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तत्त्वत्रयी का संयोग साध्वीजी श्री स्वयंप्रभाश्रीजी म.सा.

सुवर्ण इतिहास का अमर पुस्तक और जीवन को जीवंत (चैतन्यमय) निरिक्षण करनेवाले साध्वीजी को कोटिशः धन्यवाद… साधुवाद… अद्भूत चारित्रनायक, शासन के शूरवीर *पू.. आ. श्री यतीन्द्रसूरीश्वरजी महाराजा* के हस्तो से दीक्षित एवं शिक्षित साध्वीजी भगवंत में शासन राग की विविधता – विशिष्टता एक साथ थी। साधना की विशेषता के प्रभाव से अंत समय भी जागृत अवस्था को त्याग के शिखर तक ले गए। देहत्याग के कुछ समय पूर्व भरतभाई लाडू दादा आदिनाथ के दर्शन करवाने ले गए। तृप्त मन से दादा का मिलन किया। दर्शन-ज्ञान-चारित्र में लीन साध्वीजी को उम्र या अवस्था अवरोधरूप नहीं बनी। भरतभाई अत्यंत उत्कृष्ट भाव से वैयावच्च कर रहे है। श्री सौधर्म बृहद तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन संघ की वैयावच्च-भक्ति सर्वदा उत्कृष्ट रहती है। दिनरात ट्रस्टीवर्य वाघजीभाई आदि, शशीभाई जैसे श्रावक सदा जागृत है। अनेक आत्माओ का योगक्षेम कल्याण करने...

कर्नाटक गज केसरी गुरू गणेश जन्म जयंति पर गुणगान सभा 19 को सुल्लूरपेठ में

गुरु गणेश मिश्री पावन धाम सुल्लूरपेठ के प्रांगण में परम पूज्य स्पष्ट वक्ता श्री कांति मुनि जी म. सा. एवं श्रमण संघीय उप प्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी म. स. के पावन सान्निध्य में 19 नवंबर को कर्नाटक गज केसरी घोर तपस्वी श्री गणेश लाल म.सा. की पावन जन्म जयंती गुणगान सभा एवं सामायिक दिवस के रूप मनाई जाएगी । उपरोक्त जानकारी देते हुए मुनि रत्न श्री रूपेश मुनि जी म. सा. ने फरमाया कि इस अवसर पर दक्षिण सूर्य पूज्य गुरुदेव डॉ. श्री वरुण मुनि जी म. सा. आदि संत जन कर्नाटक गज केसरी जी महाराज के जीवन पर विशेष रूप से अपने श्रध्दापुष्प अर्पित करेंगे। विद्याभिलाषी लोकेश मुनि जी म ने बताया कि कर्नाटक गज केसरी घोर तपस्वी श्री गणेश लाल जी म.सा. का दक्षिण भारत पर विशेष उपकार रहा है, उनके तप त्यागमय जीवन पर सभी गुरू भक्तों की श्रध्दा जुडी हुई है। उनका नाम लेने मात्र से ही बिगडे हुए काम संवर जाते हैं, ऐसे...

धर्म से ही आत्मा का अभ्युदय होता है और आत्मा को संसार से मुक्ति मिलती है: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /चैन्नई। धर्म से ही आत्मा का अभ्युदय होता है और आत्मा को संसार से मुक्ति मिलती है। गुरूवार साहुकार पेट जैन भवन में महासाध्वी धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा में श्रध्दालूओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि धर्म-कर्म से ही आत्मा का कल्याण हो सकता है। मानव भव बार बार नहीं मिलता है अंनत पुण्यवानी करने पर प्राप्त होता था। मनुष्य जीवन मिलने के बाद उसने धर्म के मार्ग पर वो नहींं चलता है तो उसे जीवन में सुख नहीं मिल पाएगा और ना हि वह अपनी आत्मा को संसार से मुक्ति दिलवा सकता है आत्मा को मुक्ति तब मिल सकती है जब मनुष्य मोह का त्याग करे और वह पुरूषार्थ करता है तो वह अपने मानव भव को सार्थक बना सकता है और इस आत्मा को अनंता अनंत जीवा योनियों के दुखों में भटकने से बाहर निकालकर आत्मा को मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति करवा सकता है। साध्धी स्नेहप्रभा ने कहा कि क्रोध और तूफान एक जैसे होते हैं, दोनों के शा...

