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श्रावक वही, जो सच्ची श्रद्धा को अपनाए: मुनि हितेंद्र ऋषि

एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के शिष्य हितमित भाषी मुनि हितेंद्र ऋषिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के 31वें और 32वें अध्याय का स्वाध्याय करते हुए कहा कि प्रभु महावीर की अंतिम देशना का उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से हम स्वाध्याय कर रहे हैं। विचार कीजिए पूर्वधर आचार्यों ने वह लेखन करने का पुरुषार्थ नहीं किया होता तो आज प्रभु की वाणी हम तक नहीं पहुंचती। इस वाणी को आज हम सुनकर कान और मन को पवित्र, पावन बना रहे हैं। प्रभु की वाणी जीवन में बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय कर उसे हमारे जीवन में उतारना है। यह केवल साधु के लिए ही नहीं है श्रावक के लिए भी इसलिए है क्योंकि उनमें साधु बनने की भावना आए। श्रावक वही जो सच्ची श्रद्धा को अपनाए।आज श्रावक श्रावक तो बनता नहीं बल्कि साध...

धुंआ मुक्त दीपावली मनाए

राजस्थान पत्रिका, एक्सनोरा इंटरनेशनल द्वारा धुंआ मुक्त दीपावली अभियान एक सप्ताह से कई स्कूल, कॉलेज, सार्वजनिक जगह पार्क, धार्मिक पाठशाला आदि जगह पर हजारों विद्यार्थियों को विशेष जानकारी देते हुए सभी विद्यार्थियों को धुंआ मुक्त दीपावली मनाने की प्रतिज्ञा दीl इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉक्टर के मुथू कुमार प्रोग्राम ऑफिसर डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज गवेनमेंट ऑफ तमिलनाडु ने धुंआ मुक्त दीपावली अभियान की विशेष जानकारी दी। सभी विद्यार्थियों ने पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। आज अभियान का लॉस्ट दिन सुबह टी नगर चारी स्ट्रीट कॉर्पोरेशन पार्क में लोगो को जानकारी देते हुए एक्सनोरा नॉर्थ चेन्नई सचिव फतेहराज जैन ने कहा कि धुआं एवं पटाखों की आवाज से अस्थमा, उम्र वाले लोगों, पक्षियों को हानि होती हैं। इसलिए धुआं मुक्त दिपावली मनाने का निर्णय लिया एवं पौधे वितरण कर पर्यावरण को बसाने की जानकार...

आत्मा के बिना  अन्य बाह्य पदार्थो के  स्वरूप की अनुभूति असंभव हैं

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣0️⃣ 🕉️ 🧘‍♂️ आत्मा के बिना अन्य बाह्य पदार्थो के स्वरूप की अनुभूति असंभव हैं.! 😊 एक बार आत्म स्वरूप में रुचि लगने के बाद उसका स्वरूप जानकर बाह्य पदार्थो की आत्मा से भिन्नता का बोध हो जाने से अन्य पदार्थ निरर्थक लगते हैं 🪔 आत्मज्ञानी को अन्य पदार्थो का ज्ञान भी आत्मज्ञान को विशद करने के लिए ही होता है लेकिन समस्त ब्रह्मांड का ज्ञान भी निरर्थक है आत्मज्ञान के बिना, ✅ अतः जो आत्मा को जानता है वह समस्त द्रव्यों को जानता है.! *📜छान्दोग्य उपनिषद् 📜*  

जिस परिणाम और प्रवृत्ति से आत्मा में कर्मों का आगमन होता है, उसे आश्रव कहा जाता है

क्रमांक – 37 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 आश्रव* *👉 जिस परिणाम और प्रवृत्ति से आत्मा में कर्मों का आगमन होता है, उसे आश्रव कहा जाता है। जिस प्रकार मकान के दरवाजा होता है, तालाब के नाला होता है और नौका के छिद्र होता है, उसी प्रकार जीव के आश्रव होता है। आश्रव जीव का परिणाम है, इसलिये वह जीव है और अरूपी है। आत्मा के द्वारा जो कर्म-पुद्गल ग्रहण किये जाते हैं, वे अजीव हैं और रूपी हैं। आश्रव के द्वारा पुण्य-पाप दोनों का ग्रहण होता है।* *आश्रव कर्म-बंध का हेतु है अतः यह मोक्ष का बाधक है और हेय है। शुभ योग से कर्मों की निर्जरा होती है। अतः शुभ योग मोक्ष का साधक है। शुभ योग आश्रव और निर्जरा दोनों है। पुण्य-बंध की दृष्टि शुभ योग मोक्ष का बाधक है तथा न...

