चेन्नई. एमकेबी नगर जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मप्रभा ने कहा जीव की अकेले की ही गति और आगति होती है। यह विशाल पृथ्वी व विशाल संपत्ति के मालिक चक्रवर्ती राजा भी कुछ भी साथ लेकर नहीं जाने वाले हैं। इस सत्य को समझकर भावी प्राणियों को लोभ व तृष्णा को त्यागकर संतोष रूपी धन कमाना चाहिए। संसार में संतोष से बढक़र कोई भी धन होने वाला नहीं है। इन्सान सबसे बड़ी मूर्खता व अज्ञानता तब करता है जब वह धन को ह...
चैन्नई के साहुकार पेठ स्थित श्री राजेन्द्र भवन में आचार्य श्री जयन्तसेनसूरिजी के सुशिष्य मुनि संयमरत्न विजयजी,श्री भुवनरत्न विजयजी ने कहा कि जिस प्रकार कमल की सुगंध को फैलाने का कार्य हवा करती है, उसी तरह आनंदित संत पुरुषों की संगत से मूर्ख भी गुणवान हो जाता है और उसके गुण भी चारों दिशाओं में फैलने लगते हैं। जब भी किसी मंगल कार्य को प्रारंभ करना हो तो ‘सद्गुरु शरणं मम’ कहे और कार्य की ...
चैन्नई के साहुकार पेठ स्थित श्री राजेन्द्र भवन में आचार्य श्री जयन्तसेनसूरिजी के सुशिष्य मुनि संयमरत्न विजयजी,श्री भुवनरत्न विजयजी ने कहा कि जिस प्रकार कमल की सुगंध को फैलाने का कार्य हवा करती है, उसी तरह आनंदित संत पुरुषों की संगत से मूर्ख भी गुणवान हो जाता है और उसके गुण भी चारों दिशाओं में फैलने लगते हैं। जब भी किसी मंगल कार्य को प्रारंभ करना हो तो ‘सद्गुरु शरणं मम’ कहे और कार्य की ...
चेन्नई. साहुकारपेट स्थित राजेन्द्र भवन में विराजित संयमरत्न विजय ने कहा कि व्यक्ति स्वयं ही अपना मित्र होता है, अन्य बाहर के मित्रों की चाह रखनी चाहिए। ईश्वर भी उसी की सहायता करता है जो अपनी सहायता खुद करता है। जो साधक अपने कर्तव्य मार्ग पर अटल व अडिग है, उसे दूसरों की सहायता मिले या नहीं, इसकी कोई चिंता नहीं रहती। वह सबसे मित्रता रखता है, परन्तु उससे कौन-कौन मित्रता रखता है, उस ओर उसका ध्यान नहीं...
चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी को जीवन में लक्ष्य बना कर चलने को कहा। उन्होंने कहा जीवन को अच्छे मार्ग पर पहुंचाने के लिए रोज प्रवचन सुनने का लक्ष्य बनाना चाहिए। ऐसा करने पर मिला हुआ मानव जीवन सफल और सार्थक हो जाएगा। आगे बढऩे के लिए नियम बनाना बहुत ही जरूरी होता है। संतों का समागम हमें जीवन में बदलाव लाने का अवसर प्रदान करता है। इस लिए जी...
एएमकेएम में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन श्रवण करने के लिए उपस्थित श्रद्धालु चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने चातुर्मास के अवसर पर 14 प्रकार के नियम ग्रहण कर उनका संयमपूर्वक पालन करने के बारे में बताया। हम छोटी-छोटी बातों का संयम रखेंगे तो हमारा शरीर अन्तर से सशक्त बनता है और १४ नियमों को ग्रहण करने से हमारी सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। यदि आपसे नियम टूटे तो उसका...
कपिलमुनि के सान्निध्य में मनाई गुरु पूर्णिमा चेन्नई. गोपालपुरम स्थित छाजेड़ भवन में चातुर्मासार्थ विराजित कपिल मुनि ने शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शुरु किए गए चातुर्मासिक प्रवचन में कहा चातुर्मास आत्माराधना का सन्देश लेकर आया है, आराधना वही है जो सिद्धि प्राप्त कराए। आराधना करने वाला एक दिन आराध्य बन जाता है । साधना की सिद्धि के लिए द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव इन चार बातों की शुद्धि जरूर...
आत्मबली और मनोबली थे आचार्य भिक्षु चेन्नई. माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में विराजित आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में शुक्रवार को उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ ने तेरापंथ धर्मसंघ के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर आचार्य के साथ उनके एक ओर पूरा साधु समुदाय तो दूसरी ओर साध्वी व समणी समुदाय विराजित था तथा सामने मुमुक्षुओं सहित श्रावक-श्राव...
कोलकाता. पशु क्रूरता एक्ट नाम की कोई चीज नहीं है। गोरक्षा को लेकर उन्माद में आते हुए किसी भी व्यक्ति की हत्या अक्षम्य अपराध है, जिसे किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता। राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने महावीर सदन (भवानीपुर) में गुरुवार को चातुर्मासिक धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुनि ने कहा कि प्रशासन की नाक के नीचे भ्रष्टाचार के चलते हुए कानून को तार-तार कर सरेआम अवैध रूप से गाय आद...
साधु एवं श्रावक समाज को चातुर्मास काल में विशेष साधना करने की दी पावन प्रेरणा चातुर्मास एक ऐसा समय होता है जो एक प्रकार से बंधन है| साधुओं के लिए चातुर्मास बंधन होता है, क्योंकि उस समय संभवत: विहार नहीं होता| पर यह बंधन भी अच्छे के लिए होता है| बंधन सुरक्षा के लिए होता है| पछेवड़ी (कपड़े) की गांठ भी बंधन है, लेकिन शरीर को आवृत रखने में गांठ सहायक बनती है| इसलिए यह बंधन काम के लिए भी होता है| साधना...
पूर्वजन्म का सिद्धांत बड़ा महत्वपूर्ण है, ऐसा लगता है हमारे जीवन पर पूर्व जन्म की छाया रहती हैं| पूर्वजन्म का प्रभाव वर्तमान जीवन पर रहता है| कोई व्यक्ति ऋद्धिवान होता है, बुद्धिमान होता है, शांत होता है, भौतिक सुखों से विरागी-संयम प्रिय होता है, तो कोई व्यक्ति इससे उलट मूर्ख होता है, दरिद्री होता है, क्रोधी होता है और भौतिक सुखों में आसक्त होता है| इन स्थितियों के संदर्भ में वर्तमान जीवन की घटना...
चेन्नई. पुरुषवाकम स्थित एएमकेएम में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने आचारांग सूत्र और राजा श्रेणिक का चारित्र श्रवण कराते हुए कहा जिस प्रकार ऑडिट के बिना कोई प्रतिष्ठान चल नहीं सकता उसी प्रकार हमें भी स्वयं का ऑडिट या आत्मनिरीक्षण करते रहना चाहिए और जो कमियां स्वयं में मिले उनमें सुधार करना चाहिए। परिस्थितियों या अन्य कारणों का बहाना न बनाएं, गलतियां को स्वीकार करें। आज का मंत्र ...