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हमारा मन सरल और स्वच्छ होना चाहिए : बनवारीलाल पुरोहित

हमारा मन सरल और स्वच्छ होना चाहिए : बनवारीलाल पुरोहित

वर्तमान युग की समस्याएं एवं समाधान विषयक पर आयोजित हुई संगोष्ठी

  चेन्नई के 55 स्थानों पर आयोजित हुआ जैन सामायिक फैस्टिवल

आचार्य श्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती उग्रविहारी, तपोमूर्ति मुनि श्री कमलकुमारजी ठाणा 3 के सान्निध्य में ‘वर्तमान युग की समस्याएं एवं समाधान’ संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें महामहिम श्री बनवारीलालजी पुरोहित (राज्यपाल – तमिलनाडु सरकार) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।
 

महामहिम श्री बनवारीलालजी पुरोहित (राज्यपाल – तमिलनाडु सरकार) ने कहा कि जो व्यक्ति जिसकी संगत में रहता है। उसका व्यवहार वैसा ही बन जाता है। कथानक के माध्यम से महामहिम ने बताया कि अच्छी संगत में रहने वाला एक तोता अच्छे संस्कारकों से परिपूर्ण बनता है, वहीं दूसरा तोता गलत व्यक्ति के संगत में रहने पर उसकी भाषा से गलत शब्दों का ही उच्चारण होता हैं। वैसे ही व्यक्ति बुरी संगत में रहने पर स्वयं का तो नुकसान करता है ही, साथ में परिवार को भी गर्त में ले जाता है।
 

महामहिम ने आज के कार्यक्रम में संतों की सन्निधि प्राप्त होने पर कहा कि यह संतों की कृपा होती है, तभी हम उनकी ओर खिचें चले आते हैं। हम कोई भी कार्य करते हैं, उसमें भी ईश्वरीय शक्ति का योगदान रहता है, तभी हम कोई काम कर सकते है, उसमें सफलता पा सकते हैं।

महामहिम ने वर्तमान की युगीन समस्याओं के बारे में कहा कि जब हमारे घर में गलत पैसे आता हैं, तब घर का माहौल बिगड़ जाता हैं। अनेकों समस्याओं का जिक्र करते हुए समाधान के रूप में कहा कि जैसे व्यक्ति संस्था में अपने व्यवहार को उच्च बना कर, उसको गति देने में लगा रहता है, उसी तरह हमें अपने आप को भी परिवार का ट्रस्टी मानना चाहिए।

हम परिवार में कोई भी कार्य करे, उसमें पुरी पारदर्शिता रहनी चाहिए। मन सरल और स्वच्छ होना चाहिए। एक दूसरों पर विश्वास बना रहना चाहिए। दूरव्यसन से दूर रहना चाहिए। कभी भी कोई भी कार्य करे या कहीं जाएँ तो हमें हमारे परिवार के सदस्यों को अवश्य जानकारी देनी चाहिए। अपने से बड़े, माता-पिता का सदैव सम्मान रखना चाहिए। आपश्री ने विशेष रूप से कहा कि आत्मनिर्भर के साथ आत्मसंयमी जरूर बनें।

आज की मंगल वेला के अवसर पर महामहिम ने कहा कि जैसे दीपावली के बाद लाभपंचमी तक भी दीपावली का मंगल पर्व चलता रहता हैं, वैसे ही आज नववर्ष का यह तीसरा दिन भी मंगल दिवस हैं। मैं स्वयं अपने प्रति भी और आप सबके प्रति मंगल कामना करता हूँ कि यह वर्ष हमारे लिए मंगलमय बना रहे। हम नये किर्तीमान को प्राप्त करें। स्वयं अपने विकास के साथ परिवार, समाज, देश के उत्थान में सहभागी बने।
 

मुनि श्री कमलकुमारजी ने कहा कि महामहिम राज्यपाल महोदय के जीवन में नम्रता है, विनम्रता हैं। जैसे सद्गुणों से परिपूर्ण व्यक्तित्व सामने वालों को प्रभावित करता है, सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है, उसी तरह राज्यपाल महोदय का भी व्यक्तित्व है।

मुनि श्री ने विशेष प्रेरणा देते हुए कहा कि हम तन के साथ मन से भी पवित्र बने। हमारा भारत देश संस्कृति सम्पन्न है। संतों, ऋषि मुनियों की पवित्र भूमि हैं। सामुहिक परिवार भारत देश की सबसे बड़ी देन हैं।
 

मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति अपनी चेतना का जागरण करें। डिग्रियों के साथ व्यावहारिक ज्ञान का भी विकास करें। आपने कहा कि आचार्य श्री महाश्रमणजी अहिंसा यात्रा के अन्तर्गत जन-जन के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं।
 

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में महामहिम राज्यपाल महोदय का साहित्य, मोमेंटो द्वारा सम्मान किया गया। आज के दिवस पर तेरह जगहों पर सामायिक के साथ नमस्कार महामंत्र का जाप किया गया।
 

संगोष्ठी के बाद तेरापंथ समाज के वरिष्ठ व्यक्तियों से वार्तालाप करते हुए महामहिम राज्यपाल महोदय ने कहा कि मेरी इच्छा है कि मैं एक और कार्यक्रम मुनि श्री कमलकुमारजी के सान्निध्य में राज्यभवन या तेरापंथ भवन में करू। कार्यक्रम का प्रारंभ तमिल गान से हुआ। स्वागत भाषण अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सन्दीप कोठारी ने दिया। मंच संचालन तेरापंथ सभा के कार्यवाहक अध्यक्ष श्री विमल चिप्पड़ ने किया। डी भरत मरलेचा के संयोजक में संगोष्ठी में संघीय संस्थाओं के विशिष्ट व्यक्तित्व उपस्थित थे। मुनि श्री के मंगल पाठ के बाद राष्ट्र गान के बाद संगोष्ठी परिसम्पन्न हुई।

  *जैन सामायिक फैस्टिवल*

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के तत्वावधान में, तेरापंथ युवक परिषद्, चेन्नई द्वारा विश्व शांति के महान उद्देश्य से परिपूर्ण, समस्त विश्व में, सम्पूर्ण जैन समाज द्वारा प्रातः जैन सामायिक फैस्टिवल का चेन्नई के 55 स्थानों पर किया गया। मुनि श्री के सान्निध्य में आयोजित सामायिक फेस्टिवल के अवसर पर मुनि श्री ने कहा सामायिक आत्मा की कमाई हैं। यह इस जन्म को तो सुधारती है ही, अगले जन्मों का भी उदार करने में सहभागी बनती हैं। अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष सन्दीप कोठारी ने सम्पूर्ण देश में एक साथ आयोजित इस कार्यक्रम की रुपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि हम अपने संस्कारों का संवद्र्धन करते हुए भावी पीढ़ी में उसको प्रेचित करते रहे।

  
    -: प्रचार प्रसार प्रभारी :-
         स्वरूप चन्द दाँती

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