कषाय स्वयं ऐसी भयंकर आग है जोआत्मा के सद्गुणों का विनाश कर देती है।कषाय साधक के तन-मन और वचन को संतप्त, व्याकुल एवं अशान्त कर देती हैं। जब तक कषाय जीव के साथ संलग्न है तब तक संसार में गमनागमन जारी रहता है। क्रोध-मान-माया और लोभ ये चार कषाय हैं जो मन-वचन-काया की चंचलता को बढ़ाने वाले एवं कर्मों को आकर्षित करने वाले ‘आश्रव’ भी हैं तथा कर्मों को टिकाकर रखने वाले ‘बन्ध’ का कारण...
प्रवचन – 19.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) “संसार भावना – वैभवातून वैराग्याकडे” जैन धर्मातील 12 भावना हे आत्मशुद्धीचे महत्त्वाचे साधन आहे. त्यातील संसार भावना आपल्याला शिकवते की – हा संसार अखंड दुःखाचा प्रवाह आहे. जन्म, मरण, लाभ, हानी, ऐश्वर्य, मानमरातब – हे सर्व क्षणिक आहे. या भावनेतून वैराग्य निर्माण होते व आपले पाऊल मोक्षमार्गाकडे वळते. ऐश...
तपस्विनी दिव्या भटेरा व प्रज्ञा सेठिया का तपोभिनंदन कल से पर्युषण पर्व का शुभारंभ आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में मंगलवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में श्रीमती दिव्या भटेरा (धर्मपत्नी : श्री सिद्धार्थ भटेरा) तथा सुश्री प्रज्ञा सेठिया (सुपुत्र...
श्री जैन रत्न श्राविका मण्डल, तमिलनाडु के संचालन में आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा भावी आचार्यश्री महेन्द्रमुनिजी म्.सा की आज्ञानुवर्तिनी महासतीजी श्री सुमतिप्रभाजी म.सा ठाणा 7 के सानिध्य में बालिकाओं के संस्कार रोपण हेतु त्रिदिवसीय आवासीय शिविर डिवाइन टच का आयोजन किलपाक में स्थित चातुर्मास स्थल सामायिक स्वाध्याय भवन में रखा गया,जिसमें 110 बालिकाओं ने भाग लिया | संस्कारीय शिविर में महा...
हितकारी शुभ कार्यों में अरुचि रखना तथा धर्मक्रियाओं में अनुत्साह दिखाना प्रमाद है। प्रमादी मनुष्य का करणीय-अकरणीय का बोध धुंधला हो जाने से उसकी जागृति खो जाती है। प्रमाद का अर्थ मात्र आलस्य या नींद लेना ही नहीं है अपितु आत्मविस्मृति का नाम प्रमाद है। इसी कारण प्रमादी मनुष्य करने योग्य कार्य नहीं करता और नहीं करने योग्य कार्य में रुचि दिखाता है। प्रभु महावीर ने समस्त दुःखों का मूल कारण प्रमाद को बत...
जालना : प्रभू महावीर आज प्रत्येकाच्या जीभेवर आहेत. परंतू ते आमच्या जीवनात आहेतच, असे नाही म्हणूनच म्हटले आहे की, भगवान महावीर हे आमच्या जीवनात सुध्दा असायला हवेत, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य ...
प्रवचन – 18.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) जैन धर्मात कर्म, आत्मा आणि मोक्ष यांचा अभ्यास करताना एक अत्यंत महत्त्वाचा शब्द वारंवार येतो – तो म्हणजे भाव. ‘भाव’ म्हणजे केवळ भावना किंवा मन:स्थिती नव्हे, तर आपल्या अंतर्मनाचा प्रवाह, आपली अंतःप्रवृत्ती आणि आपल्या आत्म्याची दिशा. जैन धर्म सांगतो की, कर्मबंधनाची निर्मिती केवळ आपल्या कृतींनी होत नाही, तर आपल्या क...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने दक्षिण सिंहनी शासन प्रभाविका श्रमण संघीय उप प्रवर्तिनी परम विदुषी महासतीजी डॉ. श्री दर्शन प्रभा जी म सा के सोमवार को बैंगलोर में संथारे सहित देवलोक गमन हो जाने पर अपने भाव पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि आप संयम प्रिया, स्पष्ट वक्ता, सरलमना और बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी महाश्रमणी साध्वी रत...
आत्मा में अनन्त शक्ति है। इस अनन्तशक्ति को प्रकट करने के लिए जो शक्ति चाहिए उसमें बाधा डालने वाला अन्तराय कर्म है। बहुत मेहनत के बावजूद भी अभीष्ट वस्तु का लाभ या अनुकूलता न मिल पाना, सम्पत्ति या सामग्री की प्रचुरता होने पर भी उपलब्ध सामग्री का उपयोग न कर पाना, दान देने का उत्साह जागृत न हो पाना और स्वयं को उत्साह हीन या असमर्थ महसूस करना इसी कर्म का प्रभाव है। जैसे राजा के आदेश देने पर भी भण्डारी ...
जालना : जीवनात ह्या काही करायचे म्हटले तर मनाला मारुन कसे जमेल, त्यासाठी ह्या काहीही करा परंतू ह्या मनाला कधीही मारण्याचा प्रयत्न करु नका, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती....
साधक साधना शिविर का हुआ आयोजन किलपॉक, चेन्नई : भारतीय संस्कृति के उत्थान में सन्त महात्माओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान युग में इस संत संस्कृति संवर्धन के सोद्देश्य भिक्षु निलयम,किलपाॅक में मुनि मोहजीतकुमार ठाणा 3 के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में किशोर मंडल, किलपॉक के द्वारा एकदिवसीय साधक साधना का विशिष्ट उपक्रम चला। जिसमें 51 सदस्यों ने भाग लेकर अपने आप को साधुचर्या स...
श्री गुजराती जैन संघ गांधी नगर बंगलौर में चातुर्मास हेतु विराजमान दक्षिण सूरज ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि दीन, दुखी और पीड़ित प्राणियों की अनदेखी करना साक्षात धर्म और परमात्मा का अपमान करने के समान है। हर एक आत्मा में परमात्मा का निवास माना गया है। उसकी सेवा में समर्पित होना चार धामों की यात्रा करने के बराबर है। हर एक धार्मिक स्थान सेवा का केंद्र बने। उन...