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धर्म नाश के कुचक्रों को समझें व अपनी संतति को धर्म से जोड़ें : उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. शुक्रवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। आज के समय में बहुत आत्मघाती हमारी संस्कृति पर हमले हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही एक डिसीजन दिया है कि व्यभिचार करना गुनाह नहीं है। पति-पत्नी का रिश्ता कोई संप्रभुता का नहीं है, यह तो अपनी जिन्दगी दूसरे के हाथों में देने और दूसरे की जिंदगी अपने हाथों में लेकर जीवन पर्यन्त जिम्मेदारीपूर्वक निभाने का रिश्ता है। यह एक-दूसरे पर अधिकार का रिश्ता है, इसी को हम पति-पत्नी का रिश्ता कहते हैं। कोर्ट वहां किस संपूर्ण आजादी देने की बात कहता है वहां कहता है कि व्यभिचार करना गुनाह नहीं है। पहले इतने बिगड़े हुए और अभी इस तरह के कानून बनाकर भारतीय संस्कृति और रिश्तों के ताने-बाने को तार-तार करने का कुचक्र चलया ...

विचारों को रोका नहीं बदला जा सकता है: पुष्पदंत सागर

चेन्नई. कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मूथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा विचारों के विकारों के साथ आनंद यात्रा संभव नहीं है। विचारों को रोका नहीं जा सकता, बदला जा सकता है। व्यक्ति बिना भोजन के रह सकता है लेकिन बिना विचार के नहीं। मन विचार की गति मोबाइल, टीवी की रेंज से भी ज्यादा तेज होती है। उन्होंने कहा पांच इन्द्रियों के विषयों के माध्यम से व्यक्ति ने मन को विकृत बना रखा है। मन का दरवाजा हर समय खुला रहता है। इसलिए हर पल कचरा भरता जा रहा है जिससे मन में गलत विचार जल्दी आते हैं। यह अच्छी बात नहीं है। अच्छी बातें और ध्यान, ज्ञान सीखने पड़ता है। पशु-पक्षी पेट भरने के लिए जी रहे हैं जबकि मानव संसार का मालिक बनने के लिए जी रहा है। इन्द्रिय विषयों के लिए सोच विकृत हो गई है।

आध्यात्म में सफलता के लिए सत्य के मार्ग पर चलना जरूरी: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. तांबरम जैन स्थानक विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा कि आध्यात्म में सफलता पाने के लिए सत्य एवं सरलता के मार्ग पर चलना जरूरी है। असत्य एवं वक्रता के रास्ते पर पर चलकर परमात्मा को नहीं पाया जा सकता। उन्होंने कहा जब तक असत्य है तभी तक संसार है। सत्य के आने पर तो संपूर्ण संसार ही मोक्ष को प्राप्त हो जाएगा। कम बोलना चाहिए लेकिन सत्य बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक बोलने से अच्छा है कि कम बोलें लेकिन तभी बोलें जब बोलना जरूरी हो। ज्ञान के लिए विनय जरूरी है तथा ईश्वर तक पहुंचने के लिए ज्ञान। आवेश में व्यक्ति विवेकहीन होकर अपनी वाणी पर से नियंत्रण खो देता है। आध्यात्मिक सफलता की तरह ही वास्तविक यश के मूल में भी सत्य ही होता है। उन्होंने कहा स्व, समाज अथवा देश किसी के भी विकास के लिए सत्य एवं धर्म के मार्ग पर चलना जरूरी है। साध्वी अपूर्वा ने कहा मात्र तीर्थंकर का नाम स्मरण भी हमारे मन पर अ...

भगवान का जप करने से दूर होते हैं अनिष्ट : साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. अयनावरम स्थित दादावाड़ी में विराजित साध्वी कुमुदलता ने कहा कि भगवान का जप करने से अनिष्ट दूर हो जाते हैं। ईश्वर के नाम स्मरण से ही जीवन रूपी भवसागर से पार पाया जा सकता है। पाश्र्वनाथ का अनुष्ठान करने से रिद्धि-सिद्धि प्राप्त होती है। आयोजकों ने बताया कि शुक्रवार को मां पद्मावती की आराधना तथा रविवार को गुरु दिवाकर कमला महिला मंडल द्वारा नारी सम्मेलन कराया जाएगा।

