ज्ञान वाणी

सबके साथ मैत्रीभाव रखना ही संवत्सरी पर्व का संदेश – साध्वी स्नेहा़श्री जी म.सा.

सबके साथ मैत्रीभाव रखना ही संवत्सरी पर्व का संदेश – सवंत्सरी पर्व बिते वर्ष मे हुई भुलवतो क्षमा करनेका एवं क्षमा माँगने का पर्व है! साध्वी स्नेहा़श्री जी म.सा. उप प्रवर्तिनी महाराष्ट्र सौरभ पूज्या गुरूवर्या श्री चंद्रकला श्री जी म सा वाणी के जादूगर शाशन सूर्या पूज्य स्नेहा श्री जी म सा मधूर गायिका पूज्या श्रुतप्रज्ञा श्री जी म सा के पावन सानिध्य में जैन समाज ने एक साथ मनाया संवत्सरी महापर्व! प्रवचन सूर्या पूज्या स्नेहा श्री जी म सा ने कहा संवत्सरी पर्व बीते वर्ष में हुई भूलों के लिए क्षमा करने का एवं क्षमा माँगने का पर्व है। क्षमा का अर्थ है, जो बीत गया उसे जाने दो, उसे पकड़कर मत बैठो। खुद के दिल को ठेस लगी, फिर भी क्षमा कर दिया तो समझो आपने संवत्सरी पर्व के सही अर्थ को जी लिया। छप्पन इंच का सीना उसका नहीं होता, जो रोज दण्ड-बैठक लगाता है, बल्कि उसका होता है, जो दूसरों की गलतियों को मा...

तप आत्म शुद्धि का पवित्र माध्यम- डॉ वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा.ने पर्यूषण पर्व के सातवें दिन धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि तप आत्म शुद्धि का पवित्र माध्यम है। उन्होंने अंतगड सूत्र के माध्यम से राजा श्रेणिक की काली, सुकाली, महाकाली आदि दस रानियों के प्रभु महावीर के पास जाकर दीक्षा ग्रहण करके विभिन्न रत्नावली आदि अनेक प्रकार की विशिष्ट तप साधना करते हुए परम पद मुक्ति मोक्ष को प्राप्त करने के प्रेरक जीवन प्रसंग पर सारगर्भित विवेचना प्रस्तुत की। उन्होंने आगे कहा कि तपस्या करने से साधक के भवो भवो के किये संचित कर्म नष्ट हो जाते हैं। तप आत्मा की ज्योति है। तप आत्मा का श्रृंगार है। उन्होंने कहा कि श्रमण संस्कृति तप प्रधान संस्कृति है तप श्रमण संस्कृति का प्राण तत्व है। जीवन की श्रेष्ठ कला है। तप जीवन का दिव्य आलोक है। शुरव...

तप के साथ ध्यान से कषाय बने उपशांत : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

पर्युषण पर्व में ध्यान दिवस बना तप दिवस तेरापंथ धर्मस्थल में तपस्या का मेला 30 तपस्वी भाई बहनों का एक साथ तपोभिनंदन पूर्वोत्तर भारत के गुवाहाटी में तपस्या का नया कीर्तिमान बना संवत्सरी महापर्व कल इस चातुर्मास में तपस्या का नया कीर्तिमान बन गया। गुवाहाटी में आज 30 तपस्वी भाई-बहिनों का एक साथ तपोभिनंदन का मेला लगा। इस अद्भुत मेले में 14 तपस्वी भाई एवं 16 तपस्विनी बहिनों का मुनिश्री डाॅ ज्ञानेंद्र कुमार जी मुनि श्री रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की ओर से अभिनंदन किया गया। पूर्वोत्तर भारत में एक साथ ऐसा तप अभिनंदन कभी नहीं हुआ। पर्युषण महापर्व के ध्यान दिवस एक तरह से तप दिवस के रुप में परिवर्तन हो गया। तेरापंथ समाज की सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से मंगलवार को प्रात: 9 बजे से स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में सामूहिक तपोभिनंदन समारोह का आयोजन हुआ। इस...

