Author: saadhak

जीवनात आल्यानंतर तप हे केलेच पाहिजे-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: जीवनात आल्यानंतर तप हे केलेच पाहिजे. तप करणार्‍यांची अनुमोदना केली पाहिजे, त्यांना प्रोहत्सान दिले पाहिजे, त्याचे पुण्यकर्म हे आपल्यालाच लाभते, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. स...

मन्त्र साधना से मिलती आत्मिक प्रसन्नता – साध्वी डॉ॰ गवेषणाश्री

 लोगस्स कल्प अनुष्ठान का हुआ आयोजन   Sagevaani.com /माधावरम, चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी ने शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर जैन तेरापंथ नगर, माधावरम्, चेन्नई में लोगस्स कल्प का अनुष्ठान कराते हुए कहा कि लोगस्स शक्ति जागरण का एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली प्रयोग है। यह अत्यधिक गंभीर और अनेक उत्तम गुणों से युक्त स्तोत्र है। इस पाठ में चौबीस तीर्थकरों की...

पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है

क्रमांक – 25 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *✨अजीव के प्रकार* *♦️पुद्गलास्तिकाय* *⚡पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है -1. स्कन्ध, 2. देश, 3. प्रदेश, 4. परमाणु।* *〽️1. स्कन्ध –* *👉 स्कन्ध एक इकाई है। दो से लेकर अनन्त परमाणुओं के...

संयम हा प्रत्येकाने घेतलाच पाहिजे-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

sagevaani.con /जालना: बारा वृत्तांपैकी एक संयम आहे. सामायिक वृत्त प्रत्येकाने घेतलेच पाहिजे, असा काही नेम नेसला तरी आणि पचखान घेतले नसले तरी संयम हा प्रत्येकाने नियमाप्रमाणे घेतला पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी  विचारपीठावर  संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी...

तत्त्व स्वरूप के प्रति श्रद्धा को समकित कहते हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 8️⃣7️⃣ 🤍 *_431)_* तत्त्व स्वरूप के प्रति श्रद्धा को समकित कहते हैं..! *_432)_* समकित के बिना चारित्र नही हो सकता.! *_433)_* तात्त्विक धर्ममार्ग समकित से शुरू होता है.! *_434)_* स्वयं की स्वयं के आत्म स्वरूप के प्रति श्रद्धा को समकित कहते हैं.! *_435)_* किसी कारणवश आचरण में आई कमी क्षम्य हो सकती हैं...

विज्ञान में जिसे मैटर (matter) कहा गया है, जैन दर्शन में उसे पुद्गल की संज्ञा दी गई है

क्रमांक – 24 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *✨अजीव के प्रकार* *♦️पुद्गलास्तिकाय* *👉 विज्ञान में जिसे मैटर (matter) कहा गया है, जैन दर्शन में उसे पुद्गल की संज्ञा दी गई है। पुद्गल को परिभाषित करते हुए लिखा गया है- ‘पूरणगलनधर्मत्वात् ...

तरच आत्मा मोक्षाला जाईल-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना : चिंतन करा परंतू ते प्रभूंचे हवे! प्रभूंचे चिंतन कधीही व्यर्थ जात नाही. म्हणूनच आगमची वाणी ऐकली पाहिजे, या वाणित खूप ताकद आहे, त्याशिवाय आपली आत्मा मोक्षाला कशी जाईल,असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प...

आत्म समीपता के चाहक साधकों के लिए त्रिदिवसीय आत्मस्पर्श शिबिर

*🧘‍♂️आत्मस्पर्श🧘‍♂️* *_त्रि दिवसीय शिबिर_* 🛕 सनातन🌷 जैन महातीर्थ के🌷 तन्मयता प्रेरक सान्निध्य में🌷 💛 आत्म समीपता के 🪔 चाहक साधकों के लिए🪔 त्रिदिवसीय आत्मस्पर्श शिबिर 🪔 ☀️ परम तारक क्रियोद्धारक सूरीश्वर राजेन्द्र साम्राज्यवर्ती युग प्रभावक पुण्य सम्राट सूरि जयन्तसेन समुदायवर्ती सूरि नित्यसेन सूरि जयरत्न आज्ञानुवर्ती ☘️ क्षमाश्रमण श्रीअपूर्वरत्नविजयजी म.सा. श्री वैभवरत्नविजयजी म.सा. की मंगलकारी शुभक...

सर्व संग त्यागी तत्त्व के अनुरागी होते है क्षमाश्रमण

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 8️⃣6️⃣ 🖤 *_426)_* सर्व संग त्यागी तत्त्व के अनुरागी होते है क्षमाश्रमण.! *_427)_* जगत में प्राप्त समस्त पदार्थो का भक्षण कर लें तो भी रसनेंद्रिय तृप्ति असंभव हैं.! *_428)_* किसी को मेरे कारण कोई दुख पीड़ा न पहुंचे ये प्राथमिक गुण है साधु का.! *_429)_* साधु के शत्रु बहोत हो सकते है लेकिन साधु किसी क...

ज्ञान हे कधीच वाया जाणारे नसते-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: ज्ञान हे कधीच वाया जात नाही. आपली आत्मा ही प्रबळ असली की सर्व प्रश्न आपोआप सुटतात. म्हणून मनुष्याला ज्ञान हे पाहिजेच, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला.               तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा व अन्य काह...

काल के दो प्रकार माने गए हैं

क्रमांक – 22 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *✨अजीव के प्रकार* *♦️काल* *👉 काल के दो प्रकार माने गए हैं – व्यावहारिक काल और नैश्चयिक काल। समय, मुहूर्त, दिन, रात, पक्ष, मास, वर्ष, युग…. आदि व्यावहारिक काल हैं। यह काल केवल मनुष्य ...

इच्छाओं को काबु मे लाने का नाम है तप- डॉ. राज श्री जी म.सा.

आत्मा के अंदर होने वाले दर्द को तप आराधना के माध्यम से मिटा सकते हो! इच्छाएँ अनंत है, इच्छाओं को काबु मे लाने का नाम है तप – डॉ. राज श्री जी म.सा.l आज आकुर्डी स्थानक भवन में ललवाणी परिवार द्वारा सामुहिक सजोड प्रार्थना का आयोजन किया गया था! नवपद आयंबील ओली तप आराधना जारी है! “ श्रीपाद चरित्र “ वाचन डॉ. मेघाश्री जी करते है! आज स्थानक भवनमे 3 महापुरुषो के जन्मोत्सव एवं दिक्षा दिवस आध्यात्मिक रु...

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