स्वाध्याय भवन में भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा के प्रवचन ‘चतुर्विध शुद्धि के साथ करें सामायिक’ पर स्वाध्याय-अनुप्रेक्षा कार्यक्रम
रविवार 15 मार्च 2026 को चेन्नई के साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में माला स्वाध्याय-अनुप्रेक्षा के अंतर्गत संघ की मुख्य पत्रिका जिनवाणी फरवरी 2026 में प्रकाशित भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा के प्रवचन”चतुर्विध शुद्धि के साथ करें सामायिक” पर वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया द्वारा स्वाध्याय अनुप्रेक्षा की गयी | स्वाध्यायी बन्धुवर ने अनुप्रेक्षा करते हुए कहा कि भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा ने फरमाया हैं कि सामायिक के लिए भूमिका स्वरुप चार प्रकार की शुद्धि आवश्यक हैं | द्रव्य शुद्धि,क्षेत्र शुद्धि,काल शुद्धि और भाव शुद्धि के साथ की हुई सामायिक पूर्ण फलदायिनी होती हैं | शुद्धियों के विवेकपूर्ण आचरण श्रावक की सामायिक को श्रेष्ठ बनाता हैं | अतः शुद्ध सामायिक की ओर हमारे कदम गतिमान होने चाहिए | सामायिक की पूर्णता के लिए प्रतिदिन का अभ्यास आवश्यक है | अभ्यास से सामायिक साधना पूर्णता को प्राप्त होती है |उन्होंने कहा कि सामायिक के पाठ के अर्थों को समझ कर पूर्ण विधि उच्चारण के साथ सामायिक साधना करनी चाहिए,जिससे आनन्द की अनुभूति हो |
स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में वरिष्ठ स्वाध्यायी श्री नवरतनमलजी चोरडिया, गौतमचन्दजी मुणोत, रुपराजजी सेठिया, लीलमचन्दजी बागमार, उच्छबराजजी गांग,वीरपिता – वीरपति बाबू धनपतराजजी सुराणा,दीपकजी व योगेशजी श्रीश्रीमाल,जे कमलजी चोरडिया,महावीरचन्दजी बागमार,जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के पूर्व कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया,आदि स्वाध्यायी गण की सामायिक परिवेश में उपस्थिति रही | जैन संकल्प, तीन मनोरथ चिन्तन,गुरु सुखसाता पृच्छा,सामूहिक प्रत्याख्यान,वन्दन,मंगल पाठ के साथ स्वाध्याय-अनुप्रेक्षा कार्यक्रम पूर्ण हुआ|
प्रेषक : स्वाध्याय भवन – 24/25-बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट साहूकारपेट चेन्नई तमिलनाडु