पर्युषण पर्व म्हणजे आत्मशुद्धीचा महामार्ग – प.पू. रमणिकमुनी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: जैन समाजातील सर्वात पवित्र व महत्वाचा मानल्या जाणार्‍या पर्युषण महापर्वाच्या निमित्ताने जालना शहरात आयोजित धार्मिक सभेत प.पू. रमणिकमुनी म. सा. यांनी आपल्या ओजस्वी प्रवचनातून पर्युषणाचा खरा गाभा उलगडून दाखवला.सभागृहात भाविकांची मोठी उपस्थिती होती. प्रारंभी मंगलाचरण, भजन व जिनवाणी पठणाने कार्यक्रमाची सुरुवात झाली. त्यानंतर प.पू. रमणिकमुनींनी आपल्या प्रवचनातून उपस्थितांना जीवनात आचारशुद्धी, क्षमा, संयम व आत्मपरिष्काराची आवश्यकता पटवून दिली. पर्युषण हा केवळ धार्मिक विधींचा किंवा बाह्य आडंबराचा विषय नाही. त्याचा खरा हेतू म्हणजे आत्म्याचे शुद्धीकरण. आत्म्याचे शत्रू बाहेर नसतात, तर ते आपल्या अंतःकरणात दडलेले असतात. राग, द्वेष, मत्सर, अहंकार आणि लोभ हेच खरे आंतरिक शत्रू आहेत. त्यांचा पराभव करण्यासाठीच पर्युषण हे पर्व एक साधन आहे, असे त्यांनी सांगितले.ङ्गजिनवाणीने हृदय शुद्ध ह...

क्षमा का पर्व समवत्सरी महापर्व: साध्वी संबोधि

संवत्सरी का महापर्व जन-जन के अन्तर्मानस में अभिनव जागृति का संदेश लेकर आता इसे क्षमा पर्व भी कहते हैं। संवत्सरी महापर्व का जो विशेष संदेश है, वह यह है कि व्यक्ति अपने भीतर में सम्पूर्ण जीव-जगत अर्थात् प्राणीमात्र के प्रति क्षमा का, समत्व का पवित्र भाव जागृत करें। आध्यात्मिक साधना में तभी प्राण पैदा होता है, जब समत्व और उपशम का भाव जीवन में स्थान पाता है। महापर्व संवत्सरी के अवसर पर व्यक्ति सम्पूर्ण जीव जगत को क्षमा देता है और क्षमा लेता है। खामेमि सव्वे जीवा, सव्वे जीवा वि खमन्तु में। मित्ति में सव्व भूएसु, वेरं मज्झं न केणइ ॥ मैं सम्पूर्ण जीव जगत से क्षमा माँग रहा हूँ, वे भी मुझे क्षमा करें। मेरी सभी प्राणियों के साथ मैत्री है, किसी के साथ मेरा वैर-विरोध नहीं है। साधक कामना करता है- क्षमापना का यह भाव, यदि जीवन में प्रविष्ट हो जाता है तो फिर किसी के साथ किसी भी प्रकार की कटुता की, कोई कल्...

पर्यूषण पर्व : कल्प चरित्रातून संयम व त्यागाचे दर्शन-प.पू. रमणिकमुनीजी म.सा. यांचे प्रवचन

जालना : शहरात सुरू असलेल्या पर्यूषण पर्वात आज सहावा दिवस उत्साहात व श्रद्धाभावाने साजरा करण्यात आला. प्रातःकाळी मंदिरात सामूहिक मंगलाचरण व अंतःकृत दशांग सूत्र पठणाने वातावरण पवित्रतेने भारून गेले. या मंगल प्रसंगी प.पू. रमणिकमुनीजी म.सा. यांच्या प्रवचनाचा भाविकांना लाभ झाला. आजच्या प्रवचनाचा विषय होता कल्पसुत्र चरित्रातून संयम व त्यागाचे दर्शन घडले. प.पू. रमणिकमुनीजी म.सा. यांनी सांगितले की, एयवंता कुमारांचा जन्म एका समृद्ध व ऐश्वर्यशाली राजघराण्यात झाला. लहानपणापासूनच त्यांच्या भोवती वैभव, सत्तेचा झगमगाट आणि भोगसुखांची रेलचेल होती. तरीदेखील त्यांच्या हृदयात वैराग्य आणि संयमाची बीजे रोवलेली होती. राजसिंहासनाच्या मोहिनीला दूर ठेवून त्यांनी धर्ममार्गाचा स्वीकार केला. आपल्या जीवनाला उच्च आध्यात्मिक उद्दिष्ट देत त्यांनी सांसारिक सुखांचा त्याग केला. साध्या जीवनशैलीत राहून, तप, संयम आणि धर्माचरणा...

