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तर आपणही परमात्मा बनू शकतो-प.पू.गुरुछायाजी म.सा.

Sagevaani.com /जालना: नको ते करायचे आणि हवे ते सोडून द्यायचे हा मानवाचा स्वभाव असल्यामुळेच आपण परमात्मा बनत नाहीत, परंतू हव्या त्या मार्गाने गेल्यास आपणही परमात्मा बनू शकतो, असा हितोपदेश साध्वी प.पू.गुरुछायाजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. आजही संघामध्ये साध्वी प. पू. अर्हतज्योतीजी म. सा. यांनी विविध प्रकारचा जाप केला. पुढे बोलतांना साध्वी प.पू.गुरुछायाजी म.सा. म्हणाल्या की, आपण परमात्मा का बनू शकत नाहीत. कारण जे करायला हवे ते आपण सोडून देतो, आणि करायला नको ते आपण करतो म्हणून परमात्मा बनत नाहीत. परंतू आपणही परमात्मा बनू शकतो याची खात्री आणि विश्वास असायला हवा. परमात्मा बनण्यासाठी ...

सांसारिक व्यवहारों में राग द्वेष से मत जुडो कर्तव्य भाव से ही जुडो

*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*   *🪷प्रवचन प्रवाहक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 7️⃣4️⃣ 💫 366) सांसारिक व्यवहारों में राग द्वेष से मत जुडो.. कर्तव्य भाव से ही जुडो.! 367) कषाय हो ऐसे निमित्तो को Wide ball समझकर जाने दो, उससे टकराओ मत.! 368) विभाव से दूर रहना महान तप हैं.! 369) दूसरे किनारे पहुंचना है तो एक किनारा छोड़ना पड़ता है, वैसे ही आत्मबोध पाना है तो परभाव छोड़ना पड़ता है.! 370) अंतिम समय में जैसी भावना रहेगी वैसा ही अगला जन्म मिलेगा.!  

नौ दिवसीय श्री घंटाकर्ण महावीर महादेव का विशेष प्रभावकारी जाप का शुभारंभ

आज नौ दिवसीय श्री घंटाकर्ण महावीर महादेव का विशेष प्रभावकारी जाप का शुभारंभ उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पीयूष मुनि जी महाराज आदि ठाणा एवं प्रतिभा पुंज गुरूणी श्री अनीता जी महाराज आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में जैन स्थानक गुड़ मंडी जालंधर शहर में हुआ। विशेष रूप से गुरु चरणों में दर्शन प्रवचन श्रवण हेतु उपस्थित श्री सुधीर जैन कोटा राष्ट्रीय मंत्री श्री आल इंडिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कांफ्रेंस नई दिल्ली को श्री संघ जालंधर द्वारा सम्मानित भी किया गया। प्रथम दिन प्रभावना का लाभ श्रीमती सविता जैन-श्री सतपाल जैन प्रधान एस एस जैन सभा रजि जालंधर द्वारा लिया गया।

अधैर्य अन्याय का कारण है

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   7️⃣3️⃣ 🪷 तारक त्रिपदी: धैर्य, समता,गंभीरता १) बिना प्रमाणिक प्रमाण के बिना किसी पर आक्षेप न करें अर्थात *धैर्यपूर्वक* कार्य करें, *अधैर्य अन्याय का कारण है..!* २) कारण हो या कारण न हो किसी भी संजोग में किसी पर भी आक्रोश न करें अर्थात *समत्वपूर्वक* निर्णय करें, आक्रोश में हित अहित का भान नही रहता.!   ३) किसी की राज की बात प्रगट नही करनी, अतः गुप्त बातो को *गंभीरतापूर्वक* ह्रदय में रखें, चंचल हृदय में रहस्य नही टिकते.! 🙏 *सज्जन इन गुणों से* *युक्त होते है.!* *📒उपदेश रत्नमाला कुलक*   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

युग प्रभावक कृपाप्राप्त मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.

*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*   *🪷प्रवचन प्रवाहक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 7️⃣3️⃣ ✨ 361) विचारों का परिग्रह पदार्थ त्याग को निष्फल बना देता हैं.! 362) लोभ लालच से धर्म स्वीकार करना जघन्य आशातना है.! 363) अनंत जन्मों से कर्तृत्व का व्यापार किया हाथ में फिर भी कुछ न आया.! 364) जीवन का प्रमुख कर्तव्य है आत्म स्वभावमें स्थिरता.! 365) स्वभाव स्थिरता से षट्काय के जीवो को अभयदान मिलता हैं.!  

