रायपुरम महिला मण्डल द्वारा नार्थ टाउन में एकत्व भावना पर बहुत ही सुन्दर नाटक प्रस्तुत किया गया। जिसकी सभी ने बहुत सराहना की।
Sagevaani.com @Chennai परम पूज्य गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आज का पर्व बहुत ही विशेष एवं पावन दिवस है। आज टूटे हुओ को जोड़ कर एक बनाने का दिन है। टूटे हुए को जोड़ने का काम जैसे फेविकोल करता है वैसे जैन धर्म में एक शब्द है ‘क्षमा’ ये क्षमा शब्द कहने में छोटा है पर बोलने में बहुत कठिन। क्षमा मांगने वाला जब तक झुकता नहीं वह क्षमा नहीं कह सकता। आज सबमें बहुत अकड़ है छोटे बच्चे भी आसानी से झुक कर चरण स्पर्श नहीं करते।
न झुकने के कारण पति-पत्नी एक साथ होते हुए भी पराये की तरह रहते है एक छत के नीचे रहते हुए भी गलती होने पर क्षमा नही मांग पाते। यदि पति पत्नी का ही व्यवहार सही नहीं है तो बच्चे उन्हें देखकर क्या सीखेंगे। उनको क्षमा माँगना कैसे आयेगा। क्षमा बड़े-2 अपराधों को खत्म कर देता है।
यदि व्यक्ति क्षमा का महत्व जान इसे जीवन में धारण कर ले तो पुण्यवाणी प्रबल हो जाती है। क्षमा के बिना कोई अरिहन्त, सिद्ध नहीं बन सकता है । घर में समाधि, शान्ति क्षमा से हो जाती हैं क्षमा मान का मर्दन कर देता है जिससे विनय गुण व्यक्ति में आ जाता है। विनय गुण सारे भेद भाव को मिटाकर सबको एक कर देता है। बड़ी 2 समस्याएं क्षमा से सुलझ जाती है ।
सभी भाषाओं में क्षमा का प्रयोग किया गया है। आज लोग झुकना भूल गये है इसलिए रीढ़ की हड्डी में बीमारी आ रही है। भगवान कहते हैं जो झुकता है उस व्यक्ति को कमर की बीमारी नहीं आती। व्यक्ति को झुकने से कितने ही आर्शीवाद सहज में ही मिल जाते है। व्यक्ति सौ साल तक निरोगी जीता था।