चेन्नई. सैंकड़ों में कोई एक शूरवीर निकलता है, हजारों में कोई एक पंडित होता है, दस हजार में कोई एक वक्ता जन्म लेता है, लेकिन दाता तो कभी कभी ही जन्म लेता है। दाता सब जगह उपलब्ध नहीं होते। हमें दान देने के साथ ही दान लेने वालों के भीतर ऐसा स्वाभिमान जगाना है कि वे लेने के बदले देना सीख जाए। साहुकारपेट में स्थित राजेन्द्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय के सान्निध्य में जैन महासंघ,चेन्नई के तत्वावधान में दीपावली का विशेष राशन वितरण मुख्य अतिथि समाजसेवी नोखा निवासी दीपचंद लूणिया ने किया। हर जगह ऐसे लघु उद्योग हो,जिससे असहाय लोग भी अपनी आजीविका का साधन जुटा सके और पराधीनता से धीरे-धीरे स्वाधीनताको अपना ले। इस अवसर पर मुनि संयमरत्न ने कहा कि दान देने के साथ हमें नाम की इच्छा नहीं रखी चाहिए। गुप्त दान महान पुण्यकारक होता है। जो गुप्त रूप से दान करता है, उसे गुप्त रूप से ही खजाना मिलता है। अशक्...
चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में विराजित साध्वी महाप्रज्ञा ने कहा कि जाते जाते अगर कोई बात कह दे तो वह बात दिल में दिमाग में और आचरण में लाना चाहिए। जैसे पिता अंतिम समय में अपने बेटे को वसीयत देकर जाते है महावीर उत्तराध्ययन सूत्र में अपने उपासकों को अंतिम वसीयत देकर गए। यह वसीयत जीवन में उतार ली जाए तो स्व कल्याण हो जाएगा। उत्तराध्ययन सूत्र में बताया गया है कि तेरा मेरा करने में अपना समय व्यतीत नहीं करना चाहिए। जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे। प्रभु ने संसार ने चार प्रकार के गड्डे बताए है। पेट का गड्डा, समुद्र का गड्डा, तृष्णा का गड्डा। इन चारो गड्डों में नो एंट्री का बोर्ड नहीं है। पेट कभी भरा नहीं। आज टिफीन भरा कल खाली। नई नई चीजे खाने की चाहत रहती है। समुद्र में कितनी नदिया आई पर समुद्र कभी भरा नहीं। तृष्णा, इच्छा कभी पूरी नहीं होती। श्मशान घाट कभी भरता नहीं। उत्तराध्ययन सूत्र की...
चेन्नई. नदी जल का दान कर रही है। फूल सुगंध बांट रहा है, बादल पानी बांट रहे है और हवा जीवन दे रही है। दीया अंधकार पीकर रोशनी दे रहा है। तुम भी मिलकर रहो और मिल बांटकर खाओ। जो बचाकर खा रहा है वो राक्षस है, जो देता है वो देवता है, बड़भागी है। कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मुथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा कि सूर्य प्रकाश बांट रहा है, चंद्रमा शीलता बिखेर रहा है। जो भी तुम्हारे पास हो उसे अनाथों गरीबों में बांट दो। पैसा है तो पैसा बांटो, पैसा नहीं है तो प्रेम बांटो। सेवा भावी बनो, परोपकारी बनो। पिता का वचन पूरा करने राम वन को गए। राम की मर्यादा जगत के लिए वरदान बनी। सीता का शील नारियों के लिए प्रेरणा बनी। लक्ष्मण का भातृ प्रेम, प्रेम की प्रेरणा और हनुमान की भक्ति मैत्री का उदाहरण बनी। विभीषण धर्म, ईमान, सद् नीति और सद्व्यवहार का इतिहास बना। तुम भी दूसरो के लिए प्रेरणा बनो। सुख को बांटो ...
चेन्नई. जिस कम से कम ज्ञान के बल पर अर्जुनमाली केवली बना ऐसा ज्ञान किसी को भी हो सकता है। हम कैसे चलें, कैसे बोलें, कैसे भोजन करें कि जिससे हमें आनन्द और शक्ति की प्राप्ति हो कि तन, मन और चेतना प्रसन्न हो जाए। वस्तुओं को कैसे रखें अपने अन्तर की एनर्जी सुरक्षित रहे। कैसे वस्तु को लें कि सौभाग्य का उद्घाटन जाए। कैसे कम से कम व्यर्थ करें। मंगलवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज ने उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन कराया। उन्होंने समवशरण की रचना अपने अन्तर में करने की प्रेरणा दी। अपने अन्तर की शुद्धि और पवित्रता का अहसास करते हुए समवशरण की आराधना करते हैं पूर्ण श्रद्धा का भाव रखें। निर्वाण कल्याणक की अनुत्तर देशना जटिल समस्याओं का सरल समाधान देती है। अपने मन को इस तरह सुरक्षित रखना कि सोचें और काम पूर्ण हो जाए। जो मन के मालिक बनें। अ...
