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सत्यमेव जयते नातृतम्’: शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

चेन्नई:  जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता अहिंसा यात्रा प्रणेता अणुव्रत अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने शनिवार को ‘महाश्रमण समवसरण’ से पावन संबोध प्रदान करते हुए कहा कि आदमी को सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। सच्चाई का मार्ग कंटकाकीर्ण भले हो सकता है, किन्तु उसकी निष्पत्ति सदैव मंगलकारी होती है। इसलिए कहा गया ‘सत्यमेव जयते नानृतम्’ अर्थात् सत्य की सदा विजय होती है, असत्य की नहीं। आचार्यश्री ने अणुव्रत महासमिति के तत्त्वावधान में आयोजित हुए 69वें वार्षिक अधिवेशन में पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि अणुव्रत के द्वारा आदमी के जीवन में सात्विकता, नैतिकता, प्रमाणिकता और धार्मिकता रहे, तो जीवन अच्छा बन सकता है। आचार्यश्री ने संयम को अणुव्रत की आत्मा बताते हुए कहा कि ‘सादा जीवन उच्च विचार, मानव जीवन का शृंगार’। आदमी के जीवन के सादगीपूर्ण जीवन जीने ...

बुद्धि हर व्यक्ति में होती है, उसका सदुपयोग करें:

चेन्नई. बुद्धि हर व्यक्ति में होती है वह उसका सदुपयोग कर जीवन के उच्च शिखर पर पहुंच सकता है। अकबर दिल्ली का बादशाह था लेकिन बुद्धि का बादशाह बीरबल था। बीरबल की बुद्धि को आज दुनिया याद करती है। जैन इतिहास में अभय कुमार की बुद्धि सर्वश्रेष्ठ है। अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में विराजित साध्वी कुमुदलता ने बताया कि कन्या राशि वाले व्यक्ति दो राशियों मिथुन एवं कन्या के साथ अपने जीवन में क्या भाव रखते हैं। कन्या राशि का सिंबॉल है कि जब लडक़ी 17 वर्ष की होती है तब कन्या राशि वाला व्यक्ति क्या क्या करता है इस पर साध्वी ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बुध ग्रह बुद्धि देता है। आज पशु और मानव में भेद अगर दिखता है तो वह है बुद्धि को बुद्धि की अपेक्षा से बदलाव। भगवान ने मनुष्य को बुद्धि दी है इसीलिए आज पशु से मानव उच्च कहलाया। दिवाली को बैंक खाते में अभय कुमार की बुद्धि मिले ऐसा कहते हैं। बु...

साध्वी धर्मलता के सानिध्य में अनुठा धार्मिक मैच

चेन्नई. ताम्बरम विराजित साध्वी धर्मलता के सानिध्य में एक अनुठे प्रकार का क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। इस मैच में 13—13 महिलाओं की टीम बनाई गई। ब्रहृमाजी टीम की कप्तान शिमलाजी गुगलिया और सुंदरीजी टीम की कप्तान शिमलाजी मरलेचा थी। इस मैच में बॉल के बजाय प्रशन पूछे जाते थे। इसके लिए 25 पर्चियां तैयार की गई जिसमें 125 प्रश्न थे। चार सेकेंड के अंदर पर्चियों के प्रश्नों का उत्तर देने पर छह रन, पांच सेकेंड के अंदर उत्तर देने पर चार रन, वहीं छह सेकेंड में दो रन देने का प्रावधान था। सात बीतने पर भी यदि खिलाड़ी उत्तर नहीं देता है तो वह पास कहकर आउट होने से बच सकता है। पास न बोलने पर खिलाड़ी को क्लीन बोल्ड माना जाता है। मैच में सुंदरी टीम ने दो विकेट खोकर 714 रन बनाए। वहीं ब्रहृमी टीम ने चार विकेट खोकर 659 रन बनाए। सुंदरी टीम को विजेता घोषित किया गया। ज्योति हुमरवाल 572 रन बनाकर मैन आॅफ द मैच रही। प...

चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत धारा: वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत धारा बरस रही है, जैन दिवाकर दरबार में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि नें धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि आर्य सुधर्मा स्वामी ने अपने शिष्य जंबू स्वामी के पूछने पर कहा था कि, भगवान महावीर स्वामी से जैसा सुना है वैसा ही मैं तुम्हें सुना रहा हूं। सुखविपाक के माध्यम से तीसरे अध्ययन का वर्णन सुनो। हे जम्बू वीरपुर नामक नगर था, वहां पर मनोरम नामक एक बगीचा था, वहां के राजा वीर कृष्ण मित्र थे, श्रीदेवी रानी थी उनके सुजात कुमार नामक पुत्र था। सुबाहू कुमार की तरह विद्या अध्ययन होने पर बलश्री प्रमुख 500 श्रेष्ठ राज कन्याओं के साथ विवाह हुआ। पांचों इंद्रियों के सुख भोग में तलिन बने हुवे थे। ऐसे में भगवान महावीर स्वामी पधारे धर्म श्रवण के साथ श्रावक के 12 व्रतों को ग्रहण किया। गौतम स्वामी के पृच्छा करने पर भगवान महावीर ने सुजातकुमार क...