जैन जगत के दैदीप्यमान ज्योतिपुंज नक्षत्र थे पूज्य गुरुदेव प्रवर्तक श्री अमर मुनि जी महाराज- डॉ श्री वरुण मुनि जी

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म . सा. ने अंतगड सूत्र के माध्यम से अतिमुक्त कुमार के कथानक पर सारगर्भित प्रकाश डाला। जन्म के साथ मृत्यु निश्चित है पर धर्म साधना, संयम,जप तप आराधना करके साधक अपनी मृत्यु को भी महोत्सव बना सकता है। संसार में संयम ही सार है बाकी सब असार है। सब यही रह जाने वाला है। जो साधक धर्म साधना आराधना कर लेते हैं वह इस दुर्लभ मानव जीवन को सफल बना लेते हैं। उन्होंने श्रुताचार्य साहित्य सम्राट वाणीभूषण परम पूज्य गुरुदेव प्रवर्तक श्री अमर मुनि जी महाराज के महान् संयमी जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर भारतीय प्रर्वतक श्री अमर मुनि जी महाराज श्रमण संघ के एक दैदीप्यमान ज्योतिपुंज नक्षत्र थे। बालक अमर ने बचपन में भारत पाकिस्तान को विभाजित होते देखा। श्रद्धानिष्ठ पिता श्री दीवान चंद जी मल्होत्रा और श्रद्...

विचारोकी निर्मलता, आचरण की पवित्रता मे धर्म है! धर्म प्रदर्शन मे नही, आत्म दर्शन मे है – साध्वी स्नेहाश्री जी म.सा.

आज पर्युषण पर्व के छठम दिवसपर अंतगड सुत्रका वाचन पु. श्रुतप्रज्ञा श्री जी म.सा ने किया! समवसरण यात्रा गुरुमॉं पु. चंद्रकला श्री जी म.सा. ने करायी एवं भगवान महावीर स्वामीजी के जीवन शैली पर अपनी बात रखी! धन है वे भाग्यशाली, धन और स्वास्थ्य वे सौभाग्यशाली, धन स्वास्थ्य, धर्म वे महाभाग्यशाली है ! धर्म स्वास्थ्य धन नही वे दुर्भाग्यशाली है! ज़िंदगी के साथ भी और ज़िंदगी के बाद भी साथ है एकमात्र धर्म! धर्म करने की उम्र नही होती! धर्म कल्पव्रु़क्ष समान है! धर्म धोका नही मौक़ा देता है! धर्म जीवन जिनेकी अदभुत कला है! चलो तोभी धर्मपुर्वक, बैठो तो भी धर्मपुर्वक, भोजन करो तो भी धर्मपुर्वक, भोजन बनाओ तो भी धर्मपुर्वक! यह बात कही साध्वी स्नेहाश्री जी म.सा. ने ! आज जंबुकुमार के जीवनपर आधारित नाटिका सादर की गयी! ग्रुहस्ती जीवन से संय्यम यात्रा तक की सफ़र दिखायी गयी! जंबु कुमार का पात्र साकार किया सौ माधुरी ...

जप करने से मन एकाग्र होता है : मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार

पर्युषण पर्व में जप दिवस का आयोजन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से सोमवार को पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का छठा दिन जप दिवस के रूप में मनाया गया। गौहाटी हाईकोर्ट के न्यायाधीश माननीय कल्याण जी सुराणा आज पर्युषण महापर्व के प्रवचन में मुख्य रूप से उपस्थित हुए। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने उपस्थित अपार जनमेदिनी को फरमाया कि जप का जीवन में काफी महत्व है, जप करने से मन एकाग्र होता है। जप के प्रभाव से बड़े से बड़े कार्य संभव हो सकते हैं। मुनि रमेश कुमार ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जप के प्रभाव से अनेक प्रकार की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। जप का मतलब मंत्र अथवा पद्य ...

