नेल्लोर में मुनि गुणहंस विजय का चातुर्मास मंगल प्रवेश संपन्न हुआ नेल्लोर. मुनि गुणहंस विजय का अन्य दस मुनिवृंद के साथ सोमवार को श्री जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ के तत्वावधान में जैन आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवेश हुआ। इस मौके पर राजेंद्र टावर से गाजे-बाजे के साथ गुरुदेवों की शोभायात्रा निकली जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कापू स्ट्रीट पहुंची जहां उनका सोमैया किया गया। राजेंद्र जैन नवय...
श्रद्धा से ही मिल सकता है मुक्ति का पुरस्कार चेन्नई. कोलत्तूर जैन मंदिर में विराजित आचार्य पुष्पदंतसागर ने कहा ईंट को मजबूत अग्नि बनाती है। भाप से ईंट मजबूत हो जाती है। जीव को जीवनदान ऑक्सीजन एवं शरीर को रोशनी आंख देती है। शरीर को जितना सात्विक खाद-पानी देंगे उतना ही वह नीरोग रहेगा। आत्मभूमि पर जब श्रद्धा के बीज बोते हैं तो संसार से मुक्ति का पुरस्कार मिलता है। पैरों के आधार पर शरीर और नींव के आधा...
शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब चेन्नई. गोपालपुरम में लॉयड्स रोड स्थित छाजेड़ भवन में शनिवार सवेरे श्री जैन संघ के तत्वावधान में कपिल मुनि ने शनिवार को चातुर्मासार्थ प्रवेश किया। इससे पूर्व मुनि रायपेट्टा स्थित हेमराज सिंघवी जैन स्थानक से नवकार महामंत्र जाप व भक्तामर स्तोत्र के पाठ के बाद शोभायात्रा के साथ प्रस्थान किया। शोभायात्रा मु य मार्गों से गुजरती हुई लॉयड्स रोड स्थित छाजेड़ भवन पहुंची जहां स...
आचार्य महाश्रमण का चातुर्मासिक प्रवेश हमे जीवन में सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति को स्थान दें। इन तीन चीजों से जीवन अच्छा बन सकता है। हम मैत्रीभाव व ईमानदारी को स्थान दें। शनिवार को आचार्य श्री महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के तत्वावधान में आचार्य महाश्रमण ने माधवरम में चातुर्मासिक प्रवेश किया। नशीले पदार्थों का सेवन न करें। जिस आदमी का मन धर्म में रमता है उसे देवता भी नमस्कार करते है...
वेलूर. आरकाट के एसएस श्वेता बर जैन संघ के जैन भवन में विराजित ज्ञान मुनि ने शुक्रवार को एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को जितना मिला है उसी में संतोष करना चाहिए। इस असार संसार को जब तक वास्तविकता का ज्ञान नहीं होगा यह असार नहीं लगेगा और वास्तविकता का ज्ञान तभी होगा जब संसार की आसाक्ति छूटेगी। असाक्ति छूटे बिना यह संसार दुखमय एवं असार नहीं लगेगा। सुख प्राप्ति के लिए दौड़ रहे मानव को य...
कलशयात्रा के साथ पहुंची एमकेबी नगर जैन स्थानक चेन्नई. साध्वी धर्मप्रभा एवं साध्वी स्नेहप्रभा ने शुक्रवार को एमकेबी नगर जैन स्थानक में चातुर्मासिक प्रवेश किया। इससे पूर्व साध्वीवृंद लिंक रोड स्थित रेनबो पैराडाइज से कलशयात्रा के साथ जैन स्थानक पहुंची। इस मौके पर उपप्रवर्तक विनयमुनि व गौतममुनि भी पहुंचे। यहां आयोजित धर्मसभा में विशिष्ट अतिथि आनंदमल छल्लाणी, किशनलाल खाबिया, सज्जनराज मेहता, ुपूरणचंद क...
