चेन्नई

अहंकार छोड़ें, जिनशासन की आज्ञा पालन करें : उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

मंगलवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। उपाध्याय प्रवर ने बताया कि सुरक्षा हर व्यक्ति चाहता है। परमात्मा कहते हैं कि जो स्वयं के जीवन को सुरक्षित करता है वही सुरक्षित है। परमात्मा की आज्ञा है- हृदय और विचारों से खुला होना चाहिए आचरण और चरित्र में नहीं। जिसका मन और काया, सुरक्षित है वही सुरक्षित है। आज्ञा के बाहर जाने वाले असुरक्षित हो जाते हैं और जो असुरक्षित है वही आज्ञा से बाहर है। आज्ञा देने वाला आज्ञा देने के बाद विश्राम नहीं करते वे स्वयं उसकी परख करते हैं। नेपोलियन का उदाहरण देकर इसे समझाया। गुरु कहते हैं कि यदि नेपोलियन की आज्ञा का उल्लंघन किया तो सैनिक ने अपना एक जीवन खो दिया, लेकिन परमात्मा की आज्ञा का उल्लंघन करने वाले तो कितने ही जन्म खो देते है...

संसार के समस्त कार्यो को छोडक़र परमात्मा की भक्ति करना सौभाग्यशाली लोगों का काम: गौतममुनि

साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने मंगलवार को कहा कि संसार के समस्त कार्यो को छोडक़र परमात्मा की भक्ति में लगने वाले लोग सौभाग्यशाली होते है। जैनों के लिए नवकार मंत्र 68 तीर्थ का लाभ देने के बराबर होता है। भक्ति के साथ अगर नवकार मंत्र का स्मरण किया जाए तो कहीं जाने की जरुरत नहीं है, बल्कि इससे ही 68 तीर्थ का लाभ प्राप्त किया जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि पंच परमेष्टि की भक्ति स्तुति और इसकी प्रार्थना जब भी करने का मौका मिले तो मन और दिल को उसी में जोडक़र परमात्मा की दिव्य भक्ति का लाभ जीवन में ले लेना चाहिए। ऐसी उत्तम अनन्य भक्ति कर जीवन को परमात्मा की वाणी से जोडऩे का अवसर भाग्यशाली आत्माओं को ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भोजन करने से पहले घर से निकलने से पहले नवकार मंत्र का जाप करना चाहिए। इसका स्मरण किए बिना किसी भी कार्य की शुरुआत ही नहीं करनी चाहिए। यदी मनुष्य अ...

जैसी जिज्ञासा वैसे गुरु ज्ञान मिलेगा: साध्वी धर्मलता

एसएस जैन संघ ताम्बरम में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा कि जैसी जिज्ञासा होगी वैसे गुरु से ज्ञान मिलेगा। जिज्ञासु ग्रहक है और गुरु व्यापारी। जिज्ञासा और ज्ञान का गहरा नाता है। गुरु रूपी सागर में ज्ञान के अनेक मोती है। शिष्य रूपी गोताखोर को जिज्ञासा रूपी पनडुब्बी से ज्ञान के मोती प्राप्त कर सकता है। जिज्ञासा दो प्रकार की होती है स्व जिज्ञासा और पर जिज्ञासा। खुद को जानना स्व और जगत को जानना परजिज्ञासा है। जो स्व को जान लेता है वो सर्व को जान लेता है। स्व को नहीं जानता उसका ज्ञान अधूरा है। ज्ञान के महल में प्रवेश पाने के लिए जिज्ञासा पगडंडी है। महावीर भगवान के इंद्रभूमि के 11 गणधरों का परिचय जिज्ञासा से ही हुआ। जिज्ञासा ऐसी हो जो हमें मोक्षमार्ग के निकट पहुंचा दे। अपूर्वा आचार्य ने कहा कि इच्छा आकाश के समान अनंत है।धन परिमित है, इच्छा का पूर्ण होना असंभव है। लोभी पुरुष को धन धान्य से भरपूर सार...

