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कर्मों को‌ हम बांधते हैं तो इससे छुटकारा भी हम ही पा सकते हैं: प्रवीण ऋषि

कर्मों को‌ हम बांधते हैं तो इससे छुटकारा भी हम ही पा सकते हैं: प्रवीण ऋषि

टैगोर नगर के लालगंगा पटवा भवन में संत प्रवीण ऋषि ने कहा

रायपुर। हम कर्मों को बांधते हैं। कर्म हमें नहीं बांधते। कर्मों को आप जिस दिन रवाना करेंगे, वे हो जाएंगे। कर्मों को रवाना करने की प्रक्रिया ओसरामी कहलाती है। अब बड़ा सवाल ये है कि इस ओसरामी की प्रक्रिया को कैसे संपन्न करें? ये बातें टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में उपाध्याय प्रवर संत प्रवीण ऋषि ने कही।

उन्होंने कहा, इसे समझाने के लिए आज मैं आपको एक प्रसंग सुनाता हूं। एक बार राजा ने योगी से पूछा कि मेरे इस साम्राज्य की क्या कीमत है! योगी ने कहा, एक ग्लास पानी। राजा ने कहा, आप क्या बात कर रहे हैं! इतना बड़ा‌ साम्राज्य जिसमें करोड़ों के महल, मकान, जेवर, सेना है और उसकी कीमत केवल एक ग्लास पानी। योगी बोले कि हां राजन, इसकी कीमत यही है। योगी ने इस बात को समझाने के लिए एक प्रयोग किया।

उसने राजा को सम्मोहित कर ऐसा एहसास कराया कि वे रेगिस्तान में हैं। प्यास के मारे राजा के प्राण कंठ तक आ गए। तब राजा ने एक व्यक्ति को अपने सामने से जाते देखा जो हाथ में एक लोटा जल लेकर जा रहा था। राजा ने उसे पानी मांगा। उसे व्यक्ति ने कहा कि मैं यह नहीं दे पाऊंगा। लाख जतन के बाद भी राजा पानी को तरसते रहे। इससे उन्हें समझ में आ गया कि संपत्ति नहीं, जरूरत महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से सवाल करते हुए पूछा कि याद करिए, कुछ दिनों पहले नोटबंदी लागू हुई थी। उस समय आपके नोट की कीमत कितनी रह गई थी। कीमत तभी तक थी जब तक अप्रूवल था। नो अप्रूवल, नो वैल्यू।

मां बनना आत्मा का धर्म है

संत ने कहा कि एक मां हुंसा ने बेटे नेमीचंद को भगवंत आनंद ऋषि जी म.सा. बना दिया है, इसलिए एक मां जो कर सकती है, वह कोई नहीं कर सकता। आज मां कहती है कि बेटा, मेरी बात नहीं सुनता है। जबकि ऐसी एक भी संतान नहीं है जो मां कहे और बेटा ना सुने, बस कहने वाली मां चाहिए, नारी नहीं। मां बनना आत्मा का धर्म है, और बच्चा पैदा करना नारी का धर्म है। आज जिनके मां-बाप नहीं है।

ऐसे लावारिश बहुत कम है, जबकि मां-बाप के रहते लावारिश बच्चे ज्यादा है। दुनिया में उन्हें ज्यादा दर्द है जिनके मां-बाप रहते हुए भी मां-बाप मिलते नहीं है। आज दुनिया ने मां को छिन लिया है। बस नारी ही नारी नजर आती है, मां नजर नहीं आती है। आज संबोधन में मां रहा ना बहन रहा। हम स्वयं ही लेडीज एंड जेंट्स बोलकर भारतीय संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं।

आज पत्रकारों से चर्चा करेंगे संत

रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि रविवार को दोपहर 12 बजे पत्रकारों से चर्चा करेंगे। इस दौरान वे वर्तमान समाज और राष्ट्र जैसे विषयों के अलावा सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा करेंगे।

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