Sagevaani.com/चैन्नई। क्षमा से बड़ा संसार में कोई तप नहीं है। शुक्रवार साहुकारपेट जैन भवन मे श्री नवपद ओलीजी के अष्टमदिवस पर महासती धर्मप्रभा ने आयंबिल तप अराधको और श्रध्दांलूओ को श्रीपाल चारित्र सुनाते हुए कहा कि क्षमा ही धर्म है इसके समान संसार मे कौई तप नहीं है,और धर्म भी नहीं है। जब तक मनुष्य मे क्षमा करना और क्षमा मांगता नही आ जाता है तब तक वो महान नहीं बन सकता है । मनुष्य जीवन इतना लंबा और अटपटा है कि यदि क्षमा मांगने और देने का गुण व्यक्ति में नहीं है तो उनका जीवन बड़ा कष्टकारी बन जाता है। मांगने से अहंकार खत्म हो जाता है, जबकि क्षमा करने से संस्कार बनते हैं। शीलवान का शस्त्र, प्रेम का परिधान और नफरत का निदान है क्षमा करने के लिए व्यक्ति को अपने अहम को खत्म करना पड़ता है और एक सहनशील,संतोषी व्यक्ति ही कर सकता है। वही इंसान जगत मे महान और पूज्यनीय बनता है। साध्वी स्नेहप्रभा ने भगवान म...
चेन्नई स्थित नॉर्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी का चातुर्मास प्रभावी रूप से चल रहा है। इसी अवसर का लाभ उठाते हुए Sagevaani.com ने जयतिलक मुनीजी के साथ धर्म और चातुर्मास से जुड़े मुद्दों पर साक्षात्कार किया। प्रस्तुत है उसके कुछ अंश। प्रश्न: चातुर्मास का उद्देश्य? उत्तर: एक जैन धर्म के अनुसार जैन साधु का एक वर्ष में बिहार के नव कल्प जिनेश्वर देवों ने फरमाएँ हैं। उन नव कल्पों से 8 कल्प 29 दिन का और एक नवां कल्प चार महिने का है। इस लिए साधु नवकल्प बिहारी कहलता है। चातुर्मास के चार महिने के अलावा 8 कल्प के अनुसार किसी भी धर्म स्थान में ज्यादा से ज्यादा 29 दिन ही रुक सकते है उस के बाद उस स्थान से विहार करना अनिवार्य है। यह आठ महिने गर्मि और सर्दी के दिनों में साधु-साध्वी को बिहार यात्रा करते रहते हैं। जब वर्षा काल के चार महिने तक एक ही स्थान में ठहरकर साधुगण अपनी आत्मा साधना कर कर्म रज मुक्त ...
Sagevaani.com/चैन्नई। सत्य ही ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है गुरूवार को जैन भवन साहुकारपेट में महासती धर्मप्रभा ने आयंबिल ओली तप की तपस्या करने वालें साधको और श्रध्दालुओं को श्रीपाल चारित्र का वांचना हुए कहा कि धरती पर कोई भी जीव अमर नहीं है। शरीर का अस्तित्व आत्मा के बिना नहीं है और आत्मा का अस्तित्व होते हुए भी उसे अनुभव नहीं किया जा सकता है। इस सत्य को मनुष्य जितना जल्दी स्वीकार लेवें और मानकर जीवन जीने लग जाए तो वह संसार के दुखों से छुटकारा प्राप्त कर सकता है। साध्वी स्नेहप्रभा ने भगवान महावीर स्वामी की अंतिम दिव्य देशना श्रीउत्ताराध्यय श्रुतदेव के नवे अध्याय अज्यझयणं नमिपव्वाज्जा का वर्णन करतें हुए कहा कि आत्मा भगवान के समान है और शरीर दुःख के समान है इस संसार मे मनुष्य स्वार्थ को रोता है जीवन को खो देता है। आत्मा पर विजय प्राप्त करने वाला मनुष्य ही अपने जीवन को सार्थक बनाकर श अपनी आत्म...
नवपद ओली आराधना के सातवें दिन बिन्नी नोर्थटाउन के श्री सुमतिवल्लभ जैन संघ में बिराजित आचार्य श्री देवेंद्रसागरजी ने ज्ञान पद की महत्ता को उजागर करते हुए कहा की ज्ञान के बिना सारी क्रियाएं अधूरी है तथा ज्ञान के बिना मोक्ष भी संभव नहीं है। सिर्फ ज्ञान आने से जीवन में बदलाव नहीं आता बल्कि उसका अनुसरण करने से आता है।आचरित करने वाला ज्ञान ही मनुष्य को प्रकाश का मार्ग दिखाता है। ज्ञान लोगों को शक्ति प्रदान करने वाला सबसे अच्छा और उपयुक्त साधन है, ज्ञान वह प्रकाश है जिसे पृथ्वी पर किसी तरह के अंधकार द्वारा दबाया नही जा सकता है। उन लोगों पर निश्चित पकड़ बनाने के लिए, जिन्हें समझ नहीं है, ज्ञान लोगों को सामाजिक शक्ति प्रदान करता है। ज्ञान और शक्ति एक व्यक्ति के जीवन की विभिन्न कठिनाइयों में मदद करने के लिए सदैव साथ में चलती है। हम यह कह सकते हैं कि ज्ञान शक्ति देता है, और शक्ति ज्ञान प्रदान करती है...
