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पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व सम्मान को कोई संस्कृति नहीं नकारती: साध्वी नूतन प्रभा श्री

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व सम्मान को कोई संस्कृति नहीं नकारती: साध्वी नूतन प्रभा श्री

श्राद्ध पक्ष याद दिलाता है कि अपने उपकारियों को हम न भूलें 

Sagevaani.com @शिवपुरी। चूँंकि हम हर पल अपनेे पूर्वजों को याद नहींं करते इसलिए कम से कम 15 दिन तो उन्हें याद करें,श्राद्ध पक्ष मनाने के पीछे यहीं भावना है। यह कहना गलत है कि जैन संस्कृति अपने पूर्र्वजों ,बाप दादाओं के प्रति श्रद्धा औेर सम्मान को नकारती हैै। साध्वी नूतन प्र्रभा श्री जी ने कमला भवन में आयोजित धर्म सभा में उक्त विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्राद्ध पक्ष याद दिलाता है कि हमें अपने उपकारियों को नहीं भूलना चाहिए। हमारे पूर्वजों का हम पर जो एहसान है उसका मूल्य कभी नहीं चुकाया जा सकता हैे। धर्म सभा में साध्वी बन्दना श्री जी ने श्रावकों के गुणों का बखान करते हुए कहा कि श्रावक सत्यवादी औेर न्यायप्रिय होता है। उन्होंने बताया कि 21 गुणों को जो धारक होता हैै वहीं सच्चा श्रावक कहलाने का हकदार है।

     धर्म सभा में साध्वी जय श्री जी ने प्रभु महावीर के अमृृत को पीना है, भजन का गायन कर माहौल में जिनवाणी की खुशबू भरी। उन्होंने कहा कि इस संसार में आकर धन सम्पत्ति वैभव और परिग्र्रह का संचय यदि आप करते है तो इसमेें कुछ गलत नहींं है लेकिन एक सीमा आपको निश्चित करना चाहिए। आप निश्चय कर लें कि जीवन में आपको कितनी धन सम्पत्ति चाहिए और उस सम्पत्ति के बाद जितनी भी सम्पत्ति आये उसे आप दान पुण्य औैर लोगों की भलाई के लिए खर्च करें। इससे आप पुण्य भी अर्जित करेंगे और पाप से भी बच सकें गेे।

उसी प्रकार अपने कपड़े,जूते तथा अन्य उपयोग के सामान की सीमा भी आप निश्चित करें। इससे आपकी आत्मा पाप के बोझ से बोझिल नही होगी। उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि आज इन्सान ने अपने आप को धन कमाने और लड़ाई झगड़ेे तक ही सीमित कर लिया है। पाप के कामों में उसे कभी प्रमाद नहीं आता । कभी उसे महसूस नहीं होता कि उसके पास समय की कमी है लेकिन धर्म के कामों में यह कहकर व्यक्ति बच निकलता है कि उसके पास समय नही है। यहां तक कि घर के बच्चों को संस्कार देनेे में भी समय की कमी आड़े आ जाती है। साध्वी जी ने कहा कि जीवन के 12 व्रत हमेें संयमित रखने काम करती हैं। साध्वी रमणीक कुंवर जी ने बताया कि हमारे मन मेें जो शुभ औेर अशुुभ विचार आते है उससे कर्मों का बंधन होता है और हमें कर्र्मों की निर्जरा करनी चाहिए।

इंदौर से पधारे धर्मावलंबियों ने गुरुणीं मैया सेे लिया आर्शीवाद 

2021 में इंदौर के महावीर नगर स्थानक में अभूतपूर्व चातुर्मास कर जिनवाणी की गंगा प्रवाहित करने वाली साध्वी रमणीक कुंवर जी के दर्शन बंदन औेर उपदेश चुनने के लिए इंदौर के डेढ़़ दर्जन से अधिक श्रावक श्राविकाओं ने आज कमला भवन पहुंचकर अपनी धर्म भावना व्यक्त की। श्राविका बहिन श्रीमति किरण वाफना ने गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए सुंदर भजन का गायन किया। वहीं अध्यक्ष अशोक सुराणा ने बताया कि गुरुणी मैया का 2021 का चातुर्मास हमेशा स्मृतियों में रहेगा। 33 वर्षों में यह पहला चातुर्मास था जब किसी श्रावक ने 65 उपवास की तपस्या की। महावीर नगर संघ ने गुरुणी मैया से इंदौर पधारकर धर्म लाभ देने और 2025 का चातुर्मास करने की विनती की।

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