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बुरी परिस्थितियों में हम मजबूर होते हैं  या मजबूत बनते हैं, ये हम पर निर्भर है: प्रवीण ऋषि

बुरी परिस्थितियों में हम मजबूर होते हैं  या मजबूत बनते हैं, ये हम पर निर्भर है: प्रवीण ऋषि

रायपुर@sagevaani.com हर व्यक्ति के जीवन में ऐसा टर्निंग प्वाइंट आता है जो उसे पूरी तरह से बदलकर रख देता है। टर्निंग प्वाइंट किसे कहते हैं? ऐसा क्षण जब व्यक्ति के भीतर अपने सारे कषायों से मुक्त होने की प्रबलतम इच्छा जागृत होती है। वह तय करता है कि मुझे इस तरह नहीं जीना है, जैसे मैं जीते आया हूं। ऐसा विषम परिस्थितियों की वजह से होता है। कई बार लोग इस स्थिति में सुसाइड का रास्ता चुन लेते हैं। ऐसे लोगों को यही कहूंगा कि बुरी परिस्थितियों में हमें मजबूर होना है या मजबूत बनना है,ये केवल हम पर तय करता है।

टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में मजबूत होने का एक छोटा सा सूत्र है। एक छोटा सा कदम उठाने की जरूरत है। मकान बड़ा है या छोटा, ये मायने नहीं रखता। अगर लीकेज हो गया तो मकान कितना भी बड़ा हाे, उसका मतलब नहीं रह जाता। निस्वार्थ जिंदगी जिएं। इसका एक छोटा सा नियम है। खुशियां बांटते चलिए। बिना खिलाए नहीं खाऊंगा।

जब आप किसी को खाना खिलाएं तो ये ध्यान रखें कि आप उसे क्या समझकर खिला रहे हैं। अगर आप किसी को जरूरतमंद मानकर भोजन कराते हैं तो जान लीजिए कि आपको भी कोई भोजन तभी देगा जब आपका बुरा वक्त चल रहा होगा। ऐसे में जरूरी है कि जब आप किसी को कुछ खिलाएं तो प्रभु मानकर खिलाएं। मतलब मैं ईश्वर को भोजन करा रहा हूं। इसका फायदा ये होगा कि जब कोई आपको भोजन कराएगा तो ईश्वर मानकर भोग के रूप में अर्पित करेगा। कहने का तात्पर्य है कि किसी काम करते वक्त आपके मन में क्या भावना है, वही भावना आपकी नियती तय करती है।

जीवन में हर समस्या का समाधान

आपको बस निपटना आना चाहिए

संतश्री ने फरमाया कि जीवन में हर समस्या का समाधान है। आपको बस समाधान तलाशना आना चाहिए। इसके लिए मन-बुद्धि का स्थिर रहना जरूरी है। एक प्रसंग बताते हुए उन्होंने कहा, एक राज्य मे मंत्री था। उसे खुद पर बेहद विश्वास था कि उस हर शंकाध समाधान कर सकता है। राजा को भी ये बात पता थी। एक बार राजा ने उसकी परीक्षा लेनी चाही। राजा ने मंत्री को एक पहाड़ के ऊपर बने किले पर कैद करवा दिया। चारों ओर खाई थी। बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता था जो दरवाजे की साइज जितना संकरा था।

बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करवा दी। किले में बंद करने से पहले राजा ने मंत्री को 5 मिनट के लिए घर जाने का समय दिया था। मंत्री ने अपनी पत्नी को समस्या के साथउसका समाधान भी बताया। राजा ने मंत्री से कहा कि 7 दिन में तुम जिंदा बाहर नहीं निकले तो यहां से तुम्हारा मुर्दा बाहर निकलेगा। अगले दिन मंत्री राज दरबार में पेश हो गया। राजा आश्चर्यचकित हो गए। पहरेदारों से पूछा। उन्होंने कहा कि राजन आप देख लीजिए। न दरवाजा टूटा है, न दीवार टूटी है।

राजा ने मंत्री से पूछा तो उसने बताया कि उसने अपनी पत्नी से कहा था कि एक मधुमक्खी के सामने शहर लगाकर उसके पैरों में रेशम का धागा बांध देना। उसे खाई मेंछोड़ देना। मक्खी को शहद की सुगंध सामने से आ रही थी। इस वजह से वह ऊपर किले तक पहुंच गई। उसके पैरों में जो लंबा रेशम बंधा था, उसके पीछे रस्सी थी और उससे सीढ़ी बंधी थी। इस तरह वह किले से बाहर आ गया। इस कहानी का संदेश यही है कि आप हर परिस्थिति से बाहर निकल सकते हैं अगर सूझबूझ से काम लें।

प्रवचन के लिए रोज सुबह

उमड़ रही भक्तों की भीड़

रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि रोज सुबह 9 से 10 बजे के बीच गुरुदेव के प्रवचन जारी हैं। इसे सुनने के लिए रोज बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पटवा भवन पहुंच रहे हैं। मौसम को देखते हुए परिसर में तीन विशाल डोम बनाए गए हैं। इसी में श्रद्धालुओं के बैठने का इंतजाम किया गया है।

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