मनुष्य को सामाजिक प्राणी कहा जाता है इसका अर्थ है मानव समाज के लिए है तथा समाज मानव के लिए हैं. दोनों का अस्तित्व पूरी तरह से एक दूसरे पर आश्रित है पूरक हैं. उपरोक्त बातें श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन देते हुए कही, वे आगे बोले कि मानव ने स्व भावना का त्याग कर पर भावना को आधार बनाकर समाज बनाया तो समाज ने भी मानव के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका अदा की. इस तरह समाज व परिवार एक दूसरे से अभिन्न बन गये. किसी राष्ट्र या वर्तमान के देशों का स्वरूप भी इसी तरह निर्मित हुआ, व्यक्ति से समाज, समाज से नगर और नगर से छोटे छोटे राज्य और राष्ट्र का निर्माण हुआ. समाज के बगैर व्यक्ति का अस्तित्व उतना ही है जितना किसी पेड़ से पृथक हुए पत्ते का हैं. व्यक्ति अपना चहुमुखी विकास समाज में रहकर, उसके संसाधनो का उपयोग करके, सुविधाओं का उपभोग करके...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीजी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने नवपद के गुणों की विवेचना करते हुए कहा कि अरिहंत परमात्मा का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे मार्गदर्शक है। मार्गदर्शक यानी यथार्थ प्ररूपणा, स्यादवाद आदि। यह कार्य कोई दूसरा नहीं कर सकता। ज्ञानावरणीय कर्मों का क्षय होने पर ही परमात्मा केवलज्ञानी बन सकते हैं। वे जीवात्मा की पात्रता, सामर्थ्य और समय देखकर उसे धर्म का मार्ग बताने की प्रेरणा देते हैं। सिद्ध भगवंतों का गुण है कि वे अविनाशी है। अविनाशी यानी जिस सुख का कभी विनाश न हो। उन्हें अंदर का आनंद ही रहता है। जो सुख आने पर कभी जाता नहीं हो। आचार्य का गुण आचार शुद्धि व आचार संपन्नता है। ज्ञानी कहते हैं ज्ञान दिखता नहीं है, आचार दिखता है। उपाध्याय का गुण विनय होता है। साधु का गुण यह होता है कि वे ज्ञान, तप, प्रवचन, भक्ति में म...
नार्थ टाउन के ए यम के यम स्थानक में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बंधुओ :- चार अंग संसार में दुर्लभ है। पहला है मनुष्य जन्म, ये मनुष्य जन्म अनन्त -2 समय तक संसार में परिभ्रमण कर, प्रबल पुण्यवाणी होने पर पाता है। निगोद में जीव एक समय में 17 बार जन्म-मरण करता है। फिर भी मुक्त नहीं हो पाता। इतने जन्म-मरण के बाद भी निगोद में जीव को रहना पड़ता है । भयंकर वेदना निगोद मे मिलती है। ऐसी वेदना को सहन करते हुए जीव अकाम निर्जरा करता है। पुण्यवाणी को बढ़ाता है। पुण्यवाणी होने पर भी जीव आसानी से व्यवहार राशि में नहीं आ पाता। जब संसार से एक जीव मुक्त हो मोक्ष में जाता है तब निगोद से एक जीव व्यवहार राशि में आता है। मोक्ष की ओर ले जाने वाला और संसार से तारने वाला एक मात्र धर्म ही है । धर्म-ध्यान सिर्फ मनुष्य गति में ही कर सकते है। व्यवहार राशि में भी आने पर जीव स्थावर काय, तिर्यंच इन सबक...
राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु (रजत) की ओर से राजस्थानी बाजार की शुरुआत 28 व 29 अक्टूबर को किलपाक स्थित सेंट जार्ज स्कूल के विंग्स कन्वेशन सेंटर में की गई। मुख्य अतिथि तमिल सिनेमा की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री कलैमामणी सुकन्या रमेश एवं विशिष्ट अतिथि नीलिम रानी एवं रेफेक्स इंडस्ट्रीज के डाइरेक्टर जगदीश बूरड़ ने फीता काट कर बजार का शुभारंभ किया। अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने सभी का स्वागत किया। राजस्थानी बाजार में राजस्थानी संस्कृति की झलक देखने को मिली। शनिवार को शाम होते होते बड़ी संख्या में खरीदार उमड़ पड़े। इस दिन मिडनाइट तक शापिंग हुई। रविवार तक चलने वाले इस बाजार का विशेष आकर्षण राजस्थानी कल्चरल शो रहा। बाजार में एयरकंडीशन्ड हाल में ज्वेलरी के लिए बनाया गया। विजिटर फैशन, डेकर, एक्सक्लूसिव पैवेलियन बनाया गया। राजस्थानी बाजार में एक सौ पचास से अधिक स्टाल थे। राजस्थानी प्रदर्शनी में रविवार को बड़ी संख्य...
