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श्रमण सूर्य ध्यान योगी वर्तमान आचार्य भगवंत गुरुदेव श्री डॉक्टर शिवमुनि जी म.सा.

मैं इंदरमल टुकड़िया अध्यक्ष श्री वर्धमान स्थानक वासी जैन श्रावक संघ जावरा आपके चरणो में वंदन करते हुए निवेदन करता हूँ की विगत 10 वर्षो से अध्यक्ष होकर प्रतिवर्ष चार्तुमास कराया जाता रहा हैं वर्ष 2025 में हमारे द्वारा साध्वी श्री सरिता जी एवं साध्वी श्री प्रियंका जी का चार्तुमास श्रमण संघ की सती प्रवर्तक श्री विजय मुनि जी म.सा.की आज्ञानुवृति समझ कर करवाया किंतु दोनों सती की रूपये के प्रति मोह देख कर हतप्रभ हो गया प्रभावना करने वाले से नगद या सामग्री के 10 ~12 एक्स्ट्रा रखवाना महिलाओं से साड़ीया आदि मंगवाना मना करने पर क्रोध करना बिना कोई सेविका रखने के बावजूद भी संघ से 12 मासिक वेतन के लिये दबाव बनाया गयाl संघ के पदाधिकारियों के मना करने पर संघ की बदनामी करते हुए दूसरे शहरों के लोगो व स्थानीय लोगों को फोन कर रुपयों की मांग की गई संघ की प्रतिष्ठा धूमिल न हो इस हेतु संघ के पदाधिकारियों द्वारा...

पुज्यनीय चंद्रकलाश्री जी महाराज साहेब का 63 वॉं जन्मोत्सव

गुरुमॉं उपप्रवर्तिनी, महाराष्ट्र सौरभ पुज्यनीय चंद्रकलाश्री जी महाराज साहेब का 63वॉं जन्मोत्सव आध्यात्मिक जप तप धर्मआराधना के साथ मनाया गया! श्री संघ द्वारा “ श्रमणी- गौरव” उपाधि प्रदान! संघाध्यंक्ष सुभाषजी ललवाणी को गुरुमॉं एवं साध्वीव्रुंद द्वारा “ संघ – शिरोमणी” पद से नवाजा गया! आज आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे गुरुमॉं उपप्रवर्तिनी महाराष्ट्र सौरभ चंद्रकला श्री जी का 63वाँ जन्मोत्सव जप तप धर्मआराधना एवं गुणानुवाद के माध्यम से अनेक गणमान्य अतिंथी, विविध संघो के पदाधिकारी एवं अनेक भक्तो के सानिध्य मे मनाया गया! इस समारोह मे गुरुमॉं को श्री संघ के और से “श्रमणी-गौरव” इस पद से गौरन्वित किया गया! अभिनंदन पत्र का शब्दांकण संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी ने किया ! उसी प्रकार वाणी के जादुगर, शासनसुर्या पुज्यनीय स्नेहाश्री जी को “ प्रवचन-विभु” एवं मधुरकंठी पुज्यनीय श्रुतप्रज्ञाश...

ज्येष्ठ समाजसेवी, संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी “ संघ- शिरोमणी” पदसे गुरुमॉं पु. चंद्रकलाश्री जी म.सा.आदिठाणा 3 द्वारा अलंक्रुत

आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे गुरुमॉं उपप्रवर्तिनी पु. चंद्रकलाश्री जी का 63 वॉं जन्मोत्सव वाणीके जादुगर, शासन सुर्या पु. स्नेहाश्रीजी म.सा., मधुरकंठी पु. श्रुतप्रज्ञा श्री जी म. सा. के पावन सानिध्य मे बडे भक्तिभाव से अनेक गुरुभक्तो के प्रमुख उपस्थिती मे मनाया गया! संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी को गुरुमॉं द्वारा “संघ- शिरोमणी” इस पदसे समारोह के प्रमुख अतिंथी, उपाध्याय प्रवरश्री जी के परिवर्तन चातुर्मास 2025 के मुंख्य कर्णधार एवं प्रसिध्द उद्योजक श्रीमान सुनीलजी नहार के करकमलो द्वारा सन्मान पत्र देकर गौरन्वित किया गया! इस अवसर पर पुर्व संघाध्यक्ष संतोषजी कर्नावट,जैन कॉन्फ़्रेंस पंचम झोन के अध्यक्ष नितीनजी बेदमुथा , सादड़ी सदन के पुर्वाध्यंक्ष खुबीलालजी, वर्तमान अध्यंक्ष प्रविण जी सोलंकी, पुर्व राष्ट्रीय युवाध्यक्ष सागरजी साखला, भोसरी संघके अध्यक्ष राजेंन्द्रजी बांठिया, पुर...