अंतर शत्रु बाह्य शत्रु अंदर में रहे हुए दोष यह हमारे अंतर शत्रु है

वितराग परमात्मा जिन्हों ने अंदर में रहे हुए अध्यात्म शत्रुओं का विनाश कर परम स्वतंत्रता परम स्वाधीनता और परम सुख की प्राप्ति की शत्रु तो बहुत है पर भगवान ने उसके भेद बताएं अंतर शत्रु बाह्य शत्रु अंदर में रहे हुए दोष यह हमारे अंतर शत्रु हैl शत्रु होते हुए भी मित्रता का दावा करते हैं कि मैं तुम्हारे साथ ही रहूं दोस्त तीन प्रकार के बताए हैंl आधिदैविक दोष यानी भाग्य की कमजोरी कोई नहीं था शांति से बैठे थे अचानक पानी आ गया भूकंप आ गया व्यक्ति अभी था अभी नहीं ऐसा हो जाता है यह आधिदैविक दोष है। आदि भौतिक दोष व्यापार चालू किया बहुत बड़ी आशा रखी पर ऐसी खोट आयी की की सब कुछ खत्म हो गया करोड़पति का रोड़पति हो गयl समय के साथ भिन्न-भिन्न हो गया यह है आदि भौतिक दोष। आध्यात्मिक दोष अंदर से गुस्सा आता अहंकार ईर्ष्या लालसा यह सभी आध्यात्मिक दोष है वीर का शासन मिला यह अमूल्य हैl बस साधना में जीवन को जोड़ना ह...

सव्वालाख “ लोग्गस्स” जाप के समापन मे “ समकित-यात्रा” हैदराबाद पहॅंचा

सव्वालाख “ लोग्गस्स” जाप के समापन मे “ समकित-यात्रा” हैदराबाद मे पहॅंचा आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण का विश्वस्त मंडल आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण का विश्वस्त मंडल सजोड श्रमण संघीय सलाहकार, आयंबिल आराधक पु. गुरुदेव सुमतिप्रकाश जी म.सा. उत्तर भारतीय प्रवर्तक पु. आशिष मुनीजी म.सा. के सुशिष्य प्रज्ञा महर्षि, आगम ज्ञाता डॉ. समकित मुनीजी म.सा.भवांत मुनीजी, मधुर गायक जयवंत मुनीजी म. सा . के दर्शन, प्रवचन एवं लोग्गस्स स्तोत्र के जाप समापन समारोह मे पहुँचा! स्वाध्याय से कर्म निर्जरा होती है! कल से प्रारंभ नवरात्री महोत्सव से आगे एक मॉंस तक शुभ दिनांकों अंदर धर्म आराधना, ब्रम्हचर्य व्रत का पालन करनेका संदेश दिया ! दिपावली की छुट्टी धर्मआराधना मे बच्चे व्यतित करे यह संदेश माताओंको दिया! आकुर्डी संघद्वारा पु. समकित मुनीजी म. सा के चरणोंमे 2026 के चातुर्मास की बिनती संघाध्यक्ष सुभाष जी ललवाणी ने धर्मसभाम...

सात अच्छे गुणो की पालना कर अपना जीवन सफल बनाइये: पंडितरत्न पु. ज्ञानमुनीजी म.सा.

सात अच्छे गुणो की पालना कर अपना जीवन सफल बनाइये !-पंडितरत्न पु. ज्ञानमुनीजी म.सा. दिनकी शुरवात तीन सकारात्मक बातोसे करे- साध्वी मुक्ता श्री जी आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ का विश्वस्त मंडल एवं महिला मंडल गुरुभगवंतोके एवं साध्वी मंडल के दर्शन हेतु पहुँचा खैरताबाद एवं अमिरपेठ ( हैदराबाद) ! प्रखर वक्ता पंडीत रत्न ज्ञानमुनीजीम. सा. ने सात अच्छे गुणोकी पालना करनेका एहलान किया ! लिया हुआ कर्जा तुरंत लौटाना, दान मे घोषित रक्कम तुरंत देनाl घर मे लडकी हो तो शादी समयपर करना कही आग लग जाये तुरंत बुझा देना, शरीर में कुछ बिमारी हो तुरंत इलाज करना शुभ काममे देरी नहीं करना, जैसे की प्रवचन मे जाना हो समय के पूर्व जाना ! डॉ. पुनित ज्योतिजी म.सा. आदि ठाणा 7 के दर्शन दरम्यान साध्वी मुक्ता श्री जी ने दिनकी शुरुवात करते समय तीन बातें नित्य रुपसे स्मरण करनेका संदेश दिया ! सुबह उठते ही अपने हात खोलकर देखना...

