुक्ति की राह पर आना तीन रात को छोड़...

जीव-अजीव की दृष्टि से नवतत्त्व

क्रमांक – 9 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 जीव-अजीव की दृष्टि से नवतत्त्व* *👉 जैसा कि पूर्व में ही यह स्पष्ट किया जा चुका है कि मूलतत्त्व दो ही हैं – जीव और अजीव। इन्हीं के संयोग एवं वियोग से अन्य तत्त्वों को समझा जाता है। अतः अन्य सात तत्त्व इन्ही दो में ही समाहित हैं। बन्ध पुद्गल की अवस्था विशेष है, अतः बन्ध अजीव में समाहित होता है। इसी तरह पुण्य, पाप, बंध भी अजीव के पर्याय हैं अतः अजी...

संयमी किसी को भी पीड़ा पहुंचे ऐसा व्यवहार नही करते

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣7️⃣ ⚪ 🌻 संयमी किसी को भी पीड़ा पहुंचे ऐसा व्यवहार नही करते… 🤍 संयमी किसी के भी जीवन में अंतराय हो ऐसी प्रवृत्ति नही करते… 😊 जो संयमी के सत्संग में रहते है उनको सुकुन मिलता है.! 🌧️ संयमी को सभी जीवों की दुआ मिलती है क्योंकि उनके कारण जीवसृष्टि को अभय की प्राप्ति होती है.! 🪷 संयम में रहते है उनसे किसी को कोई भय नहीं लगता..! अतः षट्काय अर्था...

साध्वीजी भगवंत के मंगल पदार्पण से आज श्री ऋषभ कला मंदिर का आंगन पावन पवित्र बना

*🙏🏻श्री ऋषभदेवाय नमः🙏🏻* *☺️🪷आज आनंद अंग अंग जागियों जागियों🪷☺️* 🪷🌹☺️🪷🌹☺️🪷 *🙏🏻तार्किक शिरोमणि श्रमणी गणनायक गीतार्थ गुरुदेव प.पू. आचार्य श्री अभयशेखर सूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा* एवम् अनेक *साध्वीजी भगवंत के मंगल पदार्पण से आज श्री ऋषभ कला मंदिर का आंगन पावन पवित्र बना ।* *🌈शासन समर्पिता कला शिरोमणि श्री ऋषभ बालिका मंडल द्वारा आराधना भवन से श्री ऋषभ कला मंदिर तक शासन ध्वज लहराकर आचार्य भगवंत का सामैय...

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