भला करोगे तो भला होगा

चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा मानव जीवन को सार्थक करने के लिए परमात्मा ने धर्म का संदेश दिया है। जीवन में सच्चा फल पाने के लिए इस जीवन को धर्म कार्यो से जोडऩा चाहिए। जितना हो सके दूसरों का भला ही करना चाहिए। सचमुच मनुष्य का जीवन मिला है तो दूसरों का कल्याण हो ऐसा ही कार्य करना चाहिए। ऐसा करने से हमारे जीवन का भी भला हो जाएगा है, क्योंकि जो दूसरों का भला करते है परमात्मा उनका भला करता है। कोई भी कार्य को अच्छा करने के लिए स्वयं को उसमे लगाना चाहिए। दूसरों के भरोसेे कार्य छोडऩे वालों को असफलता ही हाथ आती है। उन्होंने कहा कि संत के पास जाने के बाद ही मनुष्य में धर्म का भाव बनता है। इसके लिए श्रावक के अंदर गुरुओं के प्रति आस्था और श्रद्धा होनी चाहिए। अच्छा भविष्य बनाने के लिए अच्छा व्यवहार रखना चाहिए।  अच्छे मार्ग पर चल कर प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन का कल्या...

19वां स्थापना दिवस मनाया

चेन्नई. श्री एसएस जैन संस्कार मंच ने हाल ही अपना 19वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर मंच द्वारा देश की सभी शाखाओं में धर्म-सेवा कार्यक्रम किए गए। इसी क्रम में साहुकारपेट स्थित जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक विनयमुनि व गौतममुनि के सान्निध्य में मंच के सदस्यों के नाम की बुकलेट जारी की गई। राहुल कोठारी द्वारा तैयार की गई इस बुकलेट में सदस्यों के मोबाइल नंबर के अलावा उनके ब्लड ग्रुप की भी जानकारी दी गई है। इसके साथ ही महावीर लूणावत, रेवंत बोहरा, राजीव बैद, पंकज कोठारी के नेतृत्व में महानगर में विराजित गुरुओं के दर्शन का आयोजन किया गया।  इसके अलावा अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में पौधारोपण किया गया। मंच के सहमंत्री दीपक बाघमार और महेन्द्र सेठिया का विशेष सहयोग रहा।

तीर्थंकर परमात्मा का ऐश्वर्य त्रिजगत में प्रकाशमान : उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. शुक्रवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज का प्रवचन कार्यक्रम हुआ। उपाध्याय प्रवर ने जैनोलोजी प्रोक्टिकल लाइफ सत्र में कहा कि अपने अन्दर की कमजोरियों को पहचानें और उनका सही समय पर उपचार करें, प्रायश्चित करें तो आपकी शक्ति और सामथ्र्य बढ़ जाएगा। मनुष्य को अपने आत्मस्वभाव में रहना चाहिए। व्यर्थ की चिंताओं से बचना चाहिए। परमात्मा ने कहा है कि शांति से रहना है तो जीवन के तीन कांटों को अपने जीवन से निकालना होगा। पहला- किसी के साथ चिंटिंग करते हैं तो आप स्वयं अपनी प्राण ऊर्जा में कांटा चुभो लेते हैं। अपने प्रगति के रास्तों को बंद कर लेते हैं। जीवन का दूसरा कांटा है गलतफहमी। यदि सफाई दें तो भी गुनाहगार और नहीं देंगें तो भी गुनाहगार बने रहेंगे और सामने वाला इनडायरेक्ट बोलता रहता है। यह कांटा निकलना सबसे मुश्किल काम है। जो ...

ज्ञान का सार है आचार: आचार्यश्री महाश्रमणजी

चेन्नई : माधावरम में शुक्रवार को हो रही बरसात के कारण जब अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी चतुर्मास परिसर में बने प्रवचन पंडाल में नहीं पधार पाए तो दृढ़ संकल्प के धनी आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को अपने प्रवास कक्ष के बाहरी बरामदे से ही मंगल प्रवचन का श्रवण कराया। श्रद्धालु भी प्रवचन पंडाल से लेकर प्रवास स्थल के समीप तक पूर्ण श्रद्धाभाव के साथ आचार्यश्री की अमृतवाणी का रसपान किया। दो दिनों हो रही बरसात शुक्रवार को भी प्रातः हल्के रूप में ही सही नियमित जारी थी। जैन साधुचर्या के अनुसार बरसात में नहीं निकल पाने के कारण प्रातः के मुख्य मंगल प्रवचन के लिए जब आचार्यश्री का प्रवचन पंडाल की ओर पधारना नहीं हो पाया तो दृढ़ संकल्प के धनी आचार्यश्री ने अपने प्रवास को ही प्रवचन पंडाल बना दिया और फिर तो वहीं से मंगल प्रवचन भी सुनाया, श्रद्धालुओं को पावन भी प्रेरणा प्रदान की। सर्वप्रथम आचार्यश्री न...