साध्वी नूतन प्रभाश्री ने उत्तराध्यन सूत्र का किया वाचन Sagevaani.com/शिवपुरी ब्यूरो। 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने जीवन के अंतिम समय में गौैतम स्वामी को निरंतर 48 घंटों तक देशना दी थी। इसी देशना को उत्तर अध्ययन सूत्र के रूप में संग्राहित किया गया है। भगवान महावीर की अंतिम देशना को अपने जीवन में उतारकर सांसारिक, पारिवारिक और आध्यात्मिक जीवन को सुखद बनाया जा सकता है। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने उत्तराध्यन सूत्र का वाचन कर और उसकी व्याख्या करते हुए व्यक्त किए। धर्मसभा में इंदौर और धार से पधारे जैन श्रावकों का जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ की ओर से बहुमान किया गया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि भगवान महावीर की अंतिम देशना उत्तराध्यन सूत्र में 32 आगमों का सार है। उत्तराध्यन सूत्र जैन धर्म की गीता है। उन्होंने बताया कि उत्तराध्यन सूत्र में 36 अध्याय है और प्रथम अ...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी महाराज ने ज्ञान पद की विवेचना करते हुए कहा कि कालचक्र, कर्मचक्र और कषायचक्र के कारण आत्मा संसार में भ्रमण कर रही है। नवकार के नवपद में अनंत शक्ति रही हुई है। ज्ञान को दीपक की उपमा दी गई है। जीवन को प्रकाशमय बनाना है तो ज्ञान का होना परम आवश्यक है। ज्ञान जीवन का मूलमंत्र है। सम्यक् ज्ञान के बिना हमारा जीवन अधूरा है। सम्यकदर्शन की प्राप्ति सम्यकज्ञान के लिए आवश्यक है। सम्यकज्ञान सम्यकदर्शन को निर्मल और उज्जवल करता है और चारित्र के शुभ परिणामों को उत्पन्न करता है। ज्ञान तीन बताए गए हैं इंद्रियों के द्वारा होता हुआ ज्ञान, मन के द्वारा होता हुआ ज्ञान और आत्मा के द्वारा होता हुआ ज्ञान। चार प्रकार के ज्ञान आत्मा के पास हो सकते हैं संवेदन ज्ञान, विषय प्रतिभास ज्ञान, व्यवहार ज्ञान और तत्व...
लालगंगा पटवा भवन में गूंज रहे हैं महावीर के अंतिम वचन आज का लाभार्थी : श्री भीखमचंदजी प्रदीपजी दिलीपजी अभिषेकजी गोलेच्छा परिवार Sagevaani.com/रायपुर। मौत रुलाती है रोने वालों को, मौत जगाती है जागने वालों को। जो दूसरे की मौत पर रोते हैं, वे कभी जाग नहीं पाते। जो मृत्यु को देखकर जाग जाते हैं, वे मंजिल पर पहुंच जाते हैं। जैसे स्थूलिभद्र अपने पिता की मौत के बाद रोया नहीं, जाग गया और उसने भोग-वासना के जीवन का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाया। लालगंगा पटवा भवन में उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के तीसरे दिन गुरुवार को उत्तराध्ययन सूत्र गाथा 4-5 संथारा अथवा सल्लेखना का उपाध्याय प्रवर ने वर्णन किया। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि जीवन में जो प्रमाद करता है उसके लिए जीवन बोझ बन जाता है। मनुष्य स्वयं की मृत्यु को नजरअंदाज कर धन-वैभव को इ...
लालगंगा पटवा भवन में गूंज रहे हैं महावीर के अंतिम वचन Sagevaani.com/रायपुर। लालगंगा पटवा भवन में श्रीमद् उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के दूसरे दिन बुधवार को परमात्मा के सूत्रों को बताते हुए उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि विनय संकट में समर्थ बनने के लिए। विनय का वरदान जिसके पास होता है वह संकट को शक्ति का केंद्र बना लेता है। कैसे संकटों को शक्ति केंद्र बनाया जाता है, प्रभु महावीर निर्वाण कल्याणक की देशना में एक अनूठा सूत्र दे रहे हैं कि संकट की भक्ति मत करो, अनजाने में इंसान समस्या की भक्ति करता है। प्रभु कहते हैं कि समस्या से मुक्त हो जाओ। और कैसे समस्या से मुक्त होना इसके अनूठे सूत्र प्रभु ने फरमाए, जिन्हे सुधर्मा स्वामी ने पवित्र अक्षरों में सुरक्षित किया। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी है। प्रभु महावीर यह वरदान किसी को नहीं देते है कि तेरे जीवन में कभ...
अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल अधिवेशन में चेन्नई तेरापंथ महिला मंडल की सहभागिता Sagevaani.com/चेन्नई : परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य में नंदनवन प्रांगण में 48वां राष्ट्रीय अधिवेशन राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती नीलम सेठिया के अध्यक्षता में सानंद संपन्न हुआ। त्रिदिवसीय अधिवेशन के दौरान आचार्य प्रवर, साध्वी प्रमुखाश्री, साध्वीवर्याजी का निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रेरणापाथेय प्राप्त हुआ। चेन्नई से अध्यक्षा लता पारख, निवर्तमान अध्यक्षा पुष्पा हिरण, मंत्री हेमलता नाहर, उपाध्यक्ष रीमा सिंघवी, प्रचार प्रसार मंत्री उषा धोखा, परामर्शक उषा बोहरा कुल छह बहनों ने इस अधिवेशन में भाग लिया।अधिवेशन के दौरान 2022- 2023 के एक वर्षीय केंद्र द्वारा दिए गए करणीय कार्यों का आकंलन हुआ। इस दौरान चेन्नई महिला मंडल को 7 अवार्ड प्राप्त हुए। इस कार्यकाल के दौरान समय-समय पर सभी चारित्र आत्माओं का मार्गदर्शन...
नवपद के छठे दिन बिन्नी के नोर्थटाउन जैन मूर्तिपूजक संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने सम्यग्दर्शन पद पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा की भगवान महावीर ने सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र को मोक्ष का मार्ग बताया है। दर्शन के बिना ज्ञान नहीं होगा व ज्ञान के बिना चारित्र नहीं होगा। लेकिन हम मात्र चारित्र को महत्व दे रहे हैं। मोक्ष मार्ग की साधना में यदि सम्यक दर्शन होगा तो चारित्र शृंगार बन जाएगा। उन्होंने कहा कि जिसे सम्यक दर्शन हो जाता है वह जड़-चेतन के भेद को भलीभाँति जान जाता है। उसे शरीर और शरीर के साथ जुड़े हुए सम्बन्धों की नश्वरता का सदैव भान रहता है। संसार की वास्तविकता को समझने के लिए हमें परमात्मा के वचनों से प्रेम करना होगा। जो सुख में लीन और दुख में दीन नहीं बनता वही सम्यक्त्वी है। आज जो हमारा पुण्य चमक रहा है वह कल अस्त भी हो जाएगा। सम्यक दर्शन ही मोक्ष का मार्ग ...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने नवपद आराधना के छठे दिन सम्यक दर्शन के पवित्र दिन पर कहा कि सम्यक दर्शन का अर्थ है सच्ची और परिपूर्ण श्रद्धा, सत्य तत्वों में गहरी आस्था, सही दृष्टि इत्यादि। जिनवाणी पर अटूट श्रद्धा होने पर ही जीव सम्यकदर्शन का अनुभव कर सकता है और मिथ्यात्व से सावधान हो सकता है। ज्ञानी कहते हैं कि सम्यकदर्शन के बिना सम्यकज्ञान, सम्यकचारित्र संभव नहीं हो सकता। सम्यकदर्शन का अवतरण आत्मोन्नति की प्रथम सीढ़ी है। सम्यकदर्शन पद में चार श्रद्धा, दस विनय, पांच लक्षण सहित 67 गुण होते हैं, जो मोक्षमार्ग के आलंबन है। मोक्ष पद की प्राप्ति हेतु सम्यक्त्व होना ही चाहिए। सम्यक्त्व के चार लक्षण अनुकंपा, आस्तिकता, समता और संवेग बताए गए हैं। उन्होंने कहा शासन की स्थापना अरिहंत करते हैं। सिद्ध भगवंत हमारे लक्ष्य...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि संसार के जीवों को भव सागर से तारने के लिए भगवान महावीर ने ऐसे धर्म का निरूपण किया और ऐसा पाठ्यक्रम बनाया जिसे अपनी इच्छानुसार अनुसरण करने का निश्चय जीवों पर छोड़ दियाl जिसने भी इस धर्म का व्रतों का चाहे पूर्ण रूप से, चाहे आंशिक रूप से पालन किया या पालन करेगा वह अवश्य ही भव सागर से पार हो सकेगा। दिशाओं की मर्यादा कर उपभोग – परिभोग के साधनों की मर्यादा करने में कोई कठिनाई नहीं होती। आसानी से ये व्रत धारण कर सहज ही पाप बंध से बचा जा सकता है। विपरीत द्रव्यों के मेल से बने पदार्थों के खाने से शरीर में विकार उत्पन्न होते है। आनन्द श्रावक के 26 बोलो की जीवन पर्यन्त के लिए ऐसी मर्यादा रखी कि उन्हें 14 नियम प्रतिदिन चितारने की आवश्यकता नही पड़ी हमें भी ऐसी मर्यादा रखने की प्रेरणा लेनी चाहिए।