तेरापंथ जैन विद्यालय में अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स कार्यक्रम का आयोजन किया गया

Sagevaani.com /चेन्नई: अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी और अणुव्रत समिति, चेन्नई के सहयोग से तेरापंथ एजुकेशनल एंड मेडिकल ट्रस्ट ने 29 अक्टूबर 2024 को तेरापंथ जैन विद्यालय में “अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स” कार्यक्रम का आयोजन किया।   कार्यक्रम में सातवीं से नौवीं कक्षा तक के छात्रों को मुनि श्री हेमंतकुमारजी ने संबोधित किया और उन्हें डिजिटल डिटॉक्स के बारे में विस्तार से बताया। मुनिश्री ने छात्रों को स्मार्टफोन, कंप्यूटर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल दुनिया के उपयोग से होने वाले लाभ और हानि के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम सुविधा के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह एक समस्या बन गया है। इसका नकारात्मक प्रभाव छात्रों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर पड़ रहा है। मुनिवर ने छात्रों को ऐसे आसान और प्रभावी तरीके बताए जिनसे वे इस डिजिटल व्यसन से मुक्त होकर अपने जी...

अधूरे मन से किया गया काम व्यक्ति को लक्ष्य तक नहीं पहुंचाता – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

श्रमण संघीय आचार्य देवेन्द्र मुनि का हुआ गुणानुवाद एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय हुआ। मोक्ष- मार्ग- गति अध्याय की विवेचना करते हुए उन्होंने कहा कि हमने यज्ञ अध्ययन में वास्तविक, आध्यात्मिक और साधु की समाचारी के स्वरूप को समझा। जो- जो साधन है, उनके लिए सुंदर व्यवस्था इस अध्ययन में की गई। इसका हमें पालन करना है। यह साधक का कर्तव्य है और वह उसकी प्रसन्नता का विषय होना चाहिए। अधूरे मन से किया गया काम व्यक्ति को लक्ष्य तक नहीं पहुंचाता है। जो व्यक्ति अनुशासन में नहीं है, लक्ष्य के प्रति जागरूक नहीं है तो समूह में सब उसके दुःख से दुःखी हो जाते हैं। हमारा चरम लक्ष्य मोक्ष है। वास्तव में देखा जाए तो छोटे से लेकर लक्ष्य मोक्ष का ही है। हरेक व्यक्ति मुक्ति चाहता है। जिसको गति करनी है, उसको मोक्...

समस्त  जीवो के  कल्याण में प्रत्यक्ष या परोक्ष श्रीअरिहंत  प्रभु का ही प्रभाव हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 9️⃣9️⃣ ⚡ *_491)_* समस्त जीवो के कल्याण में प्रत्यक्ष या परोक्ष श्रीअरिहंत प्रभु का ही प्रभाव हैं.! *_492)_* विरती सुरक्षा कवच हैं.! विरतीवंत को दुआ ही मिलती हैं.! *_493)_* किसी के सुख में निमित्त बनने में बड़ा आनंद है.! *_494)_* जो अपने विकास में ध्यान नहीं रखता, समय उसको साथ नहीं देता.! *_495)_* जीवन का प्राथमिक कर्तव्य: आत्मस्वभाव में मग्नता.!   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

जीवन धन्य बनालो-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: प्रवचनाच्या प्रारंभीच जीवन धन्य बनालो, हे गीत गाऊन त्यांनी आपल्या प्रवचनास प्रारंभ केला. त्या म्हणाल्या की, मानवाने जन्माला आल्यानंतर आपले जीवन कशाने धन्य बनेल, हे शोधले पाहिजे, परंतू दुर्देवाने तो हे शोधू शकत नाही, अशाने कसे त्याचे जीवन धन्य बनेल, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, कालपयर्ंत आपण सव्हीसव्या सुत्राचा अर्थ जाणून आजपासून सत्तावीस आणि त्यापुढील अध्यायाचा अर्थ समजावून घेणार आहोत. तर प्रभूंनी सत्तावीसाव्या अध्यायात काय सांगितले आहे की, संघ सांगेल तसे आम्हास वागावे लागते, त्याप्रमाणे बोलावे लागते. परंतू अठ्ठावीसाच्या अध्यायानुसार आपल्याला मोक्षाला जावे वाटते. तथापि, त्य...

पाप के अठारह प्रकार हैं

क्रमांक – 36 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 पाप तत्त्व* *पाप के अठारह प्रकार हैं-* *17. माया-मृषा : मायासहित झूठ बोलना माया-मृषा पाप है। इस पापमूलक प्रवृत्ति में माया और मृषा दोनों का संयोग है। क्रोध-मृषा, मान-मृषा और लोभ मृषा पाप को इसी के अन्तर्गत माना जा सकता है।* *18. मिथ्या दर्शन शल्य : विपरीत श्रद्धा रूपी शल्य मिथ्या दर्शन शल्य पाप है। सर्वज्ञभाषित तत्त्व में विपरीत श्रद्धा होना या श्रद्धा न होना मिथ्या दर्शन है। जैसे शरीर में चुभा हुआ शल्य (कांटा) या अन्तर्द्रण सदा कष्ट देता है, उसी प्रकार मिथ्या दर्शन भी आत्मा को दुःखी बनाये रखता है।* *✒️ नोट – पापकारी प्रवृत्ति अशुभ योग आश्रव है। जैसे प्राण वध करना योग आश्रव कहलाता है और प्राण व...