चेन्नई. उपाध्याय श्री प्रवीणऋषिजी चातुर्मास समिति, चेन्नई के तत्वावधान में उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि व तीर्थेशऋषि का पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासिक प्रवेश 22 जुलाई को होगा। इस मौके पर उपाध्याय प्रवर सवेरे 8.15 बजे वेपेरी स्थित गुरु श्री शांतिविजय जैन स्कूल से रवाना होंगे और पुरुषवाक्कम में गंगाधीश्वर कोईल, दूसरी गली (होटल राजभवन के पास) स्थित एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर...
चेन्नई. पेरम्बूर जैन स्थानक में विराजित समकित मुनि ने कहा जो हमेशा धर्म में रत रहता है उसे देवता भी नमन करते हैं। जो अधर्म में लगे रहते हैं देवता उनकी पिटाई करते हैं यानी वह आत्मा नरकगामी हो जाती है। जो बिना सोचे-समझे दान देता है वह शालिभद्र बनता है एवं ऋद्धियां उसके चरण चूमती हैं तथा जो सोचकर मांगता है वह केवली बनता है। आदमी के लाभ में जैसे-जैसे वृद्धि होती है उसका लोभ भी बढ़ता जाता है। मुनि ने क...
चेन्नई. सईदापेट जैन स्थानक में विराजित ज्ञानमुनि ने कहा कहना तो सरल है लेकिन पालना बहुत कठिन है। जो पालते हैं वे पूजनीय व वंदनीय होते हैं। उनके गुण की पूजा करें। नवपद की आराधना के तहत आठवें चारित्र दिवस की आराधना का दिवस है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप, ज्ञान अर्थात जानना, दर्शन यानी मानना, चारित्र अर्थात पालना। आज चारित्र के पद की आराधना करनी है। मुनि ने कहा काया का नहीं माया का डर है। जो इस माया...
चेन्नई. साहुकारपेट स्थित जैन भवन में विराजित उपाध्याय प्रवर रवीन्द्र मुनि ने कहा सालों से मंदिर जाने के बाद भी अगर व्यक्ति के जीवन में बदलाव नहीं आता तो उसका मंदिर जाना सफल नहीं हो सकता। सामायिक को सफल करना है तो हमे खुद की जांच करनी होगी, तभी जीवन सफल हो पाएगा। समस्त प्राणियों के प्रति मानव को मैत्रीभाव रखना चाहिए। स्वयं से ज्यादा दूसरों की चिंता करने को ही मैत्री भाव कहते है। प्रत्येक व्यक्ति को...
चेन्नई. पुरुषवाक्कम स्थित एएमकेएम में विराजित आचार्य सुदर्शन ने कहा श्रावक का प्रमुख लक्षण है लज्जा। सदाचार का पालन करना श्रावक का धर्म है। यदि धन चला जाए तो कुछ नहीं बिगड़ता, स्वास्थ्य खराब हो जाए तो थोड़ा नुकसान होगा, चारित्र चला गया तो सर्वस्व चला जाता है। ऋतुएं बदलने व आंधी-तूफान आने पर भी पेड़ स्थिर रहते हंै उसी प्रकार चारित्र में दृढ़ रहना चाहिए। भद्रबाहु स्वामी ने सारे उपनिषद-आगम और धर्मग्र...
चेन्नई. पेरम्बूर जैन स्थानक में विराजित समकित मुनि ने कहा नादान वह होता है जो दूसरों में सुख खोजता है। सारी जिंदगी उनमें आसक्त होकर गुजारता है। यह दुनिया मुफ्त में किसी को कुछ नहीं देती, स्वार्थ के साथ देती है और स्वार्थ से ही जीती है। निस्वार्थ से तो केवल परमात्मा ही देता है। नवकार की शरण व तप का आलंबन लेते हैं और हृदय में श्रद्धा होती है तो कोई भी दुख-बीमारी नहीं आती। इस दुनिया में जितने भी नासम...