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श्रावक के 14 नियम जो हमें रोज़ लेने चाहिये

1. सचित्त :- सचित्त अर्थात जिस पदार्थ में जीव राशि है ।* इसमें सचित पदार्थो के सेवन की दैनिक मर्यादा रखी जाती है।जैसे कच्ची हरी सब्जी , कच्चे फल , नमक , कच्चा पानी, कच्चा पूरा धान आदि का सम्पूर्ण त्याग अथवा इतनी संख्या से अधिक उपयोग नही करूँगा ऐसा नियम करना । ( 3, 5 ,7 आदि ) 2 . द्रव्य :- खाने – पीने की वस्तु / द्रव्य की प्रतिदिन मर्यादा रखनी है , इसमें पदार्थो की संख्या का निश्चय किया जाता है ।* भिन्न भिन्न नाम व स्वाद वाली वस्तुएं इतनी संख्या से अधिक खाने के काम में नहीं लूँगा । जैसे खिचड़ी , रोटी, दाल, शाक, मिठाई, पापड़, चावल आदि की मर्यादा करना । (11, 15, 21 आदि ) 3 . विगय :-* : – प्रतिदिन तेल घी दूध दही शक्कर / गुड तथा घी या तेल में तली हुयी वस्तु ये छः विगय है । इनका यथाशक्ति त्याग करना या रोज कम से कम 1 विगय त्याग करना । 4. उपानह :- जूता, मोजा, चप्पल, आदि पाँव में पहनने की चीजो ...

संस्कार आचरण से आते है

संस्कार आचरण से आते है! गुरु सानिध्य मे संय्यम का मार्ग मिलता है ! मुझ जैसे पौधे को गुरुभगवंतो ने संभाला! – युवाचार्य पु. महेंन्द्र ऋषिजी म.सा. आज एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर चेन्नई में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन महासंघ तमिलनाडु के तत्वावधान में श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी महाराज का 58वां जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर खरतरगच्छीय गणिवर्य मनीषप्रभ सागरजी, उपप्रवर्तिनी कंचनकंवर जी, महासती डॉ. प्रतिभाश्रीजी, महासती राजमतिजी का सान्निध्य भी मिला। इस दौरान मुनिश्री हितेंद्र ऋषिजी ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि युवाचार्यश्री भले ही युवाचार्य बन गए हैं लेकिन वे जीवन में सरलता, सहजता लिए हुए है। जब मैं वैराग्य में आया तब युवाचार्य भगवंत ने कहा मुझे गुरुदेव नहीं पुकारना है, गुरुदेव तो आचार्य आनंद ऋषिजी ही होंगे। उन्होंने कहा महापुरुषों की विशेषता है कि वे कोई कार्य पी...

अमृतवाणी द्वारा दक्षिण भारत स्तरीय ‘स्वर संगम- 2024’ प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

Sagevaani.com /चेन्नई: अमृतवाणी विभाग द्वारा तेरापंथ समाज की प्रतिभाओं को आगे लाने के उद्देश्य से देशभर में ‘स्वर संगम- संगीत प्रतियोगिताओं’ का आयोजन किया जाता है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी स्वर संगम 2024 के लिए प्रतिभावान गायक कलाकारों की गायकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग मंगवाई गई। चयनित कलाकारों को देश के चार भागों में उनके स्थानीय क्षेत्र के आधार पर विभाजित किया गया। चयनित कलाकारों का देश अलग-अलग भागों में क्षेत्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ।  इसी क्रम में चेन्नई में दक्षिण क्षेत्रीय प्रतिभागियों के मध्य प्रतियोगिता का आयोजन तेरापंथ भवन, ट्रिप्लीकेंट में आयोजित हुआ। सभी दसों प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रस्तुतीकरण किया।  निर्णायक श्री कुलदीप सागर, श्री अशोक कोठारी, श्रीमती सुषमा भटेरा के निर्णयानुसार 1. सुश्री खुशी कठोतिया, हैदराबाद 2. सुश्री महक भंसाली चेन्नई...

लीडर सजग होता हैं प्रमाद मग्न नही

*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*   *🪷प्रवचन प्रवाहक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *☀️प्रवचन वैभव☀️* ⚡ 7️⃣6️⃣ 376) लीडर सजग होता हैं प्रमाद मग्न नही.! 377) समकिती प्रतिकूल समय में दुख पीड़ा के समय में कभी आर्तध्यान नहीं करता.! 378) समकिती दुख से नही दोष से व्यथित होता हैं.! 379) समकिती में दोष हो सकते है, लेकिन वह कभी भी दोष के पक्ष में नही रहता.! 380) प्रभुपूजा के लिये नही प्रभु मिलन के लिये जाना, बिना मिलन की पूजा से मोक्षप्राप्ति असंभव हैं.!