सामूहिक दया-भिक्षा का आयोजन 30 को

चेन्नई. साहुकारपेट स्थित जैन भवन में उप प्रवर्तक विनय मुनि ‘वागीश’ एवं गौतम मुनि के सान्निध्य में रविवार को पुरुषों का सामूहिक दया-भिक्षा का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान भारी संख्या में पुरुष एक दिन के लिए साधु का जीवन व्यतीत करेंगे। साधु जीवन बिताने के लिए वे घर-घर जाकर गोचरी-पानी आदि लाकर आहार ग्रहण करेंगे। इस दिन वे साधु जीवन की अन्य सभी क्रियाएं भी करेंगे। इस दौरान ये लोग गृहस्थ जीवन त्यागकर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर अग्रसर होंगे। कार्यक्रम की तैयारी में श्री एस.एस. जैन संघ, साहुकारपेट के चेयरमैन दीपक बाघमार एवं महेंद्र सेठिया आदि कार्यकर्ता आदि लगे हुए हैं।

अभातेयुप का 52 वॉ राष्ट्रीय “युथ कनेक्ट” अधिवेशन शुक्रवार से प्रारम्भ

देश विदेश से 1200 युवा साथी होगें सम्मिलित जिस संघ या संगठन की  युवाशक्ति संगठित होती है, वह संघ सदैव उन्नति की ओर चलता रहता है, वह प्राणवान धर्मसंघ होता हैं| अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विमल कटारिया ने बताया कि जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ एक ऐसा धर्मसंघ है, जिसकी युवाशक्ति संगठित युवा शक्ति है| तेरापंथ धर्मसंघ के नवमें आचार्य श्री तुलसी ने युवा शक्ति का सम्यक् नियोजन, युवा शक्ति के सही उपयोग के उद्देश्य के साथ अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के रूप में उनको संगठित किया| अभातेयुप ने अध्यात्म के क्षेत्र में सवा करोड़ नवकार महामंत्र का एक समय, एक साथ सामूहिक जाप और  मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव में एक दिन में 1 लाख से ज्यादा रक्त यूनिट संग्रहीत कर “ग्रींनिज बुक ऑफ द वल्ड” में अपना नाम दर्ज करा चुका हैं| महामंत्री श्री संदीप कोठारी ने बताया कि आज *तेरापंथ धर्मसंघ की एक अतिविशिष्...

एक पल भी गंवाए बिना जीवन को धर्म में लगाएं: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. गुरुवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपाध्याय प्रवर ने सामायिक की साधना के बारे में बताया। परमात्मा ने बताया है कि कोई पन्द्रह प्रकार से संसार के सारे जंजालों से मुक्त हो सकता है। दुनिया का एकमात्र जैन धर्म ही है जो इतनी आजादी देता है। जिनशासन कहता है कि तुम जैन नहीं बने तो भी मोक्ष में जा सकते हो। चाहे जिस भी रास्ते जाओगे सामायिक से ही जाओगे। जितने भी सिद्ध हुए हैं वे सभी सामायिक की प्रक्रिया से ही मोक्ष में गए हैं। भाषा, क्रिया, पहनावा, स्थिति अलग हो सकती है लेकिन भावना सामायिक की ही होगी। ऐसी सूचनाओं की संरचना जिससे कोई भी जीव इस अनुभूति में पहुंच जाता है। वही सामायिक है। जैन धर्म बताता है कि सामायिक में स्वयं के साथ दूसरों के भी नरक ...

भलाई के कार्य से ही जीवन में आयगा बदलाव

चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा कि परमात्मा के प्रति दिल से भक्ति होने पर ही मीरा ने जहर पीकर भी पचा लिया था। सचमुच में दिल की भक्ति मनुष्य को आगे बढ़ाने वाली होती है। दिखावा में की हुई भक्ति लोगों को जहां का तहां ही खड़ा कर देती है। यदि जीवन में आगे जाना चाहते हैं तो दिल से भक्ति करें। उन्होंने कहा मनुष्य को जितना हो सके भलाई के कार्य करने चाहिए। अगर भलाई नहीं कर पाए तो बुरा किसी के साथ कभी नहीं करना चाहिए। जीवन को सफल बनाने के लिए हमेशा अच्छा करने का ही विचार रखना चाहिए। जितना संभव हो सके मनुष्य को अच्छा, भलाई और उपकार का कार्य ही करना चाहिए। लेकिन कभी भी किसी का बुरा अहित नहीं करना चाहिए। उन्होंंने कहा कि यदि हम किसी का बुरा करते हैं तो उसका बुरा नहीं होगा लेकिन अपना बुरा हो जाएगा। इसलिए सभी के प्रति अच्छा करने का भाव रखना चाहिए। ऐसा करने पर ही व्यक्ति ...

