आज के मनुष्य की यह कैसी विडम्बना है कि उसे थोड़ा सा सम्मान मिलते ही वह पागल हो जाता है;; जरा-सा धन प्राप्त होते हो बेकाबू हो जाता है; साधारण-सा ज्ञानार्जन सीखते ही वह उपदेश की भाषा में बोलने लग जाता है और तनिक सा यश मिलते ही दुनिया का उपहास करने लग जाता है। यदि सुन्दर रूप मिल गया तो वह दर्पण को तोड़ डालता है। थोड़ा-सा अधिकार हासिल होते ही वह दूसरों को तबाह करने में लग जाता है। इस प्रकार तमाम उम्र यह मनुष्य चलनी से पानी भरने की प्रक्रिया करते हुए अपने आप को बड़ा महत्वपूर्ण समझता है। मनुष्य की सभ्यता जितनी विकसित हुई है उतना ही मनुष्य जटिल, कठोर और अहंकारी बन गया। मनुष्य के हाथ में कुछ भी नहीं है फिर भी उसे ‘मैं कुछ हूँ’ का वहम् पैदा होता है। यह वहम् कहता है – मैं सारे संसार का केन्द्र हूँ, मेरे बिना दुनिया का कोई काम नहीं चलता, मैं ही सबका पालन-पोषण करता हूँ और मैं न रहूँ ...
छह तपस्विनी बहनों की तपस्या का तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं तेरापंथी सभा के तत्वावधान में शनिवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में महिमा भूरा (11), सायर देवी नाहर (11), मंजुला भादानी (11), प्रिया सेठिया (11), मंजुलता सेठिया (10), संगीता कोठारी (8) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। गुवाहाटी में इस वर्ष निरन्तर तपस्या हो रही है। तपस्या के नये नये कीर्तिमान बन रहे हैं। इस अवसर पर तेरापंथी सभा, गुवाहाटी की ओर से साहित्य एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर तपस्विनी बहिनों के तप की अनुमोदना की गई। तपस्या का उद्देश्य बताते हुए मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने तपस्विनी बहिनों के तप की अनुमोदना करते हुए कहा कि तपस्या केवल कर्म निर्जरा के लिए की जा...
दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रचारक डॉ. श्री वरुण मुनि महाराज, जो श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर में चातुर्मास हेतु विराजमान हैं, ने आज धार्मिक सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कहा कि दीन, दुखी और पीड़ित प्राणियों की अनदेखी करना प्रत्यक्ष रूप से धर्म और परमात्मा का अपमान करने के समान है। प्रत्येक आत्मा में परमात्मा का वास माना गया है। उसकी सेवा में समर्पित होना चार धामों की यात्रा करने के बराबर है। प्रत्येक धार्मिक स्थान सेवा के केंद्र बनें। उन्होंने कहा कि अहिंसा, दया, तपस्या सभी धर्मों से श्रेष्ठ धर्म हैं और सेवा धर्म सबसे कठिन है। सभी धर्मों की उपासना-पद्धति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सेवा को सभी धर्मों ने प्रथम स्थान दिया है। सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अपने जीवन में ज्ञानवान महापुरुषों का सत्संग करने से व्यक्ति जीवन में सफलता की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करता...
महातपस्वी युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डाॅ ज्ञानेन्द्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में इस वर्ष पूर्वोत्तर भारत एवं असम गुवाहाटी में तपस्या का नया रिकार्ड बन गया है। आज भी तपोभिनंदन कार्यक्रम में चार तपस्वियों का तपोभिनंदन कार्यक्रम तेरापंथ सभा के द्वारा आयोजित हुआ। जिसमे पति- पत्नी ने दस एवं पुत्र ने आठ दिन की तपस्या की। तपस्वी लहर चन्द जी भंसाली ,तपस्विनी श्रीमती बसंती भंसाली दस दिन की तपस्या,(पति पत्नी) पुत्र प्रदीप भंसाली ने आठ की तपस्या , तपस्विनी श्रीमती सुषमा सुराणा सात दिन की तपस्या की है। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गुवाहाटी ने तपस्वियों तप अभिनन्दन पत्र एवं साहित्य भेंट कर सम्मानित किया । सात की तपस्या का अभिनन्दन साहित्य भेंट कर किया गया। तेरापंथ सभा की ओर से राजेश जी जम्मड़ ने परिचय दिया। मुनि पद्म कुमार जी न...