ज्ञान का अस्त कभी नहीं होता: साध्वी धर्मप्रभा

एसएस जैन संघ एमकेबी नगर स्थानक में विराजित साध्वी धर्मप्रभा ने कहा कि इस लोक में ज्ञान के समान कोई वस्तु नहीं है। भगवान महावीर ने आत्म साधना के लिए ज्ञान को परम आवश्यक माना है। कैवल्य ज्ञान सूर्य प्रकाश से ज्यादा प्रकाश करता है। सूर्य तो मृत्यु लोक प्रकाश देता है पर कैवल्य ज्ञान तीनों लोको को प्रकाशित करता है। सूर्य को बादल ढक सकता है, राहू ग्रस्त कर सकता है और सूर्य अस्त होता है पर कैवल्य ज्ञान का अस्त कभी नहीं होता ज्ञान बिना किया गया कार्य अनैतिक है। ज्ञान श्रद्धावान को प्राप्त होता है। साध्वी स्नेह प्रभा ने कहा कि मानव को सदैव उत्तम पुरुषो की संगति करना चाहिए। क्योंकि सज्जनों की संगत हमारे संताप व परिताप का हरण चित्त को शांति प्रदान करती है। आलसी,वैर विरोध रखने वाले और स्वेच्छाचारी का साथ छोड़ देना चाहिए। दुर्जनों का संग देने से सज्जन का भी महत्व गिर जाता है। जीवात्मा को पुण्यों से सज्...

आत्म समर्पण से मिलता है परमात्मा: पुष्पदंत सागर

कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मुथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा कि शक्ति और ज्ञान प्रदर्शन से परमात्मा नहीं मिलता बल्कि आत्म समर्पण से मिलता है। फूल जैसी कोमलता से मिलता है। चार प्रकार के लोग होते है एक जो फूलो का गुलदस्ता लाकर घर की शोभा बढ़ाते है, दूसरे फूलों की माला पहनते हैं। तीसरे वे जो फूल बेचते है और चौथे वो होते है जो फूलो का इत्र निकालते हैं। जो गुलदस्ता लाते हैं वे मूढ़ हैं, जो माला पहनते हैं वे अज्ञानी हैं और जो फूल बेचते हैं वे अविवेकी हैं। जो इत्र निकाल रहे हैं वे ज्ञानी है, विवेकवान है और समझदार है।हमने अपने जीवन से सुगंध लेने की कोशिश नहीं की। इसका सदुपयोग नहीं किया। भले ही जुगनू के समान अल्प बुद्धि वाले है लेकिन हमारी आत्मा में सूर्य के समान दिव्य प्रकाश है। आत्मा पर कर्मों का आवरण है उस आवरण को हटाने के लिए बहुत बड़ा शास्त्र ज्ञानी बनना जरुरी नहीं। उसके लिए तो भरत ...

ईश्वर से अपनी मुश्किलें बढ़ी है ये न बताओं मुश्किलों से कहो ईश्वर बढ़ा है: दादी जानकी

ईश्वर से इस बात की कभी शिकायत नहीं करनी चाहिए कि हमारी मुश्किलें बढ़ी हैं बल्कि हमें मुश्किलों से कहना चाहिए कि ईश्वर बढ़ा है। चेन्नई के कामराज अरैंगम में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए तपस्वी दादी जानकी ने कहा कि कुछ लोगों को दृष्टि से ही सोच और दोष का पता चल जाता है। हमें अपनी दृष्टि और सोच को बदलना चाहिए। हमें ईश्वर के प्रति हमेशा उन चीजों के लिए धन्यवाद करना चाहिए जो हमें मिला है। जो नहीं मिला उसके लिए शिकायत करने के बजाय उसे पाने के लिए परिश्रम करना चाहिए। दादीजी ने कहा कि हमें अपने अच्छे-बुरे कर्मों के बारे में हर रोज विचार करना चाहिए। यही कर्म आपको सदमार्ग पर ले जाएगा। क्योंकी हमे इन अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब यहीं देकर जाना है। ईश्वर लोगों को कठिन समय उन्हें मजबूत बनाने के लिए दिखाता है। इसलिए हमे इसके लिए भी उनका धन्यवाद करना चाहिए। हर व्यक्ति को ऊं शांती का हर रोज जाप करना चाह...

