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रजत ने 33 लाख की छात्रवृत्ति वितरण की

राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु और राजस्थानी एजुकेशनल ट्रस्ट तमिलनाडु द्वारा छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम 16 जुलाई, 2023, रविवार को सुबह राजा अन्नामलै मंडरम, ब्राडवे में सम्पन्न हुआ।      मुख्य अतिथि CA. Dr. चिन्नास्वामी गणेशन, चेयरमैन आडिट कमिटी, करुर वैश्या बैंक व अन्य पदाधिकारीयों ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ ।  पताजंली योगपीठ के स्वामी रीटदेवजी विशेष अतिथि पधारें।      अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। महासचिव देवराज आच्छा ने रजत की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। छात्रवृत्ति चेयरमैन नरेंद्र श्रीश्रीमाल ने स्कालरशीप योजना के बारे मे बताया कि करीब 600 जरुरतमंद विद्यार्थियों को 33लाख रुपयो की राशि वितरित की गई । मुख्य अतिथि का परिचय मनीष मरडिया ने दिया। मुख्य अतिथि चिन्नास्वामी गणेशन जी का सम्मान चयनित अध्यक्ष प्रवीण टाटिया व एजुकेशन ट्रस्ट के चे...

जीवन अमर बनने के लिए हैं: डॉ. मुनिराज श्री वैभवरत्नविजयजी म.सा.

श्रुत प्रभावक, डॉ. मुनिराज श्री वैभवरत्नविजयजी म.सा. आदि भगवंत द्वारा प्रवचन “रक्ष रक्ष तीर्थथेश्वर” आज श्री राजेन्द्र भवन में आयोजित तीर्थों की रक्षा कई सदियों से कैसे सम्भाला उन धर्म प्रेमीयों की गाथा भाव यात्रा द्वारा समझाया। कभी भी तीर्थों पर अन्याय होता देखे तो सभी धर्म प्रेमी अपने जान की परवाह किए बिना तीर्थों की रक्षा कैसे करें उसके कई उदहारण बता कर समझाया पुराने तीर्थों की धरोहर को कैसे बसाया। पूरी जानकारी भाव यात्रा में संगीत की मधुर धुन के साथ हार्दिक भाई एवं विराज भाई से समझाया गया सभी धर्म प्रेमी बंधुओं ने प्रतिज्ञा ली की तीर्थों की रक्षा के लिए हमारा जीवन सदा तत्पर रहेगा। ~यदि हमारे हदय में जैन शासन का अनुपम महत्व है तो हम शासन की सुरक्षा के लिए हमारा सर्वस्व त्याग करने के लिए भी तैयार रहेंगे। ~मेवाड़ के राणा महाराजा प्रताप को भामाशा ने 12 साल तक अखड़ संपति का अन्न...

युवा किसी भी देश की आन बान शान होते हैं: महासाध्वी श्री महक जी महाराज

महासाध्वी श्री महक जी महाराज ने कहा कि युवा किसी भी देश की आन बान शान होते हैं। देश के महापुरुषों ने कहा है कि देश को उन्नति के शिखर पर पहुँचाने के लिए युवा शक्ति को व्यसन और बुराईयों से बचना चाहिए। जिससे युवा ना सिर्फ स्वयं बल्कि अपने परिवार, समाज और देश को विश्व में सर्वोच्च स्थान दिला सकते हैं। रविवार को नगर के श्री श्वेताम्बर जैन स्थानक में युवा दिवस मनाते हुए महासाध्वी श्री महक जी महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि यौवन काल जीवन का स्वर्णकाल है। ऐसा समय फिर कभी लौटकर नहीं आता। यौवन शक्तियों का पुंज होता है। अगर युवाओं की शक्ति सही दिशा में लगें तो समाज की तकदीर बदल सकती है। दुनिया में जितनी भी क्रांतियां हुई हैं, वे सब युवाओं के बलबूते पर हुई हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को भटकने से बचना होगा। सामाजिक व राजनीतिक विवादों से दूर रहना होगा। व्यसन मुक्त, क्रोध रहित, संकल्पशील, स...