एक ज़िंदगी में हज़ार ज़िंदगी जीयो : देवेंद्रसागरसूरि

आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में दैनिक प्रवचन देते हुए कहा कि अगर जिंदगी में कुछ करना है तो एक जिंदगी में हजार जिंदगी के बराबर काम करना होगा तभी आप को सफलता मिल सकती हैं इसका मतलब यह है कि सफल इंसान बनने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी होगी। यह बात बिल्कुल सच है कोई भी आज तक बिना मेहनत किये बड़ा नहीं बना है जिंदगी में कामयाब होने के लिए आपको बहुत कठिन मेहनत करनी पड़ेगी। लाइफ में कामयाब होने के लिए सबसे पहली बात है अप टू डेट रहना। दुनिया के साथ साथ चलना और दुनिया में होने वाले बदलाव को कबूल करना। अगर आप पीछे रह गए तो बाद में आप नए कन्वर्शन को समझ नहीं पाओगे और आप दुनिया से बहुत पीछे रह जाओगे। दुनिया वाले आप से बहुत आगे निकल जाएंगे। नतीजन आप फेल हो जाओगे और आपकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। ईश्वर ने आपको जिंदगी दी है कुछ नया करने और दूसर...

प्रज्ञाशील व्यक्ति सुधारे बिना नहीं रह सकते: प्रवीण ऋषि

Sagevaani.com /रायपुर। जंबूस्वामी की जिज्ञासा से एक अनूठे स्तोत्र का जन्म हुआ। सुधर्मा स्वामी ने उनकी जिज्ञासा को शांत करते हुए पुच्छिंसुणं की 108 पंक्तियों में प्रभु महावीर के साथ बिताये 30 वर्षों के अनुभव को सजाया है। पुच्छिंसुणं एक अनूठा स्तोत्र है जिसे प्रभु के जीवन को जीने वाले सुधर्मा स्वामी अपने शब्दों में सजाया है और बुधवार से इसकी आराधना लालगंगा पटवा भवन में शुरू हुई है। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि के मुखारविंद से श्रावक इस आराधना का लाभ ले रहे हैं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। गुरुवार को उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सुधर्मा स्वामी ने सबसे पहले प्रभु की उस विशेषता का जिक्र किया कि जो हमारी नजर से ओझल होती है। हम शुरुआत करते हैं कि प्रभु करुणा के सागर है, परमा पराक्रमी है, लेकिन सुधर्मा स्वामी ने क्षेत्रेज्ञ से शुर...

जिज्ञासा से जन्मा भक्ति का अनूठा स्तोत्र है पुच्छिंसुणं : प्रवीण ऋषि

लालगंगा पटवा भवन में शुरू हुई वीरत्थुई की आराधना धर्मसभा में प्रवीण ऋषि से मिले महंत रामसुंदर दास Sagevaani.com /रायपुर। उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के बाद लालगंगा पटवा भवन में बुधवार को एक अनोखी यात्रा प्रारंभ हुई। जम्बूस्वामी की जिज्ञासा के उत्तर में सुधर्मा स्वामी द्वारा रचित भगवान महावीर की अनोखी व अद्भुत स्तुति पुच्छिंसुणं (वीर स्तुति) की आराधना। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि जंबूस्वामी से लोग सवाल पूछते थे, प्रभु के बारे में पूछते थे। वे पूछते थे कि जिसे तुमने देखा ही नहीं है, उसके पीछे जा रहे हो? कैसे उस पर फ़िदा हो गए? जंबूस्वामी के पास कोई उत्तर नहीं था, वे पहुंचे सुधर्मा स्वामी के पास। उन्होंने जिज्ञासा रखी सुधर्मा स्वामी के समक्ष, और वे उनकी जिज्ञासा शांत करते चले गए। यही है पुच्छिंसुणं (वीर स्तुति) जिसकी आराधना आज से शुरू हुई है। आज की धर्मसभा में गौसेवा आयोग के अध्यक्ष मह...