साध्वी जी ने बताया कि ढाई हजार वर्ष वाद भी प्रासंगिक है भगवान महावीर की वाणी Sagevaani.com/शिवपुरी। भगवान महावीर स्वामी ने उत्तराध्यन सूत्र में फरमाया है कि अपने असंस्कृत जीवन पर लेश मात्र भी प्रमाद न करो। जब वृद्धावस्था का प्रकोप आता है तथा शरीर पर रोगों का आक्रमण होता है। उस समय कोई रिश्तेनाते काम नहीं आते। सिर्फ धर्म की शरण ही काम आती है। इसलिए समय से पहले धर्म को अपने जीवन का अंग बना लो। उक्त बात साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने जिन वाणी का वाचन करते हुए व्यक्त की। इससे पूर्व साध्वी जयश्री जी ने प्रभू महावीर की वाणी सभी दुखड़े मिटाती है, भजन का गायन कर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने अपने संबोधन में कहा कि जिनवाणी चाहे मन से सुनो अथवा विना मन से सुनो वह दोनों ही स्थिति में कल्याणकारी होती है। उन्होंने कहा कि पुण्यात्मा वह होता है जो जिन वाणी सुनने के लिए तैयार र...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि जीवन में जलाए आत्म जागरण का दीप मेरी प्रभु जीवन के अच्छेयों को बाद में देखना पहले बुराइयों का सामना तो कर लो जीवन में जो अंधकार समय है उसे रख लो अस्त प्रवृत्तियों को भली-भांति पहचान लो ऐसा कर लेने पर संसार में रहकर भी तुम आनाशक्त जीवन की सकोगेl अनासक्ति जीवन शरीर संबंध के साथ नहीं है और नहीं लाल पीले सफेद वस्तुओं के साथ हैl इन श्वेत वस तोको धारण करके भी व्यक्ति आ सकती के कीचड़ में जी सकता हैl इन रंगीन वेस्टन के साथ भी व्यक्ति आना शक्ति योगी हो सकता है संसार में ऐसे जियो जैसे कीचड़ में कमल पैरभले ही संसार में हो पर मस्तिक आकाश में रहना चाहिएl आपने देखा व्यक्ति 70 वर्ष का हो जाए तब भी मेर...
Sagevaani.com/चैन्नई। आत्मा का कल्याण ज्ञान दर्शन चारित्र से ही होगा। रविवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने स्वाध्यायो के सम्मान समारोह मे श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस मनुष्य मे ज्ञान दर्शन और चारित्र के गुण नहीं वह जीवन का निर्माण और आत्मा का कल्याण नहीं करवा सकता है। ज्ञान दर्शन और चारित्र की आराधना करने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। साध्वी स्नेह प्रभा ने श्रीमद उत्तराध्ययन सूत्र के बारवें अध्याय का अर्थ बतातें हुए कहा कि मनुष्य की पहचान जाति से नहीं उसके आचरण व्यहवार और गुणों होती है। जाति मनुष्य कितनी भी निची क्यों न हो पर कर्म अगर उसके उच्च के है तो ऐसे साधक पुरूष को जाति का बंधन भी मुक्ति के मार्ग मे बाधा नहीं बनता है और ऐसे सिध्द पुरूष को देवता भी शीश झुकाते है और उसके गुणागान करते है। साहुकार पेट श्रीसंघ के कार्याध्यक्ष महावीरचन्द सिसोदिया ने...
जिन वाणी का वाचन करते हुए साध्वी जी ने बताया कि मनुष्य होना आसान है, लेकिन मनुष्यत्व होना मुश्किल Sagevaani.com/शिवपुरी ब्यूरो। दीपावली की रात्रि को भगवान महावीर दो दिन की धर्मदेशना के पश्चात मोक्ष को प्राप्त हुए थे। उनकी अंतिम देशना उत्तराध्यन सूत्र में उल्लेखित है। भगवान की अंतिम देशना का वाचन करते हुए प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि मनुष्य होना आसान है लेकिन मनुष्यत्व को प्राप्त करना मुश्किल है। मनुष्य का जीवन तब सार्थक होता है जब वह इंसानियत की कसौटी पर अपने आपको खरा साबित करे। साध्वी जी ने अपने प्रवचन में इंसानियत का क्या पैमाना होता है, इसे भी विस्तार पूर्वक बताया। धर्मसभा में साध्वी वंदनाश्री जी ने श्रद्धा से भजो महावीर, नैया तेरी भव से पार लगेगी, भजन का गायन किया। धर्मसभा में बाहर से पधारे श्रावकों का जैन श्री संघ ने सम्मान किया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि भगवान कहते है जिस काम का जो काल हो उस समय वह कार्य पूर्ण कर लेना चाहिए। प्रमाद नहीं करना चाहिए। शास्त्रो में कहा गया है कि रात्रि भोजन त्याग जरूरी है। साधु के लिए रात्रि भोजन तो निषेध है ही पर गृहस्थ के लिए भी यही निर्देश है, पर आज गृहस्थों में शिथिलता आ गई है। परिमित भोजन करने से शरीर स्वस्थ रहता है। धक्का-मुक्की करते हुए किसी भी समारोह में आहार ग्रहण करना सभ्यता नही है। विवेक पूर्वक आचरण करना चाहिए। आहार की प्रशंसा नही करनी चाहिए अन्यथा कर्म बंध की सम्भावना रहती है। इसलिए ज्ञानीजन कहते है। भोजन करते समय मौन रखना चाहिए जिससे राग द्वेष से बचा जा सकता है। विनीत शिष्य को आज्ञा देकर काम करवाना सरल होता है परन्तु अविनीत शिष्य से काम करवाना कठिन होता है शिष्य को चाहिए कि वह न गुरू को कृपित करे और न ही स्वयं कुपित हो । सदैव अपने गुरु ...