संयम का जीवन खांडे की धार पर कत्थक करने के समान है:   आगमश्रीजी म.सा

उपाध्याय प्रवर जन्म जयंती कम्मनहल्ली में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया जीवन जीना, संयम का जीवन खांडे की धार पर कत्थक करने के समान है। सच्चा साधक वही होता है। ऐसे हमारे उपाध्याय परम पूज्य केवल मुनि जी महाराज साहब थे जिन्होंने ऊंचे आदर्शों की ज्योति कभी भी बुझने नहीं दी। कोई भी संस्था पर अपना नाम नहीं दिया। जिनका शुभ सानिध्य हमें भी मिला था। वे करुणा के मसीहा थे। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने गुणानुरागी होने से जीवन में दिव्य ज्ञाप्तीया उत्पन्न होती है। वहां तक की गुणों के प्रति अनुराग होने से तीर्थंकर जैसे सर्वोच्च पद को प्राप्त कर सकता है। साथ ही पूज्य श्री के जीवनी पर प्रकाश डाला। जैन कांफ्रेंस के रास्ट्रीय प्रचार प्रसार मंत्री गौतमजी धारीवाल तथा पुर्व युवा अध्यक्ष धर्मेंद्रजी मरलेचा एवं कम्मनहल्ली अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने केवलमुनिजी जयंती पर...

श्रद्धा से किया हुआ अनुष्ठान निष्फल नहीं जाता – प्रवर्तक सुकन मुनि

श्री घंटाकर्ण स्तोत्र जाप में उमड़े सैकड़ों श्रद्धालु श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पंचायती नोहरा उदयपुर के तत्वावधान में चातुर्मास हेतु विराजमान जैन संत प्रवर्तक सुकन मुनि, उपप्रवर्तक अमृत मुनि, महेश मुनि, अखिलेश मुनि, डॉ वरुण मुनि के सानिध्य में श्री घंटाकार्ण स्तोत्र का विशेष जाप अनुष्ठान आयोजित हुआ जिसमें 400 से अधिक साधकों ने सपरिवार भाग लिया। प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने कहा कि महापुरुषों का नाम जपने से आत्मा शुद्ध बुद्ध बनती है। परमात्मा के नाम स्मरण से समस्त आधी व्याधि और उपाधि शांत हो जाते हैं। परमात्मा के नामों में अभूतपूर्व शक्ति समाहित है। शुद्ध ह्रदय साफ दिल से किया हुआ नाम गुण स्मरण भव चक्र को मिटाने वाला होता है। मंत्र सदा काल चमत्कारी होते हैं। जितनी हमारी श्रद्धा शुद्ध रहेगी उतने ही मंत्र फलदाई बनेंगे। जैन धर्म के स्तोत्र कलयुग में कल्पवृक्ष की तरह है। एक चित एक भ...

क्रोध मनुष्य के जीवन को नरक बना सकता है: साध्वी प्रितीसुधा 

भीलवाड़ा। क्रोध मनुष्य सबसें बड़ा दुश्मन है। अहिंसा भवन शास्त्री नगर में प्रखरवक्ता साध्वी प्रितीसुधा ने रविवार को विषेश धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि गुस्सा औंर क्रोध इंसान को चांडाल बना देता। क्रोध आत्मा का पतन करता और जिंदगी को नरक बना देता। मनुष्य की जिंदगी में सबसे मुश्किल काम है स्वयं को बदलना परन्तु इंसान दूसरों को सुधारने में लगा है पर इससे उसको कुछ नहीं मिलने वाला मनुष्य की जिंदगी तभी सुधर पाएगी। जब वह अपने क्रोध पर नियंत्रण कर लेगा। और गुस्सा आने पर मौन रखने वाला प्राणी अपनी आत्मा को प्रवित्र और शुध्द बना सकता है । वह तभी संभव हो सकता है जब गुस्से और क्रोध का त्याग करेगा। साध्वी संयमसुधा ने कहा कि क्रोधी इंसान को क्रोध आने पर अपने और पराये सबको भूल जाता है।क्रोध वह आग है जिस से मनुष्य स्वंय को नुकसान पहुंचाता है। क्रोध पर अंकुश समभाव रखने वाला व्यक्ति ही लगा सकता है। इसदौरान ...

