Author: saadhak

मुनि वही जिसके पास विवेक है : प्रवीणऋषि

चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने कहा तैयारी के साथ किया जाने वाला कार्य निसंदेह पूर्ण होता है इसलिए मरने से पहले उसकी तैयारी करें। जो मृत्यु को जीता है उसे मृत्यु का भी कष्ट नहीं होता। जिसने मरने से पहले मृत्यु का आभास नहीं किया वे अपने अंत समय में भी संथारे की साधना नहीं कर पाते। आचारांग सूत्र में बताया कि जीव जिस योनि में जाता है, उसी के शरीर से प्रेम करत...

प्रेम सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ तत्व: आचार्य पुष्पदंतसागर

चेन्नई. सुंदेशा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंतसागर ने कहा प्रेम सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ तत्व है। हालांकि प्रेम के नाम पर ही सबसे अधिक दुव्र्यवहार हो रहा है। धोखा दिया जा रहा है और लोग वासना की तड़प बुझाने को ही प्रेम समझ रहे हैं। आदमी प्रेम के नाम पर ही धोखा खा रहा है। प्रेम की ताकत के सामने संसार झुकता है। रावण ने वासना के चलते ही सीता का अपहरण किया था। उसे राम ने नहीं उसके काम ने मारा था। हिरणी प...

निर्जरा के साथ स्वत: अर्जित हो जाता है पुण्य: आचार्य महाश्रमण

चेन्नई. माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में विराजित आचार्य महाश्रमण ने ‘ठाणं’ आगम के प्रथम स्थान में बताया गया है कि पुण्य एक है। जब कोई आदमी शुभ कर्म करता है तो उससे निर्जरा तो होती ही है, उसके साथ पुण्य का बंध भी होता है। शुभ कर्म और योग की प्रवृत्ति से दो कार्य होते हैं- पहला कार्य होता है कर्म निर्जरा और आत्मा निर्मल बनती है। आत्मा के साथ पुण्य का बंध भी हो जाता है। पुण्य का ब...

अज्ञान हमारे जीवन का सबसे कट्टर शत्रु : कमल मुनि कमलेश

राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश के प्रवचन     कोलकाता. अज्ञान हमारे जीवन का सबसे कट्टर शत्रु है। अनर्थ की खान और पापों की जननी है। अज्ञान से बढक़र और कोई जहर नहीं। एक शब्द का ज्ञान दान विश्व की संपूर्ण संपत्ति के दान से बढक़र है। अज्ञान दशा में की गई कठोर से कठोर साधना सफलता के बजाय संघर्ष में परिवर्तित हो जाती है। राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने महावीर सदन में जनसभा को संबोधित करते हुए सोमवार को कहा कि अज्ञ...

भोग में जीना है केवली उम्र ढोना

चेन्नई. एमकेबी नगर जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मप्रभा ने कहा महापुरुष एवं संत सदैव हितकारी और सभी को प्रिय लगने वाली वाणी बोलते हैं। उनके हर शब्द में गहरा ज्ञान व प्रत्येक प्राणी के लिए सुख-शांति देने वाला अमृत छिपा रहता है। वे नपे-तुले शब्दों में अपनी बात कहते हैं उनकी वाणी अत्यंत प्रभावशाली एवं हृदयस्पर्शी होती है। जैन संत कभी भी सावद्य भाषा का प्रयोग नहीं करते। वे सदैव निर्वेद्य व मृदु भाष...

क्रोध करना दुर्भाग्य है प्रेम करना सौभाग्य

चेन्नई. ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा जिस प्रकार बांस से आकाश को नापना और छिद्र वाली नाव से समुद्र पार करना कठिन है, उसी प्रकार परिमित काल में प्रभु के अपरिमित गुणों का गुणगान करना संभव नहीं है। पलभर का क्रोध भविष्य बिगाड़ सकता है इसलिए इसे जीवन का हिस्सा न बनाएं। क्रोध एक ऐसी आग है जो जलती तो है दूसरों को जलाने के लिए लेकिन वास्तव में सबसे पहले हमें ही जलाती है। यह चिंगारी ...