ब्यावर एसोसिएशन ट्रस्ट मद्रास के कार्यक्रम एस एस खेतपालिया फाउंडेशन कविता अनुराधा पौडवाल एवं जोली मुखर्जी ने दी प्रस्तुति ब्यावर एसोसिएशन ट्रस्ट मद्रास का 28 अक्टूबर को जीवन आनंद योजना फंड संकलन एवं दिवाली मिलन हेतु कार्यक्रम लेडी अंडाल सभा हाल चेतपेट में किया कार्यक्रम में कविता पौडवाल जोली मुखर्जी मदन मोहन शुक्ला मधुरा देशपांडे और अनुराधा पौडवाल टीम के साथ मिलकर नायाब संगीत मय प्रस्तुति दीl इस कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक श्री एस एस खेतपालिया फाउंडेशन के श्री सुनील जी खेतपालिया , एम आइ लाइफ़स्टाइल के श्री प्रवीण जी चंदन, ए एम एस बुलियन के श्री पुखराज जी बडोला दीपचंद जी लूनिया पप्पुसा एवं मार्गदर्शक श्री सुभाष जी रांका अध्यक्ष श्री राजकुमार जी कोठारी चेयरमैन श्री सुरेश जी लुणावत को चेयरमैन श्री अजीत जी गोठी, महासचिव श्री अजय नाहर, कोषाध्यक्ष श्री राजेश बोहरा , बी वाइ ए के अध्यक्ष राकेश नाह...
Sagevaani.com/चेन्नई: आज रविवार 29 अक्टूबर 2023 को आचार्यश्री हमीरमलजी म.सा की पुण्यतिथि सामायिक दिवस के रुप में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट,चेन्नई में मनाई गई | धर्मसभा में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने पूज्य आचार्यश्री हमीरमलजी म.सा के गुण स्मरण करते हुए कहा कि नागौर में श्री नगराजजी -ज्ञानदेवीजी गांधी के यहां जन्में हमीरमल के ऊपर से गयारह वर्ष की वय में ही पिताजी का साया उठ गया | अपनी मातुश्री के संग पीपाड़ शहर में ननिहाल में आपका लालन- पालन हुआ | रत्नवंशीय महासती श्री बरजूजी म.सा का संयोग मिलने पर आपकी मातुश्री को वैराग्य प्राप्त हुआ व आचार्यश्री रतनचंद्रजी म.सा के पास बर के समीप ही बिरांटिया ग्राम में अपने पुत्र हमीरमल को दीक्षित करने के पश्चात आचार्य हस्तीमल की मातुश्री रूपादेवी की तरह आप भी दीक्षित हो गयी | नवदीक्षित हमीरमलजी म.सा के घ...
Sagevaani.com/चेन्नई. बिन्नी के श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन बड़ा अमूल्य है। इसमें संसार का सौंदर्य भरा हुआ है, पर उसका आनंद तभी मिल सकता है जब जीवन जीने की कला को समझें। अध्यात्म जीवन जीने की कला सिखाता है, यह एक दिव्य विधा है। यह मनुष्य को हर दुख, कष्ट, विपत्ति और चिंता से छुटकारा दिलाकर आनंद से सराबोर करता है। केवल कुछ समय के लिए नहीं, बल्कि काल की सीमाओं से परे जाकर अनंत काल के लिए। अध्यात्म आत्मा का विज्ञान है। इसे कहीं बाहर नहीं खोजना है, बल्कि इसकी कुंजी हमारे अपने ही भीतर है। अध्यात्म का अर्थ है अपने मूल स्वभाव में लौटना जहां शांति, आनंद और स्थायी समाधान है। अध्यात्म तनावग्रस्त मन को शांति प्रदान करता है। अध्यात्म का संपूर्ण जोर इस बात पर है कि व्यक्ति अपनी मूर्छा से जागे और जान ले कि वह शुद्ध और बुद्...