वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के महावीर भवन में चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा प्रवचन सुनने के साथ साथ उनका मनन करना भी जरूरी है, क्योंकि अगर हम प्रवचन सुन उनका मनन नहीं करते, या फिर उन पर अमल नहीं करते तो इसका कोई फायदा नहीं है।
आज मनुष्य केवल इन विचारों को सुनने तक ही सीमित है। तो इन पर मनन ही करता है और ही ईश्वर दर्शन के लिए आगे कदम बढ़ाता है। तभी इन विचारों से लाभ नही उठा पाता, क्योंकि ईश्वर-दर्शन के लिए प्रेरित करना ही महापुरुषों के सत्संग-प्रवचनों का मुख्य उद्देश्य होता है। इस लिए मात्र सुनना ही पर्याप्त नही है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब मनुष्य केवल सुनने तक ही रहा तो उसके जीवन में अनेकों दुर्घटनाएं घटी एवं वह अपने जीवन-लक्ष्य को पूर्ण नही कर पाया।
साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा हर धर्म में अच्छे महापुरुष हैं और हर धर्म में अच्छे शास्त्र हैं। हमें उन महापुरुषों का सम्मान करना चाहिए। हर धर्म में श्रेष्ठ जीवन जीने की बातें हैं। दुनिया का कोई धर्म नहीं कहता कि आप किसी को कोई दुख दो, दुनिया का कोई धर्म नहीं कहता कि आप किसी का धन चुराओ, दुनिया का कोई धर्म नहीं कहता कि आप हिंसा करो, दुनिया का कोई धर्म नहीं कहता कि आप चोरी, व्यभिचार, लूटपाट करो। दुनिया का हर धर्म हमें मानवता का संदेश देता है।
साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा हम अपने नजरिए को बड़ा लेकर आएंगे तो दुनिया के किसी भी धर्म में कोई फर्क नहीं है, केवल जीने के तरीके का फर्क है। ‘कोई नहीं पराया, सारी धरती एक बसेरा है, इस सीमा में पश्चिम है तो मन का पूरब तेरा है, श्वेत वर्ण या श्याम वर्ण हो, सुंदर या कि असुंदर हो, अरे सभी मछलियां एक ताल कीं, क्या तेरा-क्या मेरा है। ’ छोटी-छोटी बातों को लेकर कि ये मेरी परम्परा, ये तेरी परम्परा- ना बा ना। केवल नजरिए को इंसान बड़ा कर लेगा तो पूरी दुनिया के भगवान एक जैसे हैं। अपनी सोच को हमेशा बड़ी रखो। ’’
इस धर्म सभा में परम पूज्य महामंत्री गुरुदेव श्री सिरिश मुनि महाराज के सांसारिक परिवार मुंबई से विनोद कोठारी भी पधारे एवं जसाखेड़ा से पधारी मुस्कान बहन ने 8 उपवास के गुरु माता से प्रत्यक्षण किया ताल से पधारी भारती देरासारिया ने 9 के उपवास के प्रत्यक्षण लिए राजाजी करेड़ा से प्रकाश गोखरू भी अपने सह परिवार के साथ पधारे श्री संघ आमेट ने आप सभी का स्वागत अभिनंदन किया यह जानकारी मीडिया प्रभारी मुकेश सिरोया ने दी वह इस अवसर पर ललित डांगी,प्रकाश चंद बडोला, सुरेंद्र सूर्या, धर्मेश कोठारी, सुशील सूर्या, चंदनमल बाफना, शांतिलाल सिरोया, प्रकाश हिरण, उदय सिंह पवार, महावीर कोठारी,अरिहंत सिरोया, दिनेश सरणोत, मनोहर लाल शर्मा, सुवालाल कोठारी,पारस बाबेल, ललित शर्मा, प्रकाश सरणोत, ताल निवासी बाबू लाल देरासारिया, ज्ञान चंद लोढ़ा, आदि श्रावक व श्राविकाएं की अच्छी उपस्थिति रही।इस धर्म सभा का संचालन सुरेश दक ने कियाl