श्रुताचार्य साहित्य सम्राट वाणी भूषण परम पूज्य प्रर्वतक श्री अमर मुनि जी महाराज के 75 वें दीक्षा निमित्त गुरु अमर संयम अमृत वर्ष के पावन अवसर पर उप प्रवर्तक श्री पंकज मुनि जी म सा, दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा, मधुर वक्ता श्री रुपेश मुनि जी म सा के पावन सानिध्य में एवं श्री गुजराती वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ गांधीनगर के तत्वावधान में एवं अखिल भारतीय श्रुताचार्य श्री गुरु अमर संयम अमृत महामहोत्सव समिति के सहयोग से 4 अक्टूबर, शनिवार को विशाल सामूहिक आयंबिल तप साधना का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगाl गांधीनगर तुरखिया भवन में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी राजेश मेहता ने दी।
जिनवाणी में संसार का स्वरूप बताया गया है यह संसार निश्चित ही दुःख रूप है। आधि, व्याधि और उपाधि से ग्रस्त इस संसार में सुख की अपेक्षा दुःख की मात्रा अधिक है। मनुष्य के पास सौ सुख हो और एक दुःख है तो वह एक दुःख भी उसे पीडित करता रहेगा। क्योकि सौ सुख होने पर भी वह स्वयं को सुखी नहीं मानता। सौ सुखों में से यदि एक सुख भी चला जाता है तो मनुष्य रोने लगता है हालाँकि निन्यानवें सुख उसके पास है फिर भी वह रोता है और शिकायत करता है। मानव मन की यह बहुत बड़ी कमजोरी है कि जो सुख उसके पास नहीं है, उसके लिए वह सदैव चिन्ताग्रस्त रहता है। इस महत्वाकांक्षा ने मानव को जन्म से मृत्यु तक दौड़ाया है। इस दौड़ में मनुष्य थकान, टूटन और घुटन भले ही महसूस करता हो पर वह अपनी हार नहीं मान सकता। महत्वाकांक्षा की फाँस आदमी को कितना दौड़ाती है यह केवल भुक्तभोगी ही बता सकता है। ऐसे व्यक्ति केवल घड़ी की सूईयों की भाँति घूमते...
साहूकारपेट में बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में सांवत्सरिक पर्व मनाया गया | स्वाध्याय भवन,साहूकारपेट में संवत्सरी महापर्व 27 अगस्त बुधवार को देवसिय व 28 अगस्त को प्रातःकाल रायसी प्रतिक्रमण युवा स्वाध्यायी योगेशजी श्रीश्रीमाल ने करवाया | एम प्रकाशजी कांकरिया ने पौषध सहित बेला योगेशजी श्रीश्रीमाल व मोहितजी छाजेड़ ने अष्ठ प्रहर सज्जनराजजी बोथरा ने पांच प्रहर उच्छबराजजी गांग गौतमचन्दजी मुणोत, गौतमचन्दजी बागमार, सी विमलचन्दजी सुराणा,एन शांतिलालजी कर्णावट, किशोरजी डाकलिया,पी वीरेन्द्रजी ओस्तवाल,एस रविन्द्रजी बोथरा शिखरजी छाजेड़ सुनीलजी सांखला ने चार प्रहर का पौषध व संवर आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने किया | वरिष्ठ श्रावक रत्न श्री मोहनलालजी कांकरिया ने मांगलिक सुनाई व प्रत्याख्यान करवाये | जैन जीवन संकल्प, गुरु-वन्दन व गुरु भगवन्तो की साता पृच्छा पाठ के संग प्रतिक्रमण में चौरासी ला...
जालना (प्रतिनिधी) : जालना शहरातील गुरु गणेश तपोधाम येथे आज सामूहिक क्षमा याचनाचा भव्य व पवित्र सोहळा मोठ्या श्रद्धा, भक्ती व उत्साहाच्या वातावरणात संपन्न झाला. या प्रसंगी प.पू. रमनिकमुनिजी म.सा. यांच्या सान्निध्यात भाविकांनी एकमेकांना मिच्छामी दुक्कडम् म्हणत वैरभाव विसरून मैत्री, शांती आणि सद्भावनेचा संदेश दिला. सकाळपासूनच तपोधाम परिसरात भाविकांची गर्दी उसळली होती. स्त्री-पुरुष, युवक-युवती आणि ज्येष्ठ नागरिकांनी उत्साहात सहभागी होत क्षमा धर्माची परंपरा जपली. सामूहिक प्रार्थना, भजन व आत्मचिंतनाने वातावरण अधिक पवित्र झाले. आपल्या प्रेरणादायी आशीर्वचनांत प.पू. रमनिकमुनिजी म.सा. यांनी सांगितले की, क्षमाशीलता हेच धर्माचे खरे लक्षण आहे. क्षमा मागणे म्हणजे कमजोरी नसून ती आत्मशुद्धीची दिशा आहे. कटुता, वैरभाव, मत्सर व अहंकार या मानवी दुर्बलता आहेत. त्या क्षमाशीलतेनेच दूर होतात. क्षमा दिल्याने हृदय ...