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। इस अवसर पर साध्वी कुमुदलता ने भगवान श्रीकृष्ण और महावीर स्वामी जीवन की समानताओं का विवेचन करते हुए कहा कि चंडकौशिक सांप ने महावीर स्वामी को डंक मारा तो महावीर ने अमृत धारा बरसाई, उसी प्रकार श्रीकृष्ण की भक्ति में मीरा ने विष का प्याला पिया तो वह अमृत बन गया। इस अवसर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने राधा-कृष्ण की वेशभूषा में प्रस्तुति दी। च्चखाण हांडी के पच्चखाण लेकर गुरुभक्तों ने पर्युषण के पचाखाण लेकर धार्मिक जीवन जीने की शिक्षा ग्रहण की।

अटूट विश्वास के धनी थे मरुधर केशरी: साध्वी धर्मप्रभा

श्री एसएस जैन संघ एमकेबी नगर एवं साध्वी धर्मप्रभा व स्नेहप्रभा के सान्निध्य में मरुधर केशरी मिश्रीमल एवं वरिष्ठ प्रवर्तक रूपमुनि की जन्म जयंती मनाई गई। विशिष्ट अतिथि एसएस जैन संघ साहुकारपेट के अध्यक्ष आनंदमल दल्लाणी, महावीरचंद बोहरा, मोहनलाल चोरडिया, पदमचंद कांकरिया, वईसराज रांका, दीपचंद लूणिया, डा. उत्तमचंद गोठी व सज्जनराज मेहता थे। दर्शना महिला मंडल व त्रिशला बहू मंडल के स्वागत गीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। चातुर्मास समिति के चेयरमैन पारसमल लोढा ने स्वागत भाषण दिया। इस मौके पर साध्वी धर्मप्रभा ने कहा मरुधर केशरी का जीवन एक जलती हुई जो आज भी पूरे समाज एवं संघ का मार्गदर्शन करती है। वे दृढ़ संकल्पी, अटूट विश्वास के धनी, दीन-दुखियों के हितेषी, जीवदया के प्रबल प्रेरक, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और श्रवण संघ की ढाल थे। उन्होंने श्रमण संघ को एकसूत्र में पिरोने के लिए सात बार राजस्थान में साधु स...

पदार्थ को हटा दें तो विषय स्वत: निष्फल हो जाएंगे: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

सोमवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पदार्थ हटाओगे तो चाहत निष्फल हो जाएगी और चाहत हटाओगे तो पदार्थ निष्फल हो जाएगा। उपाध्याय प्रवर ने बताया कि जो विषय है वही चक्र है और जो चक्र है वही विषय हैै। यदि चाहते हैं कि यह चक्र मन में न चले तो पदार्थ को न देखें। यदि पदार्थ सामने नहीं होगा तो विषय भी नहीं होगा। परमात्मा का कहना है कि यदि सहज उपलब्धता नहीं हो तो विकार उत्पन्न नहीं होता। उन्होंने ब्रह्मचर्य के नवाणं का पालन करने का मार्ग बताया। विकारों के रास्तों को बंद कर दें। जिस प्रकार यदि घास को चिंगारी का साथ न मिले तो वह चारा बनेगा और सकारात्मक काम में आएगा अन्यथा चिंगारी के संयोग से आग के साथ जलकर राख बन जाएगा। परमात्मा ने कहा है क...

