राष्ट्रसंत, श्रमण संघीय उप प्रवर्तक, सेवा सुमेरू, प.पू.गुरुदेव श्री पंकज मुनि जी म.सा., भारत गौरव, दक्षिण सूर्य, ओजस्वी प्रवचनकार प.पू.गुरुदेव डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा. ‘अमर शिष्य’ एवं कर्मयोगी मुनिरत्न, मधुर वक्ता प.पू. श्री रुपेश मुनि जी म.सा. ‘रजत’ होली चतुर्मास के उपरांत चार मार्च को संत ज्ञानेश्वर की पुण्यभूमि आलंदी में पाँच महामंगल पाठ प्रदान करेंगे। तत्पश्चात पूज्य गुरुभगवंत कीर्तनकार बहन श्वेता-निलेश जी राठौर के निवास स्थान पर पधारेंगे और वहाँ से सुप्रसिद्ध समाजसेवी श्री प्रकाशजी-सुरेखाजी कटारिया के निवास स्थान, चिंचवड़ स्टेशन, पुणे पधारेंगे।
पाँच मार्च को प्रातः 7:15 बजे पूज्य गुरुभगवंत वहाँ से प्रस्थान कर तपसूर्या मीराबाई जी लूनिया के निवास स्थान पर पधारेंगे। यहाँ प्रातः 7:25 से 9:25 बजे तक विशेष धर्मसभा का आयोजन किया गया है।
तपसूर्या मीराबाई जी लूनिया ने बताया कि हमारे संघ का परम सौभाग्य है कि दस वर्षों के पश्चात पूज्य गुरुभगवंत पुनः पुण्यनगरी पुणे में पधार रहे हैं। विशेष उल्लेखनीय है कि उप प्रवर्तक पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज, राष्ट्रसंत पद से विभूषित होने के पश्चात एवं पूज्य गुरुदेव डॉक्टर श्री वरुण मुनि जी महाराज, भारत गौरव पद से अलंकृत होने के पश्चात प्रथम बार पुण्यनगरी पूना में पधार रहे हैं।
पूज्य गुरुभगवंतों का नागरिक अभिनंदन समारोह सुश्राविका मीराबाई जी लूनिया के प्रांगण में भव्यतम रूप से आयोजित किया जाएगा।
डॉ. श्री हेमराज लूनिया एवं श्री जयुष लूनिया ने बताया कि इस पावन अवसर पर जैन संगीतकार श्री तरुण मोदी विशेष रूप से पधारेंगे और पूज्य गुरुभगवंतों के श्रीचरणों में अपनी गुरुभक्ति भक्ति-गीतों के माध्यम से अर्पित करेंगे।
भारत गौरव, दक्षिण सूर्य, ओजस्वी प्रवचनकार प.पू.गुरुदेव डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने बताया कि सुश्राविका मीराबाई जी लूनिया पिछले 36 वर्षों से दीर्घ एकासन तप आराधना कर रही हैं। उन्होंने यह व्रत लिया है कि वे जीवनपर्यंत प्रतिदिन केवल एक बार आहार (24 घंटे में एक ही बार भोजन) करेंगी, और आज तक इस संकल्प का अक्षरशः पालन कर रही हैं।
पूज्य गुरुदेवों के शुभ आशीर्वाद से उन्होंने अपने जीवन में 108 आयंबिल तप, 144, 153 , 151 , 522 आयंबिल तप जैसी दीर्घ और कठिन आराधनाएँ पूर्ण की हैं। वर्तमान में भी लगभग 400 आयंबिल तप की आराधना पूर्णता की ओर अग्रसर है।
गौरतलब है कि आयंबिल तप में केवल पानी में उबली हुई बिना मसाले की दाल एवं रुखी रोटी ग्रहण की जाती है। इसमें चाय, दूध, फल, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स आदि का पूर्ण त्याग किया जाता है। इतना कठोर तप अत्यंत विरले ही साधक कर पाते हैं।
मीराबाई जी लूनिया का कहना है कि इस तप-साधना के पीछे उत्तर भारतीय प्रवर्तक दादा गुरुदेव भंडारी प.पू. श्री पद्म चंद्र जी म. सा. एवं श्रुताचार्य, वाणी भूषण, उत्तर भारतीय प्रवर्तक, प. पू. गुरुदेव श्री अमर मुनि जी म. सा. का विशेष आशीर्वाद रहा है।
बहन सोनाली जी लूनिया- मुथियान ने बताया कि सुश्राविका मीराबाई जी लूनिया जीवनभर संत सेवा, जीवदया एवं समाज कल्याण के कार्यों में अग्रणी रही हैं। उन्होंने अपने बच्चों को भी ऐसे ही श्रेष्ठ संस्कार दिए हैं, जिसके कारण वे विदेशों में रहते हुए भी नैतिक एवं आध्यात्मिक जीवन मूल्यों का पालन करते हुए समय-समय पर दान-पुण्य एवं सेवा कार्यों में संलग्न रहते हैं।
कर्मयोगी मुनिरत्न श्री रूपेश मुनि जी महाराज ने बताया कि माता मीराबाई जी लूनिया की तप-अनुमोदना हेतु पूज्य गुरुभगवंत बैंगलोर, के.जी.एफ., चेन्नई, हैदराबाद, सिकंदराबाद, कोयंबटूर, कन्याकुमारी आदि विभिन्न स्थानों की पदयात्रा करते हुए लगभग दस वर्षों के पश्चात पुनः पधार रहे हैं।
श्रीसंघ के वरिष्ठ मार्गदर्शक श्री संतोष जी कर्नावट ने बताया कि वर्ष 2015 में पूज्य गुरुभगवंतों का भव्य चातुर्मास हमारे श्रीसंघ को प्राप्त हुआ था, जो आज भी संघ के लिए एक अविस्मरणीय और ऐतिहासिक स्मृति है।
श्रीसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष श्री सुभाषजी ललवानी ने बताया कि उस चातुर्मास के दौरान पूज्य गुरुभगवंतों के पावन सान्निध्य में आयोजित दीक्षा महोत्सव भी अत्यंत ऐतिहासिक एवं अद्वितीय रहा।
इस अवसर पर पूज्य गुरुभगवंतों के मंगलमय प्रवचनों का विशेष आयोजन होगा। समारोह के उपरांत धर्मसभा में उपस्थित समस्त श्रद्धालु भाई-बहनों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था डॉ. श्री हेमराज लूनिया, सोनाली, श्री जयुष लूनिया एवं श्री रमेशलालजी लूनिया परिवार की ओर से रहेगी।