अशुभ कर्मो का क्षय होने से हर जन्म में सुख की प्राप्ति होती है: वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत धारा बरस रही है, जैन दिवाकर दरबार में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि नें धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि भगवान महावीर स्वामी गौतम स्वामी से पृच्छा करने पर फरमा रहे थे कि सुबाहु कुमार को जो रिद्धि-सिद्धि मिली है।   वह पूर्व भव में सुमुख गाथा पति ने तपस्वी संत सुदत्त अणगार को सुपात्र दान देकर अनंत पुण्य का संचय कर लिया। शुभ कर्म का बंध और अशुभ कर्मो का क्षय होने से हर जन्म में सुख ही सुखों की प्राप्ति होने वाली है।  गौतम स्वामी ने प्रभु से पूछा कि हे भगवान क्या सुबाहु कुमार आपके पास दीक्षा ग्रहण करेंगे , प्रभु ने कहा – हाँ गौतम – ये कालान्तर में दीक्षा ग्रहण करेगा कुछ समय के पश्चात प्रभु ने हस्तिशिर्ष नगर से विहार करके जनपद में विहार करने लगे। सुबाहु कुमार ने भगवान से जो 12 व्रत ग्रहण किये उनका अच्छे से ( ...

लोभ को जीतने वाला बनता है केवलज्ञानी: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. बुधवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपाध्याय प्रवर ने जैनोलोजी प्रैक्टिकल लाइफ में सफलता के सूत्र बताते हुए कहा कि यदि कोई आपके साथ सकारात्मक न भी रहे तो आपको सकारात्मक अवश्य रहना चाहिए। यदि आप सकारात्मक रहोगे तो सामने वाले के भी सकारात्मक होने की संभावनाएं बनी रहती हैं कि वह कभी न कभी सकारात्मक हो सकता है। जिस प्रकार बीज कभी भी अनुकूलता मिलने पर अंकुरित होकर पेड़ बन सकता है इसी प्रकार हमारे कर्मों के बीज भी कब और कौन-से भव में उदय हो जाएं पता नहीं चलता। संसार का प्रत्येक व्यक्ति सफल और सम्मानित होना चाहता है। जिस जीव को कहीं भी जाकर सम्मान, सहयोग और उपकार करने वाले मिलते हैं वह उच्च गौत्र का माना गया है और जिसे हर जगह असहयोग और अपमान का...

संयम की प्रेरणा का मार्ग हैं अणुव्रत : आचार्य महाश्रमण

अणुव्रत का अर्थ है – छोटे छोटे व्रत, संकल्प, नियम| सब बड़े नियमों को स्वीकार कर लें, यह कठिन है| महाव्रतों में बड़े बड़े व्रतों की संयोजना है। पूर्ण अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य व अपरिग्रह की परिपालना हैं, महाव्रत| पर यह यदि न हो सके तो हम ऐसे ही क्यों रहें? क्यों न छोटे-छोटे व्रतों को स्वीकार करके अपने पर अपना अनुशासन कर लें, उपरोक्त विचार माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अन्तर्गत साम्प्रदायिक सौहार्द दिवस के आयोजन के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहे|   आचार्य श्री ने आगे कहा कि व्यक्ति अपने जीवन विकास के लिए अणुव्रत के नियमों को अपनाए, संकल्प करें, जैसे मैं किसी निरपराध प्राणी की हत्या नहीं करूंगा| शराब, गुटका, सिगरेट आदि का परिहार करके बड़ा झूठ, धोखाधड़ी व मिलावट नहीं करूंगा|   आचार्य श्री ने आगे कहा कि जैन धर्...

सुख है आत्म-संतोष व विवेकपूर्ण समझ में: आचार्य पुष्पदंत सागर

चेन्नई. कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मूथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा सुख महत्वाकांक्षा की पूर्ति में नहीं, सुख अहम की पुष्टि एवं अमीर-गरीब होने में नहीं, सुख अनपढ़ या विद्वान होने या उच्च पद पर पहुंचने में भी नहीं है, सुख है विवेकपूर्ण समझ और आत्म-संतोष में। अपनी समझ बढ़ाकर उसका सदुपयोग करें। अवसर मिले तो सत्संग में जाएं। ज्ञान और वैराग्य के अभाव में भक्ति रोती है एवं श्रद्धा के अभाव में भक्ति अंधी है। जब दो बाल्टी पानी रखने वाले घड़े को भी कसौटी पर कसा जाता है उसे भी हिचकोले खाने पड़ते हैं फिर आप तो इन्सान हैं। आप में परमात्मा का वास है। आपका अपना क्या है। आपकी बेटी जंवाई की अमानत है समय आने पर ले जाएगा। बेटा बहू की अमानत है समय आने पर उसका हो जाएगा। शरीर श्मशान की अमानत है समय आने पर जला दिया जाएगा। केवल तुम्हारा तो परमात्मा है जिसके हो उसके हो जाओ। गीता मात्र सांसारिक ज्ञान ह...

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