पिछले प्रवचनों में बताया गया था आत्मा को छलनी छलनी करने वाले तीन शल्य है। माया, निदान और मिथ्यात्व दर्शन शल्य । 18 पापों में एक पाप मिथ्यात्व दर्शन है। जैसे जहरीला काँटा चुभ जाए तो वो धीरे धीरे मनुष्य को खत्म कर देता है वैसे ही यह मिथ्यात्व दर्शन का शल्य है । तत्व को अतत्व कहना, अतत्व को तत्व कहना, अधर्म को धर्म और धर्म को अधर्म कहना, जीव को अजीव व अजीव को जीव कहना यही मिथ्यात्व है।
वीतराग द्वारा प्ररूपित धर्म से अलग मान्यता को मानना मिथ्यात्व है । मिथ्यात्व के दो भेद है अभिगृहित मिथ्यात्व और अनाधिग्रहीत मिथ्यात्व। इंद्रभूति बहुत बड़े विद्वान थे उनके 500 शिष्य थे, प्रकांड पंडित थे, लेकिन जब को प्रभु महावीर के सम्पर्क में आए और उनके मार्ग को समझा तो उन्होंने वीतराग प्रभु का बताया रास्ता चुना और इंद्रभूति गौतम स्वामी प्रभु के प्रथम गणधर बने । जैसे इंद्रभूति का मिथ्यात्व दूर हुआ वह अभिगृहित मिथ्यात्व होता है जो थोड़े से प्रयत्न से समझाने से शीघ्रता से दूर हो जाता है। अनाधिग्रहीत मिथ्यात्व अनन्त अनन्त काल तक निगोध की यात्रा में भव भव भटकता है।
शतावधानी पूज्या श्री अरुण कीर्ति जी ने फरमाया की कुछ प्राप्त करने के लिये कुछ छोड़ना पड़ेगा, बहुत कुछ प्राप्त करने के लिये बहुत कुछ छोड़ना पड़ेगा और सबकुछ प्राप्त करने के लिए सबकुछ छोड़ना पड़ेगा। इस दुनिया में किसी को सबकुछ नही मिलता है, कोई न कोई कमी सबको रहती है। तप तपस्याओं का दौर जारी है ।इसी श्रंखला में आज धर्मसभा में सुजल कटकानी के 9 उपवास का बहुमान श्रीसंघ द्वारा किया गया।
संघ अध्यक्ष सुरेश कटारिया ने बताया की इस वर्ष क्षमापना के अवसर पर सामूहिक पारणे का लाभ स्व. मोतीलालजी रमणीक जी मायाजी डाँगी की स्मृति में डाँगी परिवार ने लिया। शुक्रवार के पद्मावती के एकासन करवाने का लाभ रखबचन्द अभय कुमार रमन कुमार कटारिया परिवार ने लिया ।
उपाध्यक्ष विनोद बाफना ने बताया की पूज्याश्री अरुणप्रभा जी की प्रेरणा से 100 से अधिक बच्चों ने अपनी रसना इन्द्रिय पर काबू करके एक महीने तक द्रव्य मर्यादा के नियम का पालन किया जिसमें बच्चों ने एकासन बियासन भी किये। ऐसे बच्चों का और पर्युषण पर्व के दौरान आठ या आठ से अधिक उपवास करने वाले तपस्वियों का बहुमान 3 सितंबर को नीमचौक स्थानक पर किया जाएगा।
संघ के वरिष्ठ श्रावक इन्दरमल जैन एंव महेंद्र बोथरा ने बताया की पूज्या श्री अरुणप्रभा जी हमेशा तपस्या में लीन रहते है। अभी आप लगातार 90 दिन से आयम्बिल तप कर रहे है दिनाँक 04 सितंबर रविवार को आपके आयम्बिल तप की पूर्णाहुति के अवसर पर देशभर के दिवाकर भक्त रतलाम पधारेंगे। साथ ही इसी दिन अखिल भारतीय संगठन समिति की साधारण सभा जैन दिवाकर स्मारक पर आयोजित की जाएगी जिसमें नए अध्यक्ष का चयन किया जाएगा।