चेन्नई. माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में ठाणं सूत्र के छठे स्थान के तीसवें सूत्र का विवेचन करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि संहनन के छह प्रकार हैं| हमारे शरीर में संहनन का भी महत्व होता हैं| अस्थीयों (हड्डियों) की संरचना को संहनन कहा जाता हैं|* किसी आदमी की हड्डियाँ मजबूत हो सकती हैं, तो किसी की कमजोर हो सकती हैं| कई लोग अपनी हड्डियों को मजबूत रखने के लिए केल्शीयम या अन्य पदार्थों का सेवन करते हैं| कई बार आदमी गिरता हैं, हड्डी टुट जाती हैं, फैक्चर हो जाता हैं| फिर ऑपरेशन करता है, विश्राम करना पड़ता हैं| आचार्य श्री ने आगे कहा कि संहनन पृथ्वीकाय, वनस्पति आदि स्थावर जीवों में भी होता हैं| प्रश्न हो सकता हैं कि इनमें कौनसी हड्डियाँ होती हैं? इसका संभावित एक समाधान यह हो सकता हैं, कि अस्थि एक प्रतीक है कठोरता की| शरीर में जो कठोरता का भाग हैं, वो संहनन हैं, तो स्था...
चेन्नई. कहते हैं प्रभु या गुरु की एक नजर भक्त के जीवन को आबाद कर देती है और यदि हट जाए तो बर्बाद भी कर सकती है। भगवान के चरण वंदन से संकट दूर हो जाते हैं। अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में विराजित साध्वी महाप्रज्ञा ने कहा जिस प्रकार जहर की एक बूंद जिंदगी बर्बाद कर देती है उसी प्रकार जिनवाणी अमृत के समान होती है, इसकी यदि उतर जाए तो जीवन का कल्याण हो जाता है। संसार में जो आया है उसे जाना ही पड़ेगा। संसार में रहें तो कमल की तरह रहें। जीवन का सच मृत्यु को जान-समझकर जीने का प्रयास करें। साध्वीने बताया छठी शिक्षा क्षुल्लक निग्र्रंथ महावीर के समय जैन धर्म का नाम पड़ा। यह हमें सिखाता है कि राग-द्वेष की गांठ नहीं होनी चाहिए। जिस प्रकार धागे में गांठ होगी तो सूई में धागा अटक जाएगा जिससे सिलाई नहीं होगी, उसी प्रकार मन में यदि गांठ पड़ जाए तो आत्मा मुक्त नहीं हो सकती। कषाय से मुक्ति हो जाए तो संसार से ...
चेन्नई. कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मूथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा कि आदमी तीन चीजों के लिए जीता है-मेरा नाम रोशन हो, मेरी कोठी सुन्दर हो और मेरे वस्त्राभूषण सबसे ज्यादा सुन्दर हो। वह सारा जीवन इन तीनों को पाने में ही खपा देता है। आचार्य ने कहा कि आदमी इतना भी नहीं सोचता कि पलक गिरते ही, आंख बन्द होते ही ये तीनों चीजें बदल दी जाएंगी। नाम-स्वर्गीय, वस्त्राभूषण की जगह कफन, कोठी की जगह श्मशान होगा। स्थाई संसार में बदल गया। नाम कोठी वस्त्राभूषण सब क्षणभंगुर थे, एक क्षण में बदल गए। मात्र आत्मा परमात्मा शाश्वत है। इसे पाने की कोशिश ही नहीं की। धर्म भी किया तो अहंकार के साथ। नाम भी रोशन हुआ तो अभिमान के साथ। कोठी भी मशहूर हुई तो घमण्ड के साथ। अगर वास्तव में जीना है तो अपने सुख-दुख परमात्मा के चरणों में छोड़ दो। व्यर्थ के तर्क मत करो। तर्क धम के लिए दीवार हैं। परमात्मा प्रेम द्वार है।...
ज्ञानशाला रूपी फुलवारी विकसित होती रहे: आचार्य श्री महाश्रमण माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के तत्वावधान में, ज्ञानचन्द प्रकोष्ठ के अन्तर्गत त्रिदिवसीय ज्ञानशाला प्रशिक्षक सम्मेलन एवं दीक्षांत समारोह 2018 का शुभारंभ परम् पूज्य आचार्य प्रवर के मंगल पाठ के साथ हुआ| इस अवसर पर आचार्य श्री ने ज्ञानशाला के प्रशिक्षकों एवं व्यवस्थापकों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञानशाला, बालपीढ़ी के संघ निर्माण, संस्कार निर्माण, ज्ञानवर्दन के लिए बहुत महत्वपूर्ण उपक्रम हैं| इसमें जुड़े हुए लोग जो निर्वद्य प्रयास करते हैं, आध्यात्मिक सेवा करते हैं, वे अपने आप में अनुमोदनीय हैं| प्रशिक्षकों के बारे में कहते हुए आचार्य श्री ने कहा कि कितने-कितने लोग इसमें प्रशिक्षण देते हैं| वे स्वयं पहले प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, देने वाले प्रशिक्षकों को, प्रशिक्षण देते हैं...
