एएमकेएम में गौतम रास और उत्तराध्ययन सूत्र का हुआ स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में शनिवार प्रातः गौतम रास और उत्तराध्ययन सूत्र के 36वें अध्ययन जीव-अजीव विभक्ति का स्वाध्याय हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। युवाचार्यश्री ने इस अवसर पर कहा कि नाम के अनुरूप इस अध्ययन में जीव और अजीव को अलग-अलग कर पूर्ण रूप से निरुपित किया गया है। जीव- अजीव, ये दो तत्व उन्हीं के संयोग- वियोग का परिणाम है। जीव- अजीव का अनादि संबंध है। लेकिन तप-संयम आदि साधना के द्वारा इस संबंध को अलग किया जा सकता है। तब जीव शुद्ध रूप, अपना निज स्वरूप प्राप्त कर लेता है और पुद्गल से संपूर्ण रुप से विमुक्त होकर सिद्ध बन जाता है। उन्होंने कहा जब तक जीव के साथ अजीव का संबंध रहता है, तब तक शरीर, इंद्रियों, मन आदि की रचना होती है। ज...
Sagevaani.com /जालना: भगवान महावीरांचा निर्वाण कल्याणक दिन जालना येथील श्री वर्धमान जैन श्रावक संघाच्यावतीने उत्साहात आणि त्यांना यावेळी भावपूर्ण श्रध्दांजली अर्पण करण्यात आली. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनादरम्यान जप करण्यात आला. हा जप यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा; साध्वी अर्हतज्योतीजी म. सा; साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा; साध्वी हितसाधनाजी म. सा; प.पू.गुरुछायाजी म.सा; साध्वी सौम्यज्योतिजी म. सा. यांनी केला. तर साध्वी सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी प्रभू भगवान महावीरांचे गुणगाण गाऊन मार्गदर्शन केले. याप्रसंगी सभा मंडपात अनेक श्रावक- श्राविकांसह संघाच्या पदाधिकार्याची मोठी उपस्थिती होती. शेवटी श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघाचे महामंत्री डॉ. धरमचंद गादिया यांनी कार्यक्रमाचे सुत्र संचालन करुन सर्वांचे आ...
समर्पित भाव से धर्म आराधक बन जीवन सार्थक बनाना है और सम्यकत्व को प्राप्त करना है- डॉ. राज श्री जी म.सा. आज आकुर्डी स्थानक भवन में डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी समिक्षाश्री जी एवं साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने उत्तराध्ययन सुत्र के 36 वे अध्याय का पठन किया और करवाया ! प्रतिपदा के पावन अवसरपर साध्वी मंडल ने सभी उपस्थित धर्मप्रेमियोंको नुतन वर्ष की शुभकामना दे सभोके धर्मआराधना, स्वास्थ्य की मंगलकामना की ! भगवान महावीर स्वामीजी के महानिर्वाण महोत्सव निमित्त पॉंच धर्म अनुरागीयोने तेले तप की आराधना की! जवाहरजी मुथा, मोतीलालजी चोरडीया( मौन सह), शारदा जी चोरडीया, तुषारजी मुथा, मोतीलालजी बोरा ने तेला तपआराधना की! नुतन वर्ष निमित्त पॉंच मंगलपाठ साध्वी मंडल ने सुनाए! श्री संघ के औरसे संघाध्यक्ष सुभाष जी ललवाणी ने उपस्थित महानुभावोंका स्वागत कर विश्वस्त मंडल के औरसे नुतन वर्ष की साध्वी मंडल एवं संघ समाज को शुभक...
गुरु के आज्ञा में रहना ही धर्म है! समयमात्र का हमे प्रमाद नहीं करना चाहिएँ! – डॉ. राज श्री जी म.सा. आकुर्डी स्थानक भवनमें आज उत्तराध्ययन सूत्रक् 35 वे अध्याय तक का पठन साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने किया!अपने उद् बोधन मे उन्होंने बताया समय का मुल्य हमें जानना है! चार संज्ञाये विस्तार से समझाई! मूल्यांकण, मूल्यवान, मुल्याहिन, मुल्याधिन! जब सम्यकत्व की प्राप्ति होगी मनुष्य जीवन सार्थक होगा! अपने उद् बोधन मे डॉ. राज श्री जी ने कहा आज भगवान महावीर स्वामी जी का महानिर्वाण दिवस है! आज परम प्रकाश का पर्व है! साधना की प्रकाशिकी पर पहुँच कर भ. महावीर मोक्ष को गये ! भ. महावीर एवं गौतम स्वामी के गुरुशिष्य नातेपर प्रकाश डाल अपार स्नेह , प्रशस्त मोहपर का जिक्र किया! गुरु की आज्ञा रहना ही धर्म है बताया! “ णमो जिणाणं जिय भयाणं “ का सामुदायिक जाप हुआ! समाज के धर्म अनुरागी बड़ी संख्यामे उपस्थित थे! “ आनं...
एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के शिष्य मुनि हितेंद्र ऋषिजी ने शुक्रवार को उत्तराध्ययन सूत्र की विवेचना करते हुए बताया कि प्रभु महावीर ने अपने प्रधान शिष्य गौतम अणगार से कहा कि तुम देव शर्मा को प्रतिबोध देकर आओ। उन्होंने कहा गौतमस्वामी का विनय कैसा था। जहां विनय नहीं, वहां सब कुछ जीरो है। आपमें बाकी सब कुछ है, विनय नहीं है तो सब कुछ जीरो है। जिसके अंदर विनय है, वही कर्मों की निर्जरा कर सकता है। गौतमस्वामी चार ज्ञान के धनी थे। वे जानते थे, प्रभु मुझे क्यों भेज रहे हैं। लेकिन प्रभु ने कहा और वे तुरंत उठकर गए। गौतमस्वामी ने देव शर्मा को प्रतिबोधित किया कि उसे संयम ले लेना चाहिए लेकिन देव शर्मा समझने को तैयार नहीं। अंत में गौतमस्वामी वहां से निकले। गौतमस्वामी के पीछे देव शर्मा चल रहा था। उसका म...
Sagevaani.com /जालना: जप, तप, आणि आराधना जेव्हा आपण करत असतो, त्यावेळी आपले कर्म बांधिले जातात, त्यासाठी आपला भाव सुध्दा महत्वाचा आहे. भावच नसेल तर आपले कर्म सुध्दा बांधिले जात नाही, म्हणुन प्रत्येकाने कर्म करतांना भाव चांगलाच ठेवा, असा हितोपदेश साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, कालपर्यंत आपण बत्तीस अध्यायाचा अर्थ समजावून घेतला आणि आता त्या पुढील भागाचा अर्थ समावून घेणार आहोत. तेहतीसाव्या अध्यायात भगवंंत प्रभूंनी कर्माबद्दलची माहिती सांगितली. जर का आपले कर्म उत्तम राहिले तर जीवन आपले कर्तृत्ववान झाले, फळाला आले असे समजावे. जप, तप, आणि आराधना जेव्हा आपण करत असतो, त्यावेळी आपले कर्म बांधिले जातात, त्यासाठी आपला भाव सुध्दा महत्वा...
Sagevaani.com /जालना: जेव्हा मनुष्याला दु:ख येते, तेव्हा तो घायाळ होतो, विचलित होऊन जातो, परंतू त्याच्या जीवनात जेव्हा आनंद येतो तेव्हा मात्र तो निराशा झटकून कामाला लागतो. परंतू जेव्हा हाच आनंद आत्म्यापासून येतो तेंव्हा तो ना आनंदी होतो ना दु:खी! अशा आनंदासाठीच आपणाला हवाा आहे तो आत्म्ंयापासून मिळालेला आनंद, असा हितोपदेश साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, उराध्यायन सुत्र हे जीणवाणी आहे, ती प्रत्येकाने श्रवण केलीच पाहिजे. जेव्हा मनुष्याला दु:ख येते, तेव्हा तो घायाळ होतो, विचलित होऊन जातो, परंतू त्याच्या जीवनात जेव्हा आनंद येतो तेव्हा मात्र तो निराशा झटकून कामाला लागतो. परंतू जेव्हा हाच आनंद आत्म्यापासून येतो तेंव्हा तो ना आनंदी ...