मित्र बनाओं तो श्री कृष्ण के जैंसा, जो विपत्ति आने पर मित्रता को निभाए: साध्वी धर्मप्रभा

चैन्नई मित्र हो तो श्री कृष्ण जैसा। रविवार को श्री एस.एस.जैन भवन साहूकार पेठ में साध्वी धर्मप्रभा ने ऐतिहासिक धर्मसभा मे श्रध्दालूओ को सम्बोधित करतें हुए कहा कि जीवन में एक मित्र कृष्ण-सुदामा जैसा होना चाहिए। जो तुम्हारे लिए युद्ध न लड़े पर सच्चा मार्गदर्शक दिखाता रहें। संसार में कृष्ण-सुदामा जैसी मित्रता हो जाए,तो दुनिया से अमीरी-गरीबी का भेंद दूर हो सकता है। सच्चे मित्र कि सभी को तलाश है। लेकिन आज मित्रता मे स्वार्थ कि भावना छुपी हुई है। आजकल सुख और सम्पति में कौई भी मित्र बनने के लिए त्यार रहता है। और कैई मित्र बन जाते है किन्तु आपत्ति मे दुखः मे मित्रता निभाने वालें मित्र बहुत कम होतें है। सच्चा मित्र वो होता है जो दुख मे काम आयें। अन्यथा तो दुर्जन भी मित्र बन जातें है।  दुख प्राप्त होने पर,शत्रु के द्वारा संकट उत्पन्न करने पर विपत्ति आने पर एवं राज द्वार तथा श्मशायन मे साथ देता है वही ...

जब व्यक्ति की अपेक्षा उपेक्षित होती है तो उसे क्रोध आता है: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना जी

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना जी गुरुणी मैया एवं 7 ठाणा आदि साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं। वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि क्रोध पर कैसे पाएं काबू जब व्यक्ति की अपेक्षा उपेक्षित होती है तो उसे क्रोध आता है अपेक्षा और क्रोध का गहरा रिश्ता है पता ही नहीं लगता कि थोड़ा सा उपेक्षित होते ही व्यक्ति कितना विकराल रूप ले लेता है। पहले हम संबंध बनाते हैं जब जब अपेक्षा उपेक्षित होती है तब तक व्यक्ति को बुरा लगता है फिर संबंधों में दरार पड़ने शुरू हो जाती हैं। लोगों की अपेक्षाएं अलग अलग तरह की होती है और यह जरूरी नहीं हर व्यक्तिकी अपेक्षा पूरी कर दी जाए। आदमी चाहता है कि मेरे अनुसार मेरा परिवार जिए समाज जीऐ जिस ट्रस्ट मे वह ट्रस्टी है वहा भी मेरा ही दबदबा चले। क्या जरूरी नहीं समाज में हर इंसान को अपने ढंग से जीने...

तपस्या एक सामान्य क्रिया है पर अन्य के लिए सामान्य नही: जयतिलक मुनिजी

यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में पुज्य गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बन्धुओं संसार उत्पन्न भवी जीवो जैनो के लिए तपस्या एक सामान्य क्रिया है पर अन्य के लिए सामान्य नही। कोई सुनता है कि जैनों ने बिना आहार किये तेला अट्‌ठाई उपवास, मास खामण किया तो उनको आश्चर्य होता है पर जैन हंसते हुए तप कर लेते है। डाक्टर भी जैनो के तप पर रिसर्च करने लगे है कि ये कैसे सम्भव है। पर अब विज्ञान भी मानता है कि व्यक्ति चारों आहार का त्याग कर 2-4 महीने जीवित रह सकता है। पर आगम में तो पहले से उल्लेख है कि व्यक्ति चारों आहार का त्याग कर 6 महीने साल भर भी जीवित रह सकता है। आगम कहते है तप करने से कर्मों की निर्जरा होती है। भगवान कहते है नरक का द्वार बन्द करना है तो तप करो तप से कर्म निर्जरा होती है ये निर्जरा चारों गति के द्वार बन्द कर अनव्याबाध सुख दिलाती है। भगवान कहते है कि लौकिक इच्छाओं के लिए निद...

