श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया बन्धन से बंधे हुए जीव इस जगत में दिखाई देते हैं। इस बंधनों से कैसे मुक्त होना है वे कौन-कौन से बंधन है। यह जानने से पता चलेगा।
प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने मनुष्य जन्म का सार बताते हुए चार प्रकार के मानवों का वर्णन किया। नौ उपवास सौ मनीषा सकलेचा तथा ग्यारह उपवास प्रीति कोठारी इनके प्रत्याख्यान हुए आगे तपस्या जारी है। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने तपस्वी का स्वागत किया। संचालन मंत्री हस्तीमल बाफना ने किया।