- आज विजयनगर स्थानक भवन में जैन दिवाकरिय साध्वीश्री प्रतिभाश्रीजी ने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि भटक जाते हैं वे लोग, जिनके अनेक गुरु होते है,एक ही चौखट पर सिर झुके तो सन्मार्ग की प्राप्ति होती है ।इसी सन्मार्ग से उन्मार्ग की ओर बढ़ा जा सकता है।साध्वी श्री ने आचार्य भगवंत का गुणानुवाद करते हुए कहा कि वो सिर्फ दिनदुखियों के ही नाथ नहीं कहलाये बल्कि इस युग के साक्षात भगवान थे।उनमें आचार्य के गुण तो उनकी बाल्यावस्था में ही दिखने लग गए थे।
- साध्वी प्रेक्षाश्रीजी नेआचार्य भगवंत आनंदरऋषि जी को आनंद ही नहीं बल्कि परमनानंद गुरु बताते हुए उनके जन्म से लेकर दीक्षा व “आनंदऋषि” के नामकरण तथा आचार्य पदवी एवं उनके दूरदृष्टि से पहलीबार दो युवचार्यो की नियुक्ति एवं खण्ड खण्ड में विभाजित जैन समाज के पांच सम्प्रदायों को मिलाकर एक श्रमणसंघ की स्थापना तथा 92 वर्ष की उम्र तक जिनशासन को गौरवान्वित करते हुए 30 वर्षों तक आचार्य पद पर रहकर सभी साधुसंतों को संयम व समाचारी के प्रेरणा स्त्रोत के बारें मे विस्तृत से जीवन परिचय करवाया।साध्वीश्री ने बताया कि आचार्य भगवन्त ने अपनी दूरदृष्टि से ही जैन समाज के भविष्य को देख लिया और उन्होंने बच्चों को संस्कारित करने व जैन शिक्षण की आवश्यकता महसूस करली।इस हेतु उन्होंने पहली ज्ञानशाला का शुभारंभ अहमदनगर में किया जिनकी शाखाएं आज पूरे भारत वर्ष में दिनोदिन बढ़ रही है। मंत्री कन्हैया लाल सुराणा ने इस त्रिदिवसीय त्रिवेणी महोत्सव के समापन पर धर्मनिष्ठ श्रद्धालुओं द्ववारा बडे ही हर्सोल्लास से अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आयोजन की शोभा बढ़ाने हेतु सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिया।तथा सभी लाभार्थि परिवारों के प्रति अनुमोदना प्रकट की,युवा संघ को त्रिदिवसीय व्यवस्था में दिए गए सहयोग हेतु धन्यवाद दिया।
भटक जाते हैं वे लोग, जिनके अनेक गुरु होते है: साध्वीश्री प्रतिभाश्रीजी