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भ्रम से मुक्ति ही धर्म का उद्देश्य एवं सफलता हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣6️⃣ 🪔 276) भ्रम से मुक्ति ही धर्म का उद्देश्य एवं सफलता हैं.! 277) पापकार्य से दुख एवं पुण्य से अनुकूलता मिलती हैं धर्म से पुण्य,अधर्मसे पापबंध..! तो आप क्या अपनाओगे.? धर्म या पाप..? आपके जवाब से आपका स्तर तय होगा.! 278) वर्तमान में समत्वपूर्वक दुख सहन करेंगे तो भविष्य के आर्तध्यान से मुक्ति मिल जावेगी…! 279) ज्ञानशून्य क्रिया सात्विक नही हो सकती.! 280) परमात्मा पधारेंगे तो पाप स्वतः चले जायेंगे.! जैसे सूर्य के आगमन से अंधेरा विलीन हो जाता हैं.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

स्मृति के पाप सातवीं नर्क तक ले जा सकते है

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣5️⃣ ⚡ 271) स्मृति के पाप सातवीं नर्क तक ले जा सकते है..! 272) मानव भव की महिमा पाप त्याग से हैं.! 273) वीतराग का धर्म वीतराग बनने के लिए हैं.! रागवान बनने के लिए नही.! 274) समकित वासित भावधारा के बल से अनंत पुद्गल परावर्तन में संचित कर्मो का पल में नाश हो जाता हैं.! 275) क्रिया कितनी भी श्रेष्ठ शुद्ध विधिसंपन्न हो लेकिन मन में मलिनता है तो कोई सार नही है ऐसी क्रिया का.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

आज ऋषि जी रांका के 9 की तपस्या का पारणा हुआ

!जयआत्मानन्द-देवेन्द्र-शिव-महेन्द्र!   जयगुरू अम्बेश-जय गुरु इंद्र-जय गुरु मगन-जय गुरु सौभाग्य-जय गुरु मदन के पठ्धर सुशिष्य *मेवाड़ भास्कर उप प्रवर्तक युवामनीषी परम् पुज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी म.सा. करुणाकर* नवदीक्षित श्री हर्षित मुनि जी मा.सा आदि ठाणा के आर्शिवाद से मंगलवाड़ के *नितिन जी रांका के पुत्र ऋषि रांका जो 14 साल का छोटा सा बालक जो गुरु भक्ती मे 9 की तपस्या करी* 🙏   आज ऋषि जी रांका के 9 की तपस्या का पारणा हुआ 🙏🖊️   तप के सेवन से ही देह की ममता का त्याग, रसना जय व कषाय जय से कर्म क्षय होता है। कर्मक्षय से आत्मा शुद्ध आत्मा बन अजरामर मुक्ति प्राप्त करती है। 🙏🖊️

कषाय मुक्ति से ही प्राप्त होता साधना का शिखर : मुनि हिमांशुकुमारजी

Sagevaani.com /चेन्नई: साधना के मार्ग पर बढ़ने के लिए कषाय मुक्ति जरूरी है। अन्य दोस्त, सम्बंधी कुछ समय, वर्ष या जन्मों के हो सकते है, लेकिन कषाय अनन्त काल से, जन्मों से हमारे साथ बंधा हुआ है, दोस्त बना हुआ है। उसके कारण हम अपने आत्म स्वरूप को नहीं पहचान पाए। उपरोक्त विचार आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री हिमांशुकुमारजी ने तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट में ‘कषाय मुक्ति’ प्रवचनमाला के अन्तर्गत धर्मपरिषद् को कहें।  मुनिश्री ने कहा कि कषाय के चार प्रकार में अनन्तानुबन्धी (कोध्र, मान, माया, लोभ) भव भम्रण को बढ़ाता रहता है। सम्यक्त्व की प्राप्ति नहीं होती है। अप्रत्याख्यानी कषाय में व्यक्ति गलती को जानता है, मानता है। फिर भी वह त्याग नहीं कर पाता। श्रावक नहीं बन पाता। तीसरे प्रत्याख्यानी कषाय में वह कुछ त्याग करता है और चौथे संज्वलन कषाय में व्यक्ति साधु बनकर पूर्ण कषायों से ...

पानी का जमाव ना होने दें: फतेहराज जैन

आज ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन, राजस्थान पत्रिका, एक्सनोरा इंटरनेशनल द्वारा स्वच्छ भारत मिशन, पर्यावरण संरक्षण के बारे में जानकारी देने के लिए श्री सुराना जैन विद्यालय पार्क टाउन में आयोजन किया गयाl मुख्य अतिथि डाक्टर टी जी श्रीनिवासन हेल्थ एजुकेशन ऑफिसर ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने स्वस्थता के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि, इस तरह सभी विद्यार्थियों को इस अभियान द्वारा दी गई। जानकारी का पालन करना चाहिए स्कूल की प्रधान अध्यापिका ससिकला ने स्वागत भाषण के साथ पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देते हुए सभी विद्यार्थियों से आग्रह किया कि इस और ध्यान देना हमारा कर्तव्य है। इस मौके पर नॉर्थ चेन्नई सचिव फतेहराज जैन ने स्वस्थता के कई गुणों की जानकारी देते हुए कहा कि हमे अपने घर, स्कूल, ऑफिस, सार्वजनिक जगह कही पर भी पानी का जमाव ना होने दें जीस से मच्छर पैदा हो ओर कई तरह की बीमारियां हो बिना जरू...