श्री पाश्र्व पदमावती महापूजन का हुआ भव्य आयोजन

मुंबई: राष्ट्र-संत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर महाराज और डाॅ. मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के सान्निध्य में शांताकु्रज स्थित सवोय रेजिडंेसी के सुरेश जैन के  आवास पर श्री पाश्र्व पदमावती महापूजन का भव्य आयोजन किया गया। इस महापूजन समारोह में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूजा के वस्त्रों में पूजन किया। महापूजन के लाभार्थी सुरेश जैन के अनुसार घर, परिवार एवं शहर की सुख, शांति एवं समृद्धि की अभिवृद्धि के लिए आयोजित इस महापूजन समारोह में शरीक होने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु अलसुबह सवोय रेजिडेंसी पहुँच चुके थे। श्रद्धा और भक्ति में झूमते हुए श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम दिव्य मंत्रोच्चार के साथ दूध, जल, चंदन, अक्षत, गंध, फल, फूल आदि से पारसनाथ भगवान और पदमावती माताजी की अष्ट प्रकारी पूजा सम्पन्न की। इस अवसर पर संतप्रवर ने चमत्कारी एवं मनवांछित पूर्ण करने वाले पदमावती माता के इकतीसे का सामूहिक संगान करवाया। जब संतप्...

चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत धारा: वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत धारा बरस रही है, जैन दिवाकर दरबार में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि नें धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि सुबाहूकुमार मुनि सौधर्म कल्प में आयुष्य पूर्ण करके गये, वहां से देव शरीर को छोड़ करके मनुष्य भव को प्राप्त करेंगे, यहां पर केवली भगवान के बोध से मुनि बनकर अनेक वर्षों तक संयम का पालन करके अंतिम समय में संथारे के साथ आयु पूर्ण करके सनतकुमार नामक तीसरे देवलोक में जायेगे, वहां से पुनः मनुष्य भव प्राप्त करेंगे , दीक्षा ले करके तप संयम साधना के साथ आयु पूर्ण करके महाशुक्र नामक देव लोक का आयु भोगकर पुनः मनुष्य भव में जन्म लेंगे , पूर्व भव के समान ही यहां दीक्षा लेकरके साधना करते हुए आयु पूर्ण करके नवमें आनत नामक देवलोक में उत्पन्न होंगे ,वहां से चवकर के मनुष्य भव में आकर के दीक्षा लेकर तपस्या आराधना के द्वारा आत्मा भावित कर...

गलतियों की जिम्मेदारी लें और प्रायश्चित को अहोभाव से स्वीकारें: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. गुरुवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज का प्रवचन कार्यक्रम हुआ। उपाध्याय प्रवर ने जैनोलोजी प्रोक्टिकल लाइफ सत्र में कहा कि स्वयं अपराध स्वीकारने के बाद सुधरने के लिए प्रायश्चित दिया जाता है और यदि स्वयं सुधरना नहीं चाहता और दूसरा उसे सुधारने के लिए जो देता है वह दंड कहलाता है। प्रायश्चित लेने के बाद गलतियों की पुरानवृत्ति होने की संभावना शून्य हो जाती है। किसी की बुराई को जानकर भी उसे बुरा न समझने वाला व्यक्ति ही प्रायश्चित दे सकता है। प्रायश्चित देने वाले के मन में यदि उसके प्रति भावना बदल जाए, घृणा हो जाए तो उसकी नकारात्मकता प्रायश्चित देने वाले में आ जाती है। जो इससे बच सकता है वही किसी को प्रायश्चित दे सकता है। जो प्रायश्चित गुरु बताते हैं, उसे अहोभाव से स्वीकार करें। गलती के लिए स्वयं की जिम्मेदारी लें तब ही...

तनावमुक्त जीवन जीने के लिए अनुष्ठान परमावश्यक: साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. शांति पाने व तनावमुक्त जीवन जीने के लिए अनुष्ठान परमावश्यक है। चाहने से कुछ नहीं मिलता। जीवन में कुछ पाना है तो अध्यात्म की यात्रा करनी पड़ेगी। व्यक्ति अध्यात्म को भूल कर बस भौतिकता की इस चकाचौंध में फंस गया। ऋषियों ने कहा है मन के मते ना चलिए अर्थात मन के अनुसार चलोगे तो वह और मनमानी करेगा। अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में विराजित साध्वी कुमुदलता ने कहा अनुष्ठान आत्म साधना का माध्यम है, अनुष्ठान एक औषध, संजीवनी बूटी और कर्म निर्जरा करने का साधन है। शरीर को जैसे भोजन की आवश्यकता होती है ठीक उसी तरह आत्मा के लिए अनुष्ठान जरूरी होता है। यह जाप करके व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। जाप से आत्मिक शांति के साथ ही घर-परिवार व राष्ट्र में शांति होती है। यह मन कभी तो साहित्य के सुंदर पुष्पों का रस लेता है कभी वहां से उडक़र वासना की ओर दौड़ पड़ता है यह तो पल पल बदलता है क्षण क्षण फिसलता है...

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