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प्रत्येक वस्तु में  अनेक धर्म निहीत हैं

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣6️⃣ 🌅 प्रत्येक वस्तु में अनेक धर्म निहीत हैं.. समस्त धर्मो के बोध से पदार्थ का पूर्णबोध होता हैं, पूर्णबोध को प्रमाण कहते है.! ⚡ नय अर्थात वस्तु के एक अंश को जानना अन्य अंश का निषेध न करना.! 🤔 नय हमें वक्ता के आशय एवं संदर्भ को समझने की रीति सिखाता है.! 🪔 *प्रमाण नय के* *ज्ञान के अभाव में* *सिद्धांत के रहस्यों को* *समझना संभव नही है..!* ⚡ जहां प्रमाण नय के ज्ञान का अभाव हो वही पर कदाग्रह होता हैं.! *📚श्री स्यादवाद मंजरी📚*  

अहिंसा साईकल रॅली

अहिंसा साईकल रॅली के आयोजको ने लिए महासाध्वी डॉ. राज श्री म.सा. आदि ठाणा के मंगल आशिर्वाद! भगवान महावीर स्वामीजी का संदेश “ जिओ और जीने दो” जन जन तक पहुँचाने एवं अर्हम विज्जा प्रणेता उपाध्याय प्रवर पु. प्रविण ऋषिजी म. सा. के दर्शन, कर्नाटक गज केशरी, खद्दरधारी गुरुदेव पु. गणेशमलजी म.सा. के समाधि स्थल के दर्शनार्थ तीन दिवसीय चिंचवड़ से जालना(325 कि.मी.) की अहिंसा सायकल रॅली का आयोजन महावीर अॅडव्हेन्चर ग्रुप के राजेश एवं राजश्री ताथेड द्वारा किया गया है! यह रॅली एकासना तप के साथ राह में विराजीत साधु-संतो के दर्शन लेते आगे बढेंगी! आकुर्डी स्थानक भवन मे आयोजक राजेश एवं राजश्री ताथेड ने चातुर्मासार्थ विराजीत महासाध्वी डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी समिक्षा श्री जी, साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के रॅली पुर्व मंगल आशिर्वाद पाकर मांगलीक ग्रहण की! इस वक्त रॅली आयोजको को श्री संघ के विश्वस्तो द्...

एक समय में बंधे  कर्मो की निर्जरा हेतु

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣5️⃣ 🌅 एक समय में बंधे कर्मो की निर्जरा हेतु *अपार ऊर्जा की* *आवश्यकता रहती है..* 🧘‍♂️ अंतर्मुहूर्त मात्र की क्षपक श्रेणीमें अनंत भवों के संचित कर्म भस्मीभूत हो जाते हैं.! ❌ विषय भोग में लिप्त व्यक्ति कभी भी भव वन को पार नहीं कर सकते क्योंकि 🔥 उनकी समस्त ऊर्जा तो भोगविलास में ही लगी है, आत्म उत्थान के पुरुषार्थ हेतु उनके पास, न समय रहता, है न सत्त्व.. 💯 तीनो योग का आत्मध्यान में एकाग्र होना तभी संभव है जब साधक विषयों से अलिप्त रहता है.! ✅ अतः जो विषयों से अलिप्त, निरपेक्ष एवं निवृत्त रहता है वही भव वन को पार कर सकता है..! *📚श्रीज्ञाताधर्म कथा*

बोलो मगर प्यार से-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: एक ट्रक चालला होता, त्याच्या पाठीमागे लिहीले होते, बुरी नजरवाले तेरा मुंह काला, तर दुसर्‍या ट्रकच्या पाठीमागे लिहिले होते, बोलो मगर प्यार से…. प्यार बोले तो कलह होने का कामही नही! परंतू आज काल आम्ही कलह करण्यात फार गुरफटून गेलो आहोत. भांडण होण्याला काही तरी ठोस कारण हवे, परंतू भांडण होण्यालाही कारण लागत नाही, असा हितोपदेश साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी पुढे बोलतांना साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, कलह म्हणजे भांडण! भांडणं होण्याला काहीही कारण लागत नाही, ते कशावरुनही लागू शकते. एक ट्रक चालला होता, त्याच्या पाठीमागे लिहीले होते, बुरी नजरवाले तेरा मुंह काला, तर दुसर्‍या ट्रकच्या पाठीमागे लिहिले होते, बोलो मगर प्यार से…. प्य...