सदैव हसमुख व मिलनसार रहो

आज मंगलवाड चौराहे में मेवाड़ भास्कर उपप्रवर्तक युवामनिषी परम् पूज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी मा.सा (करूणाकर) आदि ठाणा के सानिध्य में खुब संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने धर्म-ध्यान तप-त्याग दया ऐकासन व दान पुण्य करके श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट श्री आनन्दऋषि जी म.सा. के सुशिष्य एवं वर्तमान आचार्य ध्यानयोगी डा. श्री शिवमुनि जी म.सा. के आज्ञानुवर्ती आगमज्ञाता, प्रज्ञामहर्षि, श्रमण संघ के आन, बान, शान भावी अनुशास्ता युवाचार्य प्रवर पूज्य श्री महेन्द्र ऋषि जी म.सा का 58 वें पावन जन्मोत्सव मनाया व गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी मा.सा द्वारा तमाम मेवाड़ के श्रावक श्राविकाओं को खुब खुब धर्म ध्यान करने का सदेस दिया गयाl कई संख्या में प्रत्याख्यान भी हुए गुरुदेव ने बताया की युवाचार्य भगवंत सदैव हसमुख व मिलनसार रहते है आपने बहोत ज्यादा उग्र विहार करके सभी श्रावक श्राविकाओं को संभाला है l साथ...

आत्म  वैभव को सुरक्षित रखना हैं, तो घर्षण में मत उतरो

*🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*   *🪷प्रवचन प्रवाहक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 7️⃣5️⃣ 371) आत्म वैभव को सुरक्षित रखना हैं, तो घर्षण में मत उतरो.! 372) गंभीरता पद का गौरव है, चंचलता पद भैरव है.! 373) विचार व्यवहार में आर्त रौद्र ध्यान हैं, तो दुर्गति निश्चित हैं.! 374) समय का सम्मान अर्थात कल्याण का सम्मान.! 375) सहज सरलता से सर्वस्वीकार का भाव आत्मस्थ हो जाए तो निर्बंधदशा सहज प्रगट होगी.!

युवाचार्य श्री पु. महेंन्द्रऋषिजी के 58वे जन्मोत्सव पर शुभकामना देने पहुँचा आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ का विश्वस्त मंडल

युवाचार्य श्री पु. महेंन्द्रऋषिजी के 58वे जन्मोत्सव पर शुभकामना देने पहुँचा आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ का विश्वस्त मंडल! आज चेन्नई जैन महासंघ के प्रांगणमे चातुर्मासार्थ विराजमान युवाचार्य श्री जी पु. महेंन्द्रऋषिजी म.सा. पु. हितेंन्द्र ऋषिजी म.सा. पु. धवलऋषिजी म.सा तथा उपप्रवर्तिनी,आनंद श्रमणीरत्ना पु. कंचनकुंवरजी म.सा. आदि ठाणा 6 के दर्शनार्थ, प्रवर्चनार्थ एवं युवाचार्य भगवंतको 58वे जन्मदिनकी शुभकामना देने हेतु आ.नि.प्रा. श्री संघ के संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी के नेत्रुत्व में विश्वस्त मंडल एवं महिला मंडल पहुँचा! श्री संघद्वारा शुभकामना देते वक्त सुभाषजीने युवाचार्य श्री जी को जन्मोत्सवकी भेंट देनेके बजाय भेंट लेने श्री संघ पहुँचा कर बताते हुये चातुर्मास आकु्र्डी श्री संघ में चातुर्मास करनेकी भेंट मॉंगी! चेन्नई महासंघ के सभी पदाधिकारी गण की आयोजन नियोजन की सराहना की! संघ द्वारा शार...

मनुष्य जन्म आपल्या हातात नसला तरीही: साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

जालना : जन्म घेणे हे आपल्या हातात नसले तरीही आपण ज्यासाठी जन्माला आलो, हे आपल्याला कळायला हवे. परंतू मनुष्य देह हा असा आहे की, त्याला जे उगमत नाही, तेच तो करु लागतो, म्हणूनच तो परमात्मा बनू शकत नाही, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. आजही संघामध्ये साध्वी प. पू. अर्हतज्योतीजी म. सा. यांनी विविध प्रकारचा जाप केला. पुढे बोलतांना साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, कोणी कोठे जन्म घ्यावा, हे आपल्या हातात नाही. कोणी सधन कुटूंबात तर कुणी गरीब कुटूंबात जन्माला येतो. परंतू ही सारी भगवंताची लिला समजावी, जन्म घेणे हे आपल्या हातात नसले तरीही आ...

