श्रुताचार्य पूज्य अमर मुनि जी महाराज की 13वीं पुण्यतिथि जैन भवन, कोल्हापुर में श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाई गई। यह कार्यक्रम पूज्य श्री पंकज मुनि जी के नेतृत्व में आयोजित हुआ। इसमें दूर-दूर से श्रद्धालुओं और उपासकों ने भाग लेकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए भारत रत्न डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने कहा कि अमर मुनि जी का जन्म बलोचिस्तान में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें धार्मिक संस्कार थे। उनके माता-पिता ने भी उन्हें धर्म और आध्यात्मिकता की शिक्षा दी। देश की स्वतंत्रता के समय वे अंबाला रेलवे स्टेशन पर पहुँचे और वहीं अपने माता-पिता से बिछड़ गए। बाद में एक जैन उपासक के माध्यम से वे जैन गुरु आचार्य श्री आत्मा राम जी महाराज की शरण में पहुँचे।
पूज्य आत्मा राम जी ने अपनी दिव्य दृष्टि से उनकी प्रतिभा और बुद्धिमत्ता को पहचान लिया। उन्होंने अपने पौत्र शिष्य से कहा कि इस बालक का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि यह आगे चलकर महान कार्य करेगा।
अमर मुनि जी महाराज ने तीन वर्ष तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद हरियाणा के सोनीपत मंडी में संन्यास दीक्षा ग्रहण की और पूर्ण रूप से संत बन गए। उनकी साधना और आराधना में पूर्ण समर्पण था। उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक मौन व्रत का पालन किया। इस कठोर साधना से उन्हें वचन सिद्धि प्राप्त हुई। उनकी वाणी में ऐसा प्रभाव था कि हजारों लोग उनके प्रवचन सुनने के लिए दूर-दूर से आते थे।
उनकी प्रेरणा से उत्तर भारत, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान आदि क्षेत्रों में अनेक विद्यालय, महाविद्यालय और अस्पताल स्थापित किए गए। इन संस्थानों में सभी धर्मों के लोग शिक्षा और सेवा प्राप्त करते हैं । वे हिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी सहित कई भाषाओं के ज्ञाता थे और अनेक धार्मिक प्रकाशनों से भी जुड़े रहे।
उनका जीवन सादगी, स्पष्टवादिता और सेवा भावना का प्रेरणादायक उदाहरण था। उन्होंने कभी अपने नाम का प्रचार नहीं किया, बल्कि सदैव अपने गुरु का नाम आगे रखा।
इस अवसर पर समाजसेवी हीरा लाल जी कर्नावट, जयंत भाई सेठ आदि ने भी उनके श्री चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में पूज्य श्री पंकज गुरुदेव के मंगल पाठ के साथ धर्म सभा का समापन हुआ। मुनि रत्न श्री रुपेश मुनि जी ने गुरु भक्ति गीत प्रस्तुत किया। धर्म सभा में पूना व इचलकरण जी आदि स्थानों से भी श्रद्धालु जन पहुंचे। आकुर्डी संघ के निवर्तमान अध्यक्ष श्री सुभाष जी ललवानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रुताचार्य श्री अमर गुरुदेव एक युग पुरुष थे। मानव जाति पर किए गए उनके उपकार सदैव याद किए जाएंगे। श्री प्रकाश मुनोत ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर अपनी सुमनांजली अर्पित की। इचलकरण जी के प्रमुख समाजसेवी श्री महावीर जी बोरूंदिया ने कहा कि हमने श्री अमर गुरुदेव के दर्शन तो नहीं किए परन्तु उनकी छवि हम आप में देख रहे हैं। जिनके शिष्य इतने महान हैं, उनके गुरु कितने महान होंगे, यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। कोल्हापुर श्रीसंघ के महामंत्री श्री जयंत भाई सेठ ने पूज्य गुरुदेवों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा यह परम सौभाग्य है जो हमें ऐसे महान युग द्रष्टा – युग स्रष्टा महापुरुष के गुणगान करने का पावन अवसर प्राप्त हुआ। संघ अध्यक्ष हीरालाल जी कर्नावट ने कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का माल्यार्पण द्वारा बहुमान किया। कार्यक्रम के पश्चात अनाथ आश्रम, कुष्ठ आश्रम, वृद्धाश्रम व अंध विद्यालय में भी अन्न दान सेवा की गई।