दिपावली पर्व एवं भ महावीर निवाणोत्सव के उपलक्ष में 237 वां अनाज खाद्य सामग्री एवं वस्त्र वितरण का कार्यक्रम दिनांक 26 को

वर्धमान साधार्मिक सेवा एवं जीव दया समिति की ओर से दिपावली पर्व एवं भ महावीर निवाणोत्सव के उपलक्ष में 237 वां अनाज खाद्य सामग्री एवं वस्त्र वितरण का कार्यक्रम दिनांक 26//10// 2024 को ए एम के एम श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन महासंघ जैन संघ श्री युवाचार्य चातुर्मास स्थल के प्रांगण में प्रज्ञा महर्षि युवाचार्य पू श्री महेन्द्र ॠषि जी म सा आदि ठाणा, आनंद श्रमणी रत्ना पू श्री कंचन कंवर जी म सा आदि ठाणा के पावन सानिध्य मेंl प्रति माह की भांति की इस माह भी 150 परिवारों को अनाज खाद्य सामग्री व वस्त्र आदि (21 आईटम) वितरण का आयोजन मुख्य अतिथि राजस्थान श्री रिखब चंद जी बोहरा वङप्पलनी, समाज सेवी हुक्मी चंद जी तलेङा, कर्मठ कार्यकर्ता पृथ्वी राज जी बागरेचा, एक्यूप्रेशर स्पेस्लिस्ट डाॅ पारस मल जी तोलावत (नेशनल अवार्ड प्राप्त) संस्था संरक्षक सदस्य सज्जन राज जी मेहता, सागर मल जी लोढा, सज्जन राज जी कोठारी, विज...

करुणा इंटरनेशनल के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जैन एवं महामंत्री सज्जन राज सुराणा बने

 दिनांक 26 अक्टूबर 2024 को नुगमबाक्कम् स्थित पॉम ग्रोव होटल में करुणा अंतरराष्ट्रीय का वर्ष 2024-26 के पदाधिकारियों का पदारोहण समारोह सोरेत्साह सम्पन्न हुआ । जिसमें करुणा इंटरनेशनल के पदाधिकारियों, संरक्षकों, गणमान्य महानुभावों, उत्साही कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अरुणकुमार जैन थे जो इंटलेक्ट डिजाइन अरेना कम्पनी के संस्थापक एवं मालिक है। डॉ. भद्रेशकुमार जैन के करुणा गीत से सभा प्रारंभ हुई। संस्थान के चेयरमैन श्री कैलाशमल दूगड़ ने करुणा क्लब की जानकारी प्रदान करते हुए नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री शांतिलाल जैन का परिचय प्रदान किया। महामंत्री श्री सज्जनराज सुराणा ने आगंतुक महानुभावों का स्वागत-अभिनंदन करते हुए अपने उद्गार, करुणा विषयक मुक्तक तथा अनुभव जनसमूह के समक्ष प्रस्तुत किये। उपाध्यक्ष श्री सुरेशकुमार कांकरिया ने कहा कि प्राचीनकाल में भारत का प्रत्येक नागरिक मानद...

माणव उत्तराध्ययन बोल-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: हे माणव तू जन्माला आला आहेस तर श्रीमद् उत्तराध्ययन बोल! तुम्ही- आम्ही खरोखरच धन्यवान आहोत, पुण्यवान आहोत की, जी प्रभूंची अंतीम वाणी ऐकण्याचं भाग्य तुम्हा- आम्हाला लाभले आहे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, हे माणव तू जन्माला आला आहेस तर एकवेळ तरी प्रभूंची वाणी ऐक, चिंतन कर, मनन कर! त्याच खर्‍या अर्थाने सौख्य सामावलेले आहे. तुम्ही- आम्ही खरोखरच धन्य आहोत, जी प्रभूंची अंतीम वाणी ऐकण्याचं भाग्य तुम्हा- आम्हाला लाभले आहे. ज्ञानाची डुबकी यात लावली जाते. जी आपल्याला कुठेही मिळणार नाही. तो क्षण आपल्यासाठी भाग्यासाठी भाग्याचाच आहे. आपली आत्मा खरे तर या जीणवाणीसाठी तरसली पाहिजे. कारण य...

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