एक बने आग तो दूसरा बने पानी यही हैं प्रभु महावीर कि वाणी माफ़ी मांगने वाला हर हाल मे बड़ा होता हैं – साध्वी स्नेहाश्रीजी का “ क्षमापना” पर्व पर उद्बोधन ! आज आकुर्डी स्थानक भवन मे “ सामुदायिक-क्षमापना” महोत्सव गुरुमॉं पु. चंद्रकला श्री जी म.सा. शासन सुर्या पु. स्नेहाश्रीजी म.सा. एवं मधुरकंठी पु श्रुतप्रज्ञाश्री जी के पावन सानिध्य मे मनाया गया।इस अवसर पर क्षमापना का महत्व विशद कर साध्वी स्नेहाश्रीजी ने बताया एक बने आग तो दूसरा बने पानी यही हैं प्रभु महावीर कि वाणी माफ़ी मांगने वाला हर हाल मे बड़ा होता हैं !वर्ष बीत जाने पर हम कैलेण्डर उतार देते हैं, फिर हम वर्ष बीत जाने पर किसी की कही बात को अपने दिल से क्यों नहीं उतार फेंकते। हम खुद की तो हजार गलतियाँ माफ कर देते हैं, फिर किसी दूसरे की दो चार गलतियों के कारण जीवनभर के लिए नफरत क्यों पालें। जैसे ब्लेक बोर्ड को टीचर हर रोज साफ कर देता है,...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर बंगलौर में चातुर्मास के लिए विराजमान दक्षिण सूरज ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि धर्म स्थान का भाव है कि मन में ही धर्म का निवास हो। धन, विद्या, संपत्ति, रूप, पदवी — इन सबसे बढ़कर धर्म है। उन्होंने कहा कि क्षमा और सत्य से ऊपर कोई धर्म नहीं। धर्मप्रेमी बहनों-भाइयों को जागरूक करते हुए उन्होंने कहा कि भवन को भोजनशाला नहीं बनाना चाहिए। धर्म स्थान का अर्थ है जहाँ साधना का कार्यक्रम बने। आगे उन्होंने कहा कि सत्संग, साधना करने से मन की शुद्धि होती है। मुनि जी ने कहा कि धर्म केवल धर्म स्थान में ही नहीं, बल्कि सभी स्थानों पर होता है। सत्संग में समय बिताने से जीवन का कल्याण होता है, लेकिन यदि जीवन विषय-विकारों में बीतता है, पैसा मौज-मस्ती में खर्च होता है और समय कुसंगति में गुजरता है, तो जीवन व्यर्थ है। इसलिए जवानी, धन और समय का स...
सामूहिक क्षमायाचना आस्था संचेती के 9 की तपस्या पर तपोभिनंदन तेरापंथ धर्मस्थल में भव्य रूप से मना क्षमायाचना दिवस आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन वृहस्पतिवार को प्रात: 9 बजे से स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में क्षमायाचना दिवस का भव्यातिभव्य समारोह का आयोजन उल्लासमय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर अपने प्रेरक उद्बोधन में मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि खमतखामणा और अपनी भूलों का प्रतिक्रमण इस पर्व की आत्मा है। ग्रंथि भेद अपेक्षित है। इस पर्व की प्रेरणा यही है कि मन की गांठें खोलें। मुनि रमेश कुमार ने उपस्थित जनमेदिनी को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म में पर्युषण महापर्व को उत्तम पर्व माना गया है, जिसमें तप-त्याग के जरिए कर्मों की ...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने पर्व पर्यूषण आराधना के आठवें दिन संवत्सरी महापर्व पर बुधवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम। अर्थात् तीर्थंकर परमात्मा भगवान महावीर स्वामी ने क्षमा को वीरों का भूषण बताया है। शूरवीर ही क्षमा कर सकते हैं, कायर व्यक्ति नहीं। उन्होंने कहा कि आज आप सब जीवों से क्षमा की अभिलाषा कीजिए, क्षमा याचना कीजिए और सर्व प्रथम उन लोगों से क्षमा याचना करें जिनके साथ आपका पहले कोई मन मुटाव, वैर वैमनस्य, शत्रुता का भाव रहा हो। तभी आपका इस महापर्व पर क्षमा करना और क्षमा मांगना सार्थक होगा। वरना मात्र अपने ही मिलने वालों से क्षमा याचना करना ही केवल एक औपचारिकता ही रह जायेगी। भगवान महावीर ने क्षमा के अमृत से क्रूर हिंसक अर्जुन मालाकार, अपने पर तेज़ोलेश...