ब्रह्मचर्य – आत्मोन्नतीचा राजमार्ग

प्रवचन – 25.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) बर्याचदा लोकांच्या मनात ब्रह्मचर्य हा शब्द आला की केवळ स्त्री–पुरुष संबंध न ठेवणे, इतकेच त्याचे स्वरूप समजले जाते. पण प्रत्यक्षात ब्रह्मचर्याचा अर्थ फार व्यापक आहे. ब्रह्मचर्य या शब्दाचा साधा अर्थ घेऊ तर ब्रह्म म्हणजे परब्रह्म, आत्मा; आणि चर्य म्हणजे आचरण. म्हणजेच आत्म्याशी संबंधित आचरण. ब्रह्मचर्य म्हणजे – इंद्रियांवर विजय मिळवणे. त्यांना नियंत्रणात ठेवणे. इंद्रियांच्या विषयांमध्ये अडकून न पडणे. आत्म्याचे स्वरूप जाणून त्यात रममाण होणे. आपल्या अंतरिक ऊर्जेचा अपव्यय न करता ती ऊर्जा आत्म्याच्या उन्नतीसाठी वापरणे. जेव्हा आपण इंद्रियांना स्वैर सोडतो तेव्हा मन विषयांमध्ये गुंतून जाते. डोळे सुंदर दृश्यात, कान गोड आवाजात, जिभेवर चविष्ट पदार्थात, नाक सुगंधात आणि त्वचा स्पर्शात गुंतते. हे गुंतणे म्हणजे आत्म्याचे ...

पर्यूषण पर्व पाचवा दिवस : अर्जुनमाली चरित्रातून संयम व आत्मशुद्धीचा संदेश-प.पू. रमणिकमुनीजी म.सा.

जालना : जालना शहरातील जैन समाजात सध्या सुरू असलेल्या पर्यूषण पर्वाचा आज पंचवा दिवस मोठ्या श्रद्धा, भक्तिभाव आणि उत्साहाने साजरा करण्यात आला. सकाळच्या मंगलाचरणाने व अंतःकृत दशांग सूत्र पठणाने या पावन दिवसाचा शुभारंभ झाला. आजच्या पंचम दिनाचा मुख्य आकर्षण ठरले प. पू. रमणिकमुनीजी म.सा. यांचे ओजस्वी प्रवचन. आपल्या गाढ ज्ञानाने आणि प्रभावी वाणीने त्यांनी अर्जुनमाली चरित्र कथन करून भाविकांना जीवनातील संयम, क्षमा आणि आत्मशुद्धीचे अनन्यसाधारण महत्त्व पटवून दिले. मुनीश्रींनी सांगितले की अर्जुनमाली हा सुरुवातीला साधा माळी होता. तो दररोज आपल्या बागेतून सुंदर फुले तोडून कुलदेवतेची भक्तिभावाने पूजा करत असे. परंतु एका दुर्दैवी प्रसंगाने त्याचे आयुष्य अंधःकारमय झाले. काही दुष्ट प्रवृत्तीच्या लोकांनी त्याच्या पत्नीवर कुदृष्टी टाकली आणि मंदिरात षड्यंत्र रचले. त्या अपमानामुळे संतापाच्या भरात अर्जुनमालीने हिं...

स्वाध्याय भवन में भादप्रद कृष्ण पक्खी पर्व तप-त्याग पूर्वक मनाया

चेन्नई के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में भादप्रद कृष्ण अमावस्या को पक्खी पर्व जप-तप- त्याग पूर्वक मनाया गया | आर नरेन्द्रजी कांकरिया व वीरेन्द्रजी ओस्तवाल द्वारा आलोयणा का पाठ किया गया | पक्खी पाक्षिक पर्व पर स्वाध्यायी बन्धुवर श्री गौतमचन्दजी मुणोत उम्मेद राजजी बागमार आर गौतमचन्दजी बागमार उच्छबराजजी गांग ,गौतमजी बागमार,शिखरजी छाजेड़ विराटजी छाजेड़ एच प्रकाशचन्दजी विशालजी ओस्तवाल पी वीरेन्द्रजी ओस्तवाल,मनीषजी तातेड़,जे.राजेन्द्रजी बागमार, गौतमचन्दजी बागमार, नवरतनमलजी प्रसन्नजी नाहर,मोहनलालजी कांकरिया सुरेशकुमारजी कांकरिया आर नरेन्द्रजी वी करणजी कांकरिया, दिलीपजी मुणोत,सी विमलचंदजी सुराणा महेन्द्रकुमारजी सुराणा मनिषजी सुराणा,राजेशजी गड़वानी, सूर्यप्रकाशजी चोरडिया जे कमलजी अरुणजी एन विकासजी चोरडिया, के सुनीलजी एस जिनेन्द्रजी सांखला एन राजेन्द्रजी कर्णावट आर महाव...

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