Blog

चातुर्मास बड़ी जोर शोर से

वड़गांव शेरी, पुणेमे प्रवर्तिनी भारतमाता प्रमोदसुधाजी म सा तथा सजक संथारा साधिका उपप्रवर्तिनी प्रियदर्शनाजी म सा इनकी सुशिष्याए प्रनवदर्शनाजी म सा तथा ईशदर्शनाजी म सा इनका 2025 का चातुर्मास बड़ी जोर शोर से भावपुर्ण वातावरण मे चल रहा है. हररोज 500 से 600 श्रावक , श्राविका स्थानक भवन मे पधारके इसका लाभ ले रहे है.  वड़गांव शेरी पुणे के अध्यक्ष श्री संतोषजी कटारिया और महामंत्री श्री हर्षदजी दुगड़ और सभी कमिटी मेंबर की उपस्थिती मे बड़ेही उस्साहपूर्ण वातावरण मे सभी लाभ ले रहे है.🙏🏻

अहंकार रूपी जेब में ज्ञान रूपी धन नहीं टिकता

गांधीनगर, बैंगलोर चातुर्मास- वरुण वाणी श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर, बेंगलुरू में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उपप्रवर्तक श्री पंकजमुनिजी म. सा. ने मंगलाचरण के साथ प्रवचन सभा का शुभारंभ किया एवं मधुर गायक परम पूज्य श्री रुपेशमुनिजी म. सा. ने गुरु पद्म अमर आरती के मधुर संगान के साथ सभा को भावविभोर कर दिया । तत्पश्चात दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार प. पू. डॉ श्री वरुणमुनिजी म. सा. ने अपने मंगल उद्बबोधन में फरमाया कि यदि आप संत नहीं बन सकते तो कम से कम शांत अवश्य बने । जिस प्रकार सूर्य की कोई प्रशंसा करें या निंदा, सूर्य उससे अप्रभावित रहता है, इसी प्रकार क्रोध या आवेश आने पर मौन रहने या मन को शांत रखने से हम उसके दूरगामी दुष्प्रभावों से बच सकते हैं । मुनि श्री ने आगे फरमाया कि जैसे शर्ट का पहला बटन यदि गलत लग जाए तो बाकी के सारे बटन गलत ही लगेंगे । इसी प्रकार यदि आध्यात्म में हमारा पहल...

परमसुख का अनुभव करोंगे तो आत्मा महान बन सकती है- महासाध्वी डॉ. संय्यमलताजी

सुख- महासुख-परमसुख इन तीन सुखो मे परमसुख का अनुभव करोंगे तो आत्मा महान बन सकती है- महासाध्वी डॉ. संय्यमलताजी का प्रतिपादन! रतलाम- जैन दिवाकरीय, दक्षिण चंद्रिका पु. डॉ. संय्यमलताजी म.सा. प्रखर वक्ता पु. डॉ.अमित प्रज्ञाजी म. सा. एकांतर तप आराधिका डॉ. कमल प्रज्ञाजी म.सा. एवं एकांतर तप आराधिका पुसौरभ प्रज्ञाजी म.सा. आदि ठाणा 4 धर्म नगरी रतलाम मे चातुर्मासार्थ विराजमान है! रतलाम नगरी से बड़े बड़े महान संत जिनशासन की सेवामे समर्पित हुये है! आज असंख्य भाविको के सामने डॉ. महासाध्वी संय्यमलताजी ने सुख के तीन प्रकारो का विश्लेषण कर हमे परमसुख का लाभ लेने का एहलान किया तो डॉ. अमित प्रज्ञा जी ने पिता के अनन्य साधारण महत्व का वर्णन विविध द्रष्टांत के माध्यम से विशद किया! चातुर्मास क़ालीन विविध आध्यात्मिक कार्यकमो की जानकारी देकर वंदना के मॉंसखमण की घोषणा की जिसमें हर रोज़ 31 वंदनाएँ गुरुचरणो मे रखी जाय...