जीवन में जो घटनाएं घटती हैं वे मनुष्य का नसीब हैं: गौतममुनि

साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले की कुछ घटनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कुछ महापुरुष ऐसे होते है जिनके नाम से तिथि चलती है उन्हीं महान लोगों में भगवान श्रीकृष्ण भी थे। इस जीवन में जो घटनाएं घटती हैं वे मनुष्य के स्वयं के नसीब से होती हैं। उसी प्रकार कृष्ण के जन्म के समय हुआ था। समय आने पर कृष्ण ने अत्यचारों का खात्मा कर उनका अवसान किया। उनके आदर्श जीवन में उतारना चाहिए। ऐसे महापुरुषों के जन्मदिन पर हमें उनके जीवन से सद्प्रेरणा लेनी चाहिए। धर्म शासन को पाकर जो परमात्मा की वाणी समझते हंै उनका जीवन सुधर जाता है। सागरमुनि ने कहा आचरण व्यक्ति को ऊंचाई पर ले जाता है। पाप करने से आत्मा नरक की ओर बढ़ती है। यह केवल लोभ की वजह से होता है। लोभ कर मनुष्य स्वयं ही नरक का मार्ग बनाता है लेकिन अच्छे कर्म कर अच्छा भव पा सकता है। धर्मसभ...

कम समय में दम का कार्य कर गए तरुणसागर जी: संयमरत्न विजय

साहुकार पेठ स्थित राजेन्द्र भवन में विराजित आचार्य संयमरत्न विजय कोंडीतोप में विराजित आचार्य पुष्पदंतसागर  के क्रांतिकारी शिष्य तरुणसागर को श्रद्धांजलि- अर्पित करने पहुंचे। मुनि संयमरत्न ने कहा कि आज तक हमनें तरु पर पुष्प खिलते देखें है, लेकिन यहां पर तो स्वयं पुष्प (पुष्पदंतसागर) ने तरु (तरुणसागर जी) को प्रकट किया है। वे छोटी सी जिंदगी में बहुत बड़ा जीवन जीकर गए, कम समय में दम का कार्य कर गए। राष्ट्रसंत तरुणसागर ने अपने तपोबल,चिंतनबल से लाखों लोगों को ज्ञान का अमृत प्रदान किया है। शांति बाई के लाल होकर इन्होंने शांति के साथ नहीं,बल्कि क्रांति के साथ प्रवचन दिए। पवन नामक बालक ने अंत समय तक तरुण बनकर अपनी तरुणाई के साथ पवन की तरह निरंतर गतिशील रहकर सद्गति की ओर महाप्रयाण किया है। इनकी सहज-सरल भाषा जीवन की एक नयी परिभाषा बन गई। तरु की तरह अपने चिंतन रूपी फल-फूल व छाया जगत को दे गए। इस अवसर प...

नर्तन नरक का भी कारण है – आचार्य पुष्पदंत सागर

कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मुथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा कि जिस पत्थर से पुल का निर्माण होता है उसी से दीवार भी बनती है। जो फूल भगवान को चढ़ते है उन्हें अर्र्र्र्र्थी पर भी चढ़ाया जाता है। यही नर्तन निर्वाण का कारण है और यही नर्तन नरक का भी कारण है। जिस अक्षर से राम बना है उसी से रावण बना है। तुम चाहे तो मुख से निकलने वाले शब्दों से जोडऩे का कार्य भी कर सकते है और तोडऩे का भी। भगवान को फूल अर्पण करना एक संकेत है, तुम एक फूल हो खुद में सुगंध पैदा करो। तुम पहले कमल बनो, विषय कषाय से ऊपर उठो। इस जगत में महावीर एक फूल है जो सुगंधित है और एक फूल आप है जो ज्ञान की सुगंध से रहित है। तुम एक फल हो जो अपनी सुगंध को खोज नहीं पाए। केवल ज्ञानी जहां बैठते है उस जगह को गंध कुटी कहते है। क्योंकि वहां केवल ज्ञान की सुगंध आती है। फूल सुबह खिलते है और शाम को मुरझा जाते है। ऐसे ही जीवन है। जीवन...

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