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मोहन रहना दुष्कर तो है पर यह एक तरह की देवी अनुभूति देता है: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैय

मोहन रहना दुष्कर तो है पर यह एक तरह की देवी अनुभूति देता है: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैय

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl

बंधुओं जैसे कि हमारी एक कोशिश करनी चाहिए कि हमारे संबंधित से हो जो दूसरों को छोड़ना पहुंचाएं कटाक्ष की वजह से हम की भाषा का प्रयोग करेंl अगर विपरीत वातावरण में थोड़ा सा मोहन रहने का अभ्यास रखें तो आपके हित में होगाl मोहन रहना दुष्कर तो है पर यह एक तरह की देवी अनुभूति देता हैl खानपान की मर्यादा तीसरी मर्यादा है कब कितना गाना आप इसका विवेक रखें जितनी भूख हो उससे कम खाएं लेकिन यह भी देखेगी क्या खा रहे हैंl

भेज रखे की कितनी सीमा तक खाना है 1 2 3 4 या और अधिक कितनी बार या दिन भर भी मुंह चल रहा हैl नियम से खाएं सुबह हाल का नाश्ता ले दोपहर में खाना खाएं फिर एक बार और हल्का-फुल्का नाश्ता कर सकते हैंl अंत में शाम को खाना खा ले मेरे ख्याल से इतना पर्याप्त है अगर आप दिन में चार बार खाने की मर्यादा रखोगे तो सड़क पर चलते हुए समूह के समोसे की तरह गढ़ आपको नहीं लग जाएगी प्रत्येक मानव को चाहिए कि अपनी इंद्रियों पर मर्यादा अवश्यl

हमारे यहां पर मेवाड महिला मंडल का भी अधिवेशन हुआ उसमें 2500 से लगाकर 3000 तक महिलाओं ने पार्टिसिपेट किया एवं संस्कृति प्रोग्राम भी हुए अन्य शुभ भाव के साथ जय जिनेंद्र जय महावीर कांता जी सिसोदिया भाईंदर🌺🌺🌺🌺

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