बेंगलुरु। आचार्यश्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने शनिवार को यहां अपने प्रवचन में कहा कि गलतियाँ हर इंसान करता है। लेकिन इसे स्वीकार हर कोई नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि गलती होने पर उसे स्वीकार कर लेना व्यक्ति को आगे ले जाने वाले गुणों में से एक है।
वे आगे बोले कि मानव स्वभाव है गलतियाँ करने का। गलतियाँ सभी से होती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी भी कहते थे भले ही 100 गलतियाँ करो लेकिन उन्हें दोहराओ मत। क्योंकि गलतियों को दोहराना मूर्खता है।
गलती हो उसे पूरी शिद्दत के साथ स्वीकार करना चाहिए। कुछ गलतियाँ होती हैं जो अनजाने में हो जाती हैं और कुछ होती हैं जो आपसे जानबूझकर होती हैं। अनजाने में होने वाली गलतियों पर आपका बस नहीं चलता। उसके लिए तो सिवाय माफी माँगने के कोई चारा नहीं रह जाता। लेकिन जानबूझकर होने वाली गलतियों में आप कमी कर सकते हैं।
देवेंद्रसागरजी ने कहा कि ज्यादातर लोगों को अपनी गलती का अहसास बहुत देर से होता है। दरअसल हमें बहुत दिनों तक यह समझ ही नहीं आता कि हमने गलती कर दी है और जब अहसास होता है, तो काफी देर हो चुकी होती है। दूसरी बात यह है कि हम धीरे-धीरे गलतियों से सबक लेते हैं। यह एक तरह से सहज प्रक्रिया है।
जैसे-जैसे हम जिंदगी में आगे बढ़ते हैं, हमें बहुत-सी सही-गलत बातों का अहसास होता जाता है। लेकिन लंबे समय तक हम सही होने की जिद पर अड़े रहते हैं। सबसे अहम बात यह है कि अगर हम अपनी गलती स्वीकार नहीं करेंगे, तो आगे चलकर गलतियां रुकने की संभावनाएं ही खत्म हो जाएंगी।
अगर हमने यह तय कर लिया है कि हम गलती कर ही नहीं सकते, तो इसका सीधा मतलब यह है कि हमारे अंदर मानव प्रवृत्ति ही नहीं है। गलती करना तो मानव प्रवृत्ति है। उन्होंने यह भी कहा कि अजीब बात यह है कि हम खुद को सही मानते हैं और चाहते हैं कि दूसरे भी हमें सही मानें।