जन्म के साथ आयी वस्तु है श्रध्दा: साध्वी डॉ. मेघा़श्री जी

अहंकार लेकर परमात्माकी भक्ति नहीं की जा सकती, श्रध्दा विनम्रता से भक्ति हो सकती! जन्म के साथ आयी वस्तु है श्रध्दा! – साध्वी डॉ. मेघा़श्री जी आकुर्डी स्थानक भवन मे आज “ पुच्छिसुणं” जाप का चौथे अध्याय का संपुट हुआ! “ श्रध्दा” विषयपर जिनवाणी सुनाते वक़्त डॉ. मेघा़श्री जी ने श्रध्दा के दो प्रकारों की अंधश्रध्दा एवं सम्यक श्रध्दा की विस्तृत जानकारी दी! श्रध्दा रुपी बाती मे ज्ञानरुपी तेल से ज्ञानप्रकाश मिलता है! आज रितेश जी डुंगरवाल के 9 उपवास के प्रत्याख्यान हुये! रितेश जी का सन्मान तपस्या के बोली से हुआ ! संघ द्वारा रजत मुंद्रा दे उन्हें गौरन्वित किया और जैन सोशल ग्रुप पुना सेंट्रल के 45 धर्मप्रेमी भाई बहन अध्यक्षा श्रीमती मधुमती चोरडीया, निवर्तमान अध्यक्षा मंगला जी टाटीया एवं विहार सेवक रविंन्द्र जी बलाई के नेत्रुत्व मे दर्शनार्थ पधारे! डॉ. मेघा़श्री जी एवं डॉ. राज श्री जी का उद् बोधन एवं मां...

लक्ष्य की ओर गतिशील रहना ही विकास : डॉ साध्वी गवेषणाश्री

31वें विकास महोत्सव का हुआ आयोजन   Sagevaani.com /चेन्नई: युवामनीषी आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी डॉ गवेषणाश्री जी के सान्निध्य में तीर्थंकर समवसरण, जैन तेरापंथ नगर, माधावरम्, चेन्नई में 31वें ‘विकास महोत्सव’ का कार्यक्रम आयोजित हुआ।  साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्री जी ने कहा कि विकास उद्धर्वारोहण की प्रक्रिया है। बीज का विकास बरगद है। मंजिल का विकास उसकी नींव है। नींव कमजोर हो तो विकास का सपना व्यर्थ है। आचार्य भिक्षु ने बीज बोया, उसे पल्लवित करने में अनेक आचार्यों का योगदान रहा है। तेरापंथ धर्मसंघ ने अकल्पनीय सर्वांगीण विकास किया। उसमें आचार्य श्री तुलसी का श्रम, प्रेरणा और प्रोत्साहन आधार बना। लक्ष्य की ओर गतिशील रहना ही विकास है।  साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा कि जिसके पास कर्मजाशक्ति, निर्णयशक्ति, इच्छाशक्ति और पुरुषार्थशक्ति हो तो वह विकास के चरम शिखर पर पहुंच...

एक शाम माताराणी भटियाणीसा के नाम

Sagevaani.com /चेन्नई: श्री माजीसा भक्त मण्डल, चेन्नई के तत्वावधान में 15वीं बार एक शाम माताराणी भटियाणी सा के नाम, साहुकारपेट स्थित श्री कनिका परमेश्वरी कालेज में शनिवार 14 सितम्बर को बड़े धुमधाम से मनाई जाएगी। कार्यकर्ता शक्तिसिंह सोढा ने बताया कि शनिवार दोपहर 03:30 बजे शोभा यात्रा माजीसा धाम, सुन्दर मुदळी स्ट्रीट से प्रारम्भ होकर श्रीकनिका परमेश्वरी कालेज जाएगी। उसी शनिवार की शाम 06:00 बजे से 12 बजे तक विराट भजनों का समागम जागरण कार्यक्रम आयोजित होगा।  कार्यक्रम में राजस्थान के सुप्रसिद्ध कलाकार सोनु सिसोदिया एंड पार्टी, गायक कलाकार मुकेश कुमार, झांकी रामू लरके, मंच संचालन डार्विन शर्मा चेन्नई होंगे। लक्ष्मीनारायण, कैलास शर्मा, किशन माली, शक्तिसिंह इत्यादि अनेकों कार्यकर्ता इस समायोजन की तैयारी में लगें हुए हैं।