सामायिक स्वाध्याय भवन, पावटा, जोधपुर दिनांक 2 अक्टूबर 2024, बुधवार को तपस्या अनुमोदन दिवस

आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्रजी म.सा ने जितेन्द्रमुनिजी म.सा को तपस्वी के अलंकरण से अलंकृत किया | प्रवचन के कुछ अंश  स्वाध्याय भवन, पावटा जोधपुर मे आचार्य हीराचंद्रजी म.सा के सुशिष्य जितेन्द्रमुनिजी म.सा ने 53 उपवास के प्रत्याख्यान किए | परमाराध्य आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्रजी म.सा ने जितेन्द्रमुनिजी म.सा को तपस्वी के अलंकरण से अलंकृत किया | इस अवसर पर प्रवचन सभा मे श्रदेय श्री रविंद्रमुनिजी म.सा ने आचार्य हस्ती की वैराग्य से ओतप्रोत कृति “मेरे अंतर भया प्रकाश,नही मुझे अब किसी की आस” से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर आचार्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा के गुणगान रुप संस्कृत मे स्तुति फरमाई व कहा कि जोधपुर मे दीर्घ काल तक उपाध्याय भगवन्त श्री मानचन्द्रजी म.सा की अग्लान भावो से सेवा करते हुए गुरु भगवन्तो का आशीर्वाद प्राप्त करने वाले जितेन्द्रमुनिजी ने सहजता पूर्वक आज 53 उपवास क...

उपवास की तपस्या सुखसाता पूर्वक गतिमान

सूर्यनगरी जोधपुर मे आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्रजी म.सा भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा की असीम कृपा से जोधपुर मे गुरु भगवन्तों के सानिध्य मे श्रदेय श्री जितेन्द्रमुनिजी म.सा के को 52 उपवास आज्ञानुवर्तिनी महासतीजी श्री विमलेशप्रभाजी म.सा के 15 उपवास व महासतीजी श्री निरंजनाश्रीजी म.सा के 7 उपवास की तपस्या सुखसाता पूर्वक गतिमान | भक्ति दिवस प्रवचन के अंश पावटा, जोधपुर स्वाध्याय भवन मे प्रवचन फरमाते हुए श्रदेय श्री अशोकमुनिजी म.सा ने उतराध्ययन सूत्र के 28 वें अध्ययन मे बताई गई तप की महिमा का विस्तृत वर्णन किया | संलेखना के पांच अतिचारों पर विस्तृत रुप से वर्णन करते हुए फरमाया कि कामना हैं, तो संसार हैं | कर्म को मैं मानना मिथ्यात्व हैं | मैं और मेरा का नाम ही संसार हैं | उपवास का अर्थ आत्मा के समीप वास करना हैं, पर आप, संतो से प्रत्याख्यान तो उपवास के मांगते हैं और करते अनशन ह...

नौ दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ

Sagevaani.com /चेन्नई: नवरात्र के पावन अवसर पर आंतरिक शक्ति जागरण, मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए मुनि हिमांशुकुमार के द्वारा तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में नौ दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। श्रावक समाज ने सर्वप्रथम मुनिवर को विधिवत पंचांग प्रणति वन्दना की। सामुहिक नमस्कार महामंत्र समुच्चारण के बाद सभी ने तीर्थंकर प्रभु सिमंधर स्वामी को वन्दना कर, उनके स्मरण से अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। चंदेसु निम्मलयरा .. से अर्हत् भगवान की तरह सिद्ध बनने का स्मरण किया। एक घन्टे से ज्यादा चले अनुष्ठान के पुरे कालमान तक ध्यान साधना में तत्पश्चात अनेक विधित मंत्रोच्चार, नवकार मंत्र का जप के बाद आरोग्य वर्धक एंव चिंता हरण मंत्र का जप करवाया गया। अनुष्ठान सभी नौ दिन सुबह और शाम को विधिवत चलेगा। सहभागी संभागी इन दिनों विशेष तप: साधना में संलग्न रहते हैं। यथायोग्य रात्रिभोजन त्याग के साथ जमीक...

जैन तेरापंथ वेलफेयर ट्रस्ट माधावरम्, चेन्नई का वार्षिक अधिवेशन आयोजित

Sagevaani.com /चेन्नई : जैन तेरापंथ वेलफेयर ट्रस्ट माधावरम्, चेन्नई का वार्षिक अधिवेशन चेयरमैन श्री तनसुखलालजी अध्यक्षता में समायोजित हुआ। नमस्कार महामंत्र से अधिवेशन शुभारम्भ हुआ। चेयरमैन ने स्वागत स्वर प्रस्तुत करते हुए वर्ष भर में मिले सभी के सहयोग के लिए कार्यकर्ताओं, अनुदानदाताओं को साधुवाद दिया एवं आगामी करणीय कार्यों की रुपरेखा प्रस्तुत की। महामंत्री श्री सुरेश नाहर ने वार्षिक मंत्री प्रतिवेदन, कोषाध्यक्ष श्री तेजराज आच्छा ने आय व्यय का ब्योरा, महासंवाददाता श्री अशोक आई बोहरा ने स्कूल प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से ऊँ अर्हम् की ध्वनि से पारित किया गया।  ट्रस्ट के सदस्यों ने साध्वी डॉ गवेषणाश्रीजी के दर्शन कर सुखसाता पुछी। साध्वी ने सभी सदस्यों को कहा कि शिक्षा के साथ आध्यात्म का समावेश हो। जीवन विज्ञान से छात्रों का बौद्धिक, शारीरिक के साथ मानसिक और भावनात्मक विकास भी ह...

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