चेन्नई. जिस संघ समाज में जिज्ञासा पर पाबंदी हो वह प्रगति के रास्ते पर लंबे समय तक चल नहीं सकता। धर्म में जिज्ञासा का समाधान होना चाहिए। सोमवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज ने उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन कराया। उन्होंने कहा कि निर्वाण कल्याणक की अनुत्तर देशना जीवन की हर समस्या का समाधान देती है। चाहे जैसा माहौल या परिस्थिति रहे। समस्याओं के प्रति बिलकुल स्पष्ट निर्देश मिलता है प्रभु की इस देशना से। भगवान पाश्र्वनाथ 23वें तीर्थंकर, महावीर 24वें तीर्थंकर हैं। पाश्र्वनाथ ने भगवान महावीर के बारे में सारी बातें बताकर गए थे। इसके बावजूद भी जिस समय महावीर का शासन प्रारंभ हुआ। पाश्र्वनाथ के शासन के साधु-साध्वियों ने उन्हें अपने धर्मगुरु नहीं स्वीकारा। आज के समय में दुनिया में बहुत सारी धारणाएं और लोग हैं तथा विभिन्न परंपराएं हैं।...
कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत रस की सरिता बह रही है, जैन दिवाकर दरबार में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि नें धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सुधर्मा स्वामी ने जंबू स्वामी से कहा कि भगवान महावीर ने 22 परिषह व शारीरिक, मानसिक कष्ट और राग द्वेष आदि व ज्ञानावर्णीय आदि अंतरंग शत्रुओं को जीतकर के केवल ज्ञानी केवलदर्शी बने। लोका लोक के सभी जीवो के मन के भावों को हस्त कमल के समान जानने व देखने वाले थे ,केवल ज्ञान से बढ़कर के कोई भी ज्ञान संसार में नहीं है। विशुद्ध कोटी और अविशुद्ध कोटि दोनो प्रकार के दोष से रहित, यानी की मूल गुण व उत्तर गुण से विशुद्ध चारित्र अथार्त यथा ख्यात चारित्र के धारक थे। इस 5 वी गाथा में ज्ञान और क्रिया का समन्वय बता करके ज्ञान व क्रिया की आवश्यकता है। मोक्ष में जाने के लिये, कोई कितना भी ज्ञानी महापंडित बन जाये परंतु मुक्ति नहीं मिल ...
चेन्नई. आत्म कल्याण के लिए जीवन में स्वाध्याय बहुत ही जरूरी होता है। जो मनुष्य अपने गुरुओं, रत्नाधिक संतों के साथ विनययुक्त आचरण करते हैं वही सच्चे अर्थों में सफलता की ओर बढ़ते हैं। ज्ञानी कहते हैं जो घोड़ा अपने मालिक की इच्छानुसार चलता है वह मालिक को प्रिय लगता है। वैसे ही जो मनुष्य अपने गुरु के बताए मार्ग का अनुसरण करता है वह अपने गुरु को प्रसन्न कर देता है। अपने इस तरह के कार्यो से आवेश और आक्रोश करने वाले गुरु को भी शिष्य शांत कर देता है। साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा जीवन में स्वाध्याय करने का जब भी मौका मिले करके जीवन को सार्थक कर लेना चाहिए। सौभाग्यशाली मनुष्य सांसारिक कार्यों को छोडक़र परमात्मा की वाणी श्रवण कर स्वाध्याय करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा जो लोग अपने माता पिता के आदेश के अनुसार चलते हैं वे सफल होते है। अपने जीवन में विनय लाने वाले लोग ...
चेन्नई. हार-जीत तो हमारे हाथ में नहीं है लेकिन बाजी खेलना हमारे हाथ में है। जीवन एक कला है। पशु भी जीवन जीता है और मनुष्य भी, असुर भी जीता है और सुर भी। ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा जीवन एक वृक्ष की तरह है। बचपन पत्तों और यौवन फल-फूलों की संयुक्त शाखाओं के समान और बुढ़ापा ठूंठ के समान है। अंत में जीवन की कहानी खत्म हो जाती है। जीवन एक बाजी के समान है। धनवान और निर्धन, बुद्धिमान और बुद्धिहीन, रूपवान और रूपहीन तथा बलशाली और बलहीन सभी जीवन जीते हैं। लेकिन जीवन जीने की जो कला जानता है उसी का जीवन सार्थक होता है। साध्वी ने कहा मृत्यु से पहले हमारे सारे दोष नष्ट हो जाएं, ऐसा जीवन जीना है। कथनी और करनी एक हो जाए एवं जीवन इतना पवित्र बना लें, यदि कोई तुम्हारी निंदा भी करे तब भी लोग उसकी बात पर विश्वास न करे। जीवन में दो भाग चिंतन और एक भाग प्रवृत्ति होगी तो भगवान श्रीराम की...