त्योहारों को श्रद्धा और उत्साह से मनाना ही सच्ची भक्ति है: भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि

श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास हेतु विराजित भारत गौरव डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने रविवार को धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि त्योहार केवल आनंद और उल्लास के अवसर नहीं होते, बल्कि वे आत्मिक शुद्धि, सद्भावना और समाज में संस्कारों के संचार के प्रतीक हैं। मुनि श्री ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा कि जब हम किसी भी पर्व को श्रद्धा, संयम और उल्लासपूर्ण भावना से मनाते हैं, तब वह हमारे जीवन में नई ऊर्जा, संतुलन और आत्मिक प्रसन्नता का संचार करता है। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल परंपराओं का पालन भर नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन को शुद्ध करने और आत्मा को जागृत करने के अवसर हैं। गुरुदेव श्री ने आगे कहा कि त्योहारों के माध्यम से हमें सदाचार, सेवा, करुणा और आत्मसंयम जैसे सद्गुणों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “जब हमारी भक्ति व्यवहार में और श्रद्धा आचरण ...

संस्कारीय शिविर ‘विंग्स टू फ्लाई’ में प्राकृत पढ़ाने की सहमति प्राप्त करने हेतु प्रेरणा

चेन्नई: श्रुत रत्नाकर [अहमदाबाद] द्वारा बहुश्रुत श्री जयमुनिजी म.सा के सानिध्य में हाल ही आगरा में हुई राष्ट्रीय प्राकृत संगोष्ठी में साहित्यकार डॉ. दिलीपजी धींग दक्षिण भारत से भाग लेने वाले एकमात्र विद्वान थे | संगोष्ठी में उन्हें प्राकृत का संदेशवाहक [ एंबेसैडर ऑफ प्राकृत ] बनाया गया | इस क्रम में 11 अक्टूबर 2025 को बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया एवं श्री जैन रत्न युवक परिषद,तमिलनाडु के शाखा प्रमुख श्री एम संदीपजी ओस्तवाल को डॉ.दिलीपजी धींग ने प्राकृत भाषा की प्रथम सचित्र वर्णमाला भेंट की | बहुश्रुत श्री जयमुनिजी म.सा के मार्गदर्शन में तैयार तथा जय जिनशासन प्रकाशन से प्रकाशित इस चार्ट में प्राकृत, संस्कृत,हिंदी और अंग्रेजी में शब्द दिए गए हैं | श्रावक संघ के निवर्तम...

भाऊ कसा असला पाहिजे हे लक्ष्मणाकडून शिकले पाहिजे-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना: भाऊ कसा असला पाहिजे हे लक्ष्मणाकडून शिकावे आणि अहंकार कसा असला पाहिजे हे रावणाकडून शिकले पाहिजे, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, भाऊ कसा असवा हे लक्ष्मणाकडून जसे आपण शिकतो तसे आजचे भाऊ आहेत, जीवाला देणारे भाऊ आज कुठे मिळतात. आणि अहंकारी रावणासारखे आम्ही वागतो. त्यामुळेच आज जिथे- तिथे अहंकारी व्यक्ती आपल्याला आढळून येतात. तुळशीदासांनी रामाययण लिहिलं परंतू त्यांनी जे नाव दिलं ते अत्भूत आहे. रामचरित्र मानस! त्यांना केवळ राम हे नाव देता आलं असतं, परंतू त्...

अहोई अष्टमी व्रत मातृत्व के पवित्र प्रेम का प्रतीक : भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि

श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर में चातुर्मास हेतु विराजमान भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि म.सा. ने शनिवार को अहोई अष्टमी व्रत के पावन अवसर पर अपने प्रेरक प्रवचनों के माध्यम से मातृत्व के सच्चे स्वरूप और व्रत की आध्यात्मिक महत्ता पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। मुनि श्री ने कहा कि —“अहोई अष्टमी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि यह मातृत्व के प्रेम, त्याग और स्नेह का जीवंत प्रतीक है। मां अपने बच्चों की दीर्घायु, आरोग्यता और मंगल जीवन के लिए उपवास रखती है। इस दिन की गई प्रार्थना और तपस्या से संतान का जीवन सद्गुणों, संस्कारों और समृद्धि से परिपूर्ण होता है।”उन्होंने आगे कहा कि —“व्रत का उद्देश्य केवल शरीर को संयमित करना नहीं, बल्कि मन को भी सात्त्विक बनाना है। जब माता अपने संकल्प में श्रद्धा और शुद्ध भावना जोड़ती है, तब उसका आशीर्वाद संतान के लिए दिव्य कवच बन जाता है। यही मातृत्व का सच्चा अध्यात्म है।” मुनि श्र...

प्रभूंना ओळखा आणि त्याचे सारखेच जगा-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा.

जालना : भगवान प्रभूंना ओळखा आणि त्यांच्यासारखे जगण्याचा प्रयत्न करा, तरच आपल्या सर्व दु:खाचे हरण होईल, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, कशाय काम हेच असतं की, त्याला कुणीही एकत्र पाहवले जात नाही. म्हणूनच म्हटले आहे, कशाय हे वाटण्याकरण्याचं काम करतात. त्यांस कुणीही चांगलं म्हणतं नाहीत. परंतू त्यांच्या शिवाय आपलं काही चालंतंही नाही. म्हणूनच तर आज जे काही परिवार वाद चालू आहेत. त्याचे कारणच कशाय हे आहे. गोडी मिटली तर आमची भूकही मिटेल, परंतू त्याने काय होणार! चाह म...