“ नमोथ्थुणं” जाप की आराधना सभी समस्याओं का निराकरण करती है! श्रध्दा एवं लगन से की आराधना प्रभु दर्शन देती है! -महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म. सा. आज आकु्र्डी स्थानक भवन में उत्तराध्ययन सुत्र के 33वे अध्याय तक का पठन साध्वी जिना ज्ञा श्री जी द्वारा हुआ! तीन दिवसीय जप आराधना में आज “ नमोथ्थुणं” का सामुहिक जाप चारो दिशाओं तरफ़ मॅंह कर के किया गया ! सभी समस्याओं का निराकरण इस जापके माध्यम से होता है! आज के धर्मसभा मे युवा डॉक्टर न्युरोलॉजिस्ट डॉ. परेश बाबेल का जन्मदिवस आध्यात्मिक रुप से मनाया गया ! अनिता जी प्रविण जी बाबेल परिवार धर्म आराधना तप आराधना नियमित रुप से करते है! श्रावक जी प्रविण जी के स्वास्थ्य की प्रतिकुलता होते हुये भी उभयतेका नियमित रुप से स्थानक भवन आ धर्मआराधना करना प्रेरणादायी है! संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी एवं विश्वस्त शारदाजी चोरडीया ने बाबेल परिवार की सराहना कर उनके नियमित धर...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣1️⃣ ⏰ *_501)_* विनय साधना का मेरूशिखर हैं.! *_502)_* दुर्गति से घातक दुर्मति है..! *_503)_* दुख मुक्ति, सुख प्राप्ति तो अतिरिक्त मुनाफा है, धर्म का फल तो स्वभाव में स्थिरता हैं.! *_504)_* अपने स्वार्थ में डूबा व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता.! *_505)_* जिसको नित्य एवं अनित्य का बोध हो गया, उसको परमानंद स्वरूप शीतगृह की प्राप्ति होती है.! *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
1) कागज – जलती हुये अक्षर से : ज्ञानावरणीय कर्म 2)जीवित प्राणियों का अंग विच्छेदन से : दर्शनावरणीय कर्म 3) प्राणियों को कष्ट पीड़ा से : अशात वेदनिय कर्म 4) पटाखे फोड़ने का आनंद लेने से : मोहनिया कर्मा 5)पटाखों से जीवो का विनाश होने से : तिर्यंच के नरकायु 6) प्राणि जीवो के शरीर के नाश से : अशुभ नाम कर्म 7) फूटते पटाखे का अहंकार करने से : निचगोत्र कर्म (8) जीवो की शांति भंग करने से : अंतराय कर्म
आकुर्डी स्थानक भवन में पॉंच दिवसीय दिपावली विशेष कार्यक्रम का आयोजन! दिपोत्सव आत्म की पवित्रता से मनाना है! आत्म की चेतना जगानी है – डॉ. राज श्री जी ! महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. डॉ. मेघाश्री जी म. सा. साध्वी समिक्षा श्री जी म.सा. एवं साध्वी जिनाज्ञा श्री जी म.सा. के पावन सानिध्य में उत्तराध्ययन सुत्र का वाचन, पठन बड़ी आस्था के साथ जारी है! आज 30 वे आध्याय तक का वाचन हुआ! विविध द्रुष्टांत सह हर अध्याय का अर्थ समझाया जाता है! उत्तराध्ययन सुत्र के साथ आज पॉंच दिवसीय दिपावली के शुभ अवसरपर विशेष कार्यक्रम एवं अनुष्ठान का आयोजन किया गया है! आज सामुहिक रुपसे “लोग्गस्स “का जाप हुआ! अनेक धर्मप्रेमी मान्यवरोंने सुत्र एवं जाप में सहभाग लिया! 31 तारीख को “नमोत्थुण” 1 तारीख़ “नमो जिणाणं जीव भयाणं” 2 तारीख़ उत्तरा ध्ययन का 36 वाँ अध्याय और नुतन वर्ष की महामांगलिक एवं 3 तारीख़ को आचार्य पु. दे...
Sagevaani.com /जालना: अंहकारी आणि घमेंडखोर व्यक्ती आयुष्यात कधीच पुढे जात नाही, त्यासाठी मनुष्याने नेहमीच अहंकार आणि घमेंड बाजूला ठेवली पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, उत्तराध्यायन सुत्र हे उगीच नाही. त्यामुळे आपल्या जीवनाचे निश्चितच कल्याण झाल्याशिवाय राहत नाही. म्हणूनच हे सुत्र सातत्याने आपल्या स्मरणात राहयला हवे. परंतू, दुर्देवाने मनुष्य हे सुत्र विसरत चाललाला आहे,त्यालां आपला नाविलाज असला तरीही व्यक्तींनी या सुत्राचा नेहमीच अभ्यास करावा, नेहमीच त्याचे चिंतन आणि मनन करावे, ज्यामुळे आपले कर्म चांगले उपजेल, आणि आपल्याला सन्मार्ग मिळेल, असे सांगून त्या म्हणाल्या की, जप हा नेहमीच करायला हवा....