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का दूसरा दिवस अहिंसा दिवस के रूप में मनाया

 शारीरीक, वाचिक, मानसिक, आत्मिक भावों में हो अहिंसा : मुनि हिमांशुकुमार अहिंसामय चेतना से स्वस्थ एवं आदर्श बनता समाज : साध्वी डॉ गवेषणाश्री Sagevaani.com /चेन्नई: अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वाधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत दूसरा दिन बुधवार को अहिंसा दिवस के रूप में दो जगह मनाया गया। ◆ तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट में मुनि श्री हिमांशुकुमारजी  ने कहा कि भगवान महावीर ने जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए अहिंसा का महत्वपूर्ण सूत्र दिया। शारीरीक, वाचिक, मानसिक, आत्मिक भावों में अहिंसा के लिए जो व्यक्ति अभय रहता है, सब जीवों के प्रति मैत्री का भाव रखता, समत्व की साधना करता और सहिष्णुमय रहने वाला ‘सकल हीत करने वाली अहिंसा’ में रत रह सकता हैं, उच्च जीवन जी सकता है। गुरुदेव तुलसी ने वर्तमान परिपेक्ष्य में उसे अणुव्रत आचार संहिता के साथ जोड़ा।  ...

जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष

क्रमांक – 13 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *जीव का प्रतिपक्षी तत्त्व अजीव है। न जीव अर्थात् जो जीव नहीं है वह अजीव है । जिसमें चेतना है वह जीव है और जिसमें चेतना नहीं है वह अजीव है। जो उपयोगवान है वह जीव है और जो अनुपयोगवान है वह अजीव है। जिसमें बोध क्रिया है वह जीव है, जिसमें बोध क्रिया नहीं है वह अजीव है। जैनदर्शन जीव के साथ-साथ अजीव को भी नित्य, शाश्वत एवं उत्पत्ति विनाश से रहित सत्ता मानता है। इसीलिए जैनदर्शन को द्वैतवादी भी कहते हैं। सांख्य भी द्वैतवादी है। सांख्य प्रकृति एवं पुरुष की सत्ता को मानता है। पुरुष जीव है तो प्रकृति अजीव है। दोनों के संयोग से ही संसार का उद्भव होता है तो दोनों के वियोग से मोक्ष संभव बनता है। यही स...

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ट्रस्ट बोर्ड साहूकारपेट का वार्षिक अधिवेशन आयोजित

Sagevaani.com /चेन्नई: श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ट्रस्ट बोर्ड साहूकारपेट का वार्षिक अधिवेशन मुनि श्री हिमांशुकुमारजी ठाणा 2 से मंगल पाठ श्रवण कर प्रबंधन्यासी श्री विमल चिप्पड की अध्यक्षता में तेरापंथ भवन में समायोजित हुआ।  उपासक एवं जैन विश्व भारती के मुख्य ट्रस्टी श्री जयंतीलाल सुराणा द्वारा नमस्कार महामंत्र के मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।  प्रबंधन्यासी श्री विमल चिप्पड ने सभी का स्वागत करते हुए विगत वर्ष में हुई त्रुटियों के लिए सभी से क्षमायाचना करते हुए आलोच्य वर्ष में देवलोक गमन हुई साध्वी श्री लावण्यश्रीजी को लोगस्स ध्यान द्वारा भावांजलि समर्पित करते हुए ट्रस्ट बोर्ड के दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की।  प्रबंधन्यासी ने पूज्य गुरुदेव एवं सभी चरित्र आत्माओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए ट्रस्ट द्वारा वर्ष भर में संपादित सभी गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्र...

मन में कलुषित परिणाम न हो

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   7️⃣2️⃣ 🪔 *_💥शुभ💥_* राग जिसका प्रशस्त हो, अंतरमें अनुकंपा की वृत्ति हो, मन में कलुषित परिणाम न हो, *उसे पुण्य का आश्रव होता हैं,*   *_💥अशुभ💥_* विषयों की लोलुपता हो, जीवनशैली प्रमादमय हो, मलिन मनोवृत्ति का विकार हो, परपीड़ा एवं परनिंदा से *पापकर्म का आगमन होता हैं.!*   *_💥शुद्ध💥_* किसी के प्रति न राग हो,न द्वेष हो, न मोहासक्ति का बंधन हो, *सुख दुख में समवृत्ति हो* *उसे न पुण्य का* *न पाप का आश्रव होता है.!* *📚श्री पंचास्तिकाय ग्रंथ📚*   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

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