गुरु अमर संयम वर्ष के अंतर्गत सम्मान समारोह 6 को

Sagevaani.com /बेंगलुरु। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, श्री राजाजी नगर के तत्वावधान में 6 नवंबर, ज्ञान पंचमी को विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों का सम्मान समारोह उपप्रवर्तक पंकजमुनि और अमर-शिष्य डॉ. वरुणमुनि के सानिध्य में होगा। संघ अध्यक्ष प्रकाश चाणोदिया ने बताया कि समारोह में उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भगवान महावीर चिकित्सालय, बेंगलुरु को गुरु अमर स्वास्थ्य सेवा सम्मान से नवाजा जाएगा। व्यक्तिगत श्रेणी में महेन्द्र जैन (नरेला मंडी, दिल्ली) को भक्त शिरोमणि, रामनिवास जैन (रोहिणी, दिल्ली) को श्रावकरत्न, गिरधारीलाल जैन (लुधियाना) को मानवसेवा, डॉ. दिलीप धींग (चेन्नई) को श्रुतसेवा, विनोद जैन (दिल्ली) और सुरेखा प्रकाशचंद कटारिया को साहित्य सेवा, किशनलाल खाबिया (चेन्नई) और डॉ. अजयकुमार जैन बीके (मैसूर) को जीवदया, प्रकाशचंद रातड़िया मूथा (केजीएफ) को सामायिक स्वाध्याय, ...

मन में सुकून शीतलता से आता है – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में आठ वार की प्रवचन माला की हुई शुरूआत एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने सोमवार को आठ वार की प्रवचन माला में सोमवार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें शीतलता पसंद है क्योंकि वह सुकून देती है। हमारी ललाट को चन्द्र की उपमा दी गई है। मुख को चन्द्र के आकार जैसा बताया गया है। आज का वार सोमवार, सोम यानी चन्द्र, शशि। चन्द्र शीतलता प्रदान करने वाला है। उन्होंने कहा जब तक शरीर स्वस्थ है, आत्मा के हित में जो कार्य करना है, कर लो। चांद की शीतलता के संदर्भ में यह कहा जाता है कि आज ठंडा रहो। जब दिन, वार या कार्य की शुरुआत हो तो वह ठंडे दिमाग से शुरू करो। ठंडा व गर्म जब एक दूसरे के साथ टकराता है तो गर्म लोहा टूट जाता है। सोम, चंद्र मन का स्वामी है, मन का कारक है। जिसका चंद्र मजबूत हो, उसका मनोबल मजबूत होता है। जिसका चंद्र कमजोर हो,...

जैन दर्शन के अनुसार जीव और अजीव स्वतंत्र एवं निरपेक्ष हैं

क्रमांक – 38 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 आश्रव* *👉 जैन दर्शन के अनुसार जीव और अजीव स्वतंत्र एवं निरपेक्ष हैं। इनमें सम्बन्ध स्थापित करने वाला कोई तत्त्व होना आवश्यक है। इनमें जो सम्बन्ध स्थापित कराता है, वही आस्रव है। इसलिए आस्रव को कर्मों के आने का द्वार भी कहते हैं। आश्रव जीव का परिणाम है इसलिए वह जीव है।* *कमकिर्षणहेतुरात्मपरिणाम आश्रवः कर्म के आकर्षण के हेतुभूत आत्म परिणामों को आश्रव कहते है। जिस प्रकार तालाब में जल आने का कारण नाला है, नौका में जल प्रवेश का कारण छिद्र है और मकान में प्रवेश करने का माध्यम दरवाजा है, उसी प्रकार जीव के प्रदेशों में कर्म के आगमन का मार्ग आस्रव है। आस्रव तत्त्व को द्वार भी कहा जाता है क्योंकि इसी रास्ते से ...