भाई दूज भाई-बहन के पवित्र रिश्तों का प्रतीक पर्व है: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /चैन्नई। भगवान की भक्ति में हो या पारवारिक रिश्तों में समर्पण और प्रेम नहीं, स्वार्थ की भावना छिपी हुई है,तो भक्ति करना और रिश्ते निभाना व्यर्थ है। बुधवार जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने भाई बहन के पवित्र त्यौहार भाई दुज पर श्रध्दालूओं को शुभ आर्शीवाद और बधाई देतें हुए कहा कि भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है इस दिन यम देवता की पूजा भी की जाती है। भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर और उपहार देकर उसकी लंबी आयु की कामना करती है और भाई बहन की रक्षा का वचन देता है। परन्तु आज रिश्तों मे स्वार्थ और दिखावट प्रदर्शन के कारण इस त्योहार में एक दूसरें में दूरियां बढ़ती जा रहीं है। पर्व मनाना तभी सार्थक होगा जब बहन और भाई निस्वार्थ भाव से भाई दुज पर्व के महत्व को समझकर इस पर्व को मनाएंगे तो ये पर्व मनाना परिवार और एक दुसरे केलिए सार्थक बन सकता ...

जो गलतियों से सीख लेता है वही जीवन में सफलता प्राप्त करता है : देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिज ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गलतियाँ हर इंसान करता है। लेकिन इसे स्वीकार हर कोई नहीं कर पाता। शायद ही कभी आपने इस बात को गंभीरता से लिया हो कि गलती हुई इसे स्वीकार कर लेने से क्या हो जाएगा या नहीं करते हैं तो उससे क्या फर्क पड़ेगा। याद रखिए गलती होने पर उसे स्वीकार कर लेना आपको आगे ले जाने वाले गुणों में से एक है। वे आगे बोले कि मानव स्वभाव है गलतियाँ करने का। गलतियाँ सभी से होती हैं। भले ही सो गलतियाँ करो लेकिन उन्हें दोहराओ मत। क्योंकि गलतियों को दोहराना मूर्खता है। गलती हो उसे स्वीकार करो। कुछ गलतियाँ होती हैं जो अनजाने में हो जाती हैं और कुछ होती हैं जो आपसे जानबूझकर होती हैं। अनजाने में होने वाली गलतियों पर आपका बस नहीं चलता। उसके लिए तो सिवाय माफी माँगने के कोई चा...

साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने मांगी भाई दौज की भेंट, कहा अपने घर के बातावरण में घोलो मिठास

जैन साध्वी जी ने धर्मसभा में बताया गौतम प्रतिपदा का महत्व  Sagevaani.com /शिवपुरी। पांच दिवसीय प्रकाश पर्व के अंतिम दिन भाई दौज के त्यौहार पर मैं अपने धर्म भाईयों से भेंट मांगना चाहती हूं। क्या आप मुझे भाई दौज की भेंट देंगे। मैं इस अवसर पर आपसे भेंट मांगती हूं कि आप अपने घर के वातावरण में मिठास घोलें। परिवार के सदस्य एक दूसरे के प्रति समर्पित हो जाऐं। जब आप घर जायें तो वहां प्रेम के साथ जाऐं, स्वास्र्थ और व्यापार को दूर रखें। यदि आप तैयार हैं तो मैं भाई दौज का टीका आपको लगा देती हूं उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में भाई दौज के अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्म सभा में उन्होंने गौतम प्रतिपदा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान महावीर के ज्येष्ठ शिष्य गौतम स्वामी जब प्रभू के प्रति अतिशय मोह की भावना से मुक्त हो गए तो उन्हें केबल्य ज्ञान प्राप्त हुआ।...