करवा चौथ का व्रत नारी की श्रद्धा, संयम और समर्पण का प्रतीक — भारत गौरव डा.वरुण मुनि

महिलाओं का करवा चौथ पर्व आत्मिक शक्ति और अटूट श्रद्धा का प्रतीक श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य दीप्तिमान प्रवचनकर्ता भारत गौरव डा. वरुण मुनि म सा ने शुक्रवार को करवा चौथ के पावन अवसर पर अपने प्रेरक प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालु महिलाओं को पवित्र प्रवचन स्थल पर मंगल आशीर्वचन प्रदान किए। उन्होंने कहा कि स्त्री ही परिवार की आत्मा है — उसके व्रत, उपवास और आस्था से घर में शांति, समृद्धि और सौहार्द का वातावरण निर्मित होता है। मुनि श्री ने करवा चौथ को केवल बाह्य आडंबर का नहीं, बल्कि आंतरिक साधना और आत्मसंयम का पर्व बताया। उन्होंने उपस्थित सभी महिलाओं को यह प्रेरणा दी कि वे नारीशक्ति के रूप में आध्यात्मिक दृढ़ता, त्याग और प्रेम के गुणों को जीवन में आत्मसात करें।आशीर्वचन देते हुए मुनि श्री ने कहा — “जब नारी अपने मन में प्रेम, विश्वास और संयम की ज्योति जलाती है, त...

महाराष्ट्र गौरव, खांदेश केसरी पु. गौतममुनीजी म. सा. का 51वे जन्मोत्सव

शिरुरः आज महाराष्ट्र गौरव, खांदेश केसरी, बरसादाता, वाणीके जादुगर पु. श्री गौतममुनीजी म. सा. का 51 वाँ जन्मोत्सव शिरुर- घोडनदी नगरी में जप-तप-आराधना- गुणानुवाद आँजिये बड़े उत्साहवर्धक एवं आध्यात्मिक आनंदोत्सव रुप मे हजारो धर्मअनुरागीयों के उपस्थिती में एवं लाड़ले शिष्य युवा महर्षि पु चेतनमुनीजी के सानिध्य मे मनाया जा रहा है! इस शुभ अवसर पर महाराष्ट्र के अलावा भारत वर्ष के अनेक क्षेत्र से भक्तगण पधारे है! आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे चातुर्मासार्थ विराजीत पु. उपप्रवर्तिनी चंद्रकलाश्री जी, शासनसुर्या पु. स्नेहाश्रीजी, मधुरकंठी पु. श्रुतप्रज्ञा श्री जी के और से गुरदेव पु. गौतममुनीजी म.सा. को आदर की चादर संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी संग विश्वस्त मंडल के सदस्य जवाहरजी मुथा, विजयजी गांधी, नेनसुखजी मांडोत, मोतीलालजी चोरडीया, राजेंन्द्रजी छाजेड, नितीनजी छाजेड, राजेंन्द्रजी रातडीया,...

अखेर आम्ही .कोणाचे गुलाम आहोत!-प.पू.रमणीकमुनीजी म.सा

जालना: भगवान प्रभूंना आम्ही मानतो. परंतू अखेर आम्ही कोणाचे तरी गुलाम आहोत. काय आम्ही कानाचे गुलाम आहोत की आम्ही मनाचे गुलाम आहोत, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधनेच्या अध्यायातील प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, जीवन धन्य बनेल, असे कार्य आपल्या हातून व्हायला पाहिजे. अन्यथा ते कार्य न केलेलेच बरे! जेंव्हा आपल्याला मरणाचे बोलावणे येईल तेव्हा काय होईल. व्यक्ती जागतो परंतू केव्हा जागतो. ते पाहणेही गरजेचे आहे. आत्मा जेव्हा जागृत होईल तेव्हा मात्र हे जीवन धन्य झाले म्हणून समजा। स्वार्थाची पुर्ती करणाराच आपल्याला ...

“सच्चा सौभाग्य वहीं है, जहाँ विश्वास, त्याग और सद्भाव का संगम हो”: डॉ. वरुण मुनि

आत्मिक सौंदर्य और श्रद्धा ही सच्चा श्रृंगार श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास हेतु विराजित दक्षिण सूर्य दीप्तिमान प्रवचनकर्ता डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा ने वीरवार को करवा चौथ के पावन अवसर पर अपने प्रेरक प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मसंयम, निष्ठा और आत्मबल का अमूल्य संदेश दिया।मुनि श्री ने कहा कि करवा चौथ केवल उपवास का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और आत्मशुद्धि का पर्व है। यह पर्व परिवार के प्रति समर्पण, प्रेम और विश्वास की भावना को प्रबल बनाता है। उन्होंने कहा — “व्रत केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा को दृढ़ बनाने का साधन है। ”मुनि श्री ने महिलाओं से आग्रह किया कि वे बाहरी श्रृंगार के साथ-साथ आंतरिक सौंदर्य और आत्मिक संतुलन को भी अपनाएं। उन्होंने समाज को संदेश दिया कि भौतिक सुखों की अपेक्षा आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर ही सच्चा सुख और शांति प्राप्त की ...

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