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सिद्धांतों की मौलिकता का प्रतिबिम्ब – तेरापंथ : साध्वीश्री उज्जवलप्रभा

सिद्धांतों की मौलिकता का प्रतिबिम्ब – तेरापंथ : साध्वीश्री उज्जवलप्रभा

आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री उज्जवलप्रभाजी ठाणा 4 के सान्निध्य में 262वां स्थापना दिवस विल्लुपूरम में मनाया हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती अंजली सुराणा के मंगलाचरण गीत से हुई। 

साध्वीश्री उज्जवलप्रभाजी ने अपने मंगल उदबोधन में फरमाया कि तेरापंथ स्थापना दिवस एवं गुरु पूर्णिमा का यह दिन बहुत ही शुभ दिन है। तेरापंथ का उद्भव एवं नामकरण का कुछ विलक्षण संयोग बना, जो किया नहीं पर अपने आप हो गया। स्वामीजी ने आगमिक चर्या तथा सिद्धांतों को अपनाया और उसी की प्रेरणा जन-जन को दी।

लौकिक एवं लोकोत्तर धर्म के भेद पर प्रकाश डालते हुए शरीर एवं आत्मा के पोषण में भिन्नता का तथ्य सबको समझाया

साध्वीश्री अनुप्रेक्षाश्रीजी ने आराध्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देते हुए फरमाया कि हम सब तेरापंथ धर्मसंघ के अभिन्न अंग है और इस धर्मसंघ की संवर्धना के लिए सतत् जागरूक रहे एवं गुरु इंगित के प्रति सदैव समर्पित रहें। स्थानीय कन्या मंडल, महिला मंडल एवं महिला मंडल अध्यक्षा राखी सुराणा द्वारा सुंदर गीतों की प्रस्तुति दी गई।

महिला मंडल एवं कन्या मंडल ने मिलकर पूरी सभा को एक रोचक प्रस्तुति द्वारा “तेरापंथ एक्सप्रेस ट्रेन” से आध्यात्मिक सफर करवाया
   

तप की बह रही बहार 

विलुप्पुरम में चातुर्मास से पूर्व ही मानो सावन की झड़ी लग गई। श्रीमती अ संगीता बाफणा ने आज 18 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। साध्वीवृंद की प्रेरणा से एकासन, उपवास, बेला, तेला आदि की तपस्या भी गतिमान है। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वीश्री प्रबोधयशाजी ने किया।
           

स्वरुप चन्द दाँती
 प्रचार प्रसार प्रभारी
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई

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