भाई बहन के रिश्ते में कोई विकार नहीं: गुरुदेव जयतिलक मुनिजी

भाई दुज पर विशेष प्रवचन  Sagevaani.com /Chennai ए यम के यम स्थानक नार्थ टाउन में विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि आत्म बंधुओ, आज भाई बहन का प्रसंग। संसार का एक बहुत ही मधुर और उत्तम रिश्ता है। क्योंकि इस रिश्ते में कोई विकार नहीं है। दोनों एक दूसरे के पूरक है। जिस घर में भाई-बहन दोनों है वह एक सम्पूर्ण परिवार है। भाई-बहन दोनों के लिए रिश्ता बहुत महत्वपूर्ण है माता पिता के वियोग के बाद भाई पिता का स्थान और बहन माता का स्थान एक दूसरे के लिए ग्रहण करते है। दोनों एक दूसरे को हिम्मत देते है। बल देते है। पिता का आर्शीवाद जिस बेटे पर हो वह कोई भी चुनौती स्वीकार कर लेता है। रक्षा बंधन के त्यौहार में भाई के दीर्घायु व आरोग्यता की बहन कामना करती है। पर आज वर्तमान में त्यौहार डिमांड का मौका बन गया है। पर वास्तव में त्यौहार शुभकामना और आर्शीवाद की वर्षा करने का पर्व है। डिमांड तो कभी भी किसी भी...

सही जवाब दे नहीं सको तो कोई गुनाह नहीं, लेकिन सवाल तो मंगल पूछना सीखो : प्रवीण ऋषि

लालगंगा पटवा भवन में उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के बाद नया प्रसंग प्रारंभ Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मरीचि के भव में प्रभु महावीर ने जहां नहीं करना था वहां अहंकार किया। अहंकार के बिना संसार में सत्ता-संपत्ति चलती नहीं है। लेकिन प्रभु के चरणों में साधना करते समय और उनके वरदानों को ग्रहण करते हुए अहंकार ऐसा चलता है कि मरीचि के भव से लेकर आखरी जन्म तक महावीर को कभी अवसर नहीं मिला कि वे अपने बड़प्पन का अहंकार कर सकें। वापस कभी वो ज्येष्ठ बने नहीं। चाहे विश्वभूति का हो या त्रिपुष्ठ वासुदेव का भव हो, वे पराक्रमी बने लेकिन ज्येष्ठ नहीं बने। और वही आखरी जन्म में तीर्थंकर बने। लेकिन बड़े भाई नहीं बन सके, छोटे भाई बने। एक छोटा सा अहंकार जहां नहीं करना था, वहां किया। इस संसार में कई जगह अहंकार करते है, उस अहंकार को टूटने का भी मौका...

आंतरिक शांति विश्व शांति की कुंजी है: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /चैन्नई। आंतरिक शांति विश्व शांति की कुंजी है।साहुकारपेट जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने नववर्ष गौतम प्रतिप्रदा पर पांचदिवस मौन साधना महामंगल पाठ और आर्शीवाद श्रध्दालूओं को प्रदान करतें हुए कहा कि हिंसा के मार्ग को त्यागकर भगवान महावीर स्वामी के बताएं गये अहिंसा के मार्ग पर सभी देश चलते है तो विश्व मे शांति और मैत्री की स्थापना हो सकती है। आज सम्पूर्ण विश्व में अजारकता भय और अशांति का माहौल बना हुआ है। भाई-भाई का दुश्मन बना हुआ है।विश्व वंदनीय महावीर के अंहिसा सिध्दांत के मार्ग पर चलेंगे तभी विश्व में मेत्री प्रेम सोहर्द कायम हो सकता है। समस्याओ का समाधान बंदूक की गोली से नहीं,प्यार की मीठी बोली और शांति से ही समस्याओं का समाधान हम खोज सकते है। वरना मानव जाति को विनाश से कोई नहींं बचा सकता है। विरोधी को कभी विरोध से नहीं वरन सद्भावना एवं शांति से जीत सकते...

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