रायपुर. कुछ लोग दुनिया में आते है पापियों को मिटाने के लिए, लेकिन भगवान महावीर आए थे पाप मिटाने के लिए। यदि हम एक पापी को मिटाते हैं तो उसी जगह पर दस पापी आ जाते हैं। यदि एक पाप को मिटाते है तो किसी को पापी बनने का मौका नहीं मिलेगा। हमें पापी नहीं, बल्कि पाप को हटाना है। टैगोर नगर के लालगंगा पटवा भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने ये बातें कही।
उन्होंने कहा कि मूर्ति बनाने से अच्छा है एक अच्छे मूर्तिकार को तैयार करना है। एक अच्छा मूर्तिकार कई अच्छी मूर्तियों को तैयार करेगा। दुनिया में यदि कोई सर्वश्रेष्ठ काम है तो स्वयं और दुनिया की दिशा बदलने का का काम है। जो काम केवल एक गुरु ही कर सकता है। हमें किसी को गुरु मानना नहीं बल्कि गुरु बनाना है। भारतीय संस्कृति का नाम एक मामले में आता है। यहां गुरु का प्रोडक्शन होता है। गुरु वह होता है जो भटके इंसान को परमात्मा के साथ जोड़ देता है। गुरु दुनिया को परमात्मा के साथ जोड़ देता है।
जो स्वयं के साथ जोड़ता है, वह गुरु नहीं हैं।इस दुनिया में सबसे मुश्किल काम प्रभु को देख पाना, उनके दर्शन करना है। भगवतता के दर्शन, उनकी श्रेष्ठता के दर्शन करना, बढ़िया को देखना। भारतीय संस्कृति गुरु उसे कहती है जो श्रेष्ठता के दर्शन करा दे। ऋषि ने कहा कि मेरे संत बनने का यदि किसी को श्रेय जाता है तो वह मेरे गुरु हैं, जिन्हें महाराष्ट्र में आनंद बाबा कहते है और मेरे पिता को।
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नित्य प्रवचन के साथ श्रेष्ठ जीवन
जीने का तरीका भी सीखा रहे हैं
रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि गुरुदेव नित्य सुबह 9 से 10 बजे तक प्रवचन के जरिए लोगों को सही राह दिखा रहे हैं। इसके अलावा अर्हम विज्जा शिविर के अंतर्गत लोगों को श्रेष्ठ जीवन जीने का तरीका भी बता रहे हैं। किसी भी धर्म-समाज का व्यक्ति गुरुदेव का मार्गदर्शन लेने के लिए श्री लालगंगा पटवा भवन आ सकता है।