भाईदूज भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और सौहार्द का प्रतीक है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में भाईदूज पर्व पर दिया संदेश एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने भाईदूज के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाईदूज का भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्व है। इस पर्व का सबसे बड़ा महत्व है कि यह दिन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के लिए मनाया जाता है। भाईदूज आर्य संस्कृति में वैदिक रुप से दीपावली के नववर्ष के पश्चात आती है। इस दिन बीज के चंद्रमा की कोर दिखाई देती है। उसी कोर के साकार को सिद्धशिला माना गया है। पारंपरिक धारणा यह है कि भव्य आत्मा बीज के दिन दर्शन कर यह धारणा करता है कि महाविदेह क्षेत्र में विचरण कर रहे सीमंधर स्वामी को नमन हो। उन्होंने कहा हमारा भारतीय समाज चंद्र वर्ष के साथ जुड़ा है। आज की दूज जैन परम्परा में बीज का महत्व भगवान महावीर के निर्वाण से जुड़ा है। नंदीवर्धन और महावीर में अद्भुत प्रेम था। भगवान महावीर क...

कषायों की अनुमोदना नहीं होती

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣4️⃣ 🌸 *_516)_* कषायों की अनुमोदना नहीं होती.! *_517)_* क्रोध का शुद्ध पर्याय ही क्षमा हैं, क्षमा की विकृति क्रोध है.! *_518)_* भवयात्रा पर पूर्णविराम लगाना ही धर्मकरणी का उद्देश्य हैं.! *_519)_* स्व आत्म के अतिरिक्त कोई समर्थ नहीं हमारा हित करने में.! *_520)_* तप करना श्रेष्ठ तप करने की शक्ति नही है तो कमसेकम तप करनेवाले की निंदा अन्तराय मत करो.!   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

भाऊ बीजेला अनन्य साधारण महत्व-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: आपल्याला प्रत्येकाला भगवंतांनी दोन डोळे, दोन हात दिले आहेत, तसेच भाऊबीजेचे आहे. भाऊ बीजेला अनन्य साधारण महत्व आहे. भाऊ आणि बहिणींचं नातं हे नेहमीसाठीच अतूट असते, तसंच नातं अांपणही ठेवायला हवं, असा हितोपदेश साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी पुढे बोलतांना साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, प्रत्येकाला भगवंतांनी दोन डोळे, दोन हात दिले आहेत, तसेच भाऊबीजेचे आहे. भाऊ बीजेला अनन्य साधारण महत्व आहे. भाऊ आणि बहिणींचं नातं हे नेहमीसाठीच अतूट असते, तसंच नातं अांपणही ठेवायला हवं. पोर्णिमेचा चंद्र जस- जसा मोठा असतो, तसंच हे नातं असतं, प्रत्येक पर्व वर्षातून एकवेळ येतं पण भाऊ- बहिणींच्या नात्याचा सण हा वर्षातून दोनदा येतो. श्रावण आला की, प्रत्येक स्त्र...

श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु ने उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मनाया

दिनांक : 2 नवम्बर 2024 शनिवार श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु ने उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मनाया | भगवान महावीर की अन्तिम देशना उतराध्ययन सूत्र के मूल वांचन व विवेचन वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्र कांकरिया ने किया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के तत्वावधान मे स्वाध्याय भवन,साहूकारपेट चेन्नई मे मनाये गए उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मे अनेक श्रदालु श्रावक-श्राविकाओं द्वारा सामायिक परिवेश मे दैनिक रुप से वीर स्तुति के रुप मे पुछिसुणं की स्तुति की गयी |  अनुभवी स्वाध्यायी बन्धुवर वीरभ्राता व वीरपुत्र वीरेन्द्रजी कांकरिया ने उतराध्ययन सूत्र के मूल संग अर्थ का अति सुन्दर विवेचन किया | श्रावक संघ, तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने दैनिक रुप से उतराध्ययन सूत्र के प्रथम अध्ययन विनय से छत्तीसवें अध्ययन जीवाजीवाभिगम मे से रोचक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम प्रस्तुत किया,श्रद्धालुओ...

आज्ञा ही परम मंगल है

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣3️⃣ 🪔 *_511)_* आज्ञा ही परम मंगल है.! *_512)_* अपने गुण वैभव को जानने मानने से उस पर श्रद्धा करने से गुण वैभव प्रगट होता है.! *_513)_* विचारों से व्यवहार का निर्माण होता हैं.! *_514)_* मान सम्मान, लोक संज्ञा को पुष्ट करने में समय बरबाद करना अधःपतन का मार्ग है.! *_515)_* वासना में लिप्त व्यक्ति कभी निर्लेप नही बन सकता.!   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

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