रुद्र महायज्ञ में 11 शिवलिंगों का सामूहिक अभिषेक

चेन्नई. श्रावण मास के उपलक्ष्य में श्री शिव संकल्प अनुष्ठान केन्द्रम काशी वाराणसी के संयोजन में जारी श्री रुद्र महायज्ञ के चौथे दिन शिवलिंगों का सामूहिक अभिषेक हुआ। इस मौके पर सवेरे काशी के ही आचार्य विनोद झा ने वैदिक मंगलाचार से यज्ञ प्रारम्भ करवाया। महायज्ञ में बड़ी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर 11 शिवलिंगों का सामूहिक अभिषेक किया गया। स्वामी पद्मनाभम ने बताया कि श्रावण भगवान शिव ...

एकान्त सुख का स्थान है मोक्ष : आचार्य महाश्रमण

उपरला बखान के माध्यम से दी प्रेरणा चेन्नई. माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में विराजित आचार्य महाश्रमण ने मंगलवार को ‘ठाणं’ आगमाधारित उद्बोधन में मोक्ष की व्याख्या करते हुए कहा कि मोक्ष एक होता है। मोक्ष की प्राप्ति तब होती है जब आत्मा पूर्णतया कर्मों से मुक्त हो जाती है। समस्त कर्मों का क्षय जब आत्मा कर लेती है तो मोक्ष प्राप्त कर लेती है। मोक्ष प्राप्त आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र ...

पाप-पुण्य के बंध से अनादिकाल से जकड़ी हुई है आत्मा

‘मेधावी छात्र सम्मान समारोह’ भी हुआ चेन्नई. माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में विराजित आचार्य महाश्रमण ने कहा नौ तत्वों में आठवां तत्व बंध होता है। बंध पुण्यात्मक और पापात्मक दोनों होता है। आत्मा अनादिकाल से इन बंधों से जकड़ी हुई है जो आत्मा के बार-बार जन्म-मृत्यु का भी कारण बनती है। जीव की किसी भी प्रवृत्ति से कुछ सूक्ष्म कण आत्मा से चिपकते हैं और आत्मा से इनसे बंधती चली जाती है...

बिना सोचे-विचारे और वासना के वश में वचन न दें

ज्ञान के साथ श्रद्धा का स्पर्श परमावश्यक चेन्नई. पुरुषावाक्कम स्थित एमकेएम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि ने कहा परमात्मा ने तीन मनोरथ बताए, पहला, मेरा किसी पर कोई अधिकार नहीं होगा। किसी पर भी किसी का अधिकार नहीं होता। राजा दशरथ अपने राज्य पर अपना अधिकार समझते थे फिर भी जिसका अधिकार नहीं था उस मंथरा दासी चाल उस राज्य पर चल गई और राजा दशरथ देखते ही रह गए। कभी भी आदेश की भाषा में न बोलें। अपनी...

अंधकार में रहकर व्यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता

चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने सोमवार को कहा परमात्मा की भक्ति के समय लोगों को मन में उल्लास रखना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में अनेक प्रकार की अनुभूति होती है। परमात्मा का प्रार्थना, स्तुति करते-करते लोगों को बहुत लाभ होता है इसलिए व्यक्ति को अपने अंतरात्मा की भावनाओं को परमात्मा के चरणों में लगाना चाहिए। भगवान की भक्ति करते समय जो अनुभूति होता है वह संसार के अन्य किसी...

केवलज्ञान रूपी पूंजी पाने के बाद कभी नहीं जाती

चेन्नई. ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा परमात्मा से संबंध जोडऩा है तो पूंजी ऐसी प्राप्त करो जो पाने के बाद खोनी नहीं पड़े। दुनिया की हर वस्तु प्राप्ति के बाद नष्ट हो जाती है लेकिन केवलज्ञान रूपी पूंजी ऐसी है जो कभी नहीं खोती। पद ऐसा प्राप्त करो जहां से कभी हटना नहीं पड़े। दुनिया के तमाम पदों का कार्यकाल खत्म होने पर छोडऩा पड़ता है और भूतपूर्व शब्द जुड़ जाता है सिद्धों का एक पद...

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