बिना ज्ञान की क्रिया कभी भी छूट सकती हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 5️⃣4️⃣ ⚡ 266) बिना ज्ञान की क्रिया कभी भी छूट सकती हैं.! 267) दुरुपयोग करोगे तो प्राप्ति दुर्लभ हो जाएगी.! मन के गलत उपयोग से समुर्छीम अवस्था प्राप्त होती हैं.! 268) जितनी चिंता संतानों के केरियर की होती है उतनी केरेक्टर की नही.! पछताना नही चाहते तो अधिक से अधिक समय एवं प्रयास केरेक्टर निर्माण में लगाना चाहिए.! 269) हम जैन होकर वीतराग के सिद्धांत को समझकर आचरण में नही उतारेंगे तो दूसरों को कैसे समझा पाएंगे.! 270) पुण्य के साथ धर्मकरणी नही है तो पुण्य डुबानेवाल बनेगा.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *युग प्रभावक वीर गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

कषायों से मुक्त हुए बिना नहीं हो सकता जीवन का कल्याण- इन्दुप्रभाजी म.सा.

एक पाप समाप्त कर सकता हमारे जीवन के सारे सुख-दर्शनप्रभाजी म.सा. गोड़ादरा स्थित महावीर भवन में चातुर्मासिक प्रवचन Sagevaani.com /सूरत। हमे दूसरों की निंदा करने की बजाय अपने अंदर झांकना चाहिए ओर निंदा करनी है तो समय की करो। जब तक आत्मा में क्रोध, मान, माया, लोभ जैसे कषाय रहेंगे तब तक उसका कल्याण नहीं हो सकता है। कषायमुक्त होने पर ही आत्मकल्याण की राह खुलेगी। धर्म की शरण लेने ओर जिनवाणी सुनने से कषाय मुक्त होना आसान हो जाता है। तप त्याग करने से जीवन निखरता है। जो तपस्या कर शरीर को तपाते है उनकी आत्मा पावन हो जाती है। ये विचार मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. ने गुरूवार को श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में महावीर भवन में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। रोचक व्याख्यानी प्रबुद्ध चिन्त...

निर्जरा के पश्चात् कर्म का स्वरूप

*अंतिम क्रमांक!* *क्रमांक — 478* . *कर्म-दर्शन* 🚥🔹🚥🔹🚥🔹🚥 🔹🚥🔹🚥🔹🚥 *🔹निर्जरा के पश्चात् कर्म का स्वरूप* *👉 यह एक स्वाभाविक प्रश्न है कि निर्जरा के पश्चात् ये कर्म चतुःस्पर्शी ही रहते हैं अथवा अष्टस्पर्शी भी हो सकते हैं? उत्तरस्वरूप निर्जरण के पश्चात् ये साधारण पुद्गल के रूप में भी रह सकते हैं और चतुःस्पर्शी रह कर भाषा, मन आदि में भी प्रयुक्त हो सकते हैं। आहारक, वैक्रिय, तैजस आदि अष्टस्पर्शी पुद्गल में भी परिवर्तित हो सकते हैं और वे द्विस्पर्शी परमाणु भी बन सकते हैं। पुनः कार्मणवर्गणा में भी परिवर्तित हो सकते हैं। अतः जीव से छूटने के पश्चात् कर्म स्वतन्त्र होकर पुद्गल की किसी भी वर्गणा में परिवर्तित हो सकता है।* *भगवान् महावीर ने कर्म-योग और कर्म-त्याग दोनों का समन्वित मार्ग निरूपित किया था। उनकी साधना पद्धति का प्रमुख अंग है- संवर (कर्म का निरोध)। किन्तु वह प्रथम चरण में सम्भव नहीं है। प...

शांति का स्थान सिर्फ धर्मस्थानक है

जिनेश्वर देव जिनका वात्सल्य एक एक माता जैसा होता है, इसलिए उनको जगत माता कहा जाता हैl भगवान का उपकार भी अनंत है, आज जगत में तीन जनों के उपकार हैl माता-पिता मालिक सद्गुरु माता-पिता के उपकार हम चुका नहीं सकते पर शुभ कार्य में निमित्त बन सकते हैं। उनका धर्म के सम्मुख ले जा सकते हैं उनके हाथों से सात कार्य कर सकते हैं। यही अवसर उपकार चुकाने का माता-पिता के उपकार इस भौतिक है तीर्थंकर का उपकार अनंत अनंत जन्म तक होता है। आज अगर तीर्थंकर तीर्थ की स्थापना नहीं करते धर्म चारों ओर ना होता तो आपका वातावरण अंधकार में होता बंधन से मुक्त होने के लिए बहुत अच्छी शिक्षा दी है। प्रभु का धर्म जन्म जन्म तक उभरने वाला है संसार एक चक्र है इस चक्र में जो घूम रहा हैl कहीं पर भी स्थिर नहीं हो सकता कोई नरक में गया कोई डी में गया कोई मनुष्य में गया कोई ना कोई दुख तो पाया ही हैl वह तो दुख से उभरने वाले परमात्मा ने हमे...

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