हर एक व्यक्ति की प्रवृत्ति, रुचि, स्वभाव समान नहीं होता है: प.पू. आगमश्रीजी म.सा.

   कम्मनहल्ली जैन स्थानक में प्रवचन      श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया हर एक व्यक्ति की प्रवृत्ति, रुचि, स्वभाव समान नहीं होता । सामान्य प्रकार से तीन प्रकार के व्यक्ति होते हैं, सत्वगुणी, रजोगुणी, तमोगुणी इसकी परिभाषा बताई। व्यक्ति के अनुरूप जो सत्कार कर सकता है वह स्वयं के जीवन में गुणों को पा लेता है। केशीश्रमण और गौतम स्वामी के बारे में बताया। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने श्रावकों के गुणों के बारे में बताया श्रावक के घट में दया चाहिए। दुखी जीवो के सेवा में सदा तत्पर रहें। विक्रमादित्य के जीवन की घटना का उल्लेख किया । धर्म रूचि अंगार का दृष्टांत बताया। अहमदनगर से संपतलाल प्रशांतजी बाफना सपरिवार, बार्शी से राहुल सुराणा सपरिवार, यशवंतपुर मंत्री रमेश बोहरा, मंत्री रोशन बाफना राममुर्तिनगर संघ एवं मंत्री रिकब मेहता, कमल बाफना, अनिल बाफना गणमान्य...

क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है: महासाध्वी धर्मप्रभा

चैन्नई (साहूकार पेठ) क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। शनिवार को मरूधर केसरी दरबार साहूकार पेठ मे महासाध्वी धर्मप्रभा ने श्रध्दालूओं को सम्बोधित करतें हुए कहा कि क्रोधी मनुष्य कभी किसी का भी मित्र नही हो सकता है। जो उसे नरक के रास्ते पर ले जाता है।क्रोध मनुष्य को बर्बाद कर देता है और उसे अच्छे बुरे का ज्ञान नही होने देता। क्रोधी व्यक्ति आवेश में जितना दूसरे का इतना बुरा नहीं जितना स्वयं का करता है। क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को समाप्त करता ही हैलेकिन उसकी सारी अच्छायों और प्रतिष्ठा को मे एक क्षण मे मिठ्ठी मे मिला देता है। गुस्से और क्रोध मे उसे भान नहीं रहता है,की वो सामने वाले के साथ वह कैसा व्यवहार कर रहा है। जिस कारण उसके अपने भी पराए बन जाते है। मनुष्य का सबसे बड़ा कौई दुश्मन है, तो उसका क्रोध, मनुष्य को गुस्से और क्रोध मे अपने अवगुण नजर नही आते वह सामने वाले व्यक्ति के दोष को सही ठहराने...

उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरुदेव केवल मुनि जी होनहार संत थे: उप प्रवर्तीनी संथारा प्रेरक महासाध्वी गौरव श्री सत्य साधना जीमा. सा.

जैन दिवाकर महासती श्री कमला वती जी म. सा की सु शिष्या उप प्रवर्तीनी संथारा प्रेरक महासाध्वी गौरव श्री सत्य साधना जीमा. सा. आदी ठाना 7 का चातुर्मास अंबेश भवन में गतिमान है। आज उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरुदेव केवल मुनि जी की जन्म जयंती होने से महासती जी ने सुख के प्रकार पर प्रवचन माला में वीराम देते हुए केवल मुनि जी के बारे में जानकारी देते हुए बताया की पूज्य श्री का जन्म कोशीथल गांव में सवंत 1970 में श्रावण मास की तेरस के दिन माता कुंकु बाई के गर्भ से पिता जवाहर लाल जी भंडारी के घर हुआ। आप श्री के एक छोटे भाई भी हुए । आप श्री की अल्पायु में ही पिता का साया दूर हो गया। आप की माता जी ने दोनो पुत्रो को अच्छे धार्मिक संस्कार देते हुए पालन पोषण किया। उसी वजह से उनमें वैराग्य पैदा हुआ और आप ने मात्रा 11वर्ष की आयु में जैन दिवाकर गुरुदेव चौथमल जी मसा के सानिध्य में सन्यास ग्रहण किया। आप श्री के साथ म...

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