भक्ति करने से मन को शांति मिलती है – साध्वी स्नेहा श्री जी

भक्ति करने से मन को शांति मिलती है, हृदय शुद्ध होता है, और आत्मा को आनंद की प्राप्ति होती है। – साध्वी स्नेहा श्री जी का उद्बोधन! इसके अतिरिक्त, भक्ति से मनुष्य के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है, और वह अंदर और बाहर से शुद्ध हो जाता है। भक्ति का अर्थ है भगवान के प्रति समर्पण, निस्वार्थता, विनम्रता और श्रद्धा। जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से भक्ति करता है, तो उसे ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है, और उसके जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। भक्ति के कई लाभ हैं: मन को शांति: भक्ति करने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है. आंतरिक शुद्धि: भक्ति से हृदय शुद्ध होता है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है. आत्मा को आनंद: भक्ति करने से आत्मा को आनंद और संतुष्टि का अनुभव होता है. पापों का नाश: भक्ति से मनुष्य के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. ईश्वर की कृपा: सच्चे ...

जिसमें अपनी मेहनत लगती है, वही अपनी यात्रा होती है — डॉ. समकित मुनिजी म.सा

चेन्नई-पुरषवाक्कम स्थित एएमकेएम जैन मेमोरियल ट्रस्ट में विराजमान आगम ज्ञाता, प्रज्ञा महर्षि डॉ. समकित मुनिजी म.सा. ने शनिवार को अपने प्रवचन में कहा जिसमें अपनी मेहनत और प्रयास लगते हैं, वही हमारी सच्ची यात्रा होती है। इस संसार में सैकड़ों यात्राएँ हैं मधुबन की यात्रा है तो पतझड़ की भी यात्रा है। लेकिन जीवन में कुछ कर सको या न कर सको, समकित यात्रा जरूर करना। ‘परदेसी’ की कथा को आगे बढ़ाते हुए मुनिश्री ने बताया कि वह एक बहुत बड़ा राजा था, लेकिन उसने बड़े होने के कर्तव्यों को नहीं निभाया। ज्ञानी सदा कहते हैं कि अगर तुम बड़े बने हो तो कार्य भी बड़े करो, क्योंकि यह जीवन बार-बार बड़ा नहीं बनाता। यदि कोई बड़ा बनकर खड़ा हो जाए लेकिन व्यवहार में प्रेम न हो, तो उसकी महानता खो जाती है। श्रेष्ठ बनना हमारा काम है — मनुष्य होकर भी कोई श्रेष्ठ बन सकता है, और मनुष्य होकर भी नीचता की ओर जा सकता है। श्रेष्ठत...

पाप काटने और पुण्य बढ़ाने के लिए वंदन आवश्यक है: श्रमण संघीय उप- प्रवर्तक श्री पंकजमुनिजी म. सा.

गांधीनगर, बैंगलोर चातुर्मास- वरुण वाणी श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर, बेंगलुरू में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उप- प्रवर्तक श्री पंकजमुनिजी म. सा. ने मंगलाचरण के साथ प्रवचन सभा का शुभारंभ किया एवं मधुर गायक परम पूज्य श्री रुपेशमुनिजी म. सा. ने गुरु पद्म अमर आरती के मधुर संगान के साथ सभा को भावविभोर कर दिया तत्पश्चात दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार प. पू. डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने आज अपने प्रवचन में फरमाया कि जीवन का चरम परम-लक्ष्य है- वीतराग बनना । जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण के साथ भक्ति करते हैं, वह अमर हो जाते हैं । आचार्य मानुतुंग द्वारा रचित भक्तामर स्तोत्र के प्रथम श्लोक के दूसरे अक्षर *प्रणत* शब्द का आज हम विवेचन करेंगे । प्रणत शब्द नत शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है – नमन करना । कोई भी व्यक्ति जाति से महान या निकृष्ट नहीं होता किंतु अपने कर्म से निकृष्ट य...

“गुरु बिना ज्ञान अधुरा है” गुरु हमे जीने की कला सिखाते है!- साध्वी स्नेहाश्री जी म.सा.

आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे “ गुरु- पौर्णिमा” महोत्सव मनाया गया! उपप्रवर्तिनी गुरुमॉं पु चंद्रकला श्री जी की सुशिष्या पु स्नेहाश्री जी म.सा. ने अपने उद् बोधन मे बताया गुरु वह दीपक हैं जो हमारे जीवन के अंधकार को दूर कर के हमें सफलता की राह दिखाते हैं। वे हमारे चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राचीन काल से ही भारत में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है — “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर:” इस मंत्र से गुरु की महानता झलकती है। गुरु केवल वही नहीं होते जो हमें किताबों का ज्ञान दें बल्कि वे होते हैं जो हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं. सही और गलत में फर्क समझाते हैं और हमारे अंधकारमय जीवन में प्रकाश लाते हैं. एक अच्छा गुरु न केवल पढ़ाता है, बल्कि हमें सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता भी देता है. गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि ...

तेरापंथ समर्पण, सेवा, समन्वय का साकार रूप : मुनि मोहजीतकुमार

 266 वां तेरापंथ स्थापना दिवस एवं गुरु पूर्णिमा मनाई गई  Sagevaani.com / किलपॉक,चेन्नई : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, किलपॉक के तत्वावधान में ‘266वाॅ तेरापंथ स्थापना दिवस’ भिक्षु निलयम के महाश्रमणम् हॉल में मुनि मोहजीतकुमार ठाणा 3 के सान्निध्य में विशाल उपस्थिति में मनाया गया।  मुनि मोहजीतकुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने त्रिपदी क्रांति की, जिसमें आचार, विचार अनुशासन के आधार पर इस धर्मसंघ को प्रस्थापित किया। उन्होंने कहा शुद्ध साधन से ही शुद्ध साध्य की प्रप्ति होती है। तेरापंथ धर्मसंघ समर्पण, सेवा, वैचारिक उदारता और समन्वयशीलता का साकार रूप है। यह संघ एक आचार्य के नेतृत्व में संचालित है। इस धर्मसंघ की गौरवशाली परम्परा में गुरु निष्ठा, आचार निष्ठा, मर्यादा निष्ठा, अनुशासन निष्ठा का सर्वोच्च स्थान है।  मुनि जयेशकुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु बॉस नहीं, एक लीडर थे। वे सिर्फ आदे...

भिक्षु चेतना वर्ष पर भिक्षु भजनोत्सव का हुआ आयोजन_

ऋषि दुगड़ की मधुर स्वर लहरीयों से भिक्षुमय बना भिक्षु निलयम  आचार्य भिक्षु कुशल विधिवेता, कवि, साहित्यकार थे : मुनि मोहजीतकुमार  Sagevaani.com /किलपाॅक, चेन्नई : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, किलपाॅक के तत्वावधान में, मुनिश्री मोहजीतकुमार के सान्निध्य में आचार्य श्री भिक्षु स्वामी जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के प्रथम चरण पर ‘भिक्षु भजनोत्सव’ विशाल धम्मजागरणा का कार्यक्रम भिक्षु निलयम के महाश्रमणम हाल में मनाया गया।  अर्हत् वन्दना, नमस्कार महामंत्र से प्रारंभ धम्मजागरणा में सभाध्यक्ष अशोक परमार ने पधारे हुए संगायक ऋषि दुगड़, श्रावक समाज का स्वागत- अभिनन्दन कियाl उपस्थित विशाल जनसैलाब को सम्बोधित करते हुए हुए मुनिश्री मोहजीतकुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु एक कुशल विधिवेता के साथ-साथ एक सहज कवि एवं महान साहित्यकार थे। वे जब तक जिये, ज्योति बनकर जिये। उनके जीवन का हर पृष्ठ, पुरुषार्थ की ...

भक्त की परम विशुद्ध अवस्था ही भगवान है

गांधीनगर, बैंगलोर चातुर्मास- वरुण वाणी श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर, बेंगलुरू में श्रमण संघीय उपप्रवर्तक प. पू. श्री पंकजमुनिजी म.सा., दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार प. पू. डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा., मधुर वक्ता कर्मयोगी पूज्य श्री रूपेशमुनि जी म. सा. आदि ठाणा-3 के पावन सानिध्य में 2025 का चातुर्मास गतिमान है । चातुर्मास के दूसरे दिन आज ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने अपने प्रवचन में फरमाया कि तीन शब्द हैं -भक्त, भक्ति और भगवान । जो भक्ति करे, उसका नाम भक्त है । भक्ति गुरु और भगवान की हो सकती है । प्रभु के प्रति प्रेम, समर्पण, स्तुति, श्रद्धा, समर्पण, जप, पूजा, आराधना, अरदास, नमाज, प्रार्थना आदि भक्ति के अनेकानेक रूप हो सकते हैं । भक्त को भगवान से मिलाने का सेतू या ब्रिज या सोपान या उपाय आदि को भक्ति कहते हैं । भक्ति की परम विशुद्ध अवस्था का नाम ही भगवान है । भगवान आदिना...

गुरुमॉं उपप्रवर्तिनी प.पू. चंद्रकला श्री जी म. सा. आदि ठाणा 3 के सानिध्यमें चातुर्मास प्रारंभ पुर्व हुआ

“ मंगल- गान” ( मंगलासाद)! आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे विराजमान उपप्रवर्तिनी महाराष्ट्र सौरभ पु चंद्रकला श्री जी म.सा., वाणीके जादुगर,”शासन-सुर्या” पु. स्नेहाश्री जी म.सा. मधुर गायिका पु. श्रुतप्रज्ञा श्री जी म.सा. आदि ठाणा ३ के पावन निश्रा मे आज चातुर्मास प्रारंभ पुर्व “ मंगल- गान” ( मंगलसाद) का आयोजन सभी श्राविकाके प्रमुख उपस्थिती मे किया गया ! लब्धिधारी गणधर गौतमजी आराधना, मंगलगान , चौविसी, भक्तामर स्तोत्र,मंगल स्तोत्र , मंगलपाठ आदि संग ,मेंहदी से हाथ रंगिले कलाईपर शगुनका धागा बॉंधा गया! लाभार्थी परिवार की ओरसे शगुन का गुड बॉंटा गया। आजके मंगलगान के प्रभावना के लाभार्थी बने संघाध्यक्ष सुभाषजी संकेतजी ललवाणी एवं परिवार! मंगलगान के उपलक्ष्य मे लाभार्थी बने पुर्वाध्यक्ष जवाहरलालजी तुषारजी मथा, विजयजी निताजी ओस्तवाल! संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी एवं उपाध्यक्षा शारदाजी चोरडी...

“ गणधर तप” आराधनासे उपप्रवर्तिनी गुरुमॉं चंद्रकलाश्रीजी म. सा. आदि ठाणा 3 का आकुर्डी स्थानक भवन मे चातुर्मास प्रारंभ

आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे आज से गुरु गौतम “ गणधर- तप” आराधना से चातुर्मास प्रारंभ हुआ! 27 धर्म अनुरीगीयो ने गणधर तप के प्रत्याख्यान लिये! एक दिवस उपवास एक दिवस बियासना कर 22 दिन की यह तप आराधना है!* *शासन प्रभाविका पु. गुरुवर्या चंचल कुंवरजी म.सा. की सुशिष्याए उपप्रवर्तिनी महाराष्ट्र सौरभ पु. चंद्रकला श्री जी, क्रांतिकारी वाणी के जादुगार,” शासन- सुर्या” पु. स्नेहा श्री जी म. सा. तथा मधुर गायिका पु . श्रुतप्रज्ञा श्री जी म. सा. आदि ठाणा 3 – आकुर्डी निगडी प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के तत्वाध्यान में चातुर्मास प्रारंभ हुआ! गणधर तप के प्रथम दिवसीय पैंसठियॉं जाप के लाभार्थी बने श्री संघ के अध्यक्ष सुभाष जी ललवाणी एवं परिवार! “ मंगलकारी” कलश की स्थापना लाभार्थी सुभाष जी ललवाणी, कांताजी ललवाणी, प्रियंका ललवाणी संग उपाध्यक्षा शारदा दादी चोरडीया एवं विश्वस्ता